00:00Middle East में महीनों से जारी तनाव अब शायद एक नए मोड पर पहुँच रहा है
00:05पूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इरान और अमेरिका के बीच टकराओ को खत्म करने के दिशा में बाच्वी तेजी
00:10से आगे बढ़ रही है
00:11संभावित समझोते युद्विराम और नए राजुनितिक सम्मिकरनों की चर्चा जोरों पर है
00:17लेकिन इस पूरे घटना करम के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है
00:21अगर इरान और अमेरिका के बीच तनाव कम हो जाता है तो लेवनान का क्या होगा
00:32कई अंतरास्टिय रिपोर्टों और छेत्रिय विशलेशकों ने दावा किया गया है
00:37कि इरान की तरफ से छेत्रिय मोर्चों पर तनाव कम करने को लेकर बाचित हुई है
00:41इनमें लेबनान का मोर्चा भी शामिल बताया जा रहा है
00:44लेकिन दूसरी तरफ इस्राइल का रुख बिलकुल अलग नजरा रहा है
00:48इस्राइली ने तर तो लगतार ये संकेत देता रहा है कि उसकी सुरक्षानीती किसी तीसरे देश के फैसलों पर निर्भर
00:55नहीं है
00:56संदेश साफ है तेहरान और वशिंग्टन चाहे जो समझोता कर ले
01:01इस्राइल अपने सुरक्षाहितों के अनुसार कारवाई जारी रखेगा
01:05यानि सवाल अब सिर्फ इरान और अमेरिका का नहीं रहे गया है
01:08असली सवाल ये है कि क्या युद्ध के बाद भी हिजबुला पर दबाब जारी रहेगा
01:13क्या दक्षनी लेबनान में इस्राइली सैने मौजूदगी बनी रहेगी
01:17क्या हिजबुला को पूरी तरह निरस्त करने की कोशिश होगी
01:21और अगर ऐसा होता है तो लिबनान की राज़नीती और समाज पर उसका क्या असर पड़ेगा
01:26ये सवाल भारत के लिए भी महत्यपुर्ण है
01:29मिडल इस्ट में 90 लाग से अधिक भारतिय मूल के लोग रहते हैं और काम करते हैं
01:35खाड़ी देशों से लेकर लिबनान, जॉर्डन और इस्राइल तक भारतिय पेशेवर, कारोबारी, टेक्नीशन और श्रमिक मौजूद है
01:43खेत्र में अस्थेत्र बढ़ने का सीधा असर भारतियों की सुरक्षार, ओजगार, वियपार और उर्जापूर्ती पर पड़ता है
01:49देल की कीमतों में उच्छाल से लेकर समुद्री वियपार मारगों तक, मिडिलिस्ट का हर संकट, भारत तक पहुंचता है
01:56और खाड़ी में रहने वाले भारतियों तक भी पहुंचता है
01:59और इसलिए आज हम समझेंगे कि युद्ध के बाद लिवनान की सिस्तिती में है
02:04हिजबुल्ला कितना कमजोर या मजबूत हुआ है
02:06इसराइल की नई रणीती क्या है
02:08और आने वाले समय में इस पूरे शेत्र का भविश्य किस दिशा में जा सकता है
02:13सबसे पहले बात हिजबुल्ला की करते है
02:20हिजबुल्ला एक संगठन नहीं है, एक समनानतर ब्यवस्था है
02:23हिजबुल्ला की शुरुवात 1980 के दशक में हुई थी
02:271982 में लेबनान पर इसराइली हमले के बाद
02:30इरान समर्थित शिया समूहों ने मिलकर इस संगठन की निव रखी
02:34समय के साथ हिजबुल्ला सिर्फ एक सशस्त्र संगठन नहीं रहा
02:38उसने राजनितिक दल, समाजिक नेटवर्क, स्कूल, अस्पताल और कल्यानकारी संस्थाओं का विशाल धाचा खड़ा कर लिया
02:46तक्षनी लेबनान और शिया बहुल इलाकों में उसका प्रभाव इतना बढ़ गया कि कई विशलेशक उसे
02:53स्टेट विदिन दस्टेट यानि की राज्यो के भीतर राज्यो कहने लगे
02:562006 के इसराइल हिश्बुल्ला युद्ध के बाद उसकी लोग प्रिता और ज्यादा बढ़ गए
03:01लेकिन 2024 में शुरू हुए संगर्ष ने उस पूरी विवस्था को जगजोर का रख दिया
03:0714 महीने का युद्ध जुसने लेबनान बदल दिया
03:11कासा युद्ध के बाद ऑक्टुबर दोहतर थेईस से इसराइल और हिजबुल्ला के बीच उसीमा पर जड़पे शुरू हुए
03:17तीरे तीरे ये जड़पे बड़े स्यान संगर्ष में बदल गई
03:21सितंबर दोहजार चौबिस में संगर्ष ने व्यापक रूप ले लिया
03:24दक्षिनी लेबनान, बेक्का वैली और बेरूट जैसे दक्षिनी उपनगर लगतार हवाई हमलों की चपेट में आये
03:31विभिन अंतराष्ट्री आकलनों के अनुसार लगभग 3800 से अधिक लोगों की मौत हुई
03:3715,000 से ज्यादा लोग घायल हुए, करीब 13,000,000 लोग विस्थापित हुए
03:42हजारों मकान, सड़के, सारवजनिक धाचे नश्ट हो गए
03:4527 नवेंबर 2024 को युद विराम लागू हुआ, लेकिन लेबनान की तरासदी वहीं खत्म नहीं हुई
03:52युद के बाद लेबनान, मलवे पर खड़ा देश
03:55युद खत्म होने के बाद लाखों लोग अपने घर पर लोटें, लेकिन उन्हें घर नहीं मिला, खंधर मिले
04:01तक्षनी लेबनान के कई गाउं पूरी तरह तबाव हो चुके थे, कई लाकों में बजली नहीं थी, सड़के तूटी हुई
04:08थी, पानी और स्वास्त सिवाएं बुरी तरह से प्रभावी थी
04:11आज भी हजारों परिवार ऐसे हैं, जो अपने घर नहीं लोट पाएं, कुछ छेत्रों में सुरक्षा कारोंने से वापस समीत
04:18बनी हुई है
04:19हिजबुल्ला को कितना नुकसान हुआ, यूद का सबसे बड़ा असर हिजबुल्ला की स्टैन शमता पर पड़ा
04:25रिपोर्ट्स के अनुसार, हज़ारों लड़ा के मारे गए या फिर घायल हुगए, वरिष्ट नेतरतों को भारी नुकसान हुचान, मिसाइल भंडार
04:33का बड़ा हिस्सा नश्ट हुआ, दक्षणी लेबनान में उसकी सैन्ने सनक्षणा को गंभीर छती पहुँची
04:40विशेश रूप से लितानी नदी के दक्षिन वाले छेतर में उसके नेटरों को भारी नुकसान पहुचने की बात कही जाती
04:46है, लेकिन उसके बावजूद हिजबुला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ, उसका सामाजिक आधार अभी भी मौजूद है, उसकी राश्णीतिक
04:54मौजूद्गी अभी बनी हुई है, और दक्षिन लेबनान की कई इलाकों में उसके समर्थक आज भी प्रभावशाली है, यानि संगठन
05:02कमजोर हुआ, लेकिन खत नहीं हुआ, हसन नसरलाह के बात की चुनौती, किजबुला की पहचान लंबे समय तक हसन नसरलाह
05:10के नेतरत
05:22भी खड़ी करती, अब सवाल केवल सैन ने पुनर निर्मान का नहीं, बलकि नेतरतो के पुनर गठन का भी है,
05:29लितानी नदी और दक्षिनी लेबनान का महत्वर, लितानी नदी केवल एक नदी नहीं है, बलकि रणितिक सीमा रेखा जैसी मानी
05:37जाती है, सयुक्त राष्ट्
05:53इसलिए आने वाले वर्षों में दख्षणी लेबनान और लितानी छेत्र संखर्ष का सबसे समेंदेशील बिंदू बने रह सकते हैं
06:00इसराइल की पौरवर्ड डिफेंस लाइन युद्ध के बाद इसराइल ने अपने सुरक्षा रणीती में बदलाव के संकेत दिये
06:06विश्लेशकों के अनुसार इसराइल सीमा के पास एक स्थाई सुरक्षा चेतर बनाए रखने की सोच पर काम कर रहा है
06:12उसका तर्क है कि भविश्य में किसी भी हमले को रोकने के लिए अगरिम सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है
06:17लेकिन लेबनान में इसे अलग नजरिये से देखा जा रहा है
06:21वहाँ कई लोग इसे दिर्ग कालिक सैने दबाब की रणीती मानते है
06:24यही कारण है कि युद विराम के बावजूद तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है
06:29तो क्या इसराइल युद रूपने को तयार है यही सबसे बड़ा सवाल है
06:32इरान और अमेरिका के बीच यही कोई समझोता होता भी है
06:35तो क्या उससे इसराइल की नीती बदलेगी
06:38अब तक मिले संकेत बताते हैं कि इसराइल अपनी सुरक्षा रणीती को स्वतंत्र रूप से तय करना चाहता है
06:44उसका मानना है कि हिजबुला भी खत्रा है और केवल युद विराम से समस्या खत्म नहीं होगी
06:50यही कारण है कि कई विश्लेशक मानते हैं कि आने वाले वर्षों में दक्षिनी लेबनान तनाओ का केंद्र बना रह
06:57सकता है
06:58तो भारतियों पर क्या असर है? भारत के लिए ये केवल दूर का युद्ध नहीं है
07:02मिडिल एस्ट भारत की उजय सुरक्षा का सबसे बड़ा सोर्स है
07:05भारत का बड़ा तेल आयात इसी छेतर से आता है
07:08इसके अलावा लाखो भारतिय नागरीक पूरे पश्टी मेशिया में काम करते है
07:12अगर लेबनान, इसराइल या व्यापक शेतर में औस्थिरता बढ़ती है
07:17तेल की कीमते बढ़ सकती है
07:19शिपिंग लागत बढ़ सकती है
07:21भारतिय निर्याद प्रभावित हो सकता है
07:23भारतिय कामगारों और परिवारों की सुरक्षा चिंता बन सकती है
07:26इसलिए भारत सरकार सबबाद और स्थाई शान्ती की वकालत करता रहा है
07:31भविशय का समसे बड़ा सवाल क्या है?
07:33तो क्या हिजबुल्ला का अंत अब करीब है?
07:36शायद नहीं
07:37लेकिन क्या वो हिजबुल्ला है जुसने कभी पूरे लेबनान की रावजनीती और सुरप्शा वैवस्था पर मजबूत पकड़ बनाये रखी थी?
07:45इसका जवाब भी नहीं है
07:46सचाई इन दोनों के बीच कहीं खड़ी दिखाई दे दिये
07:49हालिया युद ने विजबुल्ला को गहरे जख्म दिये हैं
07:53उसके हजारों लडाके मारे गए हैं और घायल हुए हैं
07:56कई वरिष्ट कमांडर हो गए
07:57सैन धाचे को भारी नुकसान पहुंचा
07:59और दक्षनी लेबनान में उसकी रणितिक शमता पर भी असर पड़ा
08:03लेकिन इसके बावजूद सा गठन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ
08:06उसके समर्थक अब भी मौजूद हैं
08:08उसका राश्वितिक प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ
08:11और लेबनान के कई इलाकों में उसकी समाजिक पकड़ बनी हुई है
08:15यही वजह है कि आज हिजबुल्ला एक ऐसे चोराहे पर खड़ा है
08:19जहां उसके सामने अस्तितों बचाने के साथ साथ
08:22खुद को नए सीरे से खड़ा करना बड़ी चुनोती है
08:24आने वाले वर्षों में लेबनान का भविश्य इस बात पर निर्भर करेगा
08:28कि क्या देश और राजनितिक स्तिरता हासित कर पाता है
08:31कि आ यूद से तबा इलाकों का पुनरनिर्मान हो पाता है
08:35और क्या इसरायल और था लेबनान के बीच
08:37कोई स्थाई सुरक्षा वैवस्था बन पाती है
08:39क्योंकि एरान और अमेरिका के बीच
08:41तनाव भले का महुता दिखाई दे रहा हो
08:43लेकिन लेवनान की लड़ाई अभी
08:45खात्व नहीं हुई है
08:46समभव है कि Middle East की अगली बड़ी कहानी
08:49अब लेवनान की धर्ती पर ही लुखी जाए
08:51इस खबर में इतना ही
08:53अपडेट्स के लिए देखते रहें One India हैंदी
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