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US-Iran Peace Deal के बाद Lebanon और Hezbollah का क्या होगा? क्या अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते कूटनीतिक समझौतों के बाद भी इजराइल लेबनान में अपनी फॉरवर्ड डिफेंस लाइन की रणनीति से पीछे हटेगा? जानिए इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की असली इनसाइड स्टोरी।

मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) का तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है, जहां कूटनीतिक गलियारों में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित ऐतिहासिक समझौते और युद्धविराम की चर्चा जोरों पर है। लेकिन इस कूटनीतिक हलचल के बीच सबसे बड़ा संकट लेबनान और हिजबुल्लाह (Hezbollah) पर खड़ा हो गया है। लगभग 14 महीने तक चले भीषण सैन्य संघर्ष के बाद, जिसने दक्षिणी लेबनान, बेक्का वैली और बेरूत को मलबे में तब्दील कर दिया, अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान समर्थित यह शिया संगठन अपनी राजनीतिक और सामाजिक पकड़ बचा पाएगा?

इस पूरे संकट का सीधा असर भारत पर भी पड़ने वाला है। मिडिल ईस्ट में 90 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग रहते हैं। खाड़ी देशों से लेकर इजराइल और जॉर्डन तक फैले इस भारतीय वर्कफोर्स की सुरक्षा, रोजगार और वैश्विक तेल आपूर्ति (Energy Security) इस क्षेत्र की स्थिरता से सीधे जुड़े हैं। तेल की कीमतों में संभावित उछाल से लेकर समुद्री व्यापार मार्गों (जैसे स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज) के संकट तक, मिडिल ईस्ट की हर हलचल भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है। इस वीडियो में विस्तार से समझिए कि लेबनान का भविष्य अब किस दिशा में जा रहा है।


This video analyzes the geopolitical aftermath of the potential US-Iran peace talks and its direct impact on Lebanon, Hezbollah, and Israel's forward defense strategy. As the Middle East stands at a critical crossroads after months of devastating conflict, we also examine how the instability in West Asia poses a massive challenge to India's energy security, global shipping costs, and the livelihood of over 9 million Indian expats working in the Gulf region.

#MiddleEastCrisis #IndianDiaspora #Hezbollah #USIranDeal #IsraelLebanonConflict

~HT.178~PR.514~ED.104~GR.538~VG.HM~

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Transcript
00:00Middle East में महीनों से जारी तनाव अब शायद एक नए मोड पर पहुँच रहा है
00:05पूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इरान और अमेरिका के बीच टकराओ को खत्म करने के दिशा में बाच्वी तेजी
00:10से आगे बढ़ रही है
00:11संभावित समझोते युद्विराम और नए राजुनितिक सम्मिकरनों की चर्चा जोरों पर है
00:17लेकिन इस पूरे घटना करम के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है
00:21अगर इरान और अमेरिका के बीच तनाव कम हो जाता है तो लेवनान का क्या होगा
00:32कई अंतरास्टिय रिपोर्टों और छेत्रिय विशलेशकों ने दावा किया गया है
00:37कि इरान की तरफ से छेत्रिय मोर्चों पर तनाव कम करने को लेकर बाचित हुई है
00:41इनमें लेबनान का मोर्चा भी शामिल बताया जा रहा है
00:44लेकिन दूसरी तरफ इस्राइल का रुख बिलकुल अलग नजरा रहा है
00:48इस्राइली ने तर तो लगतार ये संकेत देता रहा है कि उसकी सुरक्षानीती किसी तीसरे देश के फैसलों पर निर्भर
00:55नहीं है
00:56संदेश साफ है तेहरान और वशिंग्टन चाहे जो समझोता कर ले
01:01इस्राइल अपने सुरक्षाहितों के अनुसार कारवाई जारी रखेगा
01:05यानि सवाल अब सिर्फ इरान और अमेरिका का नहीं रहे गया है
01:08असली सवाल ये है कि क्या युद्ध के बाद भी हिजबुला पर दबाब जारी रहेगा
01:13क्या दक्षनी लेबनान में इस्राइली सैने मौजूदगी बनी रहेगी
01:17क्या हिजबुला को पूरी तरह निरस्त करने की कोशिश होगी
01:21और अगर ऐसा होता है तो लिबनान की राज़नीती और समाज पर उसका क्या असर पड़ेगा
01:26ये सवाल भारत के लिए भी महत्यपुर्ण है
01:29मिडल इस्ट में 90 लाग से अधिक भारतिय मूल के लोग रहते हैं और काम करते हैं
01:35खाड़ी देशों से लेकर लिबनान, जॉर्डन और इस्राइल तक भारतिय पेशेवर, कारोबारी, टेक्नीशन और श्रमिक मौजूद है
01:43खेत्र में अस्थेत्र बढ़ने का सीधा असर भारतियों की सुरक्षार, ओजगार, वियपार और उर्जापूर्ती पर पड़ता है
01:49देल की कीमतों में उच्छाल से लेकर समुद्री वियपार मारगों तक, मिडिलिस्ट का हर संकट, भारत तक पहुंचता है
01:56और खाड़ी में रहने वाले भारतियों तक भी पहुंचता है
01:59और इसलिए आज हम समझेंगे कि युद्ध के बाद लिवनान की सिस्तिती में है
02:04हिजबुल्ला कितना कमजोर या मजबूत हुआ है
02:06इसराइल की नई रणीती क्या है
02:08और आने वाले समय में इस पूरे शेत्र का भविश्य किस दिशा में जा सकता है
02:13सबसे पहले बात हिजबुल्ला की करते है
02:20हिजबुल्ला एक संगठन नहीं है, एक समनानतर ब्यवस्था है
02:23हिजबुल्ला की शुरुवात 1980 के दशक में हुई थी
02:271982 में लेबनान पर इसराइली हमले के बाद
02:30इरान समर्थित शिया समूहों ने मिलकर इस संगठन की निव रखी
02:34समय के साथ हिजबुल्ला सिर्फ एक सशस्त्र संगठन नहीं रहा
02:38उसने राजनितिक दल, समाजिक नेटवर्क, स्कूल, अस्पताल और कल्यानकारी संस्थाओं का विशाल धाचा खड़ा कर लिया
02:46तक्षनी लेबनान और शिया बहुल इलाकों में उसका प्रभाव इतना बढ़ गया कि कई विशलेशक उसे
02:53स्टेट विदिन दस्टेट यानि की राज्यो के भीतर राज्यो कहने लगे
02:562006 के इसराइल हिश्बुल्ला युद्ध के बाद उसकी लोग प्रिता और ज्यादा बढ़ गए
03:01लेकिन 2024 में शुरू हुए संगर्ष ने उस पूरी विवस्था को जगजोर का रख दिया
03:0714 महीने का युद्ध जुसने लेबनान बदल दिया
03:11कासा युद्ध के बाद ऑक्टुबर दोहतर थेईस से इसराइल और हिजबुल्ला के बीच उसीमा पर जड़पे शुरू हुए
03:17तीरे तीरे ये जड़पे बड़े स्यान संगर्ष में बदल गई
03:21सितंबर दोहजार चौबिस में संगर्ष ने व्यापक रूप ले लिया
03:24दक्षिनी लेबनान, बेक्का वैली और बेरूट जैसे दक्षिनी उपनगर लगतार हवाई हमलों की चपेट में आये
03:31विभिन अंतराष्ट्री आकलनों के अनुसार लगभग 3800 से अधिक लोगों की मौत हुई
03:3715,000 से ज्यादा लोग घायल हुए, करीब 13,000,000 लोग विस्थापित हुए
03:42हजारों मकान, सड़के, सारवजनिक धाचे नश्ट हो गए
03:4527 नवेंबर 2024 को युद विराम लागू हुआ, लेकिन लेबनान की तरासदी वहीं खत्म नहीं हुई
03:52युद के बाद लेबनान, मलवे पर खड़ा देश
03:55युद खत्म होने के बाद लाखों लोग अपने घर पर लोटें, लेकिन उन्हें घर नहीं मिला, खंधर मिले
04:01तक्षनी लेबनान के कई गाउं पूरी तरह तबाव हो चुके थे, कई लाकों में बजली नहीं थी, सड़के तूटी हुई
04:08थी, पानी और स्वास्त सिवाएं बुरी तरह से प्रभावी थी
04:11आज भी हजारों परिवार ऐसे हैं, जो अपने घर नहीं लोट पाएं, कुछ छेत्रों में सुरक्षा कारोंने से वापस समीत
04:18बनी हुई है
04:19हिजबुल्ला को कितना नुकसान हुआ, यूद का सबसे बड़ा असर हिजबुल्ला की स्टैन शमता पर पड़ा
04:25रिपोर्ट्स के अनुसार, हज़ारों लड़ा के मारे गए या फिर घायल हुगए, वरिष्ट नेतरतों को भारी नुकसान हुचान, मिसाइल भंडार
04:33का बड़ा हिस्सा नश्ट हुआ, दक्षणी लेबनान में उसकी सैन्ने सनक्षणा को गंभीर छती पहुँची
04:40विशेश रूप से लितानी नदी के दक्षिन वाले छेतर में उसके नेटरों को भारी नुकसान पहुचने की बात कही जाती
04:46है, लेकिन उसके बावजूद हिजबुला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ, उसका सामाजिक आधार अभी भी मौजूद है, उसकी राश्णीतिक
04:54मौजूद्गी अभी बनी हुई है, और दक्षिन लेबनान की कई इलाकों में उसके समर्थक आज भी प्रभावशाली है, यानि संगठन
05:02कमजोर हुआ, लेकिन खत नहीं हुआ, हसन नसरलाह के बात की चुनौती, किजबुला की पहचान लंबे समय तक हसन नसरलाह
05:10के नेतरत
05:22भी खड़ी करती, अब सवाल केवल सैन ने पुनर निर्मान का नहीं, बलकि नेतरतो के पुनर गठन का भी है,
05:29लितानी नदी और दक्षिनी लेबनान का महत्वर, लितानी नदी केवल एक नदी नहीं है, बलकि रणितिक सीमा रेखा जैसी मानी
05:37जाती है, सयुक्त राष्ट्
05:53इसलिए आने वाले वर्षों में दख्षणी लेबनान और लितानी छेत्र संखर्ष का सबसे समेंदेशील बिंदू बने रह सकते हैं
06:00इसराइल की पौरवर्ड डिफेंस लाइन युद्ध के बाद इसराइल ने अपने सुरक्षा रणीती में बदलाव के संकेत दिये
06:06विश्लेशकों के अनुसार इसराइल सीमा के पास एक स्थाई सुरक्षा चेतर बनाए रखने की सोच पर काम कर रहा है
06:12उसका तर्क है कि भविश्य में किसी भी हमले को रोकने के लिए अगरिम सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है
06:17लेकिन लेबनान में इसे अलग नजरिये से देखा जा रहा है
06:21वहाँ कई लोग इसे दिर्ग कालिक सैने दबाब की रणीती मानते है
06:24यही कारण है कि युद विराम के बावजूद तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है
06:29तो क्या इसराइल युद रूपने को तयार है यही सबसे बड़ा सवाल है
06:32इरान और अमेरिका के बीच यही कोई समझोता होता भी है
06:35तो क्या उससे इसराइल की नीती बदलेगी
06:38अब तक मिले संकेत बताते हैं कि इसराइल अपनी सुरक्षा रणीती को स्वतंत्र रूप से तय करना चाहता है
06:44उसका मानना है कि हिजबुला भी खत्रा है और केवल युद विराम से समस्या खत्म नहीं होगी
06:50यही कारण है कि कई विश्लेशक मानते हैं कि आने वाले वर्षों में दक्षिनी लेबनान तनाओ का केंद्र बना रह
06:57सकता है
06:58तो भारतियों पर क्या असर है? भारत के लिए ये केवल दूर का युद्ध नहीं है
07:02मिडिल एस्ट भारत की उजय सुरक्षा का सबसे बड़ा सोर्स है
07:05भारत का बड़ा तेल आयात इसी छेतर से आता है
07:08इसके अलावा लाखो भारतिय नागरीक पूरे पश्टी मेशिया में काम करते है
07:12अगर लेबनान, इसराइल या व्यापक शेतर में औस्थिरता बढ़ती है
07:17तेल की कीमते बढ़ सकती है
07:19शिपिंग लागत बढ़ सकती है
07:21भारतिय निर्याद प्रभावित हो सकता है
07:23भारतिय कामगारों और परिवारों की सुरक्षा चिंता बन सकती है
07:26इसलिए भारत सरकार सबबाद और स्थाई शान्ती की वकालत करता रहा है
07:31भविशय का समसे बड़ा सवाल क्या है?
07:33तो क्या हिजबुल्ला का अंत अब करीब है?
07:36शायद नहीं
07:37लेकिन क्या वो हिजबुल्ला है जुसने कभी पूरे लेबनान की रावजनीती और सुरप्शा वैवस्था पर मजबूत पकड़ बनाये रखी थी?
07:45इसका जवाब भी नहीं है
07:46सचाई इन दोनों के बीच कहीं खड़ी दिखाई दे दिये
07:49हालिया युद ने विजबुल्ला को गहरे जख्म दिये हैं
07:53उसके हजारों लडाके मारे गए हैं और घायल हुए हैं
07:56कई वरिष्ट कमांडर हो गए
07:57सैन धाचे को भारी नुकसान पहुंचा
07:59और दक्षनी लेबनान में उसकी रणितिक शमता पर भी असर पड़ा
08:03लेकिन इसके बावजूद सा गठन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ
08:06उसके समर्थक अब भी मौजूद हैं
08:08उसका राश्वितिक प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ
08:11और लेबनान के कई इलाकों में उसकी समाजिक पकड़ बनी हुई है
08:15यही वजह है कि आज हिजबुल्ला एक ऐसे चोराहे पर खड़ा है
08:19जहां उसके सामने अस्तितों बचाने के साथ साथ
08:22खुद को नए सीरे से खड़ा करना बड़ी चुनोती है
08:24आने वाले वर्षों में लेबनान का भविश्य इस बात पर निर्भर करेगा
08:28कि क्या देश और राजनितिक स्तिरता हासित कर पाता है
08:31कि आ यूद से तबा इलाकों का पुनरनिर्मान हो पाता है
08:35और क्या इसरायल और था लेबनान के बीच
08:37कोई स्थाई सुरक्षा वैवस्था बन पाती है
08:39क्योंकि एरान और अमेरिका के बीच
08:41तनाव भले का महुता दिखाई दे रहा हो
08:43लेकिन लेवनान की लड़ाई अभी
08:45खात्व नहीं हुई है
08:46समभव है कि Middle East की अगली बड़ी कहानी
08:49अब लेवनान की धर्ती पर ही लुखी जाए
08:51इस खबर में इतना ही
08:53अपडेट्स के लिए देखते रहें One India हैंदी
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