00:08इंडिया में मुझे लगता है कि ये काफी हाथ पकड़ कर सिखाना जैसा था
00:11आपके पास यूनिट टेस्ट होते हैं, एक्जाम्स होते हैं, सब कुछ बहुत ही स्ट्रक्चर्ड होता है
00:15Cambridge में ऐसा स्ट्रक्चर्ड नहीं है
00:17प्रोफेसर्स आएंगे, वो डिसकस करेंगे और चले जाएंगे
00:20और फिर ये आप पर निर्भर करता है कि आप वापस जाकर उस टॉपिक पर रिसर्च करना चाहते हैं या
00:24नहीं
00:24तो उस सेंस में आपके पास बहुत फ्रीडम है
00:26अगर आप किसी चीज की गहराई में जाना चाहते हैं
00:31पर इंडिया में भी देखो ना
00:33अगर आप कुछ बहतरीन इंस्टिटूशन में जाओ
00:35तो वहाँ ये बिलकुल वैसा ही है
00:37जैसे कि IIM अहमदाबाद में वहाँ पढ़ाई का case method है
00:41तो तुम्हारे पास cases होंगे
00:43और तुम्हें उन्हें खुद से पढ़ना, analyze करना और उसमें डूबना होगा
00:47और प्रोफेसर वहाँ आकर तुम्हें वाकई में पढ़ाएगा नहीं
00:50वहाँ का method discussion का है, नकि केवल जानकारी बाँटने का
00:53तो वहाँ एक open discussion होता है
00:55और तुम free हो, यहाँ तक के contribute न करने के लिए भी
00:58हला कि इसके लिए तुम्हें academically नुखसान उठाना पड़ सकता है
01:01पर वो ठीक है, वो fair है, बात यह है कि
01:04वहाँ कोई तुम्हें spoon feed नहीं करने वाला
01:09इन सब का बहुत कुछ लेना देना उस confidence से है
01:12जो एक institution वहाँ के लोग और एक पूरी सभ्यता अपने भीतर रखती है
01:17जब तुम इस बात को लेकर assured होते हो कि तुम किस चीज के लिए खड़े हो
01:21और जब भीतर एक गहरी सुरक्षा की भावना होती है
01:23तब तुम ज्यादा freedom देना afford कर सकते हो
01:25students को भी और generally society को भी और खुद को भी
01:29लेकिन जब तुम vulnerable feel करते हो
01:31क्योंकि तुम्हारा past काफी turbulent रहा है
01:34और वो भी अभी हाल का past तब तुम अंदर से थोड़े tight होते हो
01:37तुम relax करना afford नहीं कर सकते
01:39और तुम वो relaxation और वो freedom दूसरों को भी नहीं दे पाते
01:43चाहे वो एक family हो या classroom हो
01:45या फिर बाहर की society हो
01:47तो जैसे जैसे तुम खुद को लेकर और assured होते जाओगे
01:50तुम देखोगे कि इंडिया भी थोड़ा loser नफ हो रहा है
01:53और उन लोगों के प्रती ज्यादा generous हो रहा है
01:56जो थोड़े अलग रास्ते चुनना चाहते हैं