00:00कुछ बच्चे ऐसे थे जो असफल हुए और उन्होंने आतमत्याई कर लिए तो उन बच्चों के लिए और मैं चाहती
00:09हूं कि उन पेरेंट्स के लिए आप जरूर कहें जो इतना प्रेश्राइज कर देते हैं बच्चों पर कि वो इस
00:15कदम को उड़ाने तक मजबूर हो रहे है
00:16देश में सैकडों हजारों ऐसे मामले हर साल सामने आते हैं और खेद की खतरे की बाती है कि यह
00:23मामले प्रतिवर्श बढ़ते ही जा रहे हैं कारण पारिस्थिक और सामाजिक और पारिवारिक दबाओ के अलावा कुछ नहीं है शाक्षनिक,
00:32संस्थागत, हर तरह का दबाओ �
00:34पढ़ रहा है उसके उपर, यह हमारे माबाप है, इनकी अपनी जिन्दगी का ही केंद्र भी, इनकी दिशा, इनके लक्ष,
00:41यह सब गड़बढ रहे होते हैं, और फिर इन्होंने जो दिशा चली होती है, जिस केंद्र से, यह अपने बच्चों
00:47को विवश करते हैं कि तुम �
00:48भी वही दिशा चलो, होना क्या चाहिए था? मैं सबसे पहले एक पेरेंट, अभिभावक होने के नाते स्विकार करूँ, कि
00:54मेरा जीवन ही वेर्थ रहा है, क्योंकि मुझे कुछ पता नहीं अपने बारे में, ना मैं खुद को जानता, ना
01:00जिन्दगी को जानता, अब हम इत
01:16सोला, अठारा साल का है, बहुत होता है, बोज नहीं बरदाश्त होता, तो आत्म घाती कदम उठा लेते हैं, युवा,
01:22क्रिपा करके आप यहां जितने भी अभिभावक हैं, या शिक्षक हैं, बच्चों में ये भाव कभी मत डालिएगा कि जीवन
01:28की कोई भी उपलब धी ज
01:30जिंदगी में जो कुछ भी पाया जा सकता है, उस सब से कहीं ज्यादा बड़ी चीज है, जिल्दगी जब बहुत
01:36छोटे हों, इतने बड़े हों, इतने बड़े हों, चलो समझ में आता है, उन्हें में कुछ समझ नहीं, आप उनके
01:41लिए कुछ फैसले ले सकते हो, एक बार �
01:4410-12-14 की उमर पार करने लग गया, उसके बाद अपनी इच्छाओं को बच्चों पर लादना बंद करिए, अपने
01:54आपको खुद से आजाद करिए, और बच्चों को भी खुद से आजाद करिए, हाँ, अनुभव है आपके पास, दुनिया आपने
02:00ज्यादा देखी है, तो एक स
02:02साथी की तरह मौझूद रहिए।
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