00:00एक सही जगह सर न जुगाने के कारण आप हजार गलत जगहों पर सर जुगाते हो एक सही जगह न
00:09बिक जाने के कारण आप हजार बाजारों में, हजार दुकानदारों में, हजार खरीदारों के हाथ बिके बिके फिरते हो
00:19दो तरह के रिष्टे हो सकते हैं
00:21एक रिष्टा ही हो सकता है कि आत्मा के आगे जुखी जाओ
00:26सुईकार कर लो कि तुम में आत्मा के लिए विरोध नहीं है
00:30विरह है पर अखड इतनी है कि मानना नहीं चाहते कि विरही हो
00:35तो अपने को घोशित करे फिरते हो कि विरोधी हो
00:39अपनी विरह को विरोध का नाम दे दिया है तुमने
00:41जैसे कोई प्रेमी रूठ गया हो
00:44और ऐसा रूठा हो कि कहने लग गया हो
00:46कि मुझे तुमसे दुश्मनी है
00:48तो किसी ने जाके पूछा एक चुए ने
00:51कि तुझे अगर आत्मा से सचमुच
00:54इतनी समस्या होती इतनी दुश्मनी होती
00:57जो भी तुने सब नकली चीजें खड़ी करी है
01:00उनको तु असली क्यों बताता है
01:02असली शब्दत तो बस आत्मा के साथ चलता है
01:05इसका मतलब यह है कि तु भले ही चिलाता फिरता है
01:08कि आत्मा का विरोध लेकिन अंदर की बात यह है
01:11कि तु जिससे दुश्मनी बता रहा है
01:14दिली दिल में उसकी पूजा करता है
01:15बस तो हिम्मत नहीं देखा पा रहा
01:17कि जिसे पूजता है दिल से जाकर के
01:21पाउं भी उसके छूले
01:24बस तू हिम्मत नहीं दिखा पा रहा है
01:26कि जिसे तूने दिल से लगा रखा है
01:29जा करके उसे गले से भी लगा ले
01:32ये हिम्मत नहीं दिखा पा रहा है
01:34अपने दिल में एक प्रेम लेके घूम रहा है
01:38और कहा रहा है दिल में रखोंगा
01:40प्रकट कर दिया तो बड़ी जिम्मेदारियां आ जाएंगी, कष्ट से गुदरना पड़ेगा, मिट जाना पड़ेगा, तो बाहर-बाहर क्या दिखाऊंगा,
01:48तकरार, गुस्सा, क्रोध, विरोध, शत्रता, अभीतर ही भीतर क्या लेके घुमूँगा, प्रेम, तेरी नजर म
01:57तो ये कोई बहुत मीठा काम कर रहा होगा, तो इसलिए फिर संत बोलते हैं, न दिखा इतनी चतुराई, कि
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02:09थे तुमसे, सर सौपो, सीधे लड़ो, काहे करो, क�
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02:22उसे अपने रोजमर्रा के एक एक कर्म की इमांदारी बन जाने दो
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