00:00अगर जिन्दगी आपको बहुत थपड मार रही है, आप माने तनुभाव करते हो, हालत खराब रहती है, तो वजह बस
00:08एक है, किंद्र से कोई रिष्टा नहीं है आपका, चाकी चाकी सब कहें, कीली कहें न कोई, जरा गिनों के
00:18दिन भर जिन चीजों में लगे रहते हो और जि
00:29सब जंजाल, दंदफंद, दुनिया भर की बातें, ये किया, ये छोड़ा, ये उठाया, अभी ये काम बाकी है, अभी ये
00:40करतव है, अभी ये निप्टाना, अभी फलानी जिम्मेदारी, ये सब किसकी बाते हैं, ये चक्की की बाते हैं, कील की
00:47कितनी बात करी दिन भर में, क
01:00दूई पाटन के बीच में साबुत बचा न कोई
01:04आगे उन्होंने ये भी बता दिया कि दूई पाटन के बीच में साबुत बचने का उपाय क्या है
01:11उपाय ये कि रहो दो पाटों के बीच में पर कील से चिपक कर रहा हो कुछ नहीं होगा तुमारा
01:16कोई तुम्हारा बाल नहीं बाका कर सकता
01:18जो कीली से लाग रहे बाल न बाका होए
01:25कीली से लग कर जीने को ही निश्काम कर्म कहती है
01:30चक्की के बीच पिस जाना, अपनी हालत खराब कर लेना
01:34कहीं के न रहना, अपनी गरिमा से हाथ धो बैठना
01:41मूँ छपाने को मजबूर हो जाना, ये सब इसी बात के लक्षण है
01:45कि अपनी कामना के मारे हुए हो और केंदर से बहुत दूर छिटके हुए हो
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