00:00रामकृष्ण अगर आज होते और कोई उने जाकर बताता कि यह जो तो मचली खा रहे हो इससे तो पर्यावरण
00:04की बहुत हानी हो रही है
00:05तो रामकृष्ण में इतनी महानता निश्चित रूप से थी क्यों एकदम मान जाते कि हाँ
00:10मचली खाना ठीक नहीं है वो छोड़ देते हैं पर लोग यही बात पकड़के बैठ जाते हैं
00:13फ्रिशियों ने जिस मुह से ब्रहम उचारा था ना उस मुह में भी बैक्टिरिया लगे थे
00:18अब उचे से उचे दर्जे का श्लोक उसी मुह से निकल रहा है
00:21तुम्हें उस श्लोक पे ध्यान देना है या मुह में जो बैक्टिरिया बैठा उस पे ध्यान देना है
00:25हर इंसान में कमियां हो सकती हैं इतना हक उचे से उचे आदमी को दिया करो
00:29कि उसमें कुछ कमियां हो सकती हैं कुछ कमजोरियां हो सकती हैं लेकिन उक कमियां और कमजोरियां सीखने की चीज
00:34नहीं है इस बात को सुईकार करो एक नॉलेज करो कि हाँ उसमें ये दोश है और फिर को लेकिन
00:39ये चीज नहीं सीखनी है मुझे उनसे उनसे मुझे क्या सीखन
00:42है जो सीखने लाया के अर्संथ का एक अतीत होता है इसमें
00:45कोई बूरा मानने वाली बात नहीं है इसमें कोई अफसोस करने
00:48वाली बात या चोकने वाली बात भी नहीं है पयादा तो एक यह ऐाان
00:51होते न सब
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