00:00ब्रज में क्या चल रहा था? इंद्र की पूजा की जा रही थी। कृष्ण कहते हैं तुम गौर से देखो
00:04कि इंद्र तुम्हारी कलपना है, तुम इंद्र से कभी मिले नहीं। इंद्र तो तुम्हारे मन से उठा हुआ, एक चित्र
00:10है, एक छवी है। ये जो इतना बड़ा प
00:25जास्तविक लाफ मिल रहा है इस गोवर्धन परवत से, किस की पूजा करो। गोर्धन की पूजा माने किस की पूजा?
00:30तथ्य की पूजा
00:32कहती है कि जब तत्थे की पूजा होने लगी तो तमाम तरीके के पुद्रों पैदा हो गए बारिश हो गई
00:37और जब बारिश इत्याद होगी तो कहानी आगे कहती है कि उस सबसे बचाया भी किसने परवत ने कृष्ण ने
00:42और परवत ने परवत माने तत्थे कृष्ण माने सब
00:45वो गोवर्धन क्रिश्न की ही बुनियाद पर खड़ा है
00:48बड़ा सांकेतिक है वो चित्र जिसमें क्रिश्न की कनिष्ठा पर गोवर्धन विराजमान है
00:53गोवर्धन की बुनियाद हुए क्रिश्न
00:55गोवर्धन का आधार हुए क्रिश्न
00:57तुम गोवर्धन पे जाओ और डूब जाओ गोवर्धन में
01:00वहां कृष्ण को पाओगे तुम गहराईयों में
01:02भारत में हीली सब पूजनी रहा है
01:04पत्थर पहाण, कमरे, चरण, खूल, पत्तियां, जड़े, कीड़े, मकोड़े
01:09तिनके, गोवर्धन, खड़ियां, जोपड़े, सूरत चांद, धारे, सब पूजनी रहा है
01:14जिस किसी से भी तुमें कुछ भी मिला हो, जान लो
01:17कि देने वाला एक है, जो दे रहा है, वो उस देने वाले का ही रूप है
01:21जड़ से पकड़ लोकर तो जान लगए तुम ही तो हो, तुम ही हो
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