00:00नारी नर्क का द्वार है उसके लिए जो नारी को वासना की द्रिष्टी से देखे
00:06नहीं तो जैसे कोई भी व्यक्ति है वैसे ही एक महिला भी है
00:09पर तुम महिला को देखो और तुम्हें व्यक्ति दिखाई ही न दे
00:12तुम्हें चेतना उसकी दिखाई ही न दे
00:14तुम्हें बस उसका शरीर दिखाई दे, तुम्हें बस उसके जननांग दिखाई दे
00:18तो नर्क और क्या होता है, कि तुम्हें एक चेतना को बस मास बना डाला
00:25नर्क तुम्हारी दृष्टी में है, दुनिया की आधी आवादी महिलाओं की है
00:28तुमने दुनिया की आधी आवादी से काट लिया अपने आपको
00:32अब उनसे न तुम्हारी मित्रता हो सकती है न कोई स्वस्त संबंध हो सकता है
00:35क्योंकि तुम्हें उनकी चेतना आप दिखाई ही नहीं देती
00:38तुम्हें बस शरीर दिखाई देता है
00:39शरीर से क्या संबंद बनेगा, शरीर से तो यही संबंद बनेगा, नोचने खसोटने का, क्या तुम उनसे बैट के वैचारिक
00:45तल पर कोई बात कर पाओगे, क्या तुम उनसे मितरता का या बुद्धिमत्ता का कोई संबंद बना पाओगे, कोई संबंद
00:50नहीं बनेगा, जब �
01:05कि सारी संभावना से हाथ दो बैठे
01:08और नर्ग किसको कहते हैं
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