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Abhijit Dipke Lucknow Case: इको गार्डन में CJP चीफ का भारी विरोध, क्या है पूरा मामला? सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके जब लखनऊ के छात्र आंदोलन को हाईजैक करने पहुंचे, तो जमीन पर मौजूद अभ्यर्थियों ने उन्हें ऐसा सबक सिखाया कि उन्हें 40 मिनट में ही मैदान छोड़कर भागना पड़ा!


In a major development at Lucknow's Eco Garden, competitive exam aspirants staging a massive protest against paper leaks and recruitment scams strongly opposed the entry of Abhijit Dipke, the founder of the Cockroach Janta Party (CJP).

#AbhijitDipke #LucknowEcoGarden #CockroachJantaParty #PaperLeakProtest

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Transcript
00:07लखनाओ के एको गार्डन में जो हुआ उसने कौकरोज जनता पार्टी यानी सीजेपी और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके की राजनीती
00:15पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिये हैं
00:18सोशल मीडिया पर क्रांती की बाते करने वाले अभिजीत दीपके को शायद उम्मीद थी के लखनाओ पहुँचते ही हजारों छात्र
00:26उनका स्वागत करेंगे उनके भाशन सुनेंगे और उनके नेत्रित्व में आंदोलन को नई दिशा मिलेगी लेकिन जमीन पर तस्वीर कु
00:45कोड़े अभ्यर्थियों का आंदोलन चल रहा था इस प्रदर्शन की तयारी कथित तौर पर कई हफ्तों पहले से की जा
00:51रही थी और इसके लिए छात्रों ने प्रशासनिक अनुमती भी प्राप्त की थी इसी बीच अभिजीत दीपके ने भी इस
00:57आंदोलन में शामिल होने क
00:58का फैसला किया बताया जाता है कि दोपहर करीब दो बजे वे कुछ छात्र संगठनों के नेताओं के साथ इको
01:04गार्डन पहुंचे हाथ में सम्विधान की प्रती थी कैमरे मौजूद थे और सोशल मीडिया टीम भी सक्रिय थी लेकिन जैसे
01:11ही उन्होंने मंच के करीब बहु
01:27के समस्याओं के खिलाफ संगर्ष कर रहे हैं जबकि सीजेपी अब अचानक आकर पूरे आंदोलन को अपने नाम से जोडने
01:34की कोशिश कर रही है कुछ अभ्यर्थियों ने साफ कहा कि हमारी लड़ाई रोजगार और भरती की है किसी राजनीतिक
01:41संगठन के प्रचार की नही
01:42सूतरों और वाइरल विडियो के मताबिक अभिजीद दीपके ने प्रदर्शनकारियों से करीब 10 मिनिट बोलने का अफसर मांगा उन्होंने ये
01:49भी कहा कि वे मुंबई से विशेश रूप से यहां पहुचे हैं लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उन्हें मंच और माइक देन
02:10साधी भी नहीं मिलती और लोगतंत्र भी नहीं बचता उन्होंने पेपर लीक मामलों में जिम्मेदार लोगों के स्तीफे की मांग
02:17भी उठाई लेकिन छात्रों का फोकस कुछ और था वे अपने मुद्दों को किसी राजनीतिक चेहरे से जोड़ने के पक्ष
02:22में दिखाई �
02:23नहीं दिये आलोचकों का कहना है कि ये वही पैटर्न है जो पहले दिल्ली के आंदोलनों में भी देखने को
02:29मिला था पहले सोशल मीडिया पर बड़े दावे फिर किसी मौजूदा आंदोलन में एंट्री और उसके बाद विवाद हाला कि
02:35सीजेपी समर्थकों का तर्क है कि �
02:37अभिजीद दीप के केवल छात्रों के समर्थन में वहाँ पहुचे थे और उनका उदेश आंदोलन को मजबूत करना था लेकिन
02:44विरोध करने वाले छात्र इसे अलग नजर्य से देख रहे हैं उनका कहना है कि किसी भी आंदोलन का नेत्रत्व
02:50वही लोग करे जिन्होंने उ
03:22ऐसा व्यक्ति जो बाद में आकर पूरे संघर्ष का चहरा बनने की कोशिश करें।
03:23सिर्फ वाइरल होना। फिलहाल लखनों की घटना ने इतना तो साफ कर दिया है कि जमीन पर मौजूद छात्र अब
03:29अपने आंदोलन को किसी भी राजनीतिक या सोशल मीडिया ब्रैंडिंग से जोडने के लिए तयार नहीं दिख रहे। उनके लिए
03:35मुद्दा अभी भी वह
03:53और किसी दया ऊंब मौजूद आंड़ झाल कर दो नहीं दिख रहे दोशल में नहीं।
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