00:00आप फिल्म देखने जाओगे वहाँ पर एक प्रगार का प्रेम दिखाया जाएगा
00:03कैसा भी प्रेम हो सकता है मा बेटे का हो सकता है पते पतनी का हो सकता है
00:06और आप उसकी तुलना में पाओगे कि आपके जीवन में जो प्रेम है वैसा नहीं है
00:29दिखाई दी क्या उसको विचार आ सकता है कि एचतमिथ्या नहीं करूंगा दे को देखा और उधर से लौटके फिर
00:52मैंने
00:52करें अपना निर्मांगी जो बाहर दिख गया उससे आप बनें आप जो भी बनें अधूरे बने उसके अनुसार आप जो
00:58भी बनोगे अधूरे ल�ो क्योंगे जना में जितने प्रकार के वह कि
01:03उन सब पर खरें उतर सकते न जगत तो वैबित सताओं का भंडार
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