00:00कि एक ये हैं एक तरफ से चले तो अयोध्या का सिंगहासन और राज्य सब छोड़ के चले और दूसरी
00:05तरफ गए तो हाँ पर लंका का पूरा राज्य मिल रहा था और लंका का पूरा सोना मिल रहा था
00:09वो भी छोड़ दिया और एक मैं हूँ कि मैं दो रुपया ना छोड़ू
00:11मैं भी यहां मंदिर आया, आटो से उतरा उसमें 98 रुपय दिखा रहा है, मैंने उसको 100 का पत्ता दिया,
00:16वो बोल रहा है दो का सिक्का है नहीं, मैं का खबरदार, जा और जहां कहीं से 2 रुपय लेकर
00:21आता है, आ नहीं तो तेरे आटो नहीं छोड़ूगा मैं, और फिर बिच
00:41राज और लंगा का सोना दोनों छोड़ दिया, यह याद आना चाहिए न मूर्ती के सामने, मूर्ती का उद्देश ही
00:46यह होता है, कि आपको आपकी हिनता याद दिलाए, और साथी साथ ये भी याद दिलाए, आप भी उँचे उठ
00:52सकते हो, और यह दोनों चीज़ अब एक स
00:59शुरू हो जाती है
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