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Transcript
00:00इस व्यक्ति में अपनी कमजोरियों को जीता था
00:02कामवासना उनकी कभी किसी भी आम आदमी की तरह इतनी प्रवल थी
00:07कि पिता की आखरी घड़ी में भी पिता के साथ नहीं हो पाए
00:10जो आदमी अंग्रेजों का इतना कायल था
00:12कि जब ये गए पढ़ाई घरने के लिए रिटेम
00:15तो उन्होंने अपने बहुत सारे पैसे सिर्फ अंग्रेजी तौर तरीके सीखने उने में लगा दिये
00:20वो फिर आदमी अंग्रेजों पर बिल्कुल चड़ बैठा और अंग्रेज उससे थर राते थे
00:24एक गक्ति जो कमजोर मनका था शुरुवात में वो इतने द्रण मनका हो गया
00:29कि जब वो उपवास करने बैठते थे तो भारत ही नहीं पूरी दुनिया काप गयाती थे
00:34चर्चल के बसीने छूड़ जाते थे उतना नंगा फकीर बड़ा जिद्दी है
00:38और फिर वो जगया आई जहां पर ये महात्मा कहलाए गीता को मा बोला आखरी शब्द भी इनके हेरान थे
00:50बहुत ही लचर से और औसत से मनके आदमी थे वो बहुत ही औसत मनके आदमी उस औसत स्तर से
00:56उठकर के
00:57इतना मजबूत बन जाना मेरे ख्यासे सब को उनसे प्रिड़ना लेनी चाहिए
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