00:00मध्यप्रदेश का जिलाधा, गाउं का नाम उटावा, कागजपर विकास की पाइपलाइन बहुत पहले यहाँ बिच चुकी है, लेकिन जनता तक
00:08क्या उसकी पहुँच अब भी बहुत दूर है, इतनी दूर कि इन तक विकास की उसी पाइप से पानी पहुचाने
00:14के लिए ख�
00:27साल में एक बार आती है, पचास फीट नीचे वो महिलाएं आपको दिख जाएंगी पानी के कनस्तर ली हुई, वो
00:33जो आप देख रहे हैं अंदाजा लगा सकते हैं आप कि कितना कठिन होता होगा, क्यूंकि इस तरीके से पानी
00:39के छोटे-छोटे पोखर यहाँ बने हुए, �
00:42यह गहरी खाई एक कोई बरसाती नदी है, जिसकी गहराई में यह जो छोटे-छोटे पोखर बने हुए, इसी में
00:48से यह लोग पानी भरते हैं, और इसी पोखर में से एक यह पोखर है, जहां पर फिलाल यह गाउं
00:53की महिलाएं मौजूद हैं, हम इनके रोजाना के संगर्श
00:57को दिखाने के लिए खुद भी इस नीचे खाई में उतरेंगे , 50 फिर्ट गहरी खाई में हम भी उतरेंगगे
01:02और पहले ही नीचे ब्वाइन Byapinkस इ aufgeanie से ओर रहना की कोषिश करेंगे की जो, इसम और रहा ही
01:11और रह पानी क Souनीं को चुणे
01:26किस तरह पानी को पाने के लिए रोज यहां महिलाएं जंग लड़ती हैं क्योंकि यहां कोई नल नहीं लगा यहां
01:33चटानों से रिस रिस कर पानी पहुंचता है वो पानी चटानों के बीच घंटे दो घंटे में इस गड़े में
01:40भर जाता है तब जाकर आम आदमी अपने जी�
01:56अगर तस्वीर के रूप में देखना हो तो आपको धार जिले के सरदार पूराना पड़ेगा और यहां उटावा गाउं में
02:03ग्रामीर जो है वो बूंद बूंद से ही अपने घरों के लिए पानी भरते हैं यह जो आप देख रहे
02:09हैं यह छोटी सी पानी की एक जो लकीर आ�
02:26करके भरता है बताते हैं कि तकरीबन दो घंटे का समय लगता है इस पोखर को भरने में और वही
02:32पानी जब धीरे धीरे आकर के इस पोखर में भर जाता है तब जो महिलाएं हैं और इस इलाके के
02:37रहने वाले लोग हैं वो इसी पानी को इस तरीके के बरतनों में भरते हैं और
02:42फिर उसके बाद वो इस पानी को पीने के लिए और बाकी कामों में इस्तमान लाते हैं
02:51दो घंटे बाद एक परिवार को अगर पानी भरने का माउका मिल पाता है
02:55तब तक दूसरे लोग यहां नीचे इंतजार करते दिखते हैं
02:57क्योंकि इनके गाउं में पाइप लाइन पहुची पर गर्मी में उसी पाइप में पानी नहीं पहुच पाता
03:02कितना समय लगता है इसमें और ये पानी कहां से आ रहा फिर
03:27कब हम खेती का काम करते है पानी को पानी पिलाता है
03:33यहां तो हम 6-7 बज़े से आता है, सुबे से, 5-7 बज़े से भी आता है, 5-4
03:39बज़े, यह सब भरने में कितना समय लगता है, सब भर के वापिस कब जाते हो गाउं आप, 12-11
03:43बज़ जाती है, दो पहर के, 6 घंटे कम से कम, 6 गंटे कम, चार मुहले का पानी भरते है
03:49इदर, तो �
03:51भरते हैं, भरते हैं, में कम से 11 बज़ जाती है, जो गाउं में पाईप है वो, वो तो बंध
03:56है, दो साल से, बंध है, वो नहीं सल रहा, हमार उदर तो पानी नहीं आता है, हम तो सीर
04:01पर उठा के ले जाते है, किलो मेटर दूर ले जाते हैं, जिस जगा से यह पानी निकलता
04:20उटावा गाउं के संघर्ष की कहानी बया करती ये सबसे डरावनी तस्वीर है
04:25मैं तकरीबन जमीन से यानि वो पोखर जहां से ये महिलाएं पानी भरती है
04:30उसे तकरीबन 30 फीट उपर खड़ा हूं और इससे 20 फीट और उपर इन महिलाओं को जाना है
04:36और महिलाएं छोटे बच्चे इसी तरीके से रोजाना यहां से पानी भरके अपने गाउं तक जाते हैं
04:44जो छोटा सा पोखर है जहां से जमीन से पानी धीरे धीरे करके रिस्ट करके दो घंटे में उस पोखर
04:49को भरता है
04:50और फिर उस पोखर से ये पूरा गाउं पानी भरके एक साथ इसी तरीके से ये खाई पर चड़के अपने
04:58गाउं पहुंचता है
05:01बच्चों से लेकर बुजर्ग तक यूही अब भी पानी ले जाते हैं
05:04इनी में ये सत्तर साल की बुजर्ग महिला देखती हैं
05:06सोचे क्या हालत होती होगी खाई से पानी इनको निकालने में
05:21धार जिला मुख्याले से केवल साथ किलोमीटर दूर के गाउं में
05:24पानी का विकास इतना दूर हो जाता है अंदाजा नहीं था
05:27रिस रिस कर पानी पाती जंता का गुनहगार आखिर कौन है
05:32डबल इंजन की सरकार में जंता को हर घर जल हर घर नल के सपने दिखाए गए
05:41बस जंता की प्यास बुझाने को पानी फरार है योजना में भारी ब्रिश्टाचार की बहार है
06:04पानी को पीने के लिए जंता मजबूर होती है तो जरूरी है
06:20सरकार सोचे यहां कैसे दूसरे इंतिजाम करके पानी तो पहुचाया जा सके
06:25रवीश पाल सिंग धार आज तक
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