00:00मेरे दिवंगत पिता श्री विजेबारुपानी एवं 270 सहयात्रियों के प्रती अपनी शदान जली प्रकट करता हूँ, उन्हें प्रणाम करता हूँ
00:13और जो concerned families हैं, उनके प्रती अपनी समेधनाय, अपनी respects पेकरता हूँ
00:19तो, of course, एक साल हुआ है, life is not easy and एक कुट्र के और परिवार के सेरे से
00:31पिता की छत्रचाया अगर चली जाती हैं, तो it is irreplaceable and the agony, the pain, the sorrow is there
00:44पर, मतलब, जैसे संग का मंत्र हैं, चरहिवती, चरहिवती, जिंदगी आगे बढ़ती ही रहती हैं
00:55और मुझे विश्वास है कि मेरे पिता जी, शिवीजे बैरुपानी के आदर्श, मुल्य, उनके विचारों का
01:04अगर हम सिर्फ उनके footsteps को ही एक पत्थ मानके चलें, तो life will be much easier
01:15and मैं वहीं प्रयास कर रहा हूँ, जबी भी मैं कोई ऐसी situation में होता हूँ
01:21कि जहां पर सोच विचार चाहिए, मैं आखे बंद करके पिता जी का स्मरण करता हूँ
01:27और अगर ये जगे पर वो होते तो वो क्या करते हैं, तो इससे काफी मदद मिलती हैं
01:33और सही decision में लेने में सही रास्ता चुनने में
01:36Throughout his life, he was a common man
01:38वो हमेशा बोलते थे कि मैं CM यानी Chief Minister नहीं हूँ
01:42परंतों मैं CM यानी common man हूँ
01:44और मैंने फिर उसके उपरांथ उनकी याद में उनको शदान जली अरपन करते हुए
01:51मैं और तीन चीजे बोली थी
01:53कि वो CM यानी he was a committed man, he was a cultured man and he was a cultivated man
02:00तो ये सारे गुण उनमें थे तो आज भी वो गुण को एक पत्थर की लकीर मानते हुए
02:07हम आगे बढ़ रहे हैं
02:11आखरी सब्वाद या मुलाकात आखरी सब्वाद के साथ कैसी रही क्या बात ही थी क्या
02:18हाँ मुझब लंडन जा रहे थे मेरी बड़ी बहन लहती है लंडन में उनके घर जा रहे थे उनकी घर
02:26पर पूजा थी
02:27मेरे माता जी वहां पहुंच चुके थे तो सब खुश थे और पापा ने सालो बाद अपनी बेटी से मिलने
02:36जा रहे हो
02:37तो स्वाभाविक हैं कि वह खुशी होंगे और उसके पहले उनकी पांच तारिक की फ्लाइट थी फिर दस तारिक की
02:43और फिर चेंज जो तो बारा तारिक की हुई क्योंकि पंजाब में एक लुद्यानया सीट का उप चुनाओ था तो
02:50वह चुनाओं की प्रक्रिया में वह व
03:03पार्टी तो ना करी वक्त तक वो
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