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H-1B Visa Fee Struck Down By US Court Update: अमेरिका जाने और वहां नौकरी करने का सपना देखने वाले लाखों भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, इंजीनियर्स और युवाओं के लिए वाशिंगटन से सबसे बड़ी राहत की खबर सामने आई है! राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B वीज़ा आवेदनों पर लगाई गई $100,000 (करीब 85 लाख रुपये) की भारी-भरकम फीस को अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने असंवैधानिक करार देकर पूरी तरह से रद्द (Vacate) कर दिया है, देखिए पूरी इनसाइड स्टोरी।

About the Story:
In a major judicial blow to the Trump administration's hardline immigration policies, US District Judge Leo Sorokin in Boston has struck down the controversial $100,000 fee imposed on new H-1B visa applications for highly skilled foreign workers.

#H1BVisaUpdate #DonaldTrump #USCourtVerdict #IndianITProfessionals

~PR.514~HT.408~ED.276~GR.508~VG.HM~

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Transcript
00:00अमेरिका जाने का सपना देखने वाले लाखो भारतिय युवाओं, इंजीनियरों और आईटी प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ी राहत की खबर
00:07सामने आई है
00:08डॉनल्ड ट्रम् प्रिशासन के उस विवादित फैसले को अमेरिकी अदालत ने रद कर दिया है जिसमें H-1B वीजा पर
00:15एक लाख डॉलर यानि की करीब 85 लाख रुपए की भारी फीस लगाने का प्रावधान किया गया था
00:22ये सिर्फ एक वीजा फीस का मामला नहीं था अगर ये नियम लागू रहता तो अमेरिका में नौकरी का सपना
00:27देख रहे हजारों भारतिया पेशेवरों के लिए रास्ता लगभग बंद हो सकता था
00:32लेकिन सवाल है कि आखे टरंप प्रिशासन H-1B वीजा को इतना महंगा क्यों बनाना चाहता था और अदालत ने
00:38इससे गैर कानूनी क्यों बताया
00:40सबसे पहले समझते हैं कि H-1B वीजा क्या है
00:46H-1B अमेरिका का वो विशेश वीजा है जिसके जरीए विदेशी कुशल पेशेवर अमेरिका में काम कर सकते हैं
00:53IT, Engineering, Healthcare, Research और Finance जैसे सेक्टर का इस वीजा पर काफी निर्भर है
00:58भारतिया पेशेवर H-1B वीजा के सबसे बड़े लाभारतियों में शामिल है
01:02Microsoft, Google, Amazon, Meta, Apple जैसी कमपनियों में बड़ी संख्या में भारतिया इसी वीजा के जरीए काम करते हैं
01:10तो अब आते हैं ट्रॉम्प की फैसले पर
01:12सितंबर 2025 में ट्रॉम्प प्रिशासन ने नए H-1B वीजा आवेदनों पर एक लाख जॉलर की अतरिक्त फीस लगाने का
01:19एलान कर दिया था
01:20इससे पहले जहां सामाने सरकारी फीस कुछ हजार डॉलर के दाइरे में रहती थी वही इस नई फीस को कई
01:25गुणा आधिक कर दी गई
01:26आलोचको का कहना था कि ये कदम विदेशी कुछल कर्मचारियों को हतोत्साहित करने और अमेरिकी कमपनियों को विदेशी प्रतिभाओं से
01:33दूर रखने की कोशिश थी
01:35ट्रॉम्प प्रिशासन का तर्ग था कि H-1B सिस्टम का वर्षों से दुरूप योग हुआ है
01:40उनका कहना था कि अमेरिकी नौकरियों को प्रत्मिक्ता दी जानी चाहिए और विदेशी कर्मचारियों की भरती को सिमित किया जाना
01:45चाहिए
01:46वाइट हाउस का दावा था कि ये कदम अमेरिकी श्रमिकों के हित में उठाया गया है
01:50लेकिन इसके खिलाफ कई राजियों, उद्योग संगठनों और कमपनियों ने अदालत का दर्वाज़ा खटकटाया
01:55मामला बॉस्टन की संगी अदालत पहुंचा जहां जज लियो सोरो की ने अतिहासिक फैसला सुनाया है
02:02अदालत ने कहा कि राश्टुपती है प्रिशासन अपने स्तर पर इस तरह की फीस नहीं लगा सकते
02:06क्योंकि ये वास्तों में एक टैक्स की तरह काम कर रही थी
02:09अमेरिकी सम्मिधान के अनुसार टैक्स लगाने का धिकार कॉंग्रस के पास है, राश्ट्रपदी के पास नहीं।
02:14अदालत ने साब कहा कि ट्रॉप प्रिशासन ने अपनी कानूनी सीमा का उलंगन किया है और ये फीस कानूनन वैदे
02:20नहीं है।
02:21इसके बाद अदालत ने इस नीती को पूरी तरह से रद कर दिया।
02:24इस पैसले का सबसे बड़ा सर भारतिया समुधाय पर बढ़ने वाला है।
02:27भारत दुनिया का सबसे बड़ा H1B वीजा टैलेंट सप्लायर है।
02:31भारतिया IT कंपनिया और अमेरिका ट्रेक कंपनिया हर साल हजारों भारतिया पेशेवरों को इसी वीजा के जरीए अमेरिका भेशती है।
02:38अगर एक लाख डॉलर की फीस लागू रहती तो कंपनियों के लिए नए कर्मचारियों को स्पॉंसर करना बेहत महगा हो
02:44जाता।
02:45इससे भारतिया इंजीनियरों, डॉक्टरों शोद करता हो और टेकनोलोजी प्रोफेशनल्स के अवसर कम हो सकते थे।
03:19अलाकि कहानी अभी पूरी तरह सिखत नहीं हुए।
03:21रिष्टेदार हैं जो एजबन भी वीजा का इस्तेमाल करने वाले थे या इसकी वज़े से डर रहे थे उन तक
03:25ये वीडियो ज़रूर पहुँचाएंगे।
03:26और देश-दुनिया के बाकी ख़बरों के लिए देखते रही वान इंडिया हैंदे।
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