00:004Play का महत्व, शारिरिक संबंद से पहले तैयारी आखित क्यों जरूरी है?
00:04जिसके बारे में समाज में बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन सही और सची जानकारी अकसर कम ही मिल पाती
00:10है.
00:10आज की हमारी यह चर्चा केंद्रित होगी, महिला यौन सुकी असल सच्चाई, 4Play के महत्व और सबसे जरूरी प्यार और
00:17भावनात्वग जुड़ाव पर.
00:18डॉक्टर आकांग्शा पगारे द्वारा साजा की गई गहरी जानकारी और व्यग्यानिक तत्यों के जरिये आज हम इस पूरी प्रक्रिया को
00:24बहुत ही सिंपल, लॉजिकल और सम्मान जनक तरीके से समझेंगे.
00:27तो चलिए बिना किसी देरी के सीधे मुद्दे पर आते हैं.
00:57इससे से शारीरिक समवेधना की वास्तविक्ता, याने असली सचाई क्या है?
01:02देखिए, एक बहुती बेसिक सवाल जो अकसर दिमाग में आता है, वो ये कि फिजिकल पेनेटरेशन असल में कैसा महसूस
01:08होता है?
01:08अब यहाँ सबसे बड़ी बात समझने वाली ये है कि हर शरीर बिल्कुल अलग होता है.
01:13प्लेजर का लेवल या उसका प्रकार सब में एक जैसा बिल्कुल नहीं होता.
01:17बतलब शरीर कोई मशीन का बटन तो है नहीं कि उसे दबाया और एक जैसा स्टैंडर्ड रिस्पॉंस मिल गया, सही
01:21कहाना.
01:22हर महिला का अनुभव उसकी व्यक्तिकत शारेरिक बनावट और उस पल उसकी मानसिक स्थिती पर बहुत जादा निर्वर करता है.
01:27अगर हम बुनियादी शरीरिक समवेदनाओं की बात करें, तो जब शुरुवात में पेनेट्रेशन होता है, तो पेल्विक टिशू, जो की
01:34काफी इलास्टिक या लचीले होते हैं, उनमें एक तरका खिचाओ महसूस होता है.
01:38इसके साथ ही अंदर एक फुलनेस या हलके दबाव की भावना होती है. अब यहां कैच क्या है? कैच यह
01:45है कि अगर शरीर पूरी तरह से तयार है और पर्याप लुब्रिकेशन मौजूद है, तो ये सारी समवेदनाओं बहुत ही
01:51स्मूद और आरामदायक लगती हैं. लेकिन
01:53अगर बिना किसी तयारी के यही प्रक्रिया की जाए, तो ये बहुत जादा दर्धनाक और असहज हो सकती है. आगे
02:00बढ़ते हैं दूसरे सेक्षन पे असली सुक का रहस्य क्या है और इस पर विज्ञान का क्या कहना है? यहां
02:06में एक बहुती सपष्ट बायलोजिकल तुलना
02:08समझनी पड़ेगी. एक तरफ है वजाईना, जो मुख्य रूप से एक प्रजनन अंग है, और सच कहूं तो जैविक रूप
02:13से इसमें समवेधन शीलता थोड़ी कम होती है. और दूसरी तरफ है क्लिटोरिस, जो एक बाहरी अंग है और वो
02:19एक्स्ट्रीम लेवल पर सेंसिट
02:21होता है. हमारे समाज में एक बहुत बड़ी गलत फहमी ये है कि सिर्फ पेनेट्रेशन से ही चरम सुख मिल
02:26जाता है, लेकिन विज्ञान हमें साफ बताता है कि महिलाओं में असली सुख का प्रात्मिक केंद्र वजाईना नहीं, बलकि क्लिटोरिस
02:32है. अब जरा इस नंबर प
02:51जो ये साबित करता है कि intimacy के दोरान केवल अंद्रूनी क्रिया ही काफी नहीं होती, बलकि इस बहारी हिस्से
02:56का उतेजित होना चरम सुख के लिए सबसे एहम कड़ी है. थोड़ा और तकनीकी रूप से समझें, तो क्लिटोरिस एक
03:02छोटा लगभग मतर के दाने के आकार का अं
03:26अब आते हैं तीसरे और मेरे हिसाब से सबसे गहरे पॉइंट पर, मानसिक और भावनात्मा connection का महत्व.
03:33Connection स्थापित करने के ना तीन मुख्य मनो विज्ञानिक स्थम्भ होते हैं, जिनके बिना सब कुछ अधूरा है. पहला कदम
03:39है ट्रस्ट या विश्वास बनाना. ये सबसे जरूरी शर्थ हैं. दूसरा कदम है सुरक्षा का हिसास. जब तक एक महिला
03:46उस माहोल में और उस इन
04:03जरूरी है. चलिए देखते हैं आपना चौथा सेक्षन. फोर प्ले का महत्वा. शारिरिक संबंध से पहले तैयारी आखिर क्यों जरूरी
04:11है? यहां हम दो अलग-अलग intimacy styles को compare कर रहे हैं. एक तरफ है quickies, यानि जल्दबाजी में
04:18सब निप्टा देना, जहां पूरा ध्यान स
04:31संतुष्टी दायक अंतरंगता, जहां लोग पूरा समय लेते हैं, पूरे शरीर को बाहर से भी स्टिमिलेट करते हैं, जिससे एक
04:37जबरदस संतुष्टी मिलती है. आसान शब्दों में कहें तो, जल्दबाजी intimacy का सबसे बड़ा दुश्मन है. अब क्योंकि हम बाहरी
04:45उते�
04:45जिना की बात कर रहे हैं, तो सिर्फ एक जगे फोकस मत कीजिए. शरीर में कई सारे की zones होते
04:50हैं, कानों के पीछे का हिस्सा, गर्दन का पिछला भाग, भीतरी जांगे, पैरों या बालों को सहलाना, और बेशक, क्लिटोरिस.
04:58हर इंसान अलग होता है और उसे अलग-लग तरह
05:13संचार और सही समय, एक स्वास रिष्टे का असली आधार. इस पूरे विशलेशन को हम कुछ सुनहरे नियमों में बांद
05:21सकते हैं, पहला रूल, फोर पले को कभी भी स्किप मत कीजिए, दूसरा, अपनी चाओं और कमफर्ट के बारे में
05:27खुल कर बात करें, बिना कम्मिनिक
05:41खरीरों को एक दूसरे के साथ एड़जस्ट होने के लिए पूरा समय दें, ये कोई रेस नहीं चल रही है,
05:45बलकि दो लोगों के बीच एक बहुत ही खुबसूरत पल है. तो इस पूरी चर्चा के बाद, एक सवाल जो
05:51मैं यहाँ छोड़ना चाहूंगा, वो ये है. जरा सो�
05:55कसिफ शारीरिक प्रदर्शन से हटा कर एक गहरे भावनात्मक जुडाव, विश्वास और प्यार पर शिफ्ट कर दिया जाए, तो वो
06:02किसी रिष्टे को किस हद तक बदल सकता है. कमाल की बात है न, विश्वास, सम्वान और एक दूसरे की
06:08जरूरतों को दिल से समझना ही, �
06:10असल में सुखी जीवन का आधार है. आज के इस विश्वेशन में हमारे साथ जुडने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.
06:15उमीद है कि इस से इस जटल विशे पर काफी स्पश्टता मिली होगी. सीखते रहें और अपना ज्यान बढ़ाते रहें.
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