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Do girls really enjoy penetration, or is that just a myth most people believe?

In this video, I will discuss what girls actually feel during penetration, how much pleasure they experience, and whether it always feels good or not.

We will break down the reality in a simple and practical way from body sensations to the role of the mind, and why many people misunderstand female pleasure.

This video will help you understand the truth without myths, confusion, or unrealistic expectations.

Understand female pleasure in a simple and realistic way. Learn what women actually feel and the truth behind common myths.

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Transcript
00:004Play का महत्व, शारिरिक संबंद से पहले तैयारी आखित क्यों जरूरी है?
00:04जिसके बारे में समाज में बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन सही और सची जानकारी अकसर कम ही मिल पाती
00:10है.
00:10आज की हमारी यह चर्चा केंद्रित होगी, महिला यौन सुकी असल सच्चाई, 4Play के महत्व और सबसे जरूरी प्यार और
00:17भावनात्वग जुड़ाव पर.
00:18डॉक्टर आकांग्शा पगारे द्वारा साजा की गई गहरी जानकारी और व्यग्यानिक तत्यों के जरिये आज हम इस पूरी प्रक्रिया को
00:24बहुत ही सिंपल, लॉजिकल और सम्मान जनक तरीके से समझेंगे.
00:27तो चलिए बिना किसी देरी के सीधे मुद्दे पर आते हैं.
00:57इससे से शारीरिक समवेधना की वास्तविक्ता, याने असली सचाई क्या है?
01:02देखिए, एक बहुती बेसिक सवाल जो अकसर दिमाग में आता है, वो ये कि फिजिकल पेनेटरेशन असल में कैसा महसूस
01:08होता है?
01:08अब यहाँ सबसे बड़ी बात समझने वाली ये है कि हर शरीर बिल्कुल अलग होता है.
01:13प्लेजर का लेवल या उसका प्रकार सब में एक जैसा बिल्कुल नहीं होता.
01:17बतलब शरीर कोई मशीन का बटन तो है नहीं कि उसे दबाया और एक जैसा स्टैंडर्ड रिस्पॉंस मिल गया, सही
01:21कहाना.
01:22हर महिला का अनुभव उसकी व्यक्तिकत शारेरिक बनावट और उस पल उसकी मानसिक स्थिती पर बहुत जादा निर्वर करता है.
01:27अगर हम बुनियादी शरीरिक समवेदनाओं की बात करें, तो जब शुरुवात में पेनेट्रेशन होता है, तो पेल्विक टिशू, जो की
01:34काफी इलास्टिक या लचीले होते हैं, उनमें एक तरका खिचाओ महसूस होता है.
01:38इसके साथ ही अंदर एक फुलनेस या हलके दबाव की भावना होती है. अब यहां कैच क्या है? कैच यह
01:45है कि अगर शरीर पूरी तरह से तयार है और पर्याप लुब्रिकेशन मौजूद है, तो ये सारी समवेदनाओं बहुत ही
01:51स्मूद और आरामदायक लगती हैं. लेकिन
01:53अगर बिना किसी तयारी के यही प्रक्रिया की जाए, तो ये बहुत जादा दर्धनाक और असहज हो सकती है. आगे
02:00बढ़ते हैं दूसरे सेक्षन पे असली सुक का रहस्य क्या है और इस पर विज्ञान का क्या कहना है? यहां
02:06में एक बहुती सपष्ट बायलोजिकल तुलना
02:08समझनी पड़ेगी. एक तरफ है वजाईना, जो मुख्य रूप से एक प्रजनन अंग है, और सच कहूं तो जैविक रूप
02:13से इसमें समवेधन शीलता थोड़ी कम होती है. और दूसरी तरफ है क्लिटोरिस, जो एक बाहरी अंग है और वो
02:19एक्स्ट्रीम लेवल पर सेंसिट
02:21होता है. हमारे समाज में एक बहुत बड़ी गलत फहमी ये है कि सिर्फ पेनेट्रेशन से ही चरम सुख मिल
02:26जाता है, लेकिन विज्ञान हमें साफ बताता है कि महिलाओं में असली सुख का प्रात्मिक केंद्र वजाईना नहीं, बलकि क्लिटोरिस
02:32है. अब जरा इस नंबर प
02:51जो ये साबित करता है कि intimacy के दोरान केवल अंद्रूनी क्रिया ही काफी नहीं होती, बलकि इस बहारी हिस्से
02:56का उतेजित होना चरम सुख के लिए सबसे एहम कड़ी है. थोड़ा और तकनीकी रूप से समझें, तो क्लिटोरिस एक
03:02छोटा लगभग मतर के दाने के आकार का अं
03:26अब आते हैं तीसरे और मेरे हिसाब से सबसे गहरे पॉइंट पर, मानसिक और भावनात्मा connection का महत्व.
03:33Connection स्थापित करने के ना तीन मुख्य मनो विज्ञानिक स्थम्भ होते हैं, जिनके बिना सब कुछ अधूरा है. पहला कदम
03:39है ट्रस्ट या विश्वास बनाना. ये सबसे जरूरी शर्थ हैं. दूसरा कदम है सुरक्षा का हिसास. जब तक एक महिला
03:46उस माहोल में और उस इन
04:03जरूरी है. चलिए देखते हैं आपना चौथा सेक्षन. फोर प्ले का महत्वा. शारिरिक संबंध से पहले तैयारी आखिर क्यों जरूरी
04:11है? यहां हम दो अलग-अलग intimacy styles को compare कर रहे हैं. एक तरफ है quickies, यानि जल्दबाजी में
04:18सब निप्टा देना, जहां पूरा ध्यान स
04:31संतुष्टी दायक अंतरंगता, जहां लोग पूरा समय लेते हैं, पूरे शरीर को बाहर से भी स्टिमिलेट करते हैं, जिससे एक
04:37जबरदस संतुष्टी मिलती है. आसान शब्दों में कहें तो, जल्दबाजी intimacy का सबसे बड़ा दुश्मन है. अब क्योंकि हम बाहरी
04:45उते�
04:45जिना की बात कर रहे हैं, तो सिर्फ एक जगे फोकस मत कीजिए. शरीर में कई सारे की zones होते
04:50हैं, कानों के पीछे का हिस्सा, गर्दन का पिछला भाग, भीतरी जांगे, पैरों या बालों को सहलाना, और बेशक, क्लिटोरिस.
04:58हर इंसान अलग होता है और उसे अलग-लग तरह
05:13संचार और सही समय, एक स्वास रिष्टे का असली आधार. इस पूरे विशलेशन को हम कुछ सुनहरे नियमों में बांद
05:21सकते हैं, पहला रूल, फोर पले को कभी भी स्किप मत कीजिए, दूसरा, अपनी चाओं और कमफर्ट के बारे में
05:27खुल कर बात करें, बिना कम्मिनिक
05:41खरीरों को एक दूसरे के साथ एड़जस्ट होने के लिए पूरा समय दें, ये कोई रेस नहीं चल रही है,
05:45बलकि दो लोगों के बीच एक बहुत ही खुबसूरत पल है. तो इस पूरी चर्चा के बाद, एक सवाल जो
05:51मैं यहाँ छोड़ना चाहूंगा, वो ये है. जरा सो�
05:55कसिफ शारीरिक प्रदर्शन से हटा कर एक गहरे भावनात्मक जुडाव, विश्वास और प्यार पर शिफ्ट कर दिया जाए, तो वो
06:02किसी रिष्टे को किस हद तक बदल सकता है. कमाल की बात है न, विश्वास, सम्वान और एक दूसरे की
06:08जरूरतों को दिल से समझना ही, �
06:10असल में सुखी जीवन का आधार है. आज के इस विश्वेशन में हमारे साथ जुडने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.
06:15उमीद है कि इस से इस जटल विशे पर काफी स्पश्टता मिली होगी. सीखते रहें और अपना ज्यान बढ़ाते रहें.
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