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  • 5 months ago

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Transcript
00:00We think that life is a line of life.
00:03Everything is first to be taken.
00:05But today's case, we have a situation of a situation that we can't talk about.
00:10It's a film that doesn't have a train, a unjainous situation,
00:15and how it's a relationship to the whole life.
00:19It's a situation that we can't talk about.
00:20So, can we just talk about a train and a half a cycle of life?
00:25It's a situation that we can't talk about.
00:27It's a situation that we can't talk about.
00:28But today we are going to be the first part of the story of the story of the story of
00:44the story of the story of the story.
00:58This is a new city in Mumbai.
01:01In some days, there was something like this.
01:03which was the two people's lives.
01:06Let's go to the house.
01:08In December's house,
01:10and the Patna Junction,
01:11the platform number one.
01:13In the red shawl,
01:14the name is Nana.
01:16Her name is very high,
01:19and without a confirm ticket,
01:21the eyes of Arv.
01:23It goes up to the station.
01:28The train is presently
01:30the two people around the house.
01:32When the house goes around the house,
01:35it goes up to 5 people.
01:40The train is still on the train.
01:42But two people are there.
01:43But the space in the house will be around it,
01:45but it goes up to the house.
01:45The car will always be around the house that
01:47shows up to the house.
01:51This is a little bit more than,
01:53आरफ के मन में एक अनकहीसी उम्मीद जगा दी.
01:55अब आते हैं कहानी के दूसरे और शायद सबसे एहम पड़ाओ पर आधा कम्बल और पूरी कहानी.
02:03देखते हैं कैसे ये सफर दोनों को और करीब लाता है.
02:06रात के ढाई बच चुके हैं और ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार में है.
02:11तभी नैना को भी उसकी सीट से उठने के लिए कह दिया जाता है.
02:15वो बिचारी ट्रेन के ठंडे दर्वाजे के पास आ जाती है, जहां आरव पहले से मौजूद है.
02:21हवा इतनी सर्द है के हड्या कमपा दे.
02:24ऐसे में जब वो दोनों एक ही कंबल का आधा दा हिस्ता साजा करते हैं,
02:28तो उन दो अजनबियों के बीच की बर्फ मानों पिघलने लगती है.
02:32लेकिन बात सिर्फ कंबल की नहीं थी.
02:34रात के उस सन्नाटे में कुछ लड़के नैना को घूरने लगते हैं.
02:38ये देखते ही आरव बिना एक पल गवाए उसके सम्मान के लिए उन लड़कों से भिड़ जाता है.
02:44नैना को शायद जिन्दगी में पहली बार इतनी गहरी सुरक्षा का एहसास होता है.
02:49उसका भरोसा आरव पर इतना पुखता हो जाता है कि वो बेफिक्र होकर अपना सिर उसके कंधे पर रखकर सो
02:56जाती है.
02:56और आरव पूरी राज जाग कर बस उसकी हिफाज़त करता है.
03:00इसके बाद आता है कहानी का दीसरा मोड मुंबई में टूटा दिल.
03:04सफर पूरा तो होता है लेकिन एक बहुत ही दर्दनाक सच्चाई सामने आने वाली है.
03:09मुंबई के स्टेशन पर उतरते ही नैना के दिल का वो भारी राज आखिरकार खुलता है.
03:14पता चलता है कि वो मुंबई किसी घूमने या काम के लिए नहीं, बलकि अपने उस पती की तलाश में
03:20आई थी, जो उसे बिना बताय छोड़ कर चला गया था.
03:23ये सच सुनकर आरफ का दिल तो तूड़ जाता है, लेकिन वो उस मुश्किल वक्त में भी नैना को अकेला
03:28नहीं छोड़ता.
03:29एक उम्मीद की करन अभी भी बाकी थी.
03:31यहां जिन्दगी के दो बिलकुल अलग चहरे सामने आते हैं.
03:34एक तरफ वो इंसान है, जिसे नैना अपना पती मानती थी, जिसने उसे अकेला छोड़ दिया और मुंबई में उसे
03:40पहचानने तक से मुकर गया.
03:42और दूसरी तरफ आरव है, जिसने एक अंजान सफर में उसकी इज़द के लिए लड़ाई लड़ी और सबसे बुरे वक्त
03:48में साय की तरह उसके साथ खड़ा रहा.
03:50नैना अब अपनी जिन्दगी के सबसे बड़े चोराहे पर घड़ी थी.
03:54और यहीं से शुरू होता है कहानी का चौथा हिस्सा, एक नई शुरुवात, एक ऐसा फैसला जो जिन्दगी को हमेशा
04:02के लिए बदलने वाला था.
04:03अगली सुभह का वो पल बहुत ही भावुक है.
04:07नैना खामोशी से धूप से भरे एक कमरे में चाय बना रही है.
04:10उस खामोशी में एक बहुत बड़ा सवाल गूँज रहा था.
04:14क्या एक टूटा हुआ इंसान इतने बड़े धोके के बाद फिर से किसी पर भरोसा कर सकता है?
04:19क्या फिर से प्यार करना मुम्किन है?
04:21तब ही आरव उस खामोशी को तोड़ते हुए एक ऐसा सवाल पूचता है जो किसी भी इंसान को अंदर तक
04:29जग जोड़ दे.
04:30अगर कोई तुम्हें तुम्हारे अतीत के साथ स्विकार करे, तो क्या तुम फिर से जीना चाहोगी?
04:35ध्यान दीजिये, ये सिर्फ तरस खाना नहीं था, बलकि पूरे हक और सच्चाई के साथ एक नहीं जिन्दगी शुरू करने
04:42का प्रस्ताव था.
04:43कमरे में एक गहरा सननाटा चा जाता है, नैना कुछ नहीं कहती, बस उसकी आँखों से राहत के आशु चलक
04:50पड़ते हैं, और वो अपनी आखे बंद कर लेती है, बिना कुछ कहे, उसने सब कुछ कह दिया था, उसी
04:57पल आरव अपने कामते हाथों से उसकी मांग में सिंदू
05:00बहर देता है, इतने लंबे दर्द और धोके के बाद, नैना को आखिरकार वो सुकून मिल गया, जिसकी उसे हमेशा
05:08से तलाश थी, अब हम इस कहानी के आखरी पड़ाओ पर हैं, जहां सफर मन्जिल से भी सादा खुबसूरत हो
05:15जाता है, अगर हम समय को थोड़ा आगे बढ
05:18और ठीक डेड़ साल बात देखें, तो आज आरव और नैना अपनी शादी शुदा जिन्दिगी में बेहद खुश हैं, वो
05:25एक प्यारी सी बच्ची की परवरिश कर रहे हैं, और आज भी डिसंबर की उस सर्द रात को याद करके
05:31उनके चहरों पर एक मुसकान आ जाती है, व
05:48भलकि वो इंसान होता है, जो रास्ते में अचानक मिल जाता है, सोचे किया हमारी असली नियती इस बात से
05:54तै होती है, कि हमारी ट्रेन कहां जा रही है, या फिर इस बात से कि उस सफर में हमारे
05:58साथ कौन खड़ा है, इसी खुबसूरक और सोचने पर मजबूर कर देने वाले
06:02Thank you very much.

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