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एक बेटे और बहू ने अपनी बूढ़ी मां को चलती ट्रेन से धक्का देकर नीचे गिरा दिया। सभी ने सोचा कि अब उनका बचना नामुमकिन है। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने इंसानियत पर फिर से भरोसा जगा दिया। एक अजनबी ने अपनी जान की परवाह किए बिना मदद का हाथ बढ़ाया और पूरी घटना ने सबको भावुक कर दिया।

क्या बेटे-बहू को अपने किए की सजा मिली? बूढ़ी मां के साथ आगे क्या हुआ? और किसने दिखाई सच्ची इंसानियत?

जानिए इस दिल दहला देने वाली और भावुक कर देने वाली कहानी में, जहां लालच, रिश्तों का धोखा और इंसानियत आमने-सामने खड़े हैं।

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Transcript
00:00Look, today we will talk about what the hell is going on in this case.
00:04This is a story of Savitri Devi.
00:07A story that has made humanity's life.
00:10This story has told us how the hell under the hill
00:14will be found in the way.
00:18Let's start the starting point.
00:20Now, when the human flesh becomes a woman,
00:26what God will save humanity?
00:28Say it for a moment.
00:30When you are those people that you are the servant of your own,
00:32you will find where the hope is?
00:37We will get this question on this question.
00:41We will get this question on the station.
00:43Our timeline is the one who came to a railway station.
00:47The sun and the sun, the rain, the rain, the bus,
00:51a heart-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves.
00:54Imagine your platform number 3.
00:56Dirgin.
00:56Eek kamsor si,
00:58Boodhi maa,
00:58Jinkai hath mein lakdi ki chadai hai.
01:00Woha badaari umid se in tazaar kar rahi hai.
01:03Unka naam Sabaitri Devi hai.
01:05Jib woa apne bäte,
01:06Rohit aur Bahu Pooja ko aate deekhati hai na,
01:09To unki aankho mein joh chmak aati hai.
01:11Unhye sach mein laga tha,
01:12Ki unka bäita unhene aapne sath shahir le jane aya hai.
01:16Lekin,
01:16Hakkikat kuch or hi thi.
01:18Kyunki ya haan eek baut bada,
01:20Chjipa hua maksad tha.
01:22Dekhe,
01:22this was a good idea of a thought.
01:25It was a pure,
01:26a thought-like plan.
01:29Ruhit had his mom's house
01:32that he was going to be able to buy a house.
01:33Why?
01:34Because he was going to go to a luxury lifestyle,
01:36a flat flat.
01:38And he was only going to be able to buy a house.
01:41Ultimately, he was going to be able to buy a house.
01:43He was going to be able to buy a house.
01:44He went to be able to buy a house.
01:45This is the way Ruhit was going to be able to buy a house.
01:48Train in the house.
01:49As you can see,
01:50this is called Train to be aART.
01:56As you can see in the house,
01:57the time line,
01:58that this is the biggest biggest fear.
02:02He was only saving himself.
02:05He was going to get away his daughter.
02:07Paid when he was the first place,
02:09he was still coming all day.
02:09When the train was going to buy the house from the village,
02:11then before the house was to leave.
02:12He was going to go to his house and his way.
02:15He was getting away from his house and that there,
02:16एक खौफनाक साजिश को अंजाम दिया गया
02:19ट्रेन के खुले दर्वाजे से
02:21उन्हें सीधा अंधेरे में धक्का दे दिया गया
02:24पूजा के वो शब्द थे
02:26अब खतम करो ये बोज
02:27सोचकर ही रॉंग्टे खड़े हो जाते हैं
02:30है ना, सावित्री देवी
02:31चीक तक नहीं पाई
02:32उनका कमजोर शरीर
02:34एक तेज रफ्तार त्रीन से सिधे बाहर
02:36कीचड और बारिश के बीच
02:38उस घने अंधेरे में जा गिरा
02:40और सबसे दर्दनाग बात
02:42उनका अपना सगा बेटा
02:44ये सब चुप-चाप देखता रहा
02:49अब जब उस घने जंगल और बारिश के अंधेरे में
02:53ऐसा लगा कि बस सब खतम हो गया
02:55तभी हमारी श्रोज सामगरी इंसानियत के एक सच्चे
02:59निस्वार्थ प्रतीक से हमें मिलवाती है
03:01यहां जो विरोधा भास है ना
03:03वो बिलकुल हैरान करने वाला है
03:04इन दो बेटों को देखिए
03:06एक तरफ वो अमीर सगा बेटा रोहित है
03:08जिसने पैसों के लालच में अपनी ही मा को मरने के लिए फैक दिया
03:11और दूसरी तरफ
03:12दूसी तरफ है रामू
03:14एक 35 साल का गरीब मजदूर
03:16जो बस अपनी नाइट शिफ्ट के बाद घर लोट रहा था
03:18इस बिलकुल अजनभी इंसान ने
03:20पट्रियों के किनारे खून से लटपत सावित्री देवी को देखा
03:23और बिना कुछ सोचे
03:24उस भयंकर तूफान और कीचर के बीच
03:26उन्हें अपनी पीठ पर उठा लिया
03:28जब बारिश में भीगते हुए
03:30सावित्री देवी को थोड़ा होश आया
03:32और उन्हें पूछा कि वो कौन है
03:34तो रामू का जवाब सुनिए
03:36मैं बेटा नहीं हूँ माजी
03:38लेकिन अगर आप चाहो तो बेटा बन सकता हूँ
03:56उन्हें एक सरकारी अस्पताल ले गया
03:58और वहाँ कमपाउंडर ने
04:00बिना पैसों के इलाज करने से
04:02साफ मना कर दिया
04:03तो रामू ने एक सेकंड भी नहीं सोचा
04:06उसने अपनी जेब से
04:07वो आखरी 200 रुपे निकाल कर
04:09इलाज के लिए दे दिये
04:10अब इस त्याग की गहराई को समझिये
04:13रामू ने सिर्फ पैसे नहीं दिये थे
04:15ये पैसे उसके घर के राशन के लिए थे
04:17घर पर उसकी पतनी सीता
04:19और आट साल की बेटी गुडिया
04:21उसका इंतिजार कर रही थी
04:22मतलब उस घरीब मजदूर ने
04:24एक बिलकुल अंजान इंसान की जान बचाने के लिए
04:26अपने ही परिवार का निवाला कुर्बान कर दिया
04:29और सच कहूं तो इसी निस्वार्थ त्याग की वज़ा से
04:32डॉक्टर ने सही समय पर इलाज शुरू किया
04:34और सावित्री देवी की जान बच गई
04:36ममता की बेजोड जीत
04:38इसके बाद कहानी हमें ले जाती है
04:40अस्पताल के उस तनावपूर्ण कमरे में
04:42जहां पुलिस, रोहित, पूजा और रामू
04:44सब आखिरकार आमने सामने होते हैं
04:47वहां का माहौल इमैजन कीजिए
04:49पुलिस रोहित और पूजा को पकड़ कर
05:06वित्री देवी से पूछती है कि सच बताईए
05:08आपको चलती ट्रेन से धकक किस ने दिया
05:11मेरा पैर फिसल गया था
05:13ये वो शब्द थे जिन्होंने पूरे कमरे में सन्नाटा ला दिया
05:17मरने के लिए छोड़ दिये जाने के बावजूद
05:19एक मा के बिना शर्थ प्यार को देखिए
05:21उसने अपने बच्चे को जेल जाने से बचाने के लिए
05:24पुलिस से साफ जूट बोल दिया
05:26कि उसका पैर फिसल गया था
05:27रामू ये देखकर पूरी तरहा तूट गया था
05:30उसने गुस्से में पूछा कि आप उन लोगों को क्यों बचा रही है
05:33जिनोंने आपको मारने की कोशिश की
05:35तो सावित्री देवी का जवाब था
05:37मा अपने बच्चे को सजा नहीं दे सकती
05:40ये जवाब
05:41ये सच में एक मा की शमा की उस गहराई को दिखाता है
05:44जिसे मापना शायद हम इनसानों के बस में है ही नहीं
05:47कर्मू की सजा
05:48देखिए
05:50भले ही एक मा अपने बच्चे को माफ कर दे
05:52लेकिन हमारी श्रोट सामगरी
05:54ये बहुत स्पष्ट करती है
05:56कि ब्रह्मांड वो अपने नियम खुद तै करता है
05:59रोहित और पूजा का पतन देखिए
06:01पुलिस की जांच और मीडिया में
06:03खबर फैलने से रोहित को तुरंथ
06:05उसकी कॉपरेट जॉब से सस्पेंड कर दिया गया
06:08जिस कंपनी में उसने
06:09घर बेच कर पैसे लगाय थे
06:11वो रात और रात ढूब गई
06:12सारे पैसे बरबाद
06:14और तो और पूजा के अपने परिवार
06:17ने भी उसकी स्कुरूरता को देख कर
06:18उससे सारे रिष्टे तोड लिये
06:20मतलब वो दोनों बिना पैसे
06:22बिना किसी सम्मान और बिना
06:24सुकून के सड़क पर आ गए
06:25कर्म सच में कानून से
06:28स्वतंत्र होकर काम करता है
06:29और यहां होती है एक नई शुरूवात
06:32अपने सगे बेटे के उस
06:34भयंकर लालज के बिलकुल विपरीद
06:36सावित्री देवी को एक गरीब
06:38मजदूर के छोटे से घर में पना मिली
06:40रामू उन्हें अपने साथ ले गया
06:42और जब रामू की छोटी बेटी गुडिया
06:44ने उन्हें एक फूल ला कर दिया ना
06:46तो उनके चहरे पर असली खुशी लोटाई
06:48उन्हें वो दौलत मिल गई
06:50जो किसी बड़े फ्लाट में नहीं थी
06:52तो इस विशलेशन के अंत में
06:54ये सवाल आपके लिए है
06:56क्या खून के रिष्टे सच में सबसे मजबूत होते हैं
06:59या इंसानियत के वो बंधन ज्यादा गहरे होते हैं
07:02जो बिना किसी स्वार्थ के बनते हैं
07:04ये कहानी परिवार और वफादारी की
07:06हर धारणा को चिनौती देती है
07:08इस बारे में जरूर सोचेगा
07:09हमारे इस विशलेशन से जुड़ने के लिए
07:11बहुत-बहुत धन्यवाद ऐसे ही गहराई से सोचते रहें
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