00:00Look, today we will talk about what the hell is going on in this case.
00:04This is a story of Savitri Devi.
00:07A story that has made humanity's life.
00:10This story has told us how the hell under the hill
00:14will be found in the way.
00:18Let's start the starting point.
00:20Now, when the human flesh becomes a woman,
00:26what God will save humanity?
00:28Say it for a moment.
00:30When you are those people that you are the servant of your own,
00:32you will find where the hope is?
00:37We will get this question on this question.
00:41We will get this question on the station.
00:43Our timeline is the one who came to a railway station.
00:47The sun and the sun, the rain, the rain, the bus,
00:51a heart-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves-waves.
00:54Imagine your platform number 3.
00:56Dirgin.
00:56Eek kamsor si,
00:58Boodhi maa,
00:58Jinkai hath mein lakdi ki chadai hai.
01:00Woha badaari umid se in tazaar kar rahi hai.
01:03Unka naam Sabaitri Devi hai.
01:05Jib woa apne bäte,
01:06Rohit aur Bahu Pooja ko aate deekhati hai na,
01:09To unki aankho mein joh chmak aati hai.
01:11Unhye sach mein laga tha,
01:12Ki unka bäita unhene aapne sath shahir le jane aya hai.
01:16Lekin,
01:16Hakkikat kuch or hi thi.
01:18Kyunki ya haan eek baut bada,
01:20Chjipa hua maksad tha.
01:22Dekhe,
01:22this was a good idea of a thought.
01:25It was a pure,
01:26a thought-like plan.
01:29Ruhit had his mom's house
01:32that he was going to be able to buy a house.
01:33Why?
01:34Because he was going to go to a luxury lifestyle,
01:36a flat flat.
01:38And he was only going to be able to buy a house.
01:41Ultimately, he was going to be able to buy a house.
01:43He was going to be able to buy a house.
01:44He went to be able to buy a house.
01:45This is the way Ruhit was going to be able to buy a house.
01:48Train in the house.
01:49As you can see,
01:50this is called Train to be aART.
01:56As you can see in the house,
01:57the time line,
01:58that this is the biggest biggest fear.
02:02He was only saving himself.
02:05He was going to get away his daughter.
02:07Paid when he was the first place,
02:09he was still coming all day.
02:09When the train was going to buy the house from the village,
02:11then before the house was to leave.
02:12He was going to go to his house and his way.
02:15He was getting away from his house and that there,
02:16एक खौफनाक साजिश को अंजाम दिया गया
02:19ट्रेन के खुले दर्वाजे से
02:21उन्हें सीधा अंधेरे में धक्का दे दिया गया
02:24पूजा के वो शब्द थे
02:26अब खतम करो ये बोज
02:27सोचकर ही रॉंग्टे खड़े हो जाते हैं
02:30है ना, सावित्री देवी
02:31चीक तक नहीं पाई
02:32उनका कमजोर शरीर
02:34एक तेज रफ्तार त्रीन से सिधे बाहर
02:36कीचड और बारिश के बीच
02:38उस घने अंधेरे में जा गिरा
02:40और सबसे दर्दनाग बात
02:42उनका अपना सगा बेटा
02:44ये सब चुप-चाप देखता रहा
02:49अब जब उस घने जंगल और बारिश के अंधेरे में
02:53ऐसा लगा कि बस सब खतम हो गया
02:55तभी हमारी श्रोज सामगरी इंसानियत के एक सच्चे
02:59निस्वार्थ प्रतीक से हमें मिलवाती है
03:01यहां जो विरोधा भास है ना
03:03वो बिलकुल हैरान करने वाला है
03:04इन दो बेटों को देखिए
03:06एक तरफ वो अमीर सगा बेटा रोहित है
03:08जिसने पैसों के लालच में अपनी ही मा को मरने के लिए फैक दिया
03:11और दूसरी तरफ
03:12दूसी तरफ है रामू
03:14एक 35 साल का गरीब मजदूर
03:16जो बस अपनी नाइट शिफ्ट के बाद घर लोट रहा था
03:18इस बिलकुल अजनभी इंसान ने
03:20पट्रियों के किनारे खून से लटपत सावित्री देवी को देखा
03:23और बिना कुछ सोचे
03:24उस भयंकर तूफान और कीचर के बीच
03:26उन्हें अपनी पीठ पर उठा लिया
03:28जब बारिश में भीगते हुए
03:30सावित्री देवी को थोड़ा होश आया
03:32और उन्हें पूछा कि वो कौन है
03:34तो रामू का जवाब सुनिए
03:36मैं बेटा नहीं हूँ माजी
03:38लेकिन अगर आप चाहो तो बेटा बन सकता हूँ
03:56उन्हें एक सरकारी अस्पताल ले गया
03:58और वहाँ कमपाउंडर ने
04:00बिना पैसों के इलाज करने से
04:02साफ मना कर दिया
04:03तो रामू ने एक सेकंड भी नहीं सोचा
04:06उसने अपनी जेब से
04:07वो आखरी 200 रुपे निकाल कर
04:09इलाज के लिए दे दिये
04:10अब इस त्याग की गहराई को समझिये
04:13रामू ने सिर्फ पैसे नहीं दिये थे
04:15ये पैसे उसके घर के राशन के लिए थे
04:17घर पर उसकी पतनी सीता
04:19और आट साल की बेटी गुडिया
04:21उसका इंतिजार कर रही थी
04:22मतलब उस घरीब मजदूर ने
04:24एक बिलकुल अंजान इंसान की जान बचाने के लिए
04:26अपने ही परिवार का निवाला कुर्बान कर दिया
04:29और सच कहूं तो इसी निस्वार्थ त्याग की वज़ा से
04:32डॉक्टर ने सही समय पर इलाज शुरू किया
04:34और सावित्री देवी की जान बच गई
04:36ममता की बेजोड जीत
04:38इसके बाद कहानी हमें ले जाती है
04:40अस्पताल के उस तनावपूर्ण कमरे में
04:42जहां पुलिस, रोहित, पूजा और रामू
04:44सब आखिरकार आमने सामने होते हैं
04:47वहां का माहौल इमैजन कीजिए
04:49पुलिस रोहित और पूजा को पकड़ कर
05:06वित्री देवी से पूछती है कि सच बताईए
05:08आपको चलती ट्रेन से धकक किस ने दिया
05:11मेरा पैर फिसल गया था
05:13ये वो शब्द थे जिन्होंने पूरे कमरे में सन्नाटा ला दिया
05:17मरने के लिए छोड़ दिये जाने के बावजूद
05:19एक मा के बिना शर्थ प्यार को देखिए
05:21उसने अपने बच्चे को जेल जाने से बचाने के लिए
05:24पुलिस से साफ जूट बोल दिया
05:26कि उसका पैर फिसल गया था
05:27रामू ये देखकर पूरी तरहा तूट गया था
05:30उसने गुस्से में पूछा कि आप उन लोगों को क्यों बचा रही है
05:33जिनोंने आपको मारने की कोशिश की
05:35तो सावित्री देवी का जवाब था
05:37मा अपने बच्चे को सजा नहीं दे सकती
05:40ये जवाब
05:41ये सच में एक मा की शमा की उस गहराई को दिखाता है
05:44जिसे मापना शायद हम इनसानों के बस में है ही नहीं
05:47कर्मू की सजा
05:48देखिए
05:50भले ही एक मा अपने बच्चे को माफ कर दे
05:52लेकिन हमारी श्रोट सामगरी
05:54ये बहुत स्पष्ट करती है
05:56कि ब्रह्मांड वो अपने नियम खुद तै करता है
05:59रोहित और पूजा का पतन देखिए
06:01पुलिस की जांच और मीडिया में
06:03खबर फैलने से रोहित को तुरंथ
06:05उसकी कॉपरेट जॉब से सस्पेंड कर दिया गया
06:08जिस कंपनी में उसने
06:09घर बेच कर पैसे लगाय थे
06:11वो रात और रात ढूब गई
06:12सारे पैसे बरबाद
06:14और तो और पूजा के अपने परिवार
06:17ने भी उसकी स्कुरूरता को देख कर
06:18उससे सारे रिष्टे तोड लिये
06:20मतलब वो दोनों बिना पैसे
06:22बिना किसी सम्मान और बिना
06:24सुकून के सड़क पर आ गए
06:25कर्म सच में कानून से
06:28स्वतंत्र होकर काम करता है
06:29और यहां होती है एक नई शुरूवात
06:32अपने सगे बेटे के उस
06:34भयंकर लालज के बिलकुल विपरीद
06:36सावित्री देवी को एक गरीब
06:38मजदूर के छोटे से घर में पना मिली
06:40रामू उन्हें अपने साथ ले गया
06:42और जब रामू की छोटी बेटी गुडिया
06:44ने उन्हें एक फूल ला कर दिया ना
06:46तो उनके चहरे पर असली खुशी लोटाई
06:48उन्हें वो दौलत मिल गई
06:50जो किसी बड़े फ्लाट में नहीं थी
06:52तो इस विशलेशन के अंत में
06:54ये सवाल आपके लिए है
06:56क्या खून के रिष्टे सच में सबसे मजबूत होते हैं
06:59या इंसानियत के वो बंधन ज्यादा गहरे होते हैं
07:02जो बिना किसी स्वार्थ के बनते हैं
07:04ये कहानी परिवार और वफादारी की
07:06हर धारणा को चिनौती देती है
07:08इस बारे में जरूर सोचेगा
07:09हमारे इस विशलेशन से जुड़ने के लिए
07:11बहुत-बहुत धन्यवाद ऐसे ही गहराई से सोचते रहें
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