00:00आपने अक्सिर कंपनियों पर गड़बडी के आरोप लगने की खबर सुनी होगी लेकिन आज हम जिस मामले की इस वीडियो
00:06में बात करने जा रहे हैं उससे हाल के सालों का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट विवाद कहा जा रहा है
00:11नाम है राजेश एक्सपोर्ट्स
00:13गोल्ड जुएलरी और गोल्ड रिफाइनिंग के कारुबार से जुड़ी इस कंपनी पर सेबी ने जून दो हजार चबबस में एक
00:20सो नौ पन्नों का ऐसा आदेश शारी किया जिसमें पूरे बाजार को हिला कर रख दिया
00:25आरोप है कि कंपनी ने करीब 15,15,000 करूट रुपए का रेवेन्यू गलत तरीके से दिखाया
00:33मामला इतना बड़ा है कि निवेशकों से लेकर रेगुलेटर्स तक हर कोई इस पर नजर बनाये हुए
00:38बैंगलोरो स्थित राजेश एक्सपोर्ट्स भारत की एक बेहधी प्रमूग गोल्ड कंपनियों में गिनी चाती
00:44साल 2015 में कंपनी ने स्विच्जलान की मशूर गोल्ड रिफाइनरी वैलकेम भी से को करीब 400 मिलियन डॉलर में खरीदा
00:52था
00:53और इसी डील के बात कंपनी ने खुद को एक बड़े ग्लोबल प्लेयर यानि एक वैश्वे खिलाडी के तौर पर
00:58पेश करना शुरू किया
00:59कंपनी के consolidated revenue के आंकडे इतने बड़े दिखाई देने लगे कि ये देश की सबसे जादा बिक्री दिखाने वाली
01:06कंपियों में शामिल हो गई
01:08निवेशकों को लगने लगा कि विदेशी सबसेडेरीज के जरिये कंपनी का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है
01:13लेकिन कहानी में मोर तब आया जब मार्श दोजार चौबिस में एक शिरधारक ने शिकायत दज कराई
01:19शिकायत में कहा गया कि कंपनी के balance sheet में भारी भरकम trade receivables दिखाय जा रहे है
01:25लेकिन उनकी वसूली नहीं हो रही
01:27इसके बाद सेवी ने जाच शुरू की और forensic audit के लिए बीडियो इंडिया को नियुक्त किया गया
01:32जाच आगे बड़ी तो कई चौकाने वाले दावे सामने आ गए
01:36सेवी का सबसे बड़ा आरोप है कि वित्वश 2021 से 2025 के बीच कंपनी ने लगभग 15,15,000 करूर
01:45रुपे का revenue गलत तरीके से पेश किया
01:47जाच एजिंसी के मुताबिक ये रकम कंपनी के सबसिडेरीज के कुल revenue का करीब 99.8% नियन्यानबे दिश्रमलवाट फीसिदी
01:56consolidated revenue का लगभग पूरा हिस्सा थी यानि सेवी का दावा है कि जो विशाल कारोबार दिखाया जा रहा था
02:04उसका बड़ा हिस्सा असलियत से वास्तविक्ता से मेल नहीं खाता
02:08सेवी के अनुसार कंपती ने खास तोर पर वैलकैमबी ऐसे के नाम पर बड़े बड़े revenue आकड़े consolidated accounts में
02:15जोड़े हैं लेकिन जब स्विजल लांड में KPMG द्वारा audit किये गए वैलकैमबी के असली वितिये documents की जाच हुई
02:23तो वहाँ revenue का स्तर काफी छोटा दिखाई दिया
02:26पांच सालों में कुल आखड़ा कुल हजार करूर रुपे के आसपास था यही से सवाल खड़े हुए कि आखिर भारत
02:34में दिखाये जा रहे लाखों करूर रुपे के कारोबार का आधार था क्या
02:38कंप्टी का कहना है कि वैलकाम भी अपने accounts में केवल refining charges दिखाती है जबकि राजेश exports पूरे सोने
02:46की value को revenue के रूप में दर्च करती है
02:50हाला कि सेबी को ये दलील संतोजनक लग नहीं रही है वो से साटस्वाय नहीं है और जाच के दौरान
02:56काई जरूरी documents भी available नहीं कराएगा ऐसा सेबी का कहना है
03:00यहीं पर मामला खत्म नहीं होता है इस पूरी जाच में कथित तोर पर संबंधित पक्षों के साथ हुए कुछ
03:07लेंदेन पर भी सवाल उठे है
03:08एक संसा ने तो ये तक क्या दिया है कि जिन transactions का record में जिक्र किया गया है वो
03:14असलियत में हुए ही नहीं
03:15इसके अलावा करीब 349 करोड रुपे प्रमोटर राजेश मैता के personal accounts में भेज़ा जाने का भी आरोग है
03:22जाच में कहा गया कि इन पैसों का एक हिस्सा personal derivative trading में इस्तमाल हुआ है जबकि पूरी रकम
03:30वापस नहीं आई है
03:32अब सेबी ने ये भी कहा है कि जाच के दोरान company और उससे जोड़ी units ने परियाप सहयोग भी
03:38नहीं किया है
03:38जरूरी documents, subsidies और financial records और साथी साथ supporting entries समय पर available नहीं कराई गई
03:46Swiss privacy कानून का हवाला भी दिया गया लेकिन सेबी ने इस तर्प को सुईकार नहीं किया
03:51आदेश में इस पूरे मामले को बेहद गंभीर और बेहदी असाधारिंट बताया गया है
03:563 जून 2026 को सेबी ने अंतरे मादेश जारी करते हुए प्रमोटर राजेश मैता को फिलहाल company के shareों में
04:03खरीद या बिक्री करने से रोग दिया है
04:21आदेश के बाद शेयर में तुरन दबाव भी दिखना शुरू हो गया और श्रॉक लोवर सरकेट तक पहुंच गया
04:27इसका असाध चोटे निवेशकों से लेकर बड़े इंस्टिउशनल इंवेस्टर्स तक पढ़ता हुआ दिखाई दिया है
04:32दूसरी दरफ राजेश एक्सपोर्ट्स ने सभी आरोपों को खारिच कर दिया है
04:36कंपनी का कहना है कि उसने जो रेवेन्यू घोशत की थी वो पूरी तरीके से सही है
04:41और कहीं कोई ओवर स्टेटमेंट नहीं हुआ
04:43कंपनी के मताबिक ये पूरा मामला कम्यूनिकेशन में कमी यानि लाक ओफ कम्यूनिकेशन और अकाउंटिंग के अलग-अलग डिस्क्रिप्शन का
04:52नतीजा है
04:52कंपनी ने वरोसर जताया कि सभी डॉक्यूमेंट्स जमा होने के बाद पूरी सिच्वेशन साफ हो जाएगी
05:13जाते हैं इन्वेस्टिकेशन रिपोर्ट में तो भारी जुर्माना बाजार से प्रतिबंध निदेश को पर कारवाई और यहां तक की
05:35ट्रांस्परेंसी और कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर बड़ी बहस को भी जन दे सकता है
05:39सच क्या है इसका फाइनल डिसिजन अभी आना बाकी है लेकिन इतना जरूर है कि इस पूरविवाद ने
05:45निवेश को को एक बार फिर याद दिला दिया कि किसी भी कंपनी में निवेश करते समय केवल बड़े रेविन्यू
05:51के आंक्रे नहीं बलकि उनके पीछे की असलियत को समझना भी उतना ही जरूरी होता है
05:57इस पूरे मामले पर आपकी क्या कुछ राय है हमें कॉमेंट सेक्शन में जरूर बताएगा
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