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SEBI vs Rajesh Exports: ₹15.15 Lakh Crore Scam, Rajesh Exports, SEBI Action, India Biggest Corporate Fraud
Is Rajesh Exports at the center of one of the biggest corporate controversies in Indian market history?
SEBI's 109-page interim order has sent shockwaves through the stock market, alleging that Rajesh Exports may have misrepresented nearly ₹15.15 lakh crore in revenue over multiple years. The case involves its Swiss subsidiary Valcambi SA, questions over reported revenues, alleged fund diversion, related-party transactions, and concerns raised during a forensic investigation.

In this video, we break down the entire Rajesh Exports-SEBI case in simple terms:
✔️ What triggered the investigation?
✔️ Why is SEBI questioning the company's reported revenue?
✔️ What role does Valcambi SA play?
✔️ What are the allegations regarding fund diversion?
✔️ How has Rajesh Exports responded?
✔️ What could happen next for investors and the company?

This case has become one of the most closely watched corporate governance stories in India and could have significant implications for investors, regulators, and listed companies.

Disclaimer: SEBI's order is interim in nature and the investigation is ongoing. Rajesh Exports has denied all allegations. Final conclusions will depend on the outcome of the investigation and any future regulatory proceedings.

क्या Rajesh Exports ने अपने रेवेन्यू को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया? क्या ₹15.15 लाख करोड़ के कथित Revenue Misrepresentation का मामला भारत के सबसे बड़े Corporate Controversies में से एक बन सकता है? SEBI के 109 पन्नों के अंतरिम आदेश ने पूरे शेयर बाजार को हिला दिया है। इस वीडियो में हम समझेंगे Rajesh Exports Case, Valcambi SA की भूमिका, Revenue Fraud के आरोप, Fund Diversion, Related Party Transactions, Promoter Rajesh Mehta पर कार्रवाई और कंपनी का पक्ष।
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Transcript
00:00आपने अक्सिर कंपनियों पर गड़बडी के आरोप लगने की खबर सुनी होगी लेकिन आज हम जिस मामले की इस वीडियो
00:06में बात करने जा रहे हैं उससे हाल के सालों का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट विवाद कहा जा रहा है
00:11नाम है राजेश एक्सपोर्ट्स
00:13गोल्ड जुएलरी और गोल्ड रिफाइनिंग के कारुबार से जुड़ी इस कंपनी पर सेबी ने जून दो हजार चबबस में एक
00:20सो नौ पन्नों का ऐसा आदेश शारी किया जिसमें पूरे बाजार को हिला कर रख दिया
00:25आरोप है कि कंपनी ने करीब 15,15,000 करूट रुपए का रेवेन्यू गलत तरीके से दिखाया
00:33मामला इतना बड़ा है कि निवेशकों से लेकर रेगुलेटर्स तक हर कोई इस पर नजर बनाये हुए
00:38बैंगलोरो स्थित राजेश एक्सपोर्ट्स भारत की एक बेहधी प्रमूग गोल्ड कंपनियों में गिनी चाती
00:44साल 2015 में कंपनी ने स्विच्जलान की मशूर गोल्ड रिफाइनरी वैलकेम भी से को करीब 400 मिलियन डॉलर में खरीदा
00:52था
00:53और इसी डील के बात कंपनी ने खुद को एक बड़े ग्लोबल प्लेयर यानि एक वैश्वे खिलाडी के तौर पर
00:58पेश करना शुरू किया
00:59कंपनी के consolidated revenue के आंकडे इतने बड़े दिखाई देने लगे कि ये देश की सबसे जादा बिक्री दिखाने वाली
01:06कंपियों में शामिल हो गई
01:08निवेशकों को लगने लगा कि विदेशी सबसेडेरीज के जरिये कंपनी का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है
01:13लेकिन कहानी में मोर तब आया जब मार्श दोजार चौबिस में एक शिरधारक ने शिकायत दज कराई
01:19शिकायत में कहा गया कि कंपनी के balance sheet में भारी भरकम trade receivables दिखाय जा रहे है
01:25लेकिन उनकी वसूली नहीं हो रही
01:27इसके बाद सेवी ने जाच शुरू की और forensic audit के लिए बीडियो इंडिया को नियुक्त किया गया
01:32जाच आगे बड़ी तो कई चौकाने वाले दावे सामने आ गए
01:36सेवी का सबसे बड़ा आरोप है कि वित्वश 2021 से 2025 के बीच कंपनी ने लगभग 15,15,000 करूर
01:45रुपे का revenue गलत तरीके से पेश किया
01:47जाच एजिंसी के मुताबिक ये रकम कंपनी के सबसिडेरीज के कुल revenue का करीब 99.8% नियन्यानबे दिश्रमलवाट फीसिदी
01:56consolidated revenue का लगभग पूरा हिस्सा थी यानि सेवी का दावा है कि जो विशाल कारोबार दिखाया जा रहा था
02:04उसका बड़ा हिस्सा असलियत से वास्तविक्ता से मेल नहीं खाता
02:08सेवी के अनुसार कंपती ने खास तोर पर वैलकैमबी ऐसे के नाम पर बड़े बड़े revenue आकड़े consolidated accounts में
02:15जोड़े हैं लेकिन जब स्विजल लांड में KPMG द्वारा audit किये गए वैलकैमबी के असली वितिये documents की जाच हुई
02:23तो वहाँ revenue का स्तर काफी छोटा दिखाई दिया
02:26पांच सालों में कुल आखड़ा कुल हजार करूर रुपे के आसपास था यही से सवाल खड़े हुए कि आखिर भारत
02:34में दिखाये जा रहे लाखों करूर रुपे के कारोबार का आधार था क्या
02:38कंप्टी का कहना है कि वैलकाम भी अपने accounts में केवल refining charges दिखाती है जबकि राजेश exports पूरे सोने
02:46की value को revenue के रूप में दर्च करती है
02:50हाला कि सेबी को ये दलील संतोजनक लग नहीं रही है वो से साटस्वाय नहीं है और जाच के दौरान
02:56काई जरूरी documents भी available नहीं कराएगा ऐसा सेबी का कहना है
03:00यहीं पर मामला खत्म नहीं होता है इस पूरी जाच में कथित तोर पर संबंधित पक्षों के साथ हुए कुछ
03:07लेंदेन पर भी सवाल उठे है
03:08एक संसा ने तो ये तक क्या दिया है कि जिन transactions का record में जिक्र किया गया है वो
03:14असलियत में हुए ही नहीं
03:15इसके अलावा करीब 349 करोड रुपे प्रमोटर राजेश मैता के personal accounts में भेज़ा जाने का भी आरोग है
03:22जाच में कहा गया कि इन पैसों का एक हिस्सा personal derivative trading में इस्तमाल हुआ है जबकि पूरी रकम
03:30वापस नहीं आई है
03:32अब सेबी ने ये भी कहा है कि जाच के दोरान company और उससे जोड़ी units ने परियाप सहयोग भी
03:38नहीं किया है
03:38जरूरी documents, subsidies और financial records और साथी साथ supporting entries समय पर available नहीं कराई गई
03:46Swiss privacy कानून का हवाला भी दिया गया लेकिन सेबी ने इस तर्प को सुईकार नहीं किया
03:51आदेश में इस पूरे मामले को बेहद गंभीर और बेहदी असाधारिंट बताया गया है
03:563 जून 2026 को सेबी ने अंतरे मादेश जारी करते हुए प्रमोटर राजेश मैता को फिलहाल company के shareों में
04:03खरीद या बिक्री करने से रोग दिया है
04:21आदेश के बाद शेयर में तुरन दबाव भी दिखना शुरू हो गया और श्रॉक लोवर सरकेट तक पहुंच गया
04:27इसका असाध चोटे निवेशकों से लेकर बड़े इंस्टिउशनल इंवेस्टर्स तक पढ़ता हुआ दिखाई दिया है
04:32दूसरी दरफ राजेश एक्सपोर्ट्स ने सभी आरोपों को खारिच कर दिया है
04:36कंपनी का कहना है कि उसने जो रेवेन्यू घोशत की थी वो पूरी तरीके से सही है
04:41और कहीं कोई ओवर स्टेटमेंट नहीं हुआ
04:43कंपनी के मताबिक ये पूरा मामला कम्यूनिकेशन में कमी यानि लाक ओफ कम्यूनिकेशन और अकाउंटिंग के अलग-अलग डिस्क्रिप्शन का
04:52नतीजा है
04:52कंपनी ने वरोसर जताया कि सभी डॉक्यूमेंट्स जमा होने के बाद पूरी सिच्वेशन साफ हो जाएगी
05:13जाते हैं इन्वेस्टिकेशन रिपोर्ट में तो भारी जुर्माना बाजार से प्रतिबंध निदेश को पर कारवाई और यहां तक की
05:35ट्रांस्परेंसी और कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर बड़ी बहस को भी जन दे सकता है
05:39सच क्या है इसका फाइनल डिसिजन अभी आना बाकी है लेकिन इतना जरूर है कि इस पूरविवाद ने
05:45निवेश को को एक बार फिर याद दिला दिया कि किसी भी कंपनी में निवेश करते समय केवल बड़े रेविन्यू
05:51के आंक्रे नहीं बलकि उनके पीछे की असलियत को समझना भी उतना ही जरूरी होता है
05:57इस पूरे मामले पर आपकी क्या कुछ राय है हमें कॉमेंट सेक्शन में जरूर बताएगा
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