Skip to playerSkip to main content
As thousands of Afghan families return to their homeland, they are taking more than memories with them—they are carrying the rich flavors of Pakistan’s famous biryani. This unique cultural journey highlights how food connects people beyond borders and how Pakistani cuisine has become a cherished part of Afghan life.

Watch this inspiring story about migration, culture, tradition, and the enduring love for biryani that continues to unite communities across Pakistan and Afghanistan.

🔔 Subscribe to Apna TV New York for more international stories, cultural features, community news, and exclusive reports.

#Afghanistan #Pakistan #Biryani #AfghanRefugees #FoodCulture #ApnaTVNewYork

Pakistan biryani, Afghan returnees, Afghanistan Pakistan relations, Pakistani food culture, biryani story,

Afghan refugees news, cultural connection Pakistan Afghanistan, South Asian cuisine, Pakistani cuisine,

Afghan families returning home, food and migration, traditional biryani, international news, cultural heritage,
Apna TV New York

Afghans Return Home, Pakistan Biryani, Afghan Refugees, Pakistan News, Afghanistan News, Food Culture,

Pakistani Cuisine, Biryani Lovers, South Asia News, Cultural Exchange, International News, Migration Stories,
Afghan Community, Apna TV New York, Trending News

#AfghansReturnHome #PakistanBiryani #Afghanistan #Pakistan #Biryani #FoodCulture #AfghanRefugees #SouthAsia #PakistaniCuisine #CulturalExchange #InternationalNews #TrendingNews #ApnaTVNewYork #FoodStories #BorderlessCulture

Category

😹
Fun
Transcript
00:00इस मालुमाती निशस्त में खुश्शामदीद आज के इस तफसीली जाइजे में हमें एक बड़ी ही दिल्चस्प कहानी पर बात करने
00:06वाले हैं।
00:07क्या आपने कभी सोचा है कि हिजरत और पेचीदा सियासी तारीख कैसे हमारे दस्तर खानों को हमेशा के लिए बड़ल
00:13कर रख देती हैं।
00:37क्यासी बिसात को समझेंगे, महाजरीन की शिनाखत के बहरान पर नज़र डालेंगे और आखिर में देखेंगे इस शांदार पाक फन
00:43की मीरास को।
00:45तो आएए, पहले हिस्से से शुरुआत करते हैं।
00:48साए में छुपी एक सकाफ़त।
00:51आखिर एक इतने शांदार विर्से को आलमी सता पर पहचान क्यों नहीं मिल सकी।
00:56देखिए, ये बात वाकई हैरान कर देने वाली है।
01:00पाकिस्तान जोगराफियाई तोर पर अफगानिस्तान, चीन, इंडिया और इरान के बिलकुल बीच में है।
01:07फिर भी इसका अपना वो जो एक मुनफरिद जाइका है ना, उसे आलमी नक्षे पर ढूंडना काफी मुश्किल है।
01:13लगभग 90 लाख पाकिस्तानी इस वक्त दुनिया भर में पहले हुए हैं।
01:17लेकिन इसके बावजूद अक्सर पाकिस्तानी खानों को इंडियन खानों के साथ ही मिला दिया जाता है।
02:15और उनकी जगा वही जाने पचाने नाम ले लेते हैं।
02:17लेकिन रुकें इसमें जो आलू का इस्तमाल है ना वो आज भी हमारे हां एक बहुत बड़ी और गर्मा गरम
02:24बहस का मौजू है।
02:25सोशल मीडिया पर होने वाले इस बड़े पोल को ही देख लें। इसने हमारी इस तफरीही सकाफती बहस को बिलकुल
02:34परफेक्ट अंदाज में दिखाया है।
02:36नताइच देखिए मुकाबला कितना सक्था तकरीबन आधे लोग आलू वाली बिर्यानी के हक में हैं और बाकी आधे उसके बिलकुल
02:44खिलाफ। क्या आलू वाकई इस कौमी डिश का हिस्सा होना चाहिए। ये हमें बताता है कि हम अपने खानों को
02:51लेकर कितने जजबाती है
02:52अब जरा कहानी का रुख मोडते हैं उन सरहदों की तरफ जिन्होंने पिछले 40 सालों से इस खिते को शकल
03:01दी। तीसरा हिस्सा सरहदें और जोगराफियाई बिसात।
03:22अगर हम इन वाकियाद को तर्तीब से देखें तो 1989 से 2001 के दरम्यान ये तीन बड़े तनाजाद हुए। इन
03:32लगताल होने वाले तनाजाद ने यके बाद दीगरे लाखों अफगानों को अपना घर बार छोड़कर सरहद पार पाकिस्तान में पना
03:40लेने पर मजबूर कर दिय
03:42अब अगर हम एक मारूजी तारिख की रिकॉर्ड की बात करें तो ये वाज़ है कि सरजंग के दौरान पाकिस्तान
03:49के पॉलिसी साजों ने महाजरीन की इस आमद और मजबी धड़ों को सोवियत अफवाज के खिलाफ एक बकाइदा हिकमत अमली
03:56के तोर पर इस्तमाल किया।
04:13पाकिस्तान ने दुनिया की इतनी बड़ी महाजर अबादी को जिस कानून के तहत पना दी उससे प्राइमा फेसी कहते हैं।
04:42पाकिस्तान का जारी करदा ये शनाखती पास महाजरीन को मुलक के अंदर चलने फिरने और गहर रस्मी शुबों में काम
04:48करने की इजाज़त तो देता था लेकिन हैरत की बात ये है कि साथ ही इसने उन्हें एक अजीब सी
04:55मुस्तकिल कानूनी उलजन में भी फहसा कर रख दिय
04:57इस तकाबल से रोज मर्रा की हकीकत बिलकुल खुल कर सामने आ जाती है उनके पास कुछ आजादियां जरूर थी
05:05लेकिन बड़ी पाबंदियां भी थी वो जाइदाद नहीं खरीच सकते थे बाकाइदा कारोबार नहीं कर सकते थे यहां तक कि
05:11गाड़ियां भी उनके नाम न
05:27रहें 2014 तक 16 लाख से ज्यादा रिजिस्टर अफगान महाजरीन पाकिस्तान में थे और अगर उनको भी मिला लें जिनके
05:35पास काख़ात नहीं थे तो यह तादाद लगभग 10 लाख मजीद बढ़ जाती है इतनी बड़ी तादाद ने मिलकर मौशरे
05:42के अंदर अपना एक बह�
05:48इसको वापिस दस्तरखान की तरफ लाते हैं पांचमा और आखरी हिसा एक लाजवाल पाक फन की मिरास
05:54आज कल तोर्खम बॉर्डर पर दस लाख से जायद अफगानों को वापस भेजे जाने का दबाव है एक ऐसी जगा
06:03जहां की जिन्दगी शायद उनकी नई नसल जानती तक नहीं
06:07मुलक बदरी की ये पॉलिसियां वक्त के साथ बदलती रही हैं और बाज जुकात काफी सख्त भी रही हैं लेकिन
06:14एक बात तैह है इन दहायों ने पाकिस्तान पर सकाफ्ती और खानों के हवाले से जो मुस्तकिल नकूश छोड़े हैं
06:22वो कभी नहीं मिट सकते
06:23इस बात का सबसे बड़ा सबूत ये खाने हैं अफगान महाजरीन अपने साथ जो काबली पिलाव लाए आज वो पिशावर
06:30की हर शादी की जान है बुरानी बंजान की बात करें तो तले हुए बैंगन और दही की ये शांदार
06:36डिश अब हमारे रोजमर्रा के घरेलो खानों
06:52तो इस तफसीली जाइजे के इखतताम पर ये सवाल हमें सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर हिजरत और ये
07:01बड़े बड़े जोग्राफियाई तनाजवात हमारे इन खानों को कैसे तश्कील देते हैं जो आज हमारे दस्तरखानों की जीनत है
07:07स्यासी दबाव से सरहदे तुशाइद बदलती रहें, बंती बिगरती रहें, लेकिन हिजरत करने वाले लोग अपने साथ जो जाइके और
07:15रिवायाद लेकर आते हैं वो एक ऐसी मिरास छोड़ जाते हैं जो हमेशा हमेशा के लिए जिन्दा रहती है
07:21इस मालूमाती निशिस्त का हिस्सा बनने के लिए बहुत शुक्रिया
Comments

Recommended