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Transcript
00:00रामू गाउं का गरीब लड़का था, उसके पास बस एक पुरानी तूटी हुई चपल थी, एक शाम खेत से लोटते
00:06समय उसने देखा कि उसकी चपल खुद बखुद हवा में तैरने लगी, जैसे ही उसने पाउं डाला, चपल उससे आस्मान
00:12की ओर उडाने लगी, शुरू मे
00:27इनसान का दिल लालच से जल्दी भर जाता है, एक दिन रामू ने सोचा, अगर ये चपल उडाती है, तो
00:33क्यों न मैं सोने का महल ढूंग लूँ, वो आस्मान में बहुत दूर तक उड़ गया, और सचमुच उसे बादलों
00:38के पार एक सुनहरा महल दिखाए दिया, उसकी आ�
00:53जादूई परी प्रकट हुई और उसे थाम लिया, परी बोली, रामू ये चपल मासूं ख्वाइशों और नेक कामों के लिए
00:59थी, लालच के लिए नहीं, जब तुमने दूसरों को खुश किया, तब इसका जादू चला, लेकिन जब तुमने अपने लिए
01:06लालच किया, तो
01:23उसे बादलों के उपर उड़ते देखा जा सकता था
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