00:27।
00:37आपको अभी की खबर बता दी लेकिन सबसे पहले इसको डिगिन करने से पहले थोड़ा और डीप जाने से पहले
00:43टाटा ग्रूप का पूरा पावर स्रक्शर समझ लेते हैं।
01:0066% हिस्सदारी टाटा ट्रस के पास है।
01:30बितवश 2025 की बात करें तो टाटा संस की नेटवर्ट करीब 1.5 लाग क्रोर रूपीज थी और कुछ वाल्यूएशन
01:37इसे 70 बिलियन डॉलर यानि लगबग 6 लाग क्रोर रूपे से ज्यादा भी आख ते।
01:59शुरू होने वाले तीसरे कारिकाल का।
02:02जुलाई 2025 में टाटा ट्रस ने उनके समर्थन में सरसम्मत्री से प्रस्ता पास कर दिया था।
02:08लेकिन फरवरी 2026 की बोर्ड मीटिंग में नोईल टाटा ने कई सीधे और कठिन सवाल उठा दिये जिसके बाद री
02:15अपोइंट्मन का पैसला टाल दिया गया।
02:16फिर 26 माई 2026 को एक विशेश बैठक हुई लेकिन वहाँ भी कोई अंतिम निर्णने नहीं निकल पाया।
02:22नोईल टाटा का कहना था कि जिन मुद्दों पर सवाल उठाए गए उनका समाथान अभी पूरी तरह नहीं हुआ इसलिए
02:28अभी पैसला लेना जल्दबाजी होगी।
02:29अब सबकी नज़र 12 जून की बोर्ड बैठक पर हैं जहां सालाना अकाउंट्स के साथ इस मुद्दे पर फिर से
02:35चर्चा हो सकती है।
02:36लेकिन असली सवाल यहां पर खड़ा है कि आखिर विवात की जड़ क्या है।
02:40क्यों रतन टाटा के जाने के बाद से रतन टाटा के निधन के बाद से टाटा ग्रूप में हरकम्प मठा
02:46हुआ है और यह पूरा मामला क्यों सामने आया है।
02:49तो समझे।
02:50नुएल टाटा और टाटाकस का मानना है कि इस ग्रूप के कुछ नए बिजनस वेंचर उमीद के मुदाबएक प्रदर्शन नहीं
02:56कर रहे है।
02:57टाटा डिजिटल, टाटा इलेक्ट्रोनेक्स और बिग बास्केट जैसे कारोबारों में भारी निवेश किया गया लेकिन नुकसान भी लगातार बन।
03:05वितवश दो हजार पच्चिस में नए बिजनस का कंसॉलिडेटेड लॉस यानि साहिए उप घाटा 10,900 करोड रुपे से ज्यादा
03:12करा है।
03:13कुछ अनुमानों की मानने तो वितवश दो हजार चब्बिस में ये आकड़ा 29,000 करोड रुपे तक पहुँच सकता है।
03:18लेकिन सबसे बड़ी चिंता एर इंडिया को लेकर है।
03:21ताटा ग्रुप ने एर इंडिया को खरीद कर उसके पुनरगठन की बड़ी जिम्मेदारी उठाई थी।
03:26लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार वितवश दो हजार चब्बिस में एर इंडिया का घाटा करीब 26,800 करोड रुपे तक बहुच
03:33चुका है।
03:34कुछ अनुमानों में ये 27,000 करोड रुपे से उपर भी बताया गया।
03:38ये नुकसान पिछले साल के मुकाबले लगभग 12 गुना ज्यादा माना चारा है।
03:43इसके पीछे विमान बेडे के modernization की लागत, उचे fuel के prices, airspace के प्रतिबंद यानि restrictions और विस्तारा के
03:51साथ हुए मर्जर से जुड़े खर्च जैसे कई कारेट बताया है।
03:54अब चिंता की बात ये है कि ये loss टाटा संस को मिलने वाले dividend revenue के बड़े हिस्से को
04:00खा रहा है।
04:25वैसे इसके अलावा अगले 5 साल की रणनीती, capital allocation, corporate governance और performance से जुड़े कई सवाल भी चर्चाखे
04:32केंडर में।
04:33यही वज़ा है कि ये विवाद अब सिर्फ business performance का मामला नहीं रह गया है।
04:37ये टाटा ट्रस्ट यानि मालिकाना पक्ष और टाटा संस यानि management पक्ष के बीच एक शक्ती संतुलन की बहस पर
04:46चुका है।
05:15पावर बैलेंस के रहे हैं।
05:17उनके बरखास्तगी लंबी कानूनी लडाई और सुप्रीम कोर्ट तक पहुचा विवार।
05:22पहले ही टाटा ग्रूप में नियंतरन और governance को लेकर कई सवाल खड़े कर चुका था।
05:26SP ग्रूप के हिस्सदारी और लिक्विडिटी का मुद्धा भी सालों से चला रहा है।
05:31वहीं रतन टाटा के निधन के बाद ट्रस्ट के भीतर नेत्रत्व की यानि की management और future के दिशायाने future
05:38direction को लेकर अलग-अलग विचार भी सामने आया है।
06:09अब सवाल ये है कि इसका टाटा ग्रूप पर असर क्या पढ़ रहा है।
06:10और आने वाले समय के रहिमीतिक फैसलों पर असर पढ़ सकता है।
06:15और टाटा जैसे ब्राइंड के लिए भरोसा ही सबसे बड़ी पूंची है।
06:18अब बात ये कि दोनों पक्षों के पास आखिर ऑप्शन्स क्या-क्या है।
06:23देखें, नोईल टाटा और टाटा ट्रस मजबूत स्थिती में हैं क्योंके पास शाच्षट सीसदी नियंत्रण है।
06:29वो ज्यादा निगरानी, प्रदर्शन आधारित शर्ते और SP ग्रूप के लिए बाइबाक या शेर स्वाप जैसे ऑप्शन्स पर विचार कर
06:36सकते हैं जिससे IPO की जरूरत ना पड़े।
06:38दूसरी तरफ चन्रशेकरन ने कथे तौर पर तीन साल की लॉस्ट रिड़क्शन योजना पेश की। उन्हें बोड के कई निदेशिकों
06:46का समर्थन भी मिल चुका है। उनके लिए सबसे बड़ा रास्ता यही है कि वो रिजर्ट्स के जरिये भरोसा मस्बूत
06:52करें, घाटे
06:53को कम करें और सब ही हितधारिकों को साथ लिख करके चलें। अब टाटर ग्रूप ने अपने पूरे इतिहास में
07:00कई मुश्किल दौर देखी हैं, लेकिन उसकी सबसे बड़ी ताकत हमेशा उसकी संस्थागत संस्कृती रही है, जिसे हमने शुरुआत में
07:06आपको बताया था
07:07इंस्टिटूशन फर्स्ट का सद्धान अपनी सबसे कठिन परीक्षा यहां पर देता दिखाई ले रहा है, अगर जून की बैठक में
07:14किसी सहमती पर उचा जाता है, तो नेत्र तुस्थिर रहेगा और समू की लंबी डूरेशन की योचनाओ को स्पीड मिल
07:21सकती है, एर इं
07:37पिटल इकठा करने की प्रत्रिया भी प्रभावित हो सकती है, फिर भी एक बाद आपको यह याद रखनी चाहिए कि
07:42टाटा ग्रोप सिर्फ एक बिजनस हाउस नहीं है, यह नमक से लेकर सौफ़वेर और एरलाइन्स तक पहला हुआ एक विशाल
07:49एको सिस्टम है, जिससे ला
08:07इसलिए इस अंस्था से जुड़ा हुआ है भारत का शायद हर एक शक्स का सेंक्टिमेंट, तो अब सवाल आपसे कि
08:14क्या एन चंदर शेकरन को तीसरा कारेकाल मिलना चाहिए, भले ही कुछ सक्षर्टों के साथ मिले, या फिट आटा ट्रस
08:21की जवाब देही और निगरानी की
08:22मांग पूरी तरह सही है, जो भी आपकी राय है, कॉमेंट सेक्षन ने जरूर बताईएगा, और कोई ऐसी कंपनी है,
08:28जिसके अंदर की इंसाइट स्टोरीज आप जानना चाहते हैं, तो भी हमें कॉमेंट आखे जरूर बताईएगा.
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