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Tata Dispute: A major leadership debate is unfolding inside Tata Group. The reappointment of Tata Sons Chairman N. Chandrasekaran has reportedly been delayed after Tata Trusts Chairman Noel Tata raised concerns over key strategic and governance issues. From Air India's mounting losses and investments in Tata Digital to questions around capital allocation, governance, and Tata Sons' future direction, this issue goes far beyond a routine leadership decision.
In this video, we break down the complete story behind the Tata Group power struggle, Noel Tata vs Chandrasekaran, the role of Tata Trusts, Air India losses, Tata Sons valuation, and what it could mean for the future of India's most respected business group.

Tata Group में इस समय एक बड़ा नेतृत्व विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है। Tata Sons के Chairman N. Chandrasekaran की दोबारा नियुक्ति पर फिलहाल फैसला टल गया है। Tata Trusts के Chairman Noel Tata ने कई अहम सवाल उठाए हैं, जिनमें Air India के बढ़ते घाटे, Tata Digital और अन्य नए बिजनेस वेंचर्स में भारी निवेश, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और Tata Sons की भविष्य की रणनीति शामिल है। क्या यह सिर्फ एक री-अपॉइंटमेंट का मामला है या फिर Tata Group के भीतर एक बड़े Power Struggle की शुरुआत?

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00:27
00:37आपको अभी की खबर बता दी लेकिन सबसे पहले इसको डिगिन करने से पहले थोड़ा और डीप जाने से पहले
00:43टाटा ग्रूप का पूरा पावर स्रक्शर समझ लेते हैं।
01:0066% हिस्सदारी टाटा ट्रस के पास है।
01:30बितवश 2025 की बात करें तो टाटा संस की नेटवर्ट करीब 1.5 लाग क्रोर रूपीज थी और कुछ वाल्यूएशन
01:37इसे 70 बिलियन डॉलर यानि लगबग 6 लाग क्रोर रूपे से ज्यादा भी आख ते।
01:59शुरू होने वाले तीसरे कारिकाल का।
02:02जुलाई 2025 में टाटा ट्रस ने उनके समर्थन में सरसम्मत्री से प्रस्ता पास कर दिया था।
02:08लेकिन फरवरी 2026 की बोर्ड मीटिंग में नोईल टाटा ने कई सीधे और कठिन सवाल उठा दिये जिसके बाद री
02:15अपोइंट्मन का पैसला टाल दिया गया।
02:16फिर 26 माई 2026 को एक विशेश बैठक हुई लेकिन वहाँ भी कोई अंतिम निर्णने नहीं निकल पाया।
02:22नोईल टाटा का कहना था कि जिन मुद्दों पर सवाल उठाए गए उनका समाथान अभी पूरी तरह नहीं हुआ इसलिए
02:28अभी पैसला लेना जल्दबाजी होगी।
02:29अब सबकी नज़र 12 जून की बोर्ड बैठक पर हैं जहां सालाना अकाउंट्स के साथ इस मुद्दे पर फिर से
02:35चर्चा हो सकती है।
02:36लेकिन असली सवाल यहां पर खड़ा है कि आखिर विवात की जड़ क्या है।
02:40क्यों रतन टाटा के जाने के बाद से रतन टाटा के निधन के बाद से टाटा ग्रूप में हरकम्प मठा
02:46हुआ है और यह पूरा मामला क्यों सामने आया है।
02:49तो समझे।
02:50नुएल टाटा और टाटाकस का मानना है कि इस ग्रूप के कुछ नए बिजनस वेंचर उमीद के मुदाबएक प्रदर्शन नहीं
02:56कर रहे है।
02:57टाटा डिजिटल, टाटा इलेक्ट्रोनेक्स और बिग बास्केट जैसे कारोबारों में भारी निवेश किया गया लेकिन नुकसान भी लगातार बन।
03:05वितवश दो हजार पच्चिस में नए बिजनस का कंसॉलिडेटेड लॉस यानि साहिए उप घाटा 10,900 करोड रुपे से ज्यादा
03:12करा है।
03:13कुछ अनुमानों की मानने तो वितवश दो हजार चब्बिस में ये आकड़ा 29,000 करोड रुपे तक पहुँच सकता है।
03:18लेकिन सबसे बड़ी चिंता एर इंडिया को लेकर है।
03:21ताटा ग्रुप ने एर इंडिया को खरीद कर उसके पुनरगठन की बड़ी जिम्मेदारी उठाई थी।
03:26लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार वितवश दो हजार चब्बिस में एर इंडिया का घाटा करीब 26,800 करोड रुपे तक बहुच
03:33चुका है।
03:34कुछ अनुमानों में ये 27,000 करोड रुपे से उपर भी बताया गया।
03:38ये नुकसान पिछले साल के मुकाबले लगभग 12 गुना ज्यादा माना चारा है।
03:43इसके पीछे विमान बेडे के modernization की लागत, उचे fuel के prices, airspace के प्रतिबंद यानि restrictions और विस्तारा के
03:51साथ हुए मर्जर से जुड़े खर्च जैसे कई कारेट बताया है।
03:54अब चिंता की बात ये है कि ये loss टाटा संस को मिलने वाले dividend revenue के बड़े हिस्से को
04:00खा रहा है।
04:25वैसे इसके अलावा अगले 5 साल की रणनीती, capital allocation, corporate governance और performance से जुड़े कई सवाल भी चर्चाखे
04:32केंडर में।
04:33यही वज़ा है कि ये विवाद अब सिर्फ business performance का मामला नहीं रह गया है।
04:37ये टाटा ट्रस्ट यानि मालिकाना पक्ष और टाटा संस यानि management पक्ष के बीच एक शक्ती संतुलन की बहस पर
04:46चुका है।
05:15पावर बैलेंस के रहे हैं।
05:17उनके बरखास्तगी लंबी कानूनी लडाई और सुप्रीम कोर्ट तक पहुचा विवार।
05:22पहले ही टाटा ग्रूप में नियंतरन और governance को लेकर कई सवाल खड़े कर चुका था।
05:26SP ग्रूप के हिस्सदारी और लिक्विडिटी का मुद्धा भी सालों से चला रहा है।
05:31वहीं रतन टाटा के निधन के बाद ट्रस्ट के भीतर नेत्रत्व की यानि की management और future के दिशायाने future
05:38direction को लेकर अलग-अलग विचार भी सामने आया है।
06:09अब सवाल ये है कि इसका टाटा ग्रूप पर असर क्या पढ़ रहा है।
06:10और आने वाले समय के रहिमीतिक फैसलों पर असर पढ़ सकता है।
06:15और टाटा जैसे ब्राइंड के लिए भरोसा ही सबसे बड़ी पूंची है।
06:18अब बात ये कि दोनों पक्षों के पास आखिर ऑप्शन्स क्या-क्या है।
06:23देखें, नोईल टाटा और टाटा ट्रस मजबूत स्थिती में हैं क्योंके पास शाच्षट सीसदी नियंत्रण है।
06:29वो ज्यादा निगरानी, प्रदर्शन आधारित शर्ते और SP ग्रूप के लिए बाइबाक या शेर स्वाप जैसे ऑप्शन्स पर विचार कर
06:36सकते हैं जिससे IPO की जरूरत ना पड़े।
06:38दूसरी तरफ चन्रशेकरन ने कथे तौर पर तीन साल की लॉस्ट रिड़क्शन योजना पेश की। उन्हें बोड के कई निदेशिकों
06:46का समर्थन भी मिल चुका है। उनके लिए सबसे बड़ा रास्ता यही है कि वो रिजर्ट्स के जरिये भरोसा मस्बूत
06:52करें, घाटे
06:53को कम करें और सब ही हितधारिकों को साथ लिख करके चलें। अब टाटर ग्रूप ने अपने पूरे इतिहास में
07:00कई मुश्किल दौर देखी हैं, लेकिन उसकी सबसे बड़ी ताकत हमेशा उसकी संस्थागत संस्कृती रही है, जिसे हमने शुरुआत में
07:06आपको बताया था
07:07इंस्टिटूशन फर्स्ट का सद्धान अपनी सबसे कठिन परीक्षा यहां पर देता दिखाई ले रहा है, अगर जून की बैठक में
07:14किसी सहमती पर उचा जाता है, तो नेत्र तुस्थिर रहेगा और समू की लंबी डूरेशन की योचनाओ को स्पीड मिल
07:21सकती है, एर इं
07:37पिटल इकठा करने की प्रत्रिया भी प्रभावित हो सकती है, फिर भी एक बाद आपको यह याद रखनी चाहिए कि
07:42टाटा ग्रोप सिर्फ एक बिजनस हाउस नहीं है, यह नमक से लेकर सौफ़वेर और एरलाइन्स तक पहला हुआ एक विशाल
07:49एको सिस्टम है, जिससे ला
08:07इसलिए इस अंस्था से जुड़ा हुआ है भारत का शायद हर एक शक्स का सेंक्टिमेंट, तो अब सवाल आपसे कि
08:14क्या एन चंदर शेकरन को तीसरा कारेकाल मिलना चाहिए, भले ही कुछ सक्षर्टों के साथ मिले, या फिट आटा ट्रस
08:21की जवाब देही और निगरानी की
08:22मांग पूरी तरह सही है, जो भी आपकी राय है, कॉमेंट सेक्षन ने जरूर बताईएगा, और कोई ऐसी कंपनी है,
08:28जिसके अंदर की इंसाइट स्टोरीज आप जानना चाहते हैं, तो भी हमें कॉमेंट आखे जरूर बताईएगा.
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