00:00नमस्कार, आज के इस खास विशलेशन में हम Automated Compliance Systems की उस चिपी हुई दुनिया में गोता लगाने वाले
00:06हैं, जो हमारे Digital Accounts को पूरी तरह से कंट्रोल करती है.
00:10सच कहूं, तो आज की इस सुपरफास डिजिटल एकॉनमी में जहां हर सेकंड लाखो ट्रांजेक्शन प्रॉसेस होते हैं, बैग्डाउंड में
00:17कुछ ऐसे रूबॉटिक सिस्टम लगातार काम कर रहे हैं, जो कभी सोते नहीं हैं, कभी ठकते नहीं हैं.
00:22और सबसे दिल्चस बात, ये सिस्टम किसी भी नए अकाउंट को कैसे जज़ करते हैं, ये समझना हम सब के
00:28लिए बहुत ज़रूरी है, क्योंकि एक छोटी सी अंजाने में हुई गल्ती और भूम अकाउंट हमेशा के लिए लॉक, तो
00:35आएए, बिना किसी देरी के इस व्यव
00:50के लिए सारी डीटेल्स भर दी गई, सब कुछ तैयार है, लेकिन पहले ही दिन बिना कोई सिंगल ट्रांजाक्शन किये,
00:57अकाउंट हमेशा के लिए सस्पेंड हो जाता है, है ना चौकाने वाला? अकसर लोगों को लगता है कि जरूर कोई
01:02बहुत बड़ा फ्रॉड हुआ हो
01:20इसका सीधा सा मतलब है, सिस्टम का नो टॉलरेंस रवया, जब मशीन किसी संभावित, पॉलिसी उलंगन या रिस्क पैटर्न को
01:28पकड़ती है, तो वो बिना कोई सवाल पूछे, अकाउंट को पूरी तरह से ब्लॉक कर देती है, अब सोचने वाली
01:34बात ये है कि प्लैटफर
01:47रखने का ये पूरा काम मशीन लर्निंग अल्गोरिदम्स को सौंपतिया गया है, ये अल्गोरिदम्स पलक जपकते ही लाखों डेटा पॉइंट्स
01:54का विशलेशन करते हैं, और जहां जरा सा भी रिस्क दिखा, वहीं अकाउंट हमेशा के लिए बंद, इसमें इनसानी दख
02:14अकाउंट ब्लॉक होता है, तो अकसर तुरंत एक नया अकाउंट बनाने की कोशिश की जाती है, वही पुराना पैन कार्ड,
02:20वही आधार, वही मोबाइल नंबर या इमेल इस्तमाल करके, और सच मानिये यहीं सबसे बड़ी गलती हो जाती है, अल्गोरिदम
02:27अंधा नहीं है
02:28वह तुरंत इन डॉकुमेंट्स को स्कैन करता है, और उन्हें एक ही पैचान से जोड़ कर देखता है, जैसी सिस्टम
02:34प्रोफाइल्स को लिंक करता है, नतीजा क्या होता है, नया अकाउंट भी उसी सेकेंड, बिल्कुल पुराने वाले की तरही प्रती
02:40बंदित और हमेशा क
02:41लिए क्लोज कर दिया जाता है, इस सिस्टम को बाइपास करना लगभग नामुम्किन है, अब आते हैं दूसरे बेहद क्रिटिकल
02:47फैक्टर पे, आइडेंटिटी वेरिफिकेशन में मिस्मैच, यानि पहचान का सही तरीके से ना मिलना, यहां अल्गॉरिदम को 100 प्रतिशत
02:56प्रफेक्शन चाहिए, 99 प्रतिशत भी नहीं, और यह स्लाइड इस बात को बहतरीन तरीके से दर्शाती है, मान लीजे आधार
03:03कार्ड पे नाम लिखा है राशिद खान, लेकिन प्रोफाइल बनाते वक्त टाइप कर दिया गया राशिद A खान, अब किसी
03:10इनसान के लिए य
03:22एक भयंकर compliance failure बन जाता है, और बिना किसी warning के account तुरंत reject कर दिया जाता है, और
03:29बाज सिर्फ नाम की spelling ताकी सिमित नहीं है, अगर registered address के pin code में एक number भी इधर
03:34उधर हो गया, या जन तिथी में एक दिन का भी फरक आ गया, तो ततकाल खत्रे की घंटी बज
03:39जाती है, ये system इतने स
03:52चक हुआ कि account बनाने वाला व्यक्ति अपनी सही पैचान शिपा रहा है, तो risk committer सीधा लाल निशान पर
03:57पहुच जाता है, profile details से थोड़ा आगे बढ़ते हैं, और देखते हैं कारक number 3, प्रतिबंधित या high risk
04:03activity, यहाँ बात data entry की नहीं, बलकि हमारे behavior की हो रही है, platform अब ये दे
04:22volume create करने या पैसों को घुमाने की कोशिश के रूप में देखता है, इसी तरह अगर किसी unverified है
04:27अग्याद source से अचानक fund आ जाए, तो ये एक बहुत बड़ा red flag है, system ये जानना चाता है
04:33कि पैसा आखिर आ कहां से राए, कोई भी ऐसा transaction जो normal pattern से बिलकुल अलग है, वो पूरे
04:39क
04:39पूरे account को suspicious category में धकेल देता है, चलिए, अब आखरी दो risk factors को एक साथ समझते हैं,
04:45linked data और पुराने प्रतिबंद, ये दोनों मिलकर एक ऐसा digital जाल बनाते हैं, जिससे समझना बेहत जरूरी है, अब
04:55इस slide की सबसे दिल्चस बात ये है कि हमारा digital footprint हमें कैसे आपस में जोडता ह
05:01कभी कभी सिर्फ एक अंजाने में share किया गया data point जैसे कि एक ही wifi का IP address या
05:07एक पुराना phone number system में एक compliance link बना देता है, इसका सीधा सा मतलब है कि भले ही
05:13दो accounts पूरी तरह से अलग-अलग व्यक्तियों या business के हों, लेकिन अगर उनका internet connection या कोई एक
05:20भी data point मैच कर गया, तो machine उन द
05:29में कोई दाग लगा हो, तो वो digital दुनिया में कभी नहीं धुलता, विरासत में मिलने वाली इस penalty का
05:36सिध्धान्त बहुत करूर है, अगर कोई पुराना account कभी भी risk review या policy उलंगन के कारण बंध हुआ था,
05:43तो कोई भी नया account जो उस पुराने data का जरा सा भी हिस्सा इस्तिमाल
05:47करेगा, वो अपने आप उसी penalty का शिकार हो जाएगा, मतलब सालों पहले हुई एक छोटी सी गलती या suspension
05:54आज एक बिलकुल नए legitimate account को पल भर में नश्ट कर सकता है, नया account बनते ही system database
06:02खंगालता है और पुराना band तुरंत नए पर लागू कर देता है, तो यहाँ सबसे महत्व�
06:08पून बात यह निकल कराती है, कि आज के दौर में हमारे digital वित्तिय पदचिन एक दूसरे से बहुत गहराई
06:14से जुड़े हुए हैं, एक automated algorithm की memory कभी delete नहीं होती, यह कभी कुछ नहीं भूलता, और इस
06:21automated दुनिया में गलतियों के लिए सच मुच शून्य गुंजाइश है, हर
06:38तो अंट में ये पूरा विशलेशन हमें एक बहुत ही गहरे और उकसाने वाले सवाल पर लाकर खड़ा कर देता
06:44है, इस black and white सख्त automated financial system में जहां सब कुछ एक permanent record बन जाता है, क्या
06:52वहां मानविये भूल के लिए कभी कोई जगा बची है, इनसान तो गलतियां करते ही हैं, को�
06:59पूतियों को नहीं समझती ही, वे केवल ये देखती हैं कि नियम का पालन हुआ या नहीं, भविश्य में तकनीक
07:05कि इस भारी सकती और मानविये सुभाव के बीच का ये संतुलन कैसे काम करेगा, ये वाकए में सोचने वाली
07:11बात है,
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