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In a world dominated by smartphones and digital entertainment, the traditional game of Gilli Danda is helping children reconnect with outdoor activities. This classic South Asian sport encourages physical exercise, teamwork, concentration, and social interaction while reducing screen time.

Watch how kids are enjoying this timeless game and discovering the fun of playing outdoors with friends. Gilli Danda is more than just a game—it's a cultural tradition that promotes a healthier and more active lifestyle.

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Fun
Transcript
00:00अच्छा, जरा एक लम्हे के लिए सूचें, आज कल बच्चे अपना ज्यादातर वक्त कहां गुजारते हैं?
00:05जी हाँ, स्क्रीन्स के सामने.
00:07आज के इस तफसीली जाइजे में, हम दरसल एक ऐसे खामोश बहरान पर बात कर रहे हैं, जो हमारे घरों
00:12में बड़ी तेजी से फैल चुका है.
00:14डिजिटल बच्च्पन का बहरान, स्क्रीन्स ने बच्चों की जिंदग्यों को पूरी तरा अपनी लपेट में ले लिया है.
00:36जी हाँ, महज एक दहाई के अंदर बच्चों के फारिग उकात में स्क्रीन के इस्तिमाल में पूरे 50% तक
00:43का होश और बाएजाफ़ा हुआ है.
00:44ये वाकी एक बहुत बड़ा नमबर है.
00:47इसका सीधा सा मतलब ये है कि वो वक्त जो पहले घर से बाहर भाग दौड़ और शोर शराबे में
00:52गुजरता था, वो अब मुकमल तोर पर खामोशी से इन डिजिटल आलात की नजर हो चुका है.
00:57और सच पूछें, तो स्क्रीन टाइम के इस गलबे ने एक काफी संगीन सुरतिहाल पैदा कर दी है, जिसके नताइच
01:03अब हमारे सामने आ रहे हैं.
01:04और देखें, इस गलबे की हम सब को एक भारी कीमत अदा करनी पड़ रही है. मुक्तलिफ मुस्तनद रिपोर्ट्स, जैसे
01:11के टीपैट बातान और दीगर मारूफ तिप्पी सहाफत के मुताले हमें बताते हैं, कि जब बच्चे बाहर खिलना छोड़ देते
01:17हैं, तो उनके ब
01:31प्रेशर के मसाइल और हड़ियों की कमजूरी का बाइस बन रहा है, और नफसियाती तोर पर ये बच्चों में खामोशी
01:36से तनाव और जहनी दबाव को बढ़ा रहा है. तो चलें, अब जरा इसकी गहराई में चलते हैं. हालात सिर्फ
01:42मायूस कुन ही नहीं है, क्योंकि साइ
02:10अगर हम डिजिटल डिवाइसिस के इस्तमाल और रिवाईती खेलों का आपस में मवाजना करें, तो फर्क आपको खुद बिलकुल वाज़े
02:16नजर आएगा.
02:17डिजिटल स्क्रीन्स बच्चों को बिलकुल गैरफाल, सुस्त और तनहाई पसंद बना देती हैं. उनकी पूरी दुनिया बस एक स्क्रीन तक
02:24महदूद होकर रह जाती है. इसके बिलकुल बरक्स हमारे रिवाईती खेल फितरी तोर पर मतहर्रिक होते हैं. उनमें दूसरे ब
02:44अपनी पुरानी यादों या जजबाती लगाओं की बन्याद पर नहीं कहरे है. इसके पीछे बाकाइदा एक इंतहाई सख्त साइंसी तरीकाकार
02:52मौजूद है. इंडुनेशिया में होने वाली एक रीसर्च में महक्कीन ने 1027 मुख्तलिफ तालीमी मजामीन को एकठठा किय
02:59और फिर उन्हें मुख्तलिफ साइंसी कड़ियों से खुजार कर चांट कर सिर्फ नौ इंतहाई मुस्तनिद मुतालियात तक महदूद किया. यानि
03:06ये कोई हवाई बाते नहीं है. रवायती खेलों के इन फवायत की पुष्ट पर एक ठोस और संजीदा अकेडमिक रिसर्च
03:12मौजूद है. इस पूरी जामे तहकीक का जो निचोड है न वो एक शांदार हकीकत बेयान करता है. वो ये
03:18कि रवायती खेल जो ज्यादातर हमारी मकामी सकाफत से जड़े होते हैं, दरसल बच्चों की नशनुमा के लिए एक मुकमल
03:24पैकेज है. डिजिटल गेम्स के बिलक�
03:42जस्प है कि हमारे पुराने रिवायती खेल अंजाने में ही बच्चों को कितनी बड़ी लाइफ स्किल सिखा जाते थे. मिसाल
03:48के तौर पर हॉप स्कॉट जैसे खेलों को ही ले ले. ये बच्चों में बरदाश्ट और खुद पर काबू पाना
03:53सिखाते हैं. कई ऐसे खेल हैं
04:08एक जबरदस प्रैक्टिकल क्लास ले रहे होते हैं? और हाँ, इन बातों के पिछे हैरत अंगेज मिगदारी डेटा भी मौझूद
04:15है. मिसाल के तौर पर तहकीक में देखा गया कि जो बच्चे रिवायती खेलों में बकायदगी से हिस्सा लेते हैं,
04:20उन्होंने रवादारी
04:21और बरदाश्ट को जांचने वाले एक पैमाने पर 3.04 का आुसत स्कोर हासिल किया. ये स्कोर आम या दिर्मियाने
04:28दरजे से कहीं ज्यादा है. तो इसका क्या मतलब हुआ? इसका सीधा सा मतलब ये है कि हमारे पास अब
04:34मिगदारी और ठोस सबूत मौझूद है कि ये खेल वा
04:51कि एक बहतरीन रिपोर्ट के मताबिक कुछ खास सरगर्मिया स्क्रीन का बहुत शांदार मतबादिल हो सकती है. जैसे के साइकल
04:58चलाना इस से बच्चों में तवाजन और खुदेतमादी आती है. तेराकी से पूरा जिसम चुस्त रहता है. और बागबानी ये
05:05एक ऐसी जबर
05:21सवाल जहन में आता है. अगर ये खेल इतने ही कमाल के हैं तो फिर आजकल बच्चे गलियों या पारकों
05:27में ये खेल खेलते नजर क्यों नहीं आते? वेल, इसकी रहा में कुछ बड़ी रुकाविटे हैं. सबसे बड़ी वज़ा तो
05:32जाहिर है डिजिटल गेम्स की कशिश औ
05:48इन रुकावटों को कोई एक शखस तो दूर नहीं कर सकता. और बिलकुल इसी लिए माहरीन एक जामे हल पर
05:55जोर देते हैं, जिसे हम एक बाहमी तावन का नाम दे सकते हैं. देखें, बात सीधी सी है. कोई एक
06:01स्कूल या कोई एक वालिदین का जोड़ा, ये जंग अकेले नह
06:09आने वालों और सबसे बढ़कर हम सब को, यानी खानदानों को एक टीम बनकर काम करना होगा. हमें मिलकर रास्ते
06:16निकालने होंगे ताकि इन सदियों पुराने, लेकिन इंतहाई कारामत खेलों को हम आज के बच्चों के रोजमरा मामूलात का दुबारा
06:23हिस्सा बना सकें. य
06:38बच्च्पन को डिजिटल बनाने और बच्चों के हातों में जदीद से जदीद डिवाइस थमाने की इस अंधा धुंद दोड में,
06:44क्या हमने कभी सोचा है कि हम दरसल किन लाजवा लिकदार, रिष्टों और सलाहियतों को हमेशा के लिए पीछे छोड़
06:51रहे हैं? क्या एक
06:52चमकतीवी स्क्रीन वाकई हमारे बच्चों की अखलाकी और जिस्मानी सहत की कीमत पर खरीदी जानी चाहिए, ये हम सब के
06:58लिए एक बहुत बड़ा लम्हे फिकरिया है, हकाइक आपके सामने हैं, अब एक बहतर रासने का इंतखाब करना हम सब
07:03के अपने हाथ में हैं
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