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  • 3 hours ago
 असम विधानसभा ने बुधवार को समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026 पारित कर दिया. 126 सदस्यों वाली असम विधानसभा में 102 एनडीए विधायकों ने उसके पक्ष में मतदान किया. इसका उद्देश्य धर्म से परे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और सह-जीवनसाथी संबंध को नियंत्रित करने के लिए एक समान कानूनी ढांचा स्थापित करना है. हालांकि, विपक्ष ने इसे प्रवर समिति को भेजने की मांग की. प्रस्तावित विधेयक के पारित होने के साथ ही असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करने वाला देश का तीसरा राज्य बन गया है. विधानसभा में पहले बोलते हुए, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि, "कांग्रेस ने 1925 में सबसे पहले यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड की वकालत की थी." सरमा ने बुधवार को आरोप लगाया कि विपक्षी पार्टी अब सेक्युलर नहीं रही और एक खास समुदाय की प्रतिनिधि बन गई है.सरमा ने कहा, "यूसीसी का इतिहास बहुत पुराना है. इसकी मांग सबसे पहले 1925 में कांग्रेस ने की थी. 1937 में जवाहरलाल नेहरू ने भी इसका सुझाव दिया था. वही कांग्रेस इसका विरोध कुरान और शरीयत के एंगल से कर रही है, न कि हिंदू या ईसाई या आदिवासी एंगल से."

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Transcript
00:03असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधयक 2026 बुधवार को पारित हो गया
00:09102 NDA विधयकों ने उसके पक्ष में मतदान किया
00:12इसी के साथ असम समान नागरिक संहिता विधयक पारित करने वाला देश का तीसरा राज्य बन गया है
00:34असम में यूसिसी बिल पारित होने पर बीज़ेपी विधयकों ने खुशी जताई
00:56वहीं AIUDF विधयक मुझेबुर रह्मान ने उसी सी बिल का विरोध किया और सुप्रीम कोट जाने की बात कही
01:08कॉंग्रेस विधयकों ने भी असम विधान सभा में उसी सी बिल पास होने का विरोध किया
01:12देखिये हिटलारी काईदा से पास कर लिया पहले तो वह बिल का जुरूरती नहीं था हम लोग बंड करने के
01:19लिए बला था इब बल में जो बात है पहले इसा आसा में लागू है ओ कानून
01:46शादी तलाक उत्तराधिकार और लिविन रिलेशनशिप जैसे कई निजी मामलों पर चाहे कोई भी धर्म हूँ एक जैसे कानून बनाने
01:54के मकसद से असम सरकार ने सोमवार को यूनिफॉर्म सिवल कोड पर एक बिल पेश किया था
01:59इसमें एक से ज्यादा शादी पर रोक लगाने और लिविन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन जरूरी का प्रावधान है ये असम में
02:07रहने वाली किसी भी अनुसूचित जनजाती पर लागू नहीं होगा
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