वित्तीय वर्ष 2026‑27 में सफाई व्यवस्था ठप, स्वच्छता रेटिंग में फिसड्डी साबित होगा शहर
लाखों की लागत से बने शौचालय रखरखाव के बिना बदहाल, टीम फोटो तक नहीं ले पाती
सवाईमाधोपुर. नगर परिषद की लापरवाही ने एक बार फिर शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वित्तीय वर्ष 2026‑27 शुरू हो चुका है, लेकिन अब तक सार्वजनिक मूत्रालयों और गरीब बस्तियों के पास बने सार्वजनिक शौचालयों की साफ‑सफाई और रखरखाव का टेंडर जारी नहीं किया है। लाखों रुपए की लागत से बने इन शौचालयों की हालत बदतर है। गंदगी और बदबू से आमजन त्रस्त हैं, वहीं स्वच्छ भारत मिशन का सपना अधूरा रह गया है। यदि हालात ऐसे ही रहे तो आगामी स्वच्छता रेटिंग में नगरपरिषद एक बार फिर फिसड्डी साबित होगी और शहर की छवि धूमिल होगी। नगरपरिषद ने मार्च के बाद सार्वजनिक शौचालयों की सफाई के लिए कोई नए टेंडर नहीं किए है।
स्वच्छ भारत मिशन पर पड़ा असर
केंद्र और राज्य सरकार की टीम जब स्वच्छता रेटिंग के लिए आती है तो सबसे पहले नगर परिषद क्षेत्र में आमजन के उपयोग वाले सार्वजनिक मूत्रालयों और शौचालयों की स्थिति देखती है। पानी, रोशनी और साफ‑सफाई की व्यवस्था के आधार पर अंक दिए जाते हैं। लेकिन टेंडर जारी न होने से इन शौचालयों की हालत इतनी खराब है कि टीम के सदस्य अंदर जाकर फोटो तक नहीं ले पाते है।
बदबू और गंदगी से बेहाल शौचालय
नगर परिषद क्षेत्र में बने सार्वजनिक शौचालय महीनों से गंदगी से अटे पड़े हैं। बदबू इतनी है कि लोग पास से गुजरना भी मुश्किल समझते हैं। गरीब बस्तियों के पास बने शौचालयों में सफाई और रखरखाव न होने से आमजन को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरा है बल्कि शहर की छवि को भी नुकसान पहुंचा रही है।
टेंडर में देरी से यह होगा खतरा
वित्तीय वर्ष 2026‑27 के लिए अब तक निविदाएं जारी न होने से साफ है कि नगर परिषद की कार्यप्रणाली में गंभीर कमी है। यदि जल्द ही टेंडर जारी नहीं किए गए तो स्वच्छता रेटिंग में शहर को कम अंक मिलना तय है। इससे न केवल नगर परिषद की छवि खराब होगी बल्कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना भी अधूरी रह जाएगी।
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इनका कहना है...
शहर में सार्वजनिक शौचालयों के लिए हाल ही टेंडर हुए थे लेकिन कुछ कारणों से निरस्त हो गए। जल्द ही फिर से शौचालयों की सफाई के टेण्डर किए जाएंगे।
चन्द्रकला वर्मा, आयुक्त, नगरपरिषद सवाईमाधोपुर
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