00:00सुनो, सुनो, सुनो, कल यहां महा दंगल होगा, जिसमें भी जुर्रत है, वो आकर लड़े, इनाम की रकम 30 लाख
00:10है
00:10मैं लड़ूंगी, हाँ, मैं लड़ूंगी, मैं जीत कर अपनी माँ और बेहन का इलाज करवाऊंगी
00:18कल जो भी मेरे सामने आएगा, मैं उसे मच्छर की तरह मसल कर रख दूँगा, पिछले 10 साल से कोई
00:24भी मेरे सामने टिक नहीं सका
00:26मा, कल मैं उस पहलवान से लड़ूंगी, अगर मैं उससे जीत गई, तो मैं तुम्हारा और अपनी बेहन का इलाज
00:33करवाऊंगी
00:34देखो बेटी, तुम ऐसा कुछ नहीं करोगी, वो पिछले 10 साल से कभी भी नहीं हारा
00:44मा, मुझे उससे लड़ना ही होगा, अब हमारे पास कोई रास्ता नहीं है
00:49बेटी, वो बहुत ताकतवर है, बड़े से बड़े पहलवान भी उसके सामने टिक नहीं पाते
00:54तुम एक नाजुक से लड़की हो, तुम क्या ही कर लोगी
00:58अगर इस शहर में कोई मर्द का बच्चा है, तो सामने आए
01:03और आकर मुझे से लड़े
01:05चा इस शहर में कोई ऐसा मर्द नहीं, जो मुझे से लड़ना चाहता हो
01:09आओ, मुझे हराओ, और तीस लाख लेकर जाओ
01:13अरे ओ पहलवान, इतना क्यों चिल्ला रहे हो
01:16मैं लड़ूँगी तुमसे, और तुम्हें हरा दूँगी
01:22अरे ओ लड़की, अभी के अभी घर जाओ, जाके खाना पकाओ
01:26अरे पहलवान, तुम डर गए हो क्या, क्या तुम मुझे से लड़ना नहीं चाहते
01:31बिना लड़े ही हार मान ली
01:35लड़की, तुम कुछ ज़्यादा ही बोल रही हो, तुम शायद जानती नहीं मैं कौन हूँ
01:39मैं तुम्हारी हड़ियों का सुर्मा बना दूँगा
01:44गांव के बीचों बीच एक पुराना अखाडा था
01:46चारो तरफ पीली मिटी फैली हुई थी
01:49किनारे पर एक बुढ़ा नीम का पेड खड़ा था
01:51और उपर लटके लाओड स्पीकरों से आवाज बार बार गूंज रही थी
01:56आज अखाडे में खुली जुनोती है
01:58आज बड़ा मुकाबला है
02:00देखते हैं
02:01कौन उतरेगा मैदान में?
02:03सुनो
02:05सुनो
02:06जो भी इस बार के जिला चैंपियन रघुवीर चौहान को हरा देगा
02:10उसे 50 लाख रुपे नकद इनाम दिया जाएगा
02:13हरे
02:14रघुवीर को कौन गिराएगा
02:16वो तो बरसों से जीतता आ रहा है
02:18ये तो नामुम्किन है
02:20रघुवीर चौहान अखाडे के बीच खड़ा था
02:22लंबा चोड़ा शरीर
02:24चोड़ी छाती
02:25और चेहरे पर ऐसा भरोसा जैसे हार
02:28शब्द उसने कभी सुना ही नहीं
02:30एक एक करके पहलवान उतरे
02:32किसीने दाम लगाया
02:34किसीने पूरी तकत जोग दी
02:36लेकिन कुछी पलों में
02:38सब मिट्टी में दबे नजर आए
02:40तालियां गूंचती रही
02:41और रघुवीर ने हाथ उठाकर
02:44भीड का अभिवादन किया
02:45माइक पर फिर्चुनौती दी गई
02:47क्या है कोई माइका लाल
02:49जो उसे ललकार सके
02:50तुम में हिम्मत है
02:52तो मैदान में उतर कर दिखाओ
02:53जिसमें जिगर हो
02:55वही सामने आए
02:56और अचानक पूरा अखाड़ा
02:59खामोश हो गया
03:00उसी गाउं के किनारे एक अच्छे घर में
03:0318 साल की सानवी रहती थी
03:05दिवारों से प्लास्टर जड़ रहा था
03:07छट से बारिश के पुराने दाग दिखाई देते थे
03:11अंदर खाट पर उसका पिता लेटा था
03:13सर पर पट्टी बंधी हुई थी
03:15कुछ दिन पहले
03:16खेत में गिरने से उसके दिमाग में
03:19अंदरूनी खून बहना शुरू हो गया था
03:21डॉक्टर ने कहा था
03:23इनके दिमाग में अंदरूनी खून बहरा है
03:25प्रेन हेम्रेज है
03:27ओप्रेशन जरूरी है
03:29और इसका खर्च लगभक 30 लाख रुपय आएगा
03:32सानवी के लिए यह रकम किसी पहाड से कम नहीं थी
03:35उसकी छोटी बहन रीती को भी तेज बुखार था
03:38वह कमरे के कोने में चुपचाप लेटी रहती
03:41और कभी-कभी खांस उठती
03:44सानवी रोज सुभ़ से शाम तक लोगों के घर काम करती
03:47बरतन मास दी, जाडू लगाती, पानी भरती
03:51और जो थोड़ा बहुत मिलता, उसी से घर का खर्च चलाती
03:55उस शाम जब वह घर लोटी, तो लाउट स्पीकर की वही आवास फिर गूंज उठी
03:59पचास लाख रुपय नकद इनाम, उसके कदम अनायासी रुख गए
04:04उसे डॉक्टर की बात याद आई, अगर देर हुई, तो खत्रा बढ़ जाएगा
04:09उस राद सानवी को पिलकुल नीन नहीं आई, उससे अपना बचपन याद आने लगा
04:14जब उसका पिता, उसे अखाडे की मिट्टी में संतुलन सिखाया करता था
04:18वह कहा करते थे, ताकत सिर्फ बाजू में नहीं होती, दिमाग और धैरे भी बड़े दाफ होते हैं
04:27उसके मन में बार बार वही शब्द गूंचते रहे, और साथ ही तीस लाख रुबे की जरूरत
04:33सुबह होते ही उसने फैसला कर लिया, वह चुपचाब घर से निकल गई, रिती सो रही थी, और पिता बेहोश
04:40पड़े
04:41जब वह अखाड़े के पास पुंची, तो उसने देखा कि भीट पहले से भी ज्यादा थी
04:45और रगुवीर फिर एक और पहलवान को गिरा कर खड़ा था, माइक से आवाज आई
04:51कोई है, जो इसे चुनोती दे सके, तब ही भीट के बीच से एक आवाज उबरी
04:57मैं लड़ूँगी, साधारन कपड़ों में एक लड़की धीरे-धीरे अखाड़े की और बढ़ रही थी
05:02कोई हसा, कोई बोला, ये पागल हो गई है क्या, लेकिन सानवी ने किसी की परवाह नहीं की
05:09ये खेल नहीं है, चोट लग जाएगे
05:12सानवी ने शांत आवाज में कहा, मेरे लिए ये खेल नहीं, जरूरत है
05:17कुछ पलों के लिए पूरा अखाड़ा सन रह गया
05:20चुनोती स्विकारवी, मुकाबला तैखवा
05:23सानवी ने जुक कर मुच्च उठाई और माथे से लगा ली
05:27उससे अपने पिता की आवाज याद आई, जर लगे तो सांस संभालना
05:31एक, दो, तीन, और रगुवीर बिजली की तरह उसकी और बढ़े
05:36बिना समय गमवाए, उसने सानवी को कंधे से पकड़ा
05:40और सोर से धका दिया, सानवी संभल भी न पाई
05:44और सीधा पीट के बल मिट्टी पर जा गिरी
05:47भीर से एक साथ आवाज उठी, खत्म
05:51रगुवीर ने हल्की मुस्कान के साथ कहा
05:53मैंने मना किया था, ये तेरे बस की बात नहीं है लड़की
05:57मिट्टी पर गिरी, सानवी ने आँखें बंद की
06:00और एक गहरी सांसली, दर्द उसकी कमर से लेकर
06:03कंधों तक फैल चुका था, फिर भी उसने हार मानने
06:07की बजाए, धीरे धीरे करवट ली, उसके कानों में
06:11पिता की आवाज गूँज रही थी, पहली चोट असली
06:14परीक्षा नहीं होती, असली परीक्षा है, उठना
06:30टकर लेने के बजाए, अपना शरीर डीला छोड़ दिया, और
06:34एक तरफ ते खिसक गई, रघुवीर का संतुलन एक पल
06:38को बिगड़ गया, भीड में हल्चल मच गई, रघुवीर अब थोड़ा
06:42चिड़ गया था, उसे उम्मीद नहीं थी कि यह लड़की
06:45इतनी जल्दी संभल जाएगी, उसने गुसे में दांत फिंचे
06:48और सान्वी को पकड़ कर घसीटने लगा, मिट्टी ओड रही थी,
06:53सान्वी के हाथ छिल गए थे, लेकिन उसके दिमाग में एक ही बाद खूम रही थी,
06:58सीधी ताकत से नहीं जीट सकती, इसे थकाना होगा,
07:01और जोर से, कुछ मिनट बीट गए, रगुवीर हर बार भारी ताकत से हमला करता,
07:07और सान्वी किसी न किसी तरह बच निकलती,
07:10अब भीड की छुपी हंसी कायब हो चुकी थी,
07:13लोग ध्यान से देख रहे थे,
07:15ये लड़की गिरने के बाद भी बार बार उट कैसे रही है,
07:19रगुवीर की सांसे अब पहले जितनी संतुलित नहीं थी,
07:23उसका चेहरा लाल होने लगा था,
07:25सान्वी को मौका दिखाई दिया,
07:27जैसे ही रगुवीर आगे बढ़ा,
07:29और उसे पकड़ने की कोशिश की,
07:31सान्वी नीचे जुकी,
07:33उसकी टांक के पास हाथ लगाया,
07:35और तेजी से घुमाव दिलिया,
07:37रगुवीर का वजन आगे की तरफ चला गया,
07:40और वह घुटनों के बल गिर पड़ा,
07:42भीट से जोर की आवाज उठी,
07:44अरे,
07:45रगुवीर अब पूरी तरह गंभीर हो चुका था,
07:47वह जटके से उठा और सान्वी को पकड़ लिया,
07:51उसने उसे जमीन पर दबाने की कोशिश की,
07:54उसका भारी शरीर सान्वी पर जुक गया,
07:57सान्वी की सांस रुखने लगी,
07:59उससे लगा,
07:59जैसे उसका सीना फट जाएगा,
08:02उसी पल उसे अपने घर का दृष्ष्य याद आए,
08:05पिता का पीला चेहरा,
08:07डॉक्टर की सखत आवाज,
08:08और रीते का बुखार से तक्ता माथा,
08:11उसके अंदर अचानक एक अलग ही ताकत जाग उठी,
08:14उसने अपनी एड़ी मिट्टी में गड़ा दी,
08:16कंधा मुड़ा,
08:17और पुरी ताकत से शरीर खुमा दिया,
08:21दोनों पलट कर अलग हो गए,
08:23अब दोनों की सांसें तेज चल रही थी,
08:26फीड अब सानवी का नाम लेने लगी थी,
08:29रगुवीर के चेहरे पर,
08:30पहली बार हलका सा तनाव दिखाई दिया,
08:33वह जल्ला उठा और सीधा वार करने के लिए आगे बढ़ा,
08:37लेकिन गुस्से में उसका कदम भारी हो गया,
08:40सांवी ने मौका देख लिया,
08:43उसने अपना कंधा उसके सीने से लगाया,
08:46और वजन नीचे डाल दिया,
08:48रखुवीर पूरी तरह,
08:50रखुवीर संतुलन खो बैठा,
08:52और इस बार सीधे बैठके बल जमीन पर गिर पड़ा,
08:55मिट्टी का गुबार उठा,
08:57और पूरा अखाड़ा एक पल को स्तब्ध रह गया,
09:00सांवी ने तुरंत मौका नहीं छोड़ा,
09:02उसने रखुवीर की बाहँ पकड़ कर उस पर दबाव बना दिया,
09:06यह दाव ताकत का नहीं था,
09:08पकड़ और समय का था,
09:10रखुवीर उठने की कोशिश करता रहा,
09:13लेकिन अब उसकी सांस भूल चुकी थी,
09:15उसका शरीर भारी था,
09:16और ठकान उस पर हावी होने लगी थी,
09:19सानवी के हाथ कांप रहे थे,
09:21आँखों में आसू थे,
09:23मगर उसकी पकड़ डिली नहीं हुई,
09:25उसे सिर्फ इतना याद था,
09:27तीस लाख रुपए,
09:28बाबा का ओम प्रिशन,
09:30पीती की दवा,
09:30कुछ सेकेंड ऐसे गुजरे,
09:32जैसे घंटे बीत रहे हो,
09:35आखरकार,
09:36रखुवीर की बाहा,
09:37जमीन पर डिली पड़ गए,
09:39अनाउंसर की आवाज गुझी,
09:41फैसला साफ है,
09:43विजेता, सानवी,
09:44भीड एकदम शोर से भर गए,
09:46तालियां, सीटियां,
09:47और हैरानी से भरी आवाज है,
09:50सानवी कुछ बल तक वहीं चुकी रही,
09:53जैसे उसे यकीन ही नहो,
09:54कि वह सच में जीत गई है,
09:56जब उसने पकड़ छोड़ी,
09:58तो उसके हाथ कांप रहे थे,
10:00वह खुद भी घुटनों के बल बैट गई,
10:02रगुवीर धीरे-धीरे उठा,
10:04उसके चेहरे पर गुस्सा नहीं था,
10:06उसने सानवी की तरफ देखा,
10:08और बस इतना कहा,
10:09तुने मुझे ताकतत से नहीं,
10:12हिम्मत से हराया है,
10:13भीड, तालियां हन्य बजा रही थी,
10:15लेकिन सानवी को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था,
10:18उसकी आँखों के सामने बस अस्पताल का दरवासा था,
10:22इनाम की खोशना हुई,
10:24सानवी ने बिना समय गमवाए,
10:26पैसों का बैग उठाया और अखाड़े से बाहर निकल गई,
10:29उसके कदम तेज थे,
10:30लेकिन इस बार डर से नहीं,
10:33उम्मीद से,
10:35सानवी सीधे अस्पताल पहुँची,
10:37उसके कपड़े मिट्टी से सने थे,
10:39हाथ छिले हुए थे,
10:40और चहरे पर धकान साफ दिखाई दे रही थी,
10:44ओपरेशन के पैसे ले आई हूँ,
10:45कृपया देर मत कीजिए,
10:47नर्स ने तुरंट कहा,
10:49हाँ, डॉक्टर साहब को बता दिया है,
10:52अंदर आईए,
10:53अभी तैयारी शुरू करते हैं,
10:55डॉक्टर ने गंभीर आवास में कहा,
10:58हालत गंभीर है,
10:59लेकिन हम पूरी कोशिश करेंगे,
11:02सानवी की आँखे भर आई,
11:04बस, उन्हें बचा लीजिए,
11:06और प्रिशन थेयर्टर के बाहर,
11:08एक लंबा इंतजार शुरू हुआ,
11:10दीवार की घड़ी की टिक-टिक,
11:12जैसे उसके दिल की धड़कनों से ताल मिला रही थी,
11:15थोड़ी देर बाद,
11:16रिती भी पड़ोसी के साथ अस्पताल पहुँच गई,
11:18उसका बुखार कुछ कम था,
11:20लेकिन कमजोरी साफ दिखाई दे रही थी,
11:22वह सानवी के पास पैठ गई,
11:24धीरे से बोली,
11:26दीदी, बाबा ठीक हो जाएंगे ना,
11:29सानवी ने उसके सिर पर हाथ रखा,
11:31हाँ, अब सब ठीक होगा,
11:33कुछ घंटों बाद नौपरेशन थीर्टर का दरवाजा खुला,
11:37डॉक्टर बाहर आये और मुस्कुरा कर बोले,
11:40ओनपरेशन सबल रहा है,
11:42खत्रा टल गया है,
11:43लेकिन अब इन्हें आराम और देखभाल की जरूरत होगी,
11:47यह सुनते ही सानवी की आँखों से आँसु बह निकले,
11:50उसने पहली बार खुल कर रोय,
11:53यह रोना डर का नहीं था,
11:54रहत का था,
11:56कुछ दिनों तक अस्पताल ही उसका घर बन गया,
11:59वह सुभ़ दवा लाती,
12:00दोपहर में रीती को खाना खिलाती,
12:02और रात को पिता के पास बैट दी,
12:05धीरे धीरे उसके पिता को होश आने लगा,
12:08एक दिन उन्होंने आँखें खोली,
12:10और धीमी आवास में पूछा,
12:12तुने ये सब कैसे किया,
12:15सानवी मुस्कुरा दी,
12:17आपने ही तो सिखाया था,
12:19हिम्मत नहीं छोड़नी,
12:20रीती भी अब ठीक होने लगी थी,
12:22डॉक्टर ने कहा,
12:24अब इसे पॉष्टिक खाना और आराम चाहिए,
12:26तब ही ये पूरी तरह ठीक होगी,
12:28सानवी ने मन ही मंठान लिया,
12:30अब वह अपनी बहन की पढ़ाई,
12:32और सेहत दोनों का ध्यान लखेगी,
12:34इनाम के पैसों में से कुछ इलाज में लगे,
12:37कुछ दवाईयों में और कुछ घर की मरम्मत में,
12:41पहली बार उनके घर के छट की दरारें भरी गई,
12:44दीवारों पर नया चूना लगा,
12:46घर छोटा था,
12:48मगर अब उसमें डर कम और उम्मीद ज्यादा थी,
12:51गाउं में भी बाते बदल गई,
12:53लोग अब सान्वी को सिर्फ मजदूरी करने वाली लड़की के रूप में नहीं देखते थे,
12:58कई लड़कियां उसके पास आने लगी,
13:01हमें भी अखाडे में आना है,
13:02हमें भी सीखना है,
13:05सान्वी पहले जिच की,
13:06फिर उसने सोचा,
13:07अगर वो कर सकती है,
13:09तो और भी कर सकती है,
13:11उसने शाम को अखाडे में जाना शुरू किया,
13:15वो अमिटी को छूती,
13:16आँखें बंद करती,
13:18और अपने पिता की बात याद करती,
13:20कुछ महीनों बाद उसके पिता,
13:22साहारे से चलते हुए,
13:24खुद अखाडे तक आए,
13:26उन्होंने देखा,
13:28सानवी बच्चों को दाव सिखा रही थी,
13:31उनकी आँखें भराई,
13:33धीरे से बोले,
13:35आज समझ आया,
13:36असली जीत क्या होती है?
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