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Ek gareeb ladki ki dil ko chhoo lene wali kahani jo apne beemar baap ke ilaaj ke liye akhaade mein utarti hai. Ek taraf mashhoor pehlwan aur doosri taraf majboor beti. Inaam ki raqam 1 crore rupay hoti hai. Kya woh apne baap ki jaan bacha payegi?

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Transcript
00:00सुनो, सुनो, सुनो, कल यहां महा दंगल होगा, जिसमें भी जुर्रत है, वो आकर लड़े, इनाम की रकम 30 लाख
00:10है
00:10मैं लड़ूंगी, हाँ, मैं लड़ूंगी, मैं जीत कर अपनी माँ और बेहन का इलाज करवाऊंगी
00:18कल जो भी मेरे सामने आएगा, मैं उसे मच्छर की तरह मसल कर रख दूँगा, पिछले 10 साल से कोई
00:24भी मेरे सामने टिक नहीं सका
00:26मा, कल मैं उस पहलवान से लड़ूंगी, अगर मैं उससे जीत गई, तो मैं तुम्हारा और अपनी बेहन का इलाज
00:33करवाऊंगी
00:34देखो बेटी, तुम ऐसा कुछ नहीं करोगी, वो पिछले 10 साल से कभी भी नहीं हारा
00:44मा, मुझे उससे लड़ना ही होगा, अब हमारे पास कोई रास्ता नहीं है
00:49बेटी, वो बहुत ताकतवर है, बड़े से बड़े पहलवान भी उसके सामने टिक नहीं पाते
00:54तुम एक नाजुक से लड़की हो, तुम क्या ही कर लोगी
00:58अगर इस शहर में कोई मर्द का बच्चा है, तो सामने आए
01:03और आकर मुझे से लड़े
01:05चा इस शहर में कोई ऐसा मर्द नहीं, जो मुझे से लड़ना चाहता हो
01:09आओ, मुझे हराओ, और तीस लाख लेकर जाओ
01:13अरे ओ पहलवान, इतना क्यों चिल्ला रहे हो
01:16मैं लड़ूँगी तुमसे, और तुम्हें हरा दूँगी
01:22अरे ओ लड़की, अभी के अभी घर जाओ, जाके खाना पकाओ
01:26अरे पहलवान, तुम डर गए हो क्या, क्या तुम मुझे से लड़ना नहीं चाहते
01:31बिना लड़े ही हार मान ली
01:35लड़की, तुम कुछ ज़्यादा ही बोल रही हो, तुम शायद जानती नहीं मैं कौन हूँ
01:39मैं तुम्हारी हड़ियों का सुर्मा बना दूँगा
01:44गांव के बीचों बीच एक पुराना अखाडा था
01:46चारो तरफ पीली मिटी फैली हुई थी
01:49किनारे पर एक बुढ़ा नीम का पेड खड़ा था
01:51और उपर लटके लाओड स्पीकरों से आवाज बार बार गूंज रही थी
01:56आज अखाडे में खुली जुनोती है
01:58आज बड़ा मुकाबला है
02:00देखते हैं
02:01कौन उतरेगा मैदान में?
02:03सुनो
02:05सुनो
02:06जो भी इस बार के जिला चैंपियन रघुवीर चौहान को हरा देगा
02:10उसे 50 लाख रुपे नकद इनाम दिया जाएगा
02:13हरे
02:14रघुवीर को कौन गिराएगा
02:16वो तो बरसों से जीतता आ रहा है
02:18ये तो नामुम्किन है
02:20रघुवीर चौहान अखाडे के बीच खड़ा था
02:22लंबा चोड़ा शरीर
02:24चोड़ी छाती
02:25और चेहरे पर ऐसा भरोसा जैसे हार
02:28शब्द उसने कभी सुना ही नहीं
02:30एक एक करके पहलवान उतरे
02:32किसीने दाम लगाया
02:34किसीने पूरी तकत जोग दी
02:36लेकिन कुछी पलों में
02:38सब मिट्टी में दबे नजर आए
02:40तालियां गूंचती रही
02:41और रघुवीर ने हाथ उठाकर
02:44भीड का अभिवादन किया
02:45माइक पर फिर्चुनौती दी गई
02:47क्या है कोई माइका लाल
02:49जो उसे ललकार सके
02:50तुम में हिम्मत है
02:52तो मैदान में उतर कर दिखाओ
02:53जिसमें जिगर हो
02:55वही सामने आए
02:56और अचानक पूरा अखाड़ा
02:59खामोश हो गया
03:00उसी गाउं के किनारे एक अच्छे घर में
03:0318 साल की सानवी रहती थी
03:05दिवारों से प्लास्टर जड़ रहा था
03:07छट से बारिश के पुराने दाग दिखाई देते थे
03:11अंदर खाट पर उसका पिता लेटा था
03:13सर पर पट्टी बंधी हुई थी
03:15कुछ दिन पहले
03:16खेत में गिरने से उसके दिमाग में
03:19अंदरूनी खून बहना शुरू हो गया था
03:21डॉक्टर ने कहा था
03:23इनके दिमाग में अंदरूनी खून बहरा है
03:25प्रेन हेम्रेज है
03:27ओप्रेशन जरूरी है
03:29और इसका खर्च लगभक 30 लाख रुपय आएगा
03:32सानवी के लिए यह रकम किसी पहाड से कम नहीं थी
03:35उसकी छोटी बहन रीती को भी तेज बुखार था
03:38वह कमरे के कोने में चुपचाप लेटी रहती
03:41और कभी-कभी खांस उठती
03:44सानवी रोज सुभ़ से शाम तक लोगों के घर काम करती
03:47बरतन मास दी, जाडू लगाती, पानी भरती
03:51और जो थोड़ा बहुत मिलता, उसी से घर का खर्च चलाती
03:55उस शाम जब वह घर लोटी, तो लाउट स्पीकर की वही आवास फिर गूंज उठी
03:59पचास लाख रुपय नकद इनाम, उसके कदम अनायासी रुख गए
04:04उसे डॉक्टर की बात याद आई, अगर देर हुई, तो खत्रा बढ़ जाएगा
04:09उस राद सानवी को पिलकुल नीन नहीं आई, उससे अपना बचपन याद आने लगा
04:14जब उसका पिता, उसे अखाडे की मिट्टी में संतुलन सिखाया करता था
04:18वह कहा करते थे, ताकत सिर्फ बाजू में नहीं होती, दिमाग और धैरे भी बड़े दाफ होते हैं
04:27उसके मन में बार बार वही शब्द गूंचते रहे, और साथ ही तीस लाख रुबे की जरूरत
04:33सुबह होते ही उसने फैसला कर लिया, वह चुपचाब घर से निकल गई, रिती सो रही थी, और पिता बेहोश
04:40पड़े
04:41जब वह अखाड़े के पास पुंची, तो उसने देखा कि भीट पहले से भी ज्यादा थी
04:45और रगुवीर फिर एक और पहलवान को गिरा कर खड़ा था, माइक से आवाज आई
04:51कोई है, जो इसे चुनोती दे सके, तब ही भीट के बीच से एक आवाज उबरी
04:57मैं लड़ूँगी, साधारन कपड़ों में एक लड़की धीरे-धीरे अखाड़े की और बढ़ रही थी
05:02कोई हसा, कोई बोला, ये पागल हो गई है क्या, लेकिन सानवी ने किसी की परवाह नहीं की
05:09ये खेल नहीं है, चोट लग जाएगे
05:12सानवी ने शांत आवाज में कहा, मेरे लिए ये खेल नहीं, जरूरत है
05:17कुछ पलों के लिए पूरा अखाड़ा सन रह गया
05:20चुनोती स्विकारवी, मुकाबला तैखवा
05:23सानवी ने जुक कर मुच्च उठाई और माथे से लगा ली
05:27उससे अपने पिता की आवाज याद आई, जर लगे तो सांस संभालना
05:31एक, दो, तीन, और रगुवीर बिजली की तरह उसकी और बढ़े
05:36बिना समय गमवाए, उसने सानवी को कंधे से पकड़ा
05:40और सोर से धका दिया, सानवी संभल भी न पाई
05:44और सीधा पीट के बल मिट्टी पर जा गिरी
05:47भीर से एक साथ आवाज उठी, खत्म
05:51रगुवीर ने हल्की मुस्कान के साथ कहा
05:53मैंने मना किया था, ये तेरे बस की बात नहीं है लड़की
05:57मिट्टी पर गिरी, सानवी ने आँखें बंद की
06:00और एक गहरी सांसली, दर्द उसकी कमर से लेकर
06:03कंधों तक फैल चुका था, फिर भी उसने हार मानने
06:07की बजाए, धीरे धीरे करवट ली, उसके कानों में
06:11पिता की आवाज गूँज रही थी, पहली चोट असली
06:14परीक्षा नहीं होती, असली परीक्षा है, उठना
06:30टकर लेने के बजाए, अपना शरीर डीला छोड़ दिया, और
06:34एक तरफ ते खिसक गई, रघुवीर का संतुलन एक पल
06:38को बिगड़ गया, भीड में हल्चल मच गई, रघुवीर अब थोड़ा
06:42चिड़ गया था, उसे उम्मीद नहीं थी कि यह लड़की
06:45इतनी जल्दी संभल जाएगी, उसने गुसे में दांत फिंचे
06:48और सान्वी को पकड़ कर घसीटने लगा, मिट्टी ओड रही थी,
06:53सान्वी के हाथ छिल गए थे, लेकिन उसके दिमाग में एक ही बाद खूम रही थी,
06:58सीधी ताकत से नहीं जीट सकती, इसे थकाना होगा,
07:01और जोर से, कुछ मिनट बीट गए, रगुवीर हर बार भारी ताकत से हमला करता,
07:07और सान्वी किसी न किसी तरह बच निकलती,
07:10अब भीड की छुपी हंसी कायब हो चुकी थी,
07:13लोग ध्यान से देख रहे थे,
07:15ये लड़की गिरने के बाद भी बार बार उट कैसे रही है,
07:19रगुवीर की सांसे अब पहले जितनी संतुलित नहीं थी,
07:23उसका चेहरा लाल होने लगा था,
07:25सान्वी को मौका दिखाई दिया,
07:27जैसे ही रगुवीर आगे बढ़ा,
07:29और उसे पकड़ने की कोशिश की,
07:31सान्वी नीचे जुकी,
07:33उसकी टांक के पास हाथ लगाया,
07:35और तेजी से घुमाव दिलिया,
07:37रगुवीर का वजन आगे की तरफ चला गया,
07:40और वह घुटनों के बल गिर पड़ा,
07:42भीट से जोर की आवाज उठी,
07:44अरे,
07:45रगुवीर अब पूरी तरह गंभीर हो चुका था,
07:47वह जटके से उठा और सान्वी को पकड़ लिया,
07:51उसने उसे जमीन पर दबाने की कोशिश की,
07:54उसका भारी शरीर सान्वी पर जुक गया,
07:57सान्वी की सांस रुखने लगी,
07:59उससे लगा,
07:59जैसे उसका सीना फट जाएगा,
08:02उसी पल उसे अपने घर का दृष्ष्य याद आए,
08:05पिता का पीला चेहरा,
08:07डॉक्टर की सखत आवाज,
08:08और रीते का बुखार से तक्ता माथा,
08:11उसके अंदर अचानक एक अलग ही ताकत जाग उठी,
08:14उसने अपनी एड़ी मिट्टी में गड़ा दी,
08:16कंधा मुड़ा,
08:17और पुरी ताकत से शरीर खुमा दिया,
08:21दोनों पलट कर अलग हो गए,
08:23अब दोनों की सांसें तेज चल रही थी,
08:26फीड अब सानवी का नाम लेने लगी थी,
08:29रगुवीर के चेहरे पर,
08:30पहली बार हलका सा तनाव दिखाई दिया,
08:33वह जल्ला उठा और सीधा वार करने के लिए आगे बढ़ा,
08:37लेकिन गुस्से में उसका कदम भारी हो गया,
08:40सांवी ने मौका देख लिया,
08:43उसने अपना कंधा उसके सीने से लगाया,
08:46और वजन नीचे डाल दिया,
08:48रखुवीर पूरी तरह,
08:50रखुवीर संतुलन खो बैठा,
08:52और इस बार सीधे बैठके बल जमीन पर गिर पड़ा,
08:55मिट्टी का गुबार उठा,
08:57और पूरा अखाड़ा एक पल को स्तब्ध रह गया,
09:00सांवी ने तुरंत मौका नहीं छोड़ा,
09:02उसने रखुवीर की बाहँ पकड़ कर उस पर दबाव बना दिया,
09:06यह दाव ताकत का नहीं था,
09:08पकड़ और समय का था,
09:10रखुवीर उठने की कोशिश करता रहा,
09:13लेकिन अब उसकी सांस भूल चुकी थी,
09:15उसका शरीर भारी था,
09:16और ठकान उस पर हावी होने लगी थी,
09:19सानवी के हाथ कांप रहे थे,
09:21आँखों में आसू थे,
09:23मगर उसकी पकड़ डिली नहीं हुई,
09:25उसे सिर्फ इतना याद था,
09:27तीस लाख रुपए,
09:28बाबा का ओम प्रिशन,
09:30पीती की दवा,
09:30कुछ सेकेंड ऐसे गुजरे,
09:32जैसे घंटे बीत रहे हो,
09:35आखरकार,
09:36रखुवीर की बाहा,
09:37जमीन पर डिली पड़ गए,
09:39अनाउंसर की आवाज गुझी,
09:41फैसला साफ है,
09:43विजेता, सानवी,
09:44भीड एकदम शोर से भर गए,
09:46तालियां, सीटियां,
09:47और हैरानी से भरी आवाज है,
09:50सानवी कुछ बल तक वहीं चुकी रही,
09:53जैसे उसे यकीन ही नहो,
09:54कि वह सच में जीत गई है,
09:56जब उसने पकड़ छोड़ी,
09:58तो उसके हाथ कांप रहे थे,
10:00वह खुद भी घुटनों के बल बैट गई,
10:02रगुवीर धीरे-धीरे उठा,
10:04उसके चेहरे पर गुस्सा नहीं था,
10:06उसने सानवी की तरफ देखा,
10:08और बस इतना कहा,
10:09तुने मुझे ताकतत से नहीं,
10:12हिम्मत से हराया है,
10:13भीड, तालियां हन्य बजा रही थी,
10:15लेकिन सानवी को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था,
10:18उसकी आँखों के सामने बस अस्पताल का दरवासा था,
10:22इनाम की खोशना हुई,
10:24सानवी ने बिना समय गमवाए,
10:26पैसों का बैग उठाया और अखाड़े से बाहर निकल गई,
10:29उसके कदम तेज थे,
10:30लेकिन इस बार डर से नहीं,
10:33उम्मीद से,
10:35सानवी सीधे अस्पताल पहुँची,
10:37उसके कपड़े मिट्टी से सने थे,
10:39हाथ छिले हुए थे,
10:40और चहरे पर धकान साफ दिखाई दे रही थी,
10:44ओपरेशन के पैसे ले आई हूँ,
10:45कृपया देर मत कीजिए,
10:47नर्स ने तुरंट कहा,
10:49हाँ, डॉक्टर साहब को बता दिया है,
10:52अंदर आईए,
10:53अभी तैयारी शुरू करते हैं,
10:55डॉक्टर ने गंभीर आवास में कहा,
10:58हालत गंभीर है,
10:59लेकिन हम पूरी कोशिश करेंगे,
11:02सानवी की आँखे भर आई,
11:04बस, उन्हें बचा लीजिए,
11:06और प्रिशन थेयर्टर के बाहर,
11:08एक लंबा इंतजार शुरू हुआ,
11:10दीवार की घड़ी की टिक-टिक,
11:12जैसे उसके दिल की धड़कनों से ताल मिला रही थी,
11:15थोड़ी देर बाद,
11:16रिती भी पड़ोसी के साथ अस्पताल पहुँच गई,
11:18उसका बुखार कुछ कम था,
11:20लेकिन कमजोरी साफ दिखाई दे रही थी,
11:22वह सानवी के पास पैठ गई,
11:24धीरे से बोली,
11:26दीदी, बाबा ठीक हो जाएंगे ना,
11:29सानवी ने उसके सिर पर हाथ रखा,
11:31हाँ, अब सब ठीक होगा,
11:33कुछ घंटों बाद नौपरेशन थीर्टर का दरवाजा खुला,
11:37डॉक्टर बाहर आये और मुस्कुरा कर बोले,
11:40ओनपरेशन सबल रहा है,
11:42खत्रा टल गया है,
11:43लेकिन अब इन्हें आराम और देखभाल की जरूरत होगी,
11:47यह सुनते ही सानवी की आँखों से आँसु बह निकले,
11:50उसने पहली बार खुल कर रोय,
11:53यह रोना डर का नहीं था,
11:54रहत का था,
11:56कुछ दिनों तक अस्पताल ही उसका घर बन गया,
11:59वह सुभ़ दवा लाती,
12:00दोपहर में रीती को खाना खिलाती,
12:02और रात को पिता के पास बैट दी,
12:05धीरे धीरे उसके पिता को होश आने लगा,
12:08एक दिन उन्होंने आँखें खोली,
12:10और धीमी आवास में पूछा,
12:12तुने ये सब कैसे किया,
12:15सानवी मुस्कुरा दी,
12:17आपने ही तो सिखाया था,
12:19हिम्मत नहीं छोड़नी,
12:20रीती भी अब ठीक होने लगी थी,
12:22डॉक्टर ने कहा,
12:24अब इसे पॉष्टिक खाना और आराम चाहिए,
12:26तब ही ये पूरी तरह ठीक होगी,
12:28सानवी ने मन ही मंठान लिया,
12:30अब वह अपनी बहन की पढ़ाई,
12:32और सेहत दोनों का ध्यान लखेगी,
12:34इनाम के पैसों में से कुछ इलाज में लगे,
12:37कुछ दवाईयों में और कुछ घर की मरम्मत में,
12:41पहली बार उनके घर के छट की दरारें भरी गई,
12:44दीवारों पर नया चूना लगा,
12:46घर छोटा था,
12:48मगर अब उसमें डर कम और उम्मीद ज्यादा थी,
12:51गाउं में भी बाते बदल गई,
12:53लोग अब सान्वी को सिर्फ मजदूरी करने वाली लड़की के रूप में नहीं देखते थे,
12:58कई लड़कियां उसके पास आने लगी,
13:01हमें भी अखाडे में आना है,
13:02हमें भी सीखना है,
13:05सान्वी पहले जिच की,
13:06फिर उसने सोचा,
13:07अगर वो कर सकती है,
13:09तो और भी कर सकती है,
13:11उसने शाम को अखाडे में जाना शुरू किया,
13:15वो अमिटी को छूती,
13:16आँखें बंद करती,
13:18और अपने पिता की बात याद करती,
13:20कुछ महीनों बाद उसके पिता,
13:22साहारे से चलते हुए,
13:24खुद अखाडे तक आए,
13:26उन्होंने देखा,
13:28सानवी बच्चों को दाव सिखा रही थी,
13:31उनकी आँखें भराई,
13:33धीरे से बोले,
13:35आज समझ आया,
13:36असली जीत क्या होती है?
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