00:00दोस्तो, आज मैं इस खुफनाक वाकिये का तीसरा और अखरी हिस्सा अप लोगों के सामने पेश कर रहा हूँ, ये
00:07कहानी कोई फर्जी किस्सा नहीं, बलकि हर्फ बाहर्फ एक हकीकी वाकिया है, जो कुछ तारिक के साथ हुआ, वो आज
00:17तक मेरे लिए भी एक ऐसा राज है, �
00:22इस अखरी हिस्से को पढ़ने के बाद, मैं अब सब दोस्तों की जाती राय जरूर जानना चाहूंगा, आखर अब के
00:29ख्याल में, ये सब हकीकत थी, कोई पुरसरार साया, आ फिर कुछ और, शुक्रिया, तो दोस्तो, अब तारिक की हालत
00:41इंतहाई खराब हो चुकी थी, घर
00:52मैं खुद भी ज्यादातर वक्त तारिक भाई के पास ही रहने लगा था, मेरे वालिदین बार बार मुझे समझाते थे,
00:59इस से थोड़ा दूर रहूं, कहीं ये साया तुम्हारे उपर भी मसल्ट ना हो जाए, लेकिन मेरा जमीर ये बात
01:07मानने को तयार नहीं था, मैं अपने �
01:10दोस्त को इस हालत में अकिला नहीं छोड़ सकता था, इसलिए मैं हर वक्त उसके साथ रहा, फिर एक दिन
01:17मेरे एक दोस्त ने कहा, कराची में एक बज़र्ग हैं, शायद वो तुम्हारी मदद कर सकें, लेकिन मसला ये था
01:26कि तारिक की तबियत इतनी खराब हो चुकी थी कि �
01:29थोड़ा सा सफर भी नहीं कर सकता था, मैंने इन बुजर्ग का नंबर लिया और उनसे बात की, मैंने सारा
01:36वाकिया बताया और आने की इजासत मांगी, खुश किसमती से उन्होंने इजासत दे दी, अब सबसे बड़ा मसला ये था
01:44कि तारिक को कराची कैसे लेकर जाएं, फि
01:59शायद इसे पत्ता चल गया था कि हम इसे किसी बजर्ग के पास लेकर जा रहे हैं, मैं इस वक्त
02:05तारिक के पास ही बैठा था, मैं मसलसल कुरानी आयात पढ़ रहा था, अचानक तारिक का पूरा जिसम जोर जोर
02:12से हिलने लगा, वो चार पाई पर इस तरह उचल रहा था, ज
02:28होफनाक कैफियत तकरीबन एक घंटे तक जारी रही, फिर अचानक सब कुछ खामोश हो गया, ऐसा लगा जैसे वो साया
02:37इसे छोड़ कर चला गया हो, मैंने फौरान तारिक को आवाज दी, लेकिन इसकी तरफ से कोई जवाब ना आया,
02:46मैंने इसे हिलाया, मगर उसके जिसम म
02:49कोई हरकत नहीं थी, ये देखकर मेरे हाथ पाउं ठंडे पाड़ गया, मैंने जल्दी से इसकी नबस चक की, नबस
02:58बहुत आहिस्ता चल रही थी, मैंने फौरान इसे उठाया गारी में डाला, और सीधा जिना अस्पताल ले गया, तारिक की
03:07वालदा भी हमारे साथ थी, वो म
03:19ऐसे ही हम अस्पताल पहुँचे, डॉक्टर ने एमर्जनसी में तारिक को चेक किया, फिर हैरानी से मेरी तरफ देखकर पूछने
03:27लगा, आखिर इसे हुआ किया है, डॉक्टर ने तारिक को गौर से देखा, फिर हैरानी से बोला, इसकी आंखें इतनी
03:37सुर्ख क्यों है, और
03:49ने डॉक्टर से कहा, डॉक्टर साहिब पहले पिलेज इसे ड्रिप्स और इंजेक्शन लगा दें ताका इसकी तबियत कुछ संभल जाए,
03:57बाकी जो मसला है, शायद आप इस पर यकीन ना करें, डॉक्टर ने हैरानी से मेरी तरफ देखा और बोला,
04:05आप मुझे बताएं त
04:18कुछ इंजेक्शन दिये, इसके बाद मैंने इसे तफसील से सारा वाकिया बताया, कि तारिक के साथ किया कुछ हो रहा
04:26था, और किस तरह एक पुरसरार साया इसकी जिन्दगी तबा कर रहा था, लेकिन डॉक्टर ने मेरी बात का बिलकुल
04:34यकीन नहीं किया, वो खामोशी से
04:36मुझे देखता रहा, जैसे इसे लग रहा हो कि शायद हम जिहनी दबाओ का शिकार हैं, खिर, तक्रीबन छे घंटे
04:45बाद तारिक की तबियत में थोड़ी बहुत बेहतरी आई, मैंने फॉरण इसे सहारा देकर गाड़ी में बिठाया, और हम सीधा
04:53कराची के सफर पर रवान
05:06अब वो नहीं बच्चेगा, इसकी सांसे बहुत आहिस्ता हो गई थी, जिस्म बिलकुल साकित पढ़ गया था, हम सब ने
05:15घबरा कर कलमा पढ़ना शुरू कर दिया, मैंने फॉरण गाड़ी साइड पर रोग दी, इस वक्त ऐसा लग रहा था
05:22जैसे जिन्दगी इसके जिस्म
05:24से निकल रही हो, लेकिन अल्ला पाक का लाक लाक शुक, कुछ लम्हों बाद उसके जिस्म में दोबारा हलकी सी
05:31हरकत हुई, मैंने फॉरण गाड़ी दोबारा चलाई, और जितना तेज मुम्किन था, उन बुजर्ग के घर की तरफ रवाना हो
05:39गया, ये हमारी खुश किस्मत
05:42थी कि वो बुजर्ग घर पर ही मौजूद थे, उन्होंने फॉरण पानी मंगवाया, इस पर कुछ पढ़ा और फिर वो
05:49पानी तारिक पर चीन्टा, इसके बाद पूरी रात वो कुरानी आयात और दौाईं पढ़ते रहे, आहिस्ता आहिस्ता तारिक की तबीयत
05:58बहतर होने �
05:58लगी, हम तकरीबन एक हफ़ता वहां रहे, हर रात वो बुजर्ग मसलसल इस पर पढ़ाई करते, सिर्फ एक हफ़ते के
06:07अंदर, तारिक की हालत में हैरान कुन बहतरी आ गई, वो मनहूस साया, जिसने इसकी जिन्दगी जहन्नम बना दी थी,
06:17आखिरकार इस से दूर हो गया,
06:20आहिस्ता आहिस्ता तारिक दोबारा एक आम इनसान की तरह जिन्दगी गुजारने लगा, वापसी से पहले इन बुजर्गों ने एक तावीज
06:28दिया और कहा, इसे हमेशा अपने साथ रखना, कभी खुझ से अलग मत करना, हम वापस घर आ गए, और
06:38अल्ला के करम से तारिक �
06:39ठीक हो गया, कुछ हर से बाद भाभी भी वापस आ गएंग, आज माशालला तारिक की एक प्यारी सी बेटी
06:47है, और वो अपनी फैमली के साथ पर सुकून जिन्दगी गुजार रहा है, लेकिन इसने अपनी जिन्दगी में जो तकलीफ
06:54बरदाश्त की, वो शायद कोई आम इ
07:09मैं किसी इनसान को इसकी बरदाश्त से ज्यादा तकलीफ नहीं देता, और बेशक मेरा अल्ला बहुत रहम करने वाला और
07:18महर्बान है.
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