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  • 16 hours ago
Dosto…
Aaj ki is khaufnaak horror story mein hum aap ko ek aise waqia ke bare mein batayenge jo mere dost Tariq ke sath UAE mein pesh aya.

Shuru mein sab kuch normal tha…
Lekin phir ek ajeeb aur pur-asrar saya uski zindagi mein aa gaya.

Ek aisi khoobsurat larki…
Jo asal mein insaan nahi thi.

Uske baad Tariq ki zindagi dheere dheere tabah hoti chali gayi.
Uski sehat kharab hone lagi, jism kamzor hota gaya aur har raat ek nayi dahshat uska intezar karti thi…

Kya tha woh saya?
Kyun Tariq us se jaan nahi chura pa raha tha?
Aur kya woh kabhi is azaab se nikal paya?

Janne ke liye poori video zaroor dekhein…

⚠️ Headphones laga kar dekhein agar himmat hai…

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Transcript
00:00दोस्तो, आज मैं इस खुफनाक वाकिये का तीसरा और अखरी हिस्सा अप लोगों के सामने पेश कर रहा हूँ, ये
00:07कहानी कोई फर्जी किस्सा नहीं, बलकि हर्फ बाहर्फ एक हकीकी वाकिया है, जो कुछ तारिक के साथ हुआ, वो आज
00:17तक मेरे लिए भी एक ऐसा राज है, �
00:22इस अखरी हिस्से को पढ़ने के बाद, मैं अब सब दोस्तों की जाती राय जरूर जानना चाहूंगा, आखर अब के
00:29ख्याल में, ये सब हकीकत थी, कोई पुरसरार साया, आ फिर कुछ और, शुक्रिया, तो दोस्तो, अब तारिक की हालत
00:41इंतहाई खराब हो चुकी थी, घर
00:52मैं खुद भी ज्यादातर वक्त तारिक भाई के पास ही रहने लगा था, मेरे वालिदین बार बार मुझे समझाते थे,
00:59इस से थोड़ा दूर रहूं, कहीं ये साया तुम्हारे उपर भी मसल्ट ना हो जाए, लेकिन मेरा जमीर ये बात
01:07मानने को तयार नहीं था, मैं अपने �
01:10दोस्त को इस हालत में अकिला नहीं छोड़ सकता था, इसलिए मैं हर वक्त उसके साथ रहा, फिर एक दिन
01:17मेरे एक दोस्त ने कहा, कराची में एक बज़र्ग हैं, शायद वो तुम्हारी मदद कर सकें, लेकिन मसला ये था
01:26कि तारिक की तबियत इतनी खराब हो चुकी थी कि �
01:29थोड़ा सा सफर भी नहीं कर सकता था, मैंने इन बुजर्ग का नंबर लिया और उनसे बात की, मैंने सारा
01:36वाकिया बताया और आने की इजासत मांगी, खुश किसमती से उन्होंने इजासत दे दी, अब सबसे बड़ा मसला ये था
01:44कि तारिक को कराची कैसे लेकर जाएं, फि
01:59शायद इसे पत्ता चल गया था कि हम इसे किसी बजर्ग के पास लेकर जा रहे हैं, मैं इस वक्त
02:05तारिक के पास ही बैठा था, मैं मसलसल कुरानी आयात पढ़ रहा था, अचानक तारिक का पूरा जिसम जोर जोर
02:12से हिलने लगा, वो चार पाई पर इस तरह उचल रहा था, ज
02:28होफनाक कैफियत तकरीबन एक घंटे तक जारी रही, फिर अचानक सब कुछ खामोश हो गया, ऐसा लगा जैसे वो साया
02:37इसे छोड़ कर चला गया हो, मैंने फौरान तारिक को आवाज दी, लेकिन इसकी तरफ से कोई जवाब ना आया,
02:46मैंने इसे हिलाया, मगर उसके जिसम म
02:49कोई हरकत नहीं थी, ये देखकर मेरे हाथ पाउं ठंडे पाड़ गया, मैंने जल्दी से इसकी नबस चक की, नबस
02:58बहुत आहिस्ता चल रही थी, मैंने फौरान इसे उठाया गारी में डाला, और सीधा जिना अस्पताल ले गया, तारिक की
03:07वालदा भी हमारे साथ थी, वो म
03:19ऐसे ही हम अस्पताल पहुँचे, डॉक्टर ने एमर्जनसी में तारिक को चेक किया, फिर हैरानी से मेरी तरफ देखकर पूछने
03:27लगा, आखिर इसे हुआ किया है, डॉक्टर ने तारिक को गौर से देखा, फिर हैरानी से बोला, इसकी आंखें इतनी
03:37सुर्ख क्यों है, और
03:49ने डॉक्टर से कहा, डॉक्टर साहिब पहले पिलेज इसे ड्रिप्स और इंजेक्शन लगा दें ताका इसकी तबियत कुछ संभल जाए,
03:57बाकी जो मसला है, शायद आप इस पर यकीन ना करें, डॉक्टर ने हैरानी से मेरी तरफ देखा और बोला,
04:05आप मुझे बताएं त
04:18कुछ इंजेक्शन दिये, इसके बाद मैंने इसे तफसील से सारा वाकिया बताया, कि तारिक के साथ किया कुछ हो रहा
04:26था, और किस तरह एक पुरसरार साया इसकी जिन्दगी तबा कर रहा था, लेकिन डॉक्टर ने मेरी बात का बिलकुल
04:34यकीन नहीं किया, वो खामोशी से
04:36मुझे देखता रहा, जैसे इसे लग रहा हो कि शायद हम जिहनी दबाओ का शिकार हैं, खिर, तक्रीबन छे घंटे
04:45बाद तारिक की तबियत में थोड़ी बहुत बेहतरी आई, मैंने फॉरण इसे सहारा देकर गाड़ी में बिठाया, और हम सीधा
04:53कराची के सफर पर रवान
05:06अब वो नहीं बच्चेगा, इसकी सांसे बहुत आहिस्ता हो गई थी, जिस्म बिलकुल साकित पढ़ गया था, हम सब ने
05:15घबरा कर कलमा पढ़ना शुरू कर दिया, मैंने फॉरण गाड़ी साइड पर रोग दी, इस वक्त ऐसा लग रहा था
05:22जैसे जिन्दगी इसके जिस्म
05:24से निकल रही हो, लेकिन अल्ला पाक का लाक लाक शुक, कुछ लम्हों बाद उसके जिस्म में दोबारा हलकी सी
05:31हरकत हुई, मैंने फॉरण गाड़ी दोबारा चलाई, और जितना तेज मुम्किन था, उन बुजर्ग के घर की तरफ रवाना हो
05:39गया, ये हमारी खुश किस्मत
05:42थी कि वो बुजर्ग घर पर ही मौजूद थे, उन्होंने फॉरण पानी मंगवाया, इस पर कुछ पढ़ा और फिर वो
05:49पानी तारिक पर चीन्टा, इसके बाद पूरी रात वो कुरानी आयात और दौाईं पढ़ते रहे, आहिस्ता आहिस्ता तारिक की तबीयत
05:58बहतर होने �
05:58लगी, हम तकरीबन एक हफ़ता वहां रहे, हर रात वो बुजर्ग मसलसल इस पर पढ़ाई करते, सिर्फ एक हफ़ते के
06:07अंदर, तारिक की हालत में हैरान कुन बहतरी आ गई, वो मनहूस साया, जिसने इसकी जिन्दगी जहन्नम बना दी थी,
06:17आखिरकार इस से दूर हो गया,
06:20आहिस्ता आहिस्ता तारिक दोबारा एक आम इनसान की तरह जिन्दगी गुजारने लगा, वापसी से पहले इन बुजर्गों ने एक तावीज
06:28दिया और कहा, इसे हमेशा अपने साथ रखना, कभी खुझ से अलग मत करना, हम वापस घर आ गए, और
06:38अल्ला के करम से तारिक �
06:39ठीक हो गया, कुछ हर से बाद भाभी भी वापस आ गएंग, आज माशालला तारिक की एक प्यारी सी बेटी
06:47है, और वो अपनी फैमली के साथ पर सुकून जिन्दगी गुजार रहा है, लेकिन इसने अपनी जिन्दगी में जो तकलीफ
06:54बरदाश्त की, वो शायद कोई आम इ
07:09मैं किसी इनसान को इसकी बरदाश्त से ज्यादा तकलीफ नहीं देता, और बेशक मेरा अल्ला बहुत रहम करने वाला और
07:18महर्बान है.
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