00:03बड़ा मज़ा आता है सर नाच रही है पांच घंगरा चोली भेहन के नाच रही है रील सारे है क्या
00:08वो मनिया
00:12मज़े देखो यह आधूने नाचा होगा इसे अपमान की तरह है लो
00:22और जिनकी पत्निया होंगी और बहने होंगी और प्रेमिकाये होंगी कई तो उनको नचाते होंगे यह इनी
00:31पर देखती है तो जीवन में ले आते हो अगर कोई सीधी साधी मासूम लड़की जीवन में आ जाए तो
00:36उसे वुमनिया बना देते हो आदा हाव भाव नैन नक्ष कपड़े बाल इक्षाएं मान्यताएं उपर से लेके नीचे तक पूरी
00:46वुमन बनी बैठी है वो शिख से ले
00:58कोई और बता रहा है उसका नाम क्या है उसके लिए पाप क्या है उसके लिए पुर्ण क्या है सब
01:03को इसको और बता रहा है इतिहास ने और समाज ने उसको इंसानी नहीं रहने दिया है उसको पूरा नकली
01:09बना दिया है इसलिए तो बोलना पड़ता कि तुम महिला नहीं हो �
01:12तुम मनुष्य की चेतना हो।
01:13कभी किसी बोलता हूँ कि तुम पुरुष नहीं हो।
01:16तुम मनुष्य की चेतना हो।
01:17मुझे बोलना पड़ता है क्या।
01:19पर महिलाओं को बार बार याद दिलाना पड़ता है
01:21क्योंकि वो महिला ही है पूरी।
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