00:00अगर मोहंदास करमचंद गांधी उनको बोलेंगे जैसे बहुत लोग बोलते भी कि मैं महात्मा नहीं मानदा भारत के विभाजन में
00:06भी उनकी नीतियों का कॉंट्रिबूशन था तो जब महात्मा बोलू या नहीं बोलू मतलब वो जो एक खटक सी होती
00:13है
00:13हम बिलकुल मानेंगे कि इस तरह नहीं कहाना चाहिए कि देधी हमें आजादी बिना खटक बिना ढालिस से ऐसा लगता
00:20है जैसे कि भारत की आजादी सिर्फ एक आदमी के बूते हमको मिल गई है बिलकुल ऐसी बात है
00:25जो यह विश्यूद्ध नहुआ ओता तो आजादी को और भहुत समय लग जाता 46 की नेवल नूटिनी नहीं होती तो
00:31आजादी को और समय लग जाता और जो क्रांतिकारे हुए थे जिन्नोंने हिंसा का मार्ग अपनाया था वो नहुए होते
00:39तो भी आजादी को बहुत और समय
00:40ये सब बातें हम मानते हैं
00:42सुभाष चंद्रबोस ने भी जो करा
00:43उसने भी आजादी की तिफिकों
00:46और निकट लाने में
00:48सहायता करी लेकिन ये बतातो
00:50गाणधी न न होते तो क्या आजादी
00:52उसी दिन मिल जाती जिस दिन मिली
00:53क्या गांधी ने आजादी को लाने में कोई मदद नहीं करी तुम्हारी
00:57सब ने करा और गांधी ने भी करा
00:59जो रास्ता उन्हें उस वक्त ठीक लगा
01:03वो रास्ता उन्होंने चुना
01:04आप आज बिलकुल बहस कर सकते हैं इस बात पर कि कोई दूसरा रास्ता भी हो सकता था
01:09कर लीजिए बहस
01:10लिकिन उस व्यक्त ने जो रास्ता चुना अपनी दृष्टी से अपने विवेक से
01:14उसमें उस इनसान पर आप व्यक्तिकत लांचन लगाएं ये कता ही ठीक नहीं है
01:18बहुत कुछ है जो उनके जीवन से चरितर से सीखा जा सकता है और सीखा जाना चाहिए
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