00:00लोग तो ऐसे गुजरते जैसे वो वहां मौजूद ही न हो
00:02मीरा हर रागीर से उमीद करती
00:05लेकिन हर बार उसकी उमीदें बुच जाती
00:07उसी भीड में एक चमचमाती कार आकर रुकी
00:10दर्वाजा खुला और एक युवक उत्रा
00:12सिधार्थ उम्र करीब 25 साल
00:14उसके चहरे पर एक अजीब सी गंभीरता
00:17और आखों में एक अलग चमक थी
00:19उसकी चाल में आत्म विश्वास था
00:21भीर ठिठक गई
00:22सब को लगा कि अब वही होगा
00:24जो अकसर होता है पैसा और मजबूरी का सौदा
00:27लेकिन सिधार्थ सीधे मीरा की ओर बढ़ा
00:29वो उसके सामने खड़ा हुआ
00:30और धीमे स्वर में बोला
00:32तुम्हें पैसों की जरूरत है
00:33है ना
00:34मीरा ने शर्म से सिर जुका लिया
00:36सिधार्थ ने कुछ पल उसकी आँखों में देखा
00:38और फिर गहरी सांस लेकर कहा
00:40देखो भीक से पेट तो भर सकता है
00:43लेकिन जिन्दगी नहीं बदल सकती
00:44अगर सच में जीना है
00:46तो मेरे साथ चलो
00:47मैं तुम्हें ऐसा काम दूंगा
00:49जिसमें इज़त भी होगी और रोटी भी
00:51ये सुनते ही जैसे
00:52चारों और खामोशी चा गई
00:54भीड में काना फुसी शुरू हो गई
00:56किसी ने तिरसकार भरी नज़र डाली
00:58किसी ने सिर्थ चारों जाली
Comments