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00:00किसी भी रिलेशन में बने रहना, जस किसी को दुख न पहुचे या चोटना लगे, ऐसा रहना क्या इमानदारी होगी?
00:30किसी लोग ऐसे ही है, सही से हाथ खड़े करो, जुल्दी से करो, मत बताओ मुझे उस सच जिससे मेरी
00:34फीलिंग्स हर्ट होती है, मैं नहीं ले रहा, गीता सत्रों परे, इतने फिल्मी गाने सुने, इतनी शायरी पढ़ी कि लगा
00:51कि दिल भी कुछ होता है, ये बॉलिवोड का क
00:53माल है, दिल, अच्छा, कितनों की जिंदगी में ऐसे लोग हैं, जिन से सच बोल दिया, तो उनकी फीलिंग्स हर्ट
01:00हो जाएंगी, इतने सारे हाथ, ओ, और इन में से कई लोग एक दूसरे की जिंदगी में हो गे, ओ,
01:14दिल तो जितनी जल्दी हो सके,
01:24सबसे पहले अपना, अध्यात्म का और काम ही क्या है, दिल तोड़ना, दिल विल प्यार वे और मैं क्या जानूरे,
01:30महावाक क्या है ये अध्यात्म का, कोई रिष्टा है जो सच को जहल सके, बन रहे हैं बहुत करांतेकारी दुनिया
01:38में, और अपनी निजी जिंदगी में,
01:53बहुत सारे टिंकुओं को छोड़ पाई हूँ, बहुत सारे बंदनों से मुक्ती हुई है, बट कुछ संशे हैं जो अभी
02:00भी आ जाते हैं, ऐसा देखते आए हैं उसकी वज़े से, तो तोड़ा परसनल भी है और ओवरॉल वो कुश्यन
02:09आता है, कि क्या किसी के, किसी भी रि
02:33और पूछलों आपने एक मिनटे पूछलिया, अब जो में आदे इंटे बोलोंग, उसकी गाली मुझे पड़ेगी, ना, जो पूछना तो
02:42पूछले तो उसमें यह मुनोग्यमी लाना जरूरी था, हूँ, पूरे भारत भर के लोगधर्मी,
02:52वैसे ही मरे जा रहे हैं हार्ट अटाइक से कि यह हमारी सब महिलाओं को चरित्रहीन और भरष्ट करे दे
02:57रहा है, उपर से मोग्यमी के खिलाफ और बुलवा दीजे मुझे, आप कह रहे हैं कि कि किसी का दिल
03:08न तूटे इसके लिए क्या किसी रिष्टे में बने रहना इमान
03:13जांदारी या बेहमानी की बात तो तब आएगी न, जब पहले कोई घटना संभव हो वैसी, आप अगर बदल गए
03:22हो, तो आपका रिष्टा बदल गया, आप लाग कोशिश कर लो, रिष्टा वैसा रही नहीं जायेगा, जैसा था अंधेरे में,
03:35रही नहीं जायेगा,
03:38जो देखने लग गया, वो अंधेरे में बनाए रिष्टे को पुरानी तरह ही अब कैसे निबाहेगा, कैसे, बोलो कैसे,
03:55अंधेरा कमरा था, आप घुज गई, वहाँ कोई था, आपको लगा पिया जी हैं और जाकर के लिपट गई, तभी
04:01किसी ने बत्ती चला दी,
04:04वो निकला टिंकू लाल, क्या रिष्टा वैसे ही रह जाएगा, प्रकाश सब बदल देता है,
04:13अंधेरे में बनाए गए रिष्टे, प्रकाश की धार बरदाश्त नहीं कर पाते,
04:21आपको पूछना नहीं पड़ेगा कि क्या मैं रिष्टा बदल दू, रिष्टा बदल गया, तटक्षन बदल गया, आप से बिना पूछे
04:28बदल गया, बदल गया,
04:36यह धमकी दी जा रही है मुझे,
04:46यह सोच समझ के बोलो,
04:50तो आप यह परेशानी तो पालिये ही नहीं,
04:56कि अब जिन्दगी समझ में आने लगी है,
05:00तो जो मेरे साथ है, मुझे से रिष्टे में है,
05:04उनका क्या करूं,
05:07उनके सामने जूट बोलती रहूं, सांतो ना देती रहूं,
05:11ताकि उनका दिल न तूटे,
05:15या कुछ उनसे दो-चार सची बाते भी कर लूं,
05:19यह दुविधा यह परेशानी कालपनिक है,
05:23आपको चिंता करने की ज़रूरत ही नहीं,
05:28जब ज्यान जिन्दगी में आता है न,
05:32तो आखों से बरसता है वो,
05:34आप छुपा भी नहीं पाओगे,
05:38आप सोचो भी कि किसी का दिल रखना है,
05:40आप रखी नहीं पाओगे, आपकी आखों से दिख जाएगा,
05:42कि आप आप देख रहे हो, आप आरपार देख रहे हो,
05:46यौर सीन थ्रू,
05:49आप कोशिश भी कर लोगे कि मैं पुराने जैसी बनी रहूं,
05:53तू जुन्नू, मैं धनिया,
05:57तो भी जुन्नू को भनक लग जाएगी,
06:01कि ये धनिया,
06:03इसकी आँखें कुछ बदली बदली सी हैं,
06:07कुछ तो हुआ है,
06:09ग्यान आँखें बदल देता है,
06:11ग्यान आँखें बदल देता है,
06:16तो आपको नहीं सोचना है,
06:18कि अब रिष्टे का क्या होगा,
06:20रिष्टे का अब क्या होगा,
06:22ये ग्यान खुद तै कर लेगा
06:25और आपको अपनी और से
06:27जोर भी नहीं लगाना है
06:29कि इसको बनाए रखूँ
06:30कि तोड़ दूँ
06:31कि बदल दूँ
06:32कि सवार दूँ
06:33आठदस तरह के विकल्प होते हैं
06:34रिष्टों को ले करके
06:35आपको किसी विकल्प की परवा करनी नहीं
06:38अब जो होना होगा
06:40ज्यान खुद करेगा
06:41बलकि वो तो करा भी मत करिये
06:43कि अब मैं ज्यादा समझदार हो गई हूँ
06:44तो अब मैं आपचारिक रूप से रिष्टा तोड़ रही हूँ
06:47ये आपचारिक रूप से
07:10आप कुछ दिनों तक पाखंड भी करके देख लो
07:13कि आपको दिख गया है
07:16कि जुन्नू लाल बिल्कुल नालायक है
07:20पर आप बेवफा ना कहलाओ
07:23इस डर से आप बिल्कुल वही पुराने जुन्नू की पुरानी धनिया बनने का स्वांग करके देख लो
07:29आप कर लो स्वांग जुन्नू को पता चल जाएगा
07:32जुन्नू का यह पुदीना
07:41ज्यादा बहतर है
07:44धनिया ज्यादा ताजी हुई जा रही है आज कल
07:52अब इस प्रेश्ण में फिलोसोफिकल एरर क्या था बताओ
07:58कर्म के बारे में पूछा
08:01कर्ता के बारे में नहीं
08:03मैं रिष्टे का क्या करूँ
08:06यह प्रश्ण किस तल पर है
08:09कर्म के तल पर है
08:10और बार बार बार बार विदानता आपको क्या बोल रहा है
08:13कर्म की परवाह
08:15सही कर्म अपने आप
08:17हो जाएगा
08:19ज्यान कर्म को बदलने की चेश्टा नहीं करता कर्म को बदलना हो तो बदलेगा नहीं बदलना हो नहीं बदलेगा भाड
08:25में जाए ज्यान का आगहात किस पर होता है
08:30तो इसलिए आपको सोचने ही नहीं है कि मैं आगे क्या करूँ लेकिन आपके 90 प्रतिशत प्रश्ण यही होते है
08:36what to do next मेरा ऐसा ऐसा चल रहा है आप मैं क्या करूँ क्या करूँ
08:40सारे प्रश्णा आप कर्म के ही तल पर कर रहे हो इसलिए आप फस जाते हो
08:46बेपरवाही चाहिए जो होना होगा हो जाएगा ना जो होगा होगा
08:58अब दिल तूटने की बात कि हमें सब समझ में आ गया है पर अगर समझदारी दिखाएंगे
09:07तो किसी का दिल तूट जाएगा यह दिल क्या होता है दिल क्या होता है
09:15वो अली चीज़, कैसे दिखा थे
09:17यह
09:19यह क्या है, कुछ है यह
09:23यह क्या है
09:25क्या है यह
09:26कुछ है
09:27कुछ है नहीं तो तूटेगा क्या
09:31कहीं होता है
09:34कहीं होता है
09:37कुछ भी है क्या यह
09:40तो दिल माने क्या
09:42मानने ता
09:43है न, मानने था
09:46मानने था
09:47अहंकार जनित और अहंकार केंदरित
09:49मानने था, जिसको आप दिल का नाम देते हो
09:51पर इतने फिल्मी गाने सुने, इतनी शायरी पढ़ी कि
09:55लगा कि दिल भी कुछ होता है, दिल क्या होता है
09:57गीता क्या बोल रही, गीता में एक दिल भी आता है
10:00आत्मा, अहम, डिल और प्रक्रति
10:04ऐसा सिखा है अपने
10:07यह है
10:08दो-चार श्लोक बताई जिसमें दिल का भी जिक्र हो
10:11उर्दू का ही श्लोक बता दो
10:17है कोई, जहां पे दिल की भी बात हो
10:21यह बॉलिवूट का कमाल है
10:23दिल
10:28दिल न टूटे, माने आप बस यही कह रहे हो
10:31कि किसी ने मुझे लेकर कुछ धारणा बना रखी है
10:34किसी की मुझे को लेकर कोई बिलीफ है
10:38जो की जाहिर है जूटी है
10:42पर मैं चाती हूं न टूटे
10:44तो ले दे कर आप क्या बोल रही है
10:46आप गहरे है उसकी एक जूटी बिलीफ है
10:50और मैं नहीं चाती कि उसकी जूटी बिलीफ टूटे
10:53आप उसकी दोस्त है कि दुश्मन है
10:56जल्दी बोलिए
10:58तो दिल का मतलब ही अगर जूटी माननेता है
11:01और फाल्तू और मान
11:03यही है न
11:04अगर दिल का मतलब ही यही है
11:06तो दिल तो जितनी जल्दी हो सके
11:10सबसे पहले अपना
11:13सबसे पहले अपना
11:15अध्यात्म का और काम ही क्या है
11:17दिल तोड़ना
11:18दिल विल प्यार वे और मैं क्या जानूरे
11:22महावाक्य है यह अध्यात्म का
11:27तु मेरा दिल है, तु मेरा जिगर है, अध्यात में यह सब होता है, जिगर,
11:34अमलाश है, मलाश है, यकृत, उपनिशा दो बोल रहे हैं,
11:41कि तत्व मसी और तत्व माने किड़नी, है यह साव,
11:48हमारे गाहानों करते हैं
11:49सबकुछ को सब आङटा ए
11:51तु मेरा गला है तु मेरी जबान है
11:56और कर शरीर के अंगों है फोलद नाता दिखाना है
11:59तो सचमुच में शरीर के जिस अंग से उसका नाता एंऔर उसका मान कभी नहीं लेखे
12:07चुपरियो भागी बीठेक है
12:09तु मेरी मूच का बाल है
12:18दिल तूट जाएगा मानि क्या
12:22अंकार ना सोयम को जानता
12:24ना दूसरे को जानता
12:26जैसे अपनी एक जूठी छवी बना रखी है
12:29वैसे उसकी भी एक जूठी छवी बना रखी है
12:31और आप चाहती है कि जूठी छवी चलती रहे
12:35इससे किसका लाब हो रहा है
12:38किसका
12:41बोलो ना किसका
12:52जो अपनी सच्चाई को
12:55दूसरे से छुपा रहा है
13:02वो दूसरे का
13:03दिल तूटने से भले बचा रहा हो
13:05पर उसकी जिन्दगी तोड़ रहा है
13:12और रिष्टे हमारे सारे ही ऐसे होते हैं
13:14जिसमें अपनी सच्चाई बता दो तो दिली नहीं रिष्टा भी तूट जाए
13:20हम सब जानते हैं कि हमारे संबंधों में
13:23कौन से सवाल हैं जो कभी नहीं पूछे आने चाहिए
13:27और वो सवाल अगर पूछ दिये गए
13:30वो मुद्दा वो चर्चा
13:33अगर छिड़ गई वो चर्चा
13:35तो गड़बड हो जाएगी हो जाएगी न
13:37हम सब जानते हैं कि कौन सी बत बात
13:40कौन सी सच्चाई अगर दूसरे को बता दी
13:43तो उसका दिल तूटेगा
13:45तो बताओ ही मत
13:47वास्ताव में पेशेवर लोग
13:48यह जो रिलेशन्शिप एक्सपर्ट्स होते हैं
13:50यह सलाह भी यह देते हैं कि कुछ बातें
13:52ना अपने पार्टनरों कोई बतानी नहीं चाहिए
13:54ना पार्टनर को ना पेरेंट को किसी को नहीं बतानी चाहिए
13:58और कुछ बाते होती हैं जो पेरेंट्स को बता दो पर पार्टनर को नहीं बताओ
14:01कुछ बाते हैं जो पार्टनर होताओ पेरिंट्स होताओ और किसी को नहीं बताओ
14:08मानेक कुल मिलाके एक एक रिष्टा जूट पर ही टिका हुआ है
14:19सच मुझ किसी का भला चाहते हो
14:23तो उसको गलत फेहमी में मत रखो
14:30तथे तथे यथार्थ यथार्थ है
14:37वो न्यूट्रल होता है
14:39ना किसी का अच्छा ना किसी का बुरा
14:43वो बस है
14:46वो सत्य के बिलकुल निकट की चीज़ है
14:49वो विवहार से उपर ले जाता है परमार्थ में
15:00उसी को छुपा रहे हो
15:01और इस छुपा छुपी को रिष्टे की बुनियात बना रहे हो
15:05कि उसका दिल तूट जाएगा
15:06उसकी भावनाएं आहत हो जाएंगी
15:09क्या मेरी फीलिंग्स की कोई कदर नहीं
15:13मत बताओ मुझे वो सच जिससे मेरी फीलिंग्स हर्ट होती हो
15:17अच्छा कितने लोग ऐसे हैं सही से हाथ खड़े करो
15:19जल्दी से करो
15:20मत बताओ मुझे उस सच जिससे मेरी फीलिंग्स हर्ट होती हो
15:38मैं नहीं ले रहा गीता सत्राथ
15:49अच्छा छोड़ो तुम ऐसे नहीं हो ठीक है
15:53तुम तो महामानव हो
15:59देवाद ही देव हो
16:01अच्छा कितनों की जिन्दगी में ऐसे लोग हैं जिनसे सच बोल दिया तो उनकी फीलिंग्स हर्ट हो जाएंगी
16:06इतने सारे हाथ
16:12और इन में से कई लोग एक दूसरे की जिन्दगी में होंगे
16:19हम हर्ट नहीं होते पर हम जूट इसलिए बोलते हैं क्योंकि वो हर्ट हो जाएगा
16:23और यही बात
16:25वो भी बोल रहा है
16:29और
16:44एक कहानी थी
16:46अगिन खूर
16:48एक आद बार पहले भी उसका जिक्र कर रहा है
16:50बंगाली की कहानी है
16:54तो उसमें एक
17:00एक पायर ब्रैंड बिलकुल क्रामतिकारी
17:05कम्यूनिस्ट लड़का है
17:06वो यूनिवरस्टी में पढ़ता है
17:08और कहरा है यह कर दूँगा वो कर दूँगा
17:10करांतियां लगा बिलकुल आग लगा दूँगा
17:12सब जगह यह दुनिया
17:13इसके रीत रिवाज
17:15यह सब सिर्फ
17:17गरीबों को शोशितों को कुचलने का पाखंड मात्र है
17:20मैं सब खतम कर दूँगा
17:22उसका जो बाप है
17:24वो बाप सीधा साधा
17:25बिलकुल मृदल इनसान है
17:27कम बोलता है चुप रहता है
17:30यह जब उसके आगे जाकर के
17:32बेटा बहुत आग उगलता है
17:34कि दुनिया में इतना गलत है
17:35ऐसा है वैसा है में सब तोड़ देना चाहिए
17:37बाप चुप चाप रहता है अपना बैठा ख़बार पढ़ता रहता है
17:42तो यह बेटा अपने बाप को बहुत ताने मारता है
17:45बोलता है तुहारे भी तर को याग नहीं है
17:48और उस बेटे का नाम उसके साथ के लोगों ने उसका जो
17:52प्यर क्रूप उसने लाग देगे आग खाने वाला
17:56हम वहीं इसे कहानी का नाम आओगा गेंखोर आग खाने वाला
18:00मुलता है तेरे दम नहीं है
18:02अरे तुम्ही जैसे लोगों के कारण
18:07कभी क्रांतियां नहीं होने पाती
18:10बुर्जु आप भद्रजन
18:12तुम्हारे कारणी
18:14ये
18:16दुनिया जैसी चल रही है
18:17वैसी है
18:18तो एक दिन वो यही सब कुछ कर रहा होता है
18:22बाप बैठा है
18:23बाप ऐसे अख़बार नीचे करता है
18:24और उसे बुलता है
18:37तुम्हारी मा का किसी से अफेर था
18:39तुम मेरी आफेर नहीं हूँ
18:45और ये अगेन खोर ऐसे सुनता है
18:47और फिर ऐसे लहराता हुआ गिर जाता है
18:50आनी खत्म
18:54कोई रिष्टा है जो सच को जेल सके
18:57कोई रिष्टा है
18:58बन रहे हैं बहुत करांतिकारी दुनिया में
19:01पर अपनी निजी जिन्दगी में
19:03सब जूट पर ही तो चल रहा है
19:08कहानी में अतिश्योक्ति थी
19:10आम घरों में ऐसा नहीं होता
19:11कि अउलादें कहीं और से आ रही हो
19:13आम तोर पर
19:16पर
19:19उतना बड़ा नहीं तो छोटा मोटा जूट तो
19:22होता ही है
19:28जूट
19:33हटाने का
19:34सच जेलने का दम रखिये
19:40जो रिष्टा लगातार जूट की
19:42खुराक मांगता हो
19:45उसको भूखा मरने दीजिए
19:49उसकी डाइटिंग हो जाएगी
19:51उसकी फास्टिंग है वो
19:53कुछ बहतर बन कर निकलेगा अब वो
19:59और बहतर माने यह नहीं होता
20:01कि प्रेम बढ़ जाएगा या कुछ
20:03बहतर माने सम्यक हो जाएगा एप्रॉप्रियेट हो जाएगा
20:06वैसा हो जाएगा जैसा उसे होना चाहिए
20:13इंसान और घोडे का रिष्टा पति और पत्नी का नहीं हो सकता
20:17आपने उसको जान लिया कि यह घोड़ा ही है
20:20तो यह थोड़े है कि अब दुश्मनी हो जाएगी या घhrणा हो जाएगी
20:23अब रिष्टा सम्यक हो जाएगा
20:25वही रिष्टा जो एक इंसान में और एक पशो में होना चाहिए
20:28वो रिष्टा रहेगा
20:31यह थोड़े हैं कि डाइवोर्स हो गया
20:45ये थोड़ी किया है कि घोड़े को निकाल दिया है और कह रहे हैं कि अब संबंद विच्छेद, नहीं, नहीं,
20:50बस हम जान गए हैं कि ये घोड़ा है, अब घोड़े के साथ भी रिष्टा तो होता है, नहीं होता
20:59है, है रिष्टा, घोड़े के साथ अभी भी रिष्टा है, कह
21:05भी कहते हैं चल तयार हो जा तडबक तडबक ले चल जिस काम आ सकता है उसी काम आ
21:21दिल विल की बहुत परवाह मत किया करिये अध्यात्म का भी बहुत नाश इस दिल बाजी नहीं करा है
21:28आप जिसको लोकधर्म कहते हो वो सेंटिमेंटलिजम के अलावा कुछ है आप इस पर आप नोट्स बना लीजेगा और गौर
21:40करिएगा खुद दो बातों के अलावा लोकधर्म में कुछ हो तो बताईएगा एक एक कोरी भावना है सेंटिमेंटलिजम और दूसरा
21:49परलोकवाद
21:51mysticism
21:53बस यही दो बाते होती है
21:56कि या तो रो और बोलो
21:57कि यही तो
21:59भक्त और भगवान के बीज का रिष्टा है
22:01भावना
22:03भावभा
22:07और या फिर कहो कि बस अब देखो
22:11मेरी आँखों से देखो तो तुमको वहाँ
22:14चंत्रमा के उपर
22:15बैठी परी दिखाई देगी
22:26भावनाओं की बुराई नहीं कर रहे हैं
22:29हम कह रहे हैं केंद्र पर
22:31भावना नहीं होनी चाहिए केंद्र पर
22:33बोध होना चाहिए और बोध
22:36से जो भावना
22:37उठती है वो बड़ी सुन्दर होती है
22:40बोध से
22:41भी आशू आ सकते हैं, वो बड़े प्यारे आशू होते हैं, ज्यानी भावना से रिक्त नहीं हो जाता, ज्यानी की
22:54भावना निर्मल हो जाती है, और जिनकी भावनाएं कल्पना से, भै से, अहंकार से संचालित होती हैं, उनकी भावनाएं भी
23:05अहंकार जितनी ही गंदी होती है
23:09भावना अपने आप में न अच्छी न बुरी वो कैसी भी हो सकती
23:12निर्भर इस पर करता है कि भावना का केंदर क्या है
23:15भावना के केंदर पर माननेता है तो भावना बड़ी गंदी होगी
23:19और भावना के केंद्र पर अगर बोध है तो उस भावना से ज्यादा प्यारा क्या, उसकी सुगंद बहुत अच्छी होगी
23:30ग्यानी को लोकधर्म में रूखा सूखा बहुत दिखाया जाता है
23:35कि ये तो ऐसे ही होता है, निर्मम है बिलकुल, तुम क्या जानों दिलों की बाते हैं
23:47ग्यानी कि जितनी गाड़ी, गहरी और साफ भावना होती है, उतनी किसी की नहीं होती
24:00आप लोगोंने भावनाओं का तो पूरा कॉंट्रैक्ट खुदी हडप लिया है
24:07क्याते हैं भावना माने लोकधर्म और भावना हीन माने ग्यान
24:14ये गलत विभाजन है, भावनाओं पर लोकधर्म ने जो मोनोपली, जो एक आधिकार करा है वो बिलकुल गलत है
24:27भावना तो चोर की भी होती है
24:33भावना अपने आप में कैसे बहुत शुद्ध, बहुत निर्मल चीज हो गई
24:37भाव कैसे ऐसी चीज हो गया कि भाव बड़ी उची बात है, न कुछ नहीं
24:41नभाव उचा नविचार उचा, नभाव नीचा नविचार नीचा, केंद्र होते हैं उचे नीचे
24:52सर एक और क्वेशन था इसी से, क्या जो सच्चा प्रेम जिसे हम अध्यात में समझते हैं
24:59वो किसी psychological dependency के बिना possible है, क्या जाहें वो गुरू के साथ हो या फिर वो किसी भी
25:07इनसान के साथ हो
25:08क्योंकि जब मैं देखती हूँ तो कहीं न कहीं एक psychological dependency है और अगर वो इनसान नहीं है सामने
25:16या किसी भी तरह से connected नहीं है तो वो dependency के बिना हम सच्चे प्यार को प्रेम को समझ
25:23सकते हैं या possible है भी ऐसा
25:26psychological dependency मुहावरा है उससे आशे क्या है माने क्या जैसे कि मैं अगर अपने example में देखती हूँ तो
25:34अगर मैं जब भी मुझे
25:36anxiety बोले या जो भी संशय आते हैं तो आपसे मुझे समझ मिली है तो मुझे आपके वीडियोज ही देखने
25:44पड़ते हैं तो मेरी एक आपके साथ
25:58नहीं है जैसे अभी आप बोल रहते हैं तो वो मुझे बहुत प्रॉब्लम करता है सोच कर भी तो इस
26:04तरह से एक dependency जो बन गई है मुझे यह नहीं पता कि यह सच्चा प्रेम है या नहीं है
26:10बट एक dependency तो है इस चीज को समझने में तो वो जरूरी है आगे प्रेम के मार्ग मे
26:20एक चीज होती है ठीक है उसका एक नाम होता है उसी को कोई बोलता है नार्कोटिक्स और कोई बोलता
26:35है मेडिसिन दोनों का साझा नाम होता है ड्रग्स
26:44आप देखते हो आप जब जाते हो दवाई की दुकान पर तुहां लिखा रहता है chemists and drugists तो क्या
26:50कोकेन बेच रहा है वो
26:56एक पदार्थ है पदार्थ ही है ठीक है वही पदार्थ वही पदार्थ नार्कोटिक्स कि श्रेणी में भी आ सकता है
27:08नशा
27:11और पदार्थ ही है वो दवा की श्रेणी में भी आ सकता है कैसे पता करें कि नशा है कि
27:20दवा है कैसे पता करें
27:27क्वांटिटी कैसे पता करें और दोनों के ही पास जाने से राहत की अनुभूती तो होती है बलकि नशे के
27:38पास जाने से और जल्दी हो जाती है राहत की अनुभूती
27:43कैसे पता करें कि आप जिसका सेवन कर रहे हो वो दवा है कि नशा है कैसे पता करें
27:57नशा आपके सोचने समझने की ताकत को और कम कर देगा
28:12प्रिशान हो उस आलत में या कि आप बहुत अवसाद में हो निराश में हो आप डिप्रेस्ट हो तो लोग
28:19नशा करते हैं
28:20नशा आपकी जो भी मानसे के स्थितिति उसको और खराब कर देता है
28:26आप प्षने शने सोचने समझने से और ज्यादा अपाहिज होते जाते हो
28:33ठीक है?
28:35दवा क्या करती है?
28:39दवा आपको दवा आपको बहतर बनाती है
28:47दवा अगर किसी दिमागी बीमारी के लिए ली जा रही है
28:51तो दिमाग को कुंद नहीं करती
28:53वो दिमाग को और सही करती है
28:59तीक्षन कर देती है, शार्प कर देती है
29:02भीतरी कोहरे को हटाती है
29:05और नशे के बाद आप जब सुबह उठते हो तो भीतर कोहरा
29:09और घणा हो गया होता है
29:13बाता रही है समझ मैं?
29:14जे
29:18डवा इसलिए बनी ही नहीं होती है
29:20कि आप उसे अनन्त काल तक लो
29:27अनन्त तक, अनन्त काल माने जीवन भर
29:30उस हरत में अनन्त कह रहा हो
29:32जीवन भर आहार लिया जाता है दवा नहीं
29:37जीवन भर आहार लिया जाता है दवा नहीं
29:40दवा का काम ये होता है
29:44कि वो धीरे धीरे हटती जाए
29:47या अपना रूप परिवर्तित करती जाए
29:51इस तरीके से कि अब आगे आहार ही दवा बन जाए
29:57आपका आपकी जो पहली दवाई होती हो तो आपका खाना ही होता है
30:01वो भी तो मिटीरियल ही है आप खाई रहे वो भी दवाई
30:07बश्मयारी बात
30:09दवा का काम होता है धीरे धीरे गायब हो जाना
30:15और गायब हो जाना माने यह नहीं कि अब वो अनुपस्थित है
30:18अब वो अनुपस्थित नहीं है अब वो आहार बन गई है
30:22पहले वो आपकी विवस्था से बाहर की कोई चीज थी
30:25आप बोलते थे खाने के साथ इतनी गोलियां खालो
30:29तो आपकी विवस्था से बाहर की चीज थी अतरिक चीज थी
30:32अब वो आपका खाना ही बन गई है
30:48लोगे उसको उतना
30:50ज्यादा और लेना पड़ेगा
30:53आप
30:53उसको जिस मात्रा में
30:56लेते थे कुछ महीनों बाद
30:57वो मात्रा
30:58कम पड़ने लगती है
31:00जिसने शुरुवात करी हो दो सिगरेट फूकने से
31:03वो दस फूकेगा
31:07और वो दस में भी कहेगा कि
31:09वो मदा नहीं आरा जो पहले आता था
31:11फिर उसे कुछ और चाहिए
31:15दवा का काम है
31:18हटते जाना
31:20वो दोनों तरीकों से हटती है
31:21अगर वो अपना काम कर रही है
31:24तो भी हटेगी
31:25और काम नहीं करती जब कोई दवा
31:27आप महीने पर से दवा ले रहे हैं
31:28काम नहीं कर रही तो डॉक्टर क्या करता है
31:30वो भी हटाता है
31:32और नशे का काम है कभी नहटना
31:36आपको इतना आपाहिज बना देना
31:38इतना आपाहिज बना देना
31:39कि आप उसको और मांगो
31:40और मांगो
31:41और मांगो
31:45और यहां पर
31:47नशे
31:48की परिभाशा क्या है वो बीमारी से आएगी
31:51बीमारी ही क्या होती है
31:53जब आप psychological dependence की बात कर रहे हैं
31:55तो बीमारी ही क्या है
31:57अज्ञान
32:00अज्ञान
32:01हंकार ही तो आश्रित होता है ना किसी पर
32:03psychological dependence होता है
32:04egoic dependence है
32:06अंकार कह रहा है मैं किसी पर आश्रेत हूं उसकी संगत मिल जाती है तो मुझे संतोना हो जाती है
32:12तो क्यों करता है अंकार किसी पर आश्रेता किसी की संगत की मांग क्यों करता है क्योंकि वो खुद को
32:17जानता नहीं है
32:19तो उसको लगता है कि मैं वो हूँ जो किसी को पा लूँगा तो पूरा हो जाओंगा
32:22तो बीमारी का ही नाम क्या है अग्यान
32:28जो चीज अग्यान को काटती हो वो दवा है
32:33जो चीज अग्यान को और बढ़ा दे वो नशा है
32:38और दोनों ही हालात में
32:41तातकालिक रूप से
32:42कम से कम तातकालिक रूप से
32:44दुख से मुक्तितो मिलती ही
32:46मिलती है
32:50एक पुराना वीडियो है
32:51जिसका शीर्शाख है
32:52Awareness begins with suffering
32:57तो उसमें
32:58छातर थे हों पूछ रहे थे
33:00कि यह जो आप बाते बोल रहे हैं
33:01Awareness अगर वो इतनी जबरदस चीज़ है
33:04तो लोग Aware होना
33:06क्यों नहीं चाहते
33:06इनका इसलिए क्योंकि Aware ना होने
33:09में सुख है
33:12और दो जबों पर
33:14सुख होता है
33:15एक पूर्ण मुक्ति में
33:17और एक पूर्ण बेहोशी में
33:18जिसे पूर्ण बंधन भी कह सकते हो
33:21तो पूर्ण होश में भी सुख है
33:23और पूर्ण बेहोशी में भी सुख है
33:26दुख होता है
33:29बीच की जगह पर
33:32इस मध्यम तल पर दुख होता है
33:34जहां पर इतनी चेतना तो है
33:36कि एहसास हो सके कि कुछ कमी है जिन्दगी में
33:39वहाँ दुख होता है
33:41नशा दुख दूर करता है
33:42क्या करके
33:45आपको बिलकुल निमनतम
33:46तल पर गिरा करके
33:47अब वहाँ दुख नहीं रहेगा
33:50दवा भी दुख तूर करती है
33:51क्या करके
33:54हम आंतरिक दवाई की बात कर रहे है
33:56पेट वाली दवाई नहीं उठाती
33:58ठीक है? अगर
34:00अज्ञान बीमारी है
34:02तो दवाई है
34:04अहंकार के तल को उठाना
34:06अगर उसको वो उठा रहा है उसे
34:07निर्बोज कर रहा है तो दवा है
34:09और नशा होता है कि उसको
34:12और सुला दो
34:13उसको एकदम ही होश न रह जाए
34:15ये नशा है
34:17और वो नशा अध्यात्म के नाम पर भी होता है
34:20क्या आप मुझे अध्यात्म के
34:21नाम पर कुछ ऐसी कर्टूते
34:23बता सकते हैं जिसमें
34:25दुख कम होता है क्योंकि आदमी
34:27और वेहोश हो जाता है
34:30क्या बता सकते हैं आप और और वहां पर जो लोग सम्मिलित होते हैं शरीक होते हैं वो बिलकुल आपको
34:37यही बताएंगे कि यह सब करके यहां जा करके हमारा दुख कम हो जाता है
34:46जो कुछ भी आपको बेहोश करदे जीं जोब जोब जोब जोब जोबगे तो ना कुछ याद रह जैएगा ना कुछ
34:56समझ में आएगा
34:58खोपड़ा ही सुनन पड़ जाएगा तो दुख भी कहां बचेगा बात आरी समझ में या कर्म कांड में इतने व्यस्त
35:07हो जाओ
35:08कि प्रश्न उठाने की गुंजाईश ही न बचे
35:11अब ये करो, अब ये करो, अब ये करो, अब ये करो
35:14तो सवाल ही नहीं होगा
35:16तो संशय भी नहीं होगा
35:20दुख भी नहीं होगा
35:23ये नशे हैं, ये आध्यात्मिक नशे हैं
35:30सदा से
35:34वास्तविक अध्यात्म की पहचान यही बताई गई है
35:38कि वो आपको पुराने सहारों से आजाद करता चलता है
35:45उसमें कई बार प्रश्ण उठता है
35:47कि कहीं अगर अध्यात्मे ही सहारा बनने लग गया नया सहारा तो
35:51मैंने अपनी पुरानी बैसाखियां त्याग दी
36:01समझदारी का नहीं है क्यों कि अध्यात्म ने पुरानी बैसाखियां नहीं हटाई है
36:08अध्यात्म ने उसको ही पदल दिया है जो बैसाखियां मांगा करता था
36:13अध्यात्मत का काम विशय हटाना थोड़ी है जीवन से
36:16उसका प्राथ में एक मूल काम क्या है
36:19करता को ही पदल देना
36:22तो आप कई बार ये एक दिमागी मॉडल लगाते हैं
36:25और आप कहते हो देखो अध्यात में क्या होता है न
36:28कि पहले बैसाखी होता था
36:30रुपया, पैसा, मनोरंजन
36:31ये सब पुरानी बैसाखी थी
36:34अब नई बैसाखी क्या है definitely, नई बैसाखी है
36:37गुरू और गरंथ
36:39और सुने में ये बात बहुत
36:40intellectual लगती है
36:42कि पुरानी बैसाखियां तो हट गई पर नई
36:44आगई, ये बात ना समझए की है
36:47क्योंकि बैसाखियां तो
36:48हटाई ही नहीं गई है
36:50वो
36:52जिसको किसी बैसाखी की जरूरत नहीं
36:55उसे उसका स्वरूप याद दिलाया गया है
36:59अब बैसाखीया अपने आप गिर गए है
37:01किसी ने हटाई नहीं है
37:03अध्यात्म का काम ये नहीं है
37:04कि वो आपकी जिन्दgraduate के वेष्यों की सफाई कर दे
37:06वो सफाई होनी होगी तो होगी, नहीं होनी तो नहोगी, तो अध्यात में खुद कैसे बैसाखी बन जाएगा, जिसने आपको
37:17याद दिला दिया कि तुम वो हो जिसे कोई बैसाखी चाहिए नहीं, और वो एक बार में नहीं होता है,
37:22वो भी शने शने उठने वाली घटना भी,
37:24एक ascension भी एक गती से होता है
37:26ना एक क्रमिक घटना है वो भी
37:29जैसे जैसे आपको याद आता जाता है
37:30कि आप वास्ताव में कौन हो
37:32और ये ये तो मतलब मैं क्यों हो
37:34जबरतस्ती ये सब ढो रहा हूँ
37:36आप छोड़ते चलते हो
37:37जब आप ये सब छोड़ते चलते हो
37:39तो आप कोई दूसरी चीज़ काई के लिए पकड़ लोगे
37:41आपकी तो पूरी यात्रा ही
37:43अपनी ही ताकत को याद करने की है
37:47तो ये खत्रा बिलकुल नहीं होने वाला है
37:50कि अध्यात स्वयम एक बैसाखी बन जाए
37:55कि गीता बैसाखी बन जाए
37:56मैं बैसाखी बन जाओं
37:58ये नहीं होने वाला है
38:00जो काम बैसाखीया तब बनती है
38:03जब आप आप रह जाओ
38:06आपके भीतर
38:07जो दुरबलता की भावना है
38:09वो वैसी ही रह जाए
38:10और आप से कहा जाए, इस brand की बैसाखी नहीं, किसी दूसरे brand की पहन लो, तो अब बैसाखी तो
38:19बदल गई, पर फिर भी कायम है, बैसाखी क्यों कायम है?
38:25क्योंकि करता कायम है
38:27क्योंकि दुर्बलता कायम है
38:29अध्यात्म आपकी
38:31बैसाखियों को नहीं
38:33आपकी आइडेंटिटी को
38:34चुनौती देता है
38:37आइडेंटिटी को ही
38:40तो वो
38:40नशा नहीं बन सकता
38:41वहाँ पर यह नहीं चल सकता कि अभी यह नहीं
38:44अभी यह ट्राए करो, अभी यह ट्राए करो, भजन क्लबिंग ट्राए करो, अभी यह सब हो, नहीं चल सकता, और
38:51अगर यह चल रहा है, तो फिर यह तो एक नकली दुरूबलता का域 � go round है, जो हो रहा
38:57है, अच्छा तो होता क्या है, क्या होता है,
39:02जब हमको दिखने लग जाता है कि हमें किसी बैसाखी की ज़रूरत नहीं
39:10तो क्या हमारी जिंदगी से जो गुरु है वो गायब हो जाता है
39:15कि वैसे जैसे हमारी जो बैसाखियां थी वो हट गई
39:18जब वे पता चला कि मैं दुरबल हुई नहीं
39:20मैं जूट मूटी बैसाखी का सहारा मांग रहा था
39:23तो बैसाखियां तो मेरी हट गई
39:25तो क्या उसी तरीके से गुरू भी हट जाता है
39:29ग्रंथ भी हट जाता है
39:30यह सवाल उठेगा
39:33नहीं उस तरीके से नहीं हट जाता है
39:34दूसरे तरीके से हटता है
39:36कैसे हटता है
39:38उसका स्वरूब बदल जाता है
39:40आप उसको जो समझते थे
39:42वो वो नहीं रह जाता
39:46जो बहुत दुर्बल है
39:48उसके लिए जो गुरू भी होगा उसका
39:51वो बस सहारा देने वाला हाथ होगा
39:54और जो सशक्त होना शुरू हो जाता है
39:58उसके लिए गुरु भी
40:00फिर साथी जैसा होने लग जाता है
40:04जो बहुत दुर्बल है
40:06वो गुरु के युद्ध में सैनिक तो नहीं बनेगा न
40:10तो उसके लिए गुरु बस कौन है
40:12एक सेवियर
40:17कि जिनों ने हमें बचा लिया
40:19कहेगा हे तारनहार, हे तारनहार
40:21तुमने हमें तार लिया
40:24आप जब अध्यात्मिक अपनी यात्रा में आगे बढ़ते हो
40:27तो फिर गुरु को तारनहार नहीं बोलते
40:29उसको बोलोगे सेनापती
40:32अब मैं उतना दुरबल नहीं हूँ
40:48साथी है तू
40:49और कहने � warmer कहते हैं या नहीं जानता
40:52कि और आगे बढ़ते हो
40:53और गुरु से बात करना चाहते हो
40:55तो कई नजरी नहीं आता
40:58क्यों नजरी नहीं आता
41:01वो आप ही के भीतर चला गया
41:05आप खुजोगे बात करनी है
41:07है कहां गया भी मिले गई नहीं
41:10तो इस तरीके से
41:12गुरु गायब होता है वैसे नहीं गायब होता है
41:14ज़े बैसाखियां गायब होती है
41:15बैसाखियों को तो लात मार के हटा दो
41:17ये बैसाखिया मुझसे जूड बोल रही थी
41:19कि मेरी टांगों में दम नहीं है
41:21अब मैं इन ही टांगों कदम इन बैसाखियों को दिखाती हूँ
41:24एक लात मारी बैसाखी को
41:26बैसाखियां ऐसे हटाई जाती है
41:28गुरू भी हटाया जाता है जीवन से
41:30पर दूसरे तरीके से हटाया जाता है
41:32कैसे हटाया जाता है
41:33कि उसका रूप परिवर्तित होता जाता है
41:37रूप परिवर्तित होता जाता है
41:39आप जो हो उसके अनुसार उसका रूप होता है
41:42और जब आप पूरी तरह मुक्त हो जाते हो
41:44तो फिर वो अरूप हो जाता है
41:45उसका कोई रूप नहीं बचता
41:47आप उसको रूप में खोजोगे और कहीं नहीं दिखाई देगा
41:51समझ में आरी बात
41:52तो हटती बैसाखिया भी है और हटता
41:55गुरू भी है
41:56पर बैसाखिया हटती है लात खा के
41:58और गुरू हटता है
42:00फ्रिदय बन के
42:01अब वो भीतर चला गया इस लिए नहीं दिखेगा
42:03बैसाखिया इस लिए नहीं दिखती क्योंकि अब
42:05पप तो कैसे दिखेगी भग गई
42:11आरी बात समझ में
42:16धनिवाद धर
42:43कर दो तो साइन कर दो तो साइन से क्या होगा तुमने ये मेरी किसी शक्ले मेरी बनाई है
42:52साइन बना दो पर ये फोटो किसी तो बताओ कर ले
43:02दो कि अच्छा ये जदो हजूरों प्याला पीता जदो हजूरों प्याला पीता
43:17प्याला पीता चुछना रहा जवाब सवाग
43:23अचारे जी आप जब एक्जाम्पल दे रहे थे ना, मेरे मन में यही भजन चल दा
43:52अचारे जाने मोरा, जो मैं बॉरा तुम और आना
44:00कभीरे का मरम राम जाना, लोग मरी कभीर आणा
44:08कभीरे का मरम राम जाना, लोग मरम का जाने मोरा
44:17मैं बोरी मेरे राम बरता
44:22पाय चारजी
44:24चारजी, I love you
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