00:00हमने तो बच्चों को पूरी छूट दे रखी है
00:16तुम्हारी अपनी जिंदगी में तो हमें कहीं भी मुक्ति के कोई लक्षर दिखाई नहीं देते
00:20तो तुम्हें अपने बच्चों को मुक्त कैसे छोड़ दिया
00:23एक होता है किसी को सीधे सीधे ही कैदी बना लेना
00:27और एक होता है कैदी बनाना भी
00:28और यह अहसान भी जताना कि तू तो आजाद है
00:32तो पहले तो अहसान जता हो
00:33हमने अपने बच्चों को पूरी छूट दी है
00:35और दूसरे उनको इस भ्रहम में डाल दो
00:38कि तुम आजाद हो
00:39जब वो इस भ्रहम में है कि आजाद है
00:54मैं छूट दे रहा हूँ ये वैसे ही मैं पतंग को ढील दे रहा हूँ
00:56मने डोर तो मेरे हाथ में अभी भी न
00:59आज छूट दे रहा हूँ तो कल छूट
01:02मुक्ते, स्वतंतरता, आजादी
01:04ये देने वाली चीज़े नहीं होती है
01:06जिने प्रेम होता है आकाश्ते
01:08वो ऐसी परिस्थितिया निर्मित करते हैं
01:11कि धूआ कटे, वो ये नहीं कहते हमने बच्चों को छूट दे दिया
01:14बच्चों का धूआ काटा नहीं है छूट दे दिया
01:17वो जा करके कहीं कुछ करेंगे उल्टा पुल्टा
01:20और फिर तुम कहोगे ये छूट ज्यादा देना ठीक होता नहीं है
01:24चलो छूट वापस लेते हैं
01:26बात समच में आ रही है
01:28अपने आपको तो बहुत शेष्ट बता दिया
01:30ये कहकर कि हमने छूट दे रखी है
01:33छूट का मतलब तुम अपनी जन्दगी में कभी नहीं जानते थे
01:37तो अपने बच्चों के लिए क्या जानोगे
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