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  • 17 hours ago
नवद्वारों का पिंजरा तामे पंछी पौन
रहने को अचरज है, उड़ै अचंभा कौन?
पिंजरा माया है, अचरज माया है, अचंभा भी माया है। द्वार सदा खुले हैं किन्तु पंछी उड़ नहीं पाता। यही माया है। यही माटी की इस देह की कहानी है। कैसा खिलौना है। पंचकोश और 9 द्वार। दो आंख-कान-नाक (6), मुंह, गुदा, मूत्र द्वार (9)। ये सारे पंचतत्त्व के प्रतीक हैं, दैहिक कर्मों के संचालक हैं। सभी स्थूल प्राणी-युगलों में कार्य करते हैं। क्षर सृष्टि के अंग हैं और प्रकृति के नियंत्रण में कार्य करते हैं। इनके भीतर ही प्राण रूप आत्मा (पंछी) का वास है। शरीर ही ब्रह्माण्ड शृंखला में सुनें पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी का यह विशेष लेख- दशम द्वार : चेतना का अवतरण

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Transcript
00:28नमस्कार
00:34द्वार सदा खुले हैं, किन्तु पंची उड़ नहीं बाता, यही माया है, यही माटी की इस देह की कहानी है,
00:42कैसा खिलोना है, पंच, कोश और नौ द्वार, दो आख, कान, नाख, मुहुगुदा, मोत्र द्वार, यह सारे पंचे तत्व के
00:51प्रतीख हैं, देही कर्मों के सं�
00:53जालक हैं, सभी स्थूल प्राणी यूगलों में कारे करते हैं, शर्ष्ष्टी के अंग हैं, और प्रक्रती के नियंत्रण में कारे
01:00करते हैं, इनके भीतर ही प्राण रूप आत्मा पंची का वास है, आत्मा भी इस्त्री पुरुष में समान है, देह
01:07भी समान है, फिर इस्त्
01:22,
01:22,
01:22,
01:23,
01:23,
01:23AUTAGNURABANGASYYA KAKA BRAHMINKA MARG HOOTA HAYE
01:24ISKA JIVANKI DHANIC GATIVIDHIYON SE JUDAURAB NAHIN HOOTA
01:28ISKKO DAS BAIN DWAAR KAHA JUATA HAYE
01:30BRAHIN MEH ISI MARG SEY STRI SHAREER MEH PRAVEYASH KARTA HAYE
01:34OR ISI MARG SEYONI ROOP SHAREER DHARAN KARKKE BAHAR AATTA HAYE
01:38YAH MARG CHANDDRAMA DWAARA NILLANTRIT RHETA HAYE
01:42MAASIK AARTM HIN DWAAR KHOLTA HAYE
01:44JOO CHANDRIS MAASSE NILLANTRIT HAYE
01:47AARTMAS SURYANSH HAYE
01:49चंद्रमा सूर्य पत्नी हैं
01:50ये दमपती ही अग्नि सोमात्मक यग्य से ब्रह्म का आवान करते हैं
01:55यही बीज योशागनी में आहुत होकर सूक्ष्म शरीर में प्रतिष्ठित हो जाता है
02:01चांदोग्य उपनिशद में पंचागनी का वर्णन है
02:04जो जीवात्मा की सूक्ष्म से स्थूल तकी यात्रा का विवर्ण है
02:09इस्त्री शरीर में पंचागनी का अंतिम पड़ा होता है
02:12मंत्र कहता है
02:13योशा वाव गोतमा अग्निस तस्या उपस्थ एव समिद्य दुप्त मंत्रयते
02:18सर धुमो योनिर अर्चिर तर्यन
02:21अंतह करोती ते अंगारा
02:24अभिननदा विस्फुलिंगा हा
02:26तस्मिन ने तस्मिन अग्नो देवा रेतो जुमती
02:29तस्या आहुतेर गर्भः संभवती
02:32अर्थात है गोतम
02:33इस्त्री ही अग्नी है उसका उपस्थ समिदा है
02:36शरीर के रोम धुआ है
02:38योनि ज्वाला है
02:39क्रिया अंगारे है
02:40सुख चिनगारिया है
02:42देवता इस अग्नी में रेत की आहुती देते है
02:45संतान पुरुष उत्पन होता है
02:47योशा वा अग्निर गौर्तम
02:49तस्या उपस्थ एव समिल लोमानी
02:52धूमो योनिर अडची
02:54ब्रहदारन्यक उपनिशत का भी यही मंतव्य है
02:56दोनों ही मंत्र लगभग
02:58एक सार्थ कर रहे है
02:59इस्त्री शरीर वेदी है
03:01अग्नी समिधा धुआ
03:03ज्वाला तो स्थूल शरीर के अंग है
03:06अंगारे विक्यान और सुख तो आनंद है
03:09जिसके अभाव में ज्रिष्टी संभव नहीं है
03:11माया का यह संसार इस्त्री के भौतिक शरीर का अंग तो है
03:16किन्तु इसके क्रियाए स्वतंत्र है
03:18क्योंकि प्रजिनन की सभी सूश्म क्रियाएं चंद्रमा पर आधारित है
03:24मासिक चक्र
03:25चंद्रमास तथा मंगल ग्रिह के प्रभाव से होता है
03:28चंद्रमा मन का स्वामी है
03:30संतान के लिए मन चंद्रमा का शक्ति युक्त पूर्ण शांत प्रसन होना आविश्यक है
03:35चंद्रमा जल तत्व और भावना का स्वामी भी है
03:39इस्त्री शरीर भी जल प्रधान, रक्त, रज, गर्भ, द्रव्य आदी होता है
03:45चंद्रमाही पितर लोक भी है, आत्मा गर्भ में चंद्रमा के माध्यम से आता है
03:50चंद्रमाही अत्री पुत्र है, आत्तव ही ज्वार भाटा के सिध्धान्त से प्रभावित होता है
03:56पूर्णिमा अमावस्या भी मन के संचालक है, पूर्णिमा को भावनाय उद्दिप्त रहती हैं और रक्त प्रवाह तेज, अमावस्या को मानसिक
04:05चिंता और तनाव, चंद्रमा प्रजनन क्षेत्र का कारक है, शिष्टी का मात्री भाव है, कमजोर चंद्रमा इस्त्री रोग क
04:15astra dehan apara prakrati dua tathar dhasmah dhar para prakrati ka kshetra hoonay se sūkšnuk riyao ka kshetra hai dhasmah
04:23dhwar istri ki apani divyata ki swatantra virasat hai is par istri ki devatwa kahi eqadikar rehatta hai
04:30पुरुष शायद इस सथ्य से सर्वथा अन्भिग्य ही रहता है कि इस्त्री शरीर का यह क्षेत्र मूल शरीर से स्वतंत्र
04:38कारे करता है
04:39जहां इस थूल शरीर पंज भूतों से निर्मित जड़ पिंड है वहीं इह स्रिष्टी का प्रवेश द्वार है
04:46इसके माध्यम से नई चेतना जगत में प्रवेश करती है ब्रह्म इसी मार्ग से जीव रूप में अवतरित होता है
04:53अतहर दिव्य मार्ग है इस्त्री रूप में माया निराकार ब्रह्म को साकार रूप देती है
04:59गर्भस्त चेतना पर माके संसकार, भावनाय और विचार सीधे प्रभाव डालते हैं
05:06शांत सात्विक योग मई इस्त्री का गर्भ एक तपोव हुई है
05:10यहीं से उच्च कोटी का आत्मा संसार में प्रविष्ट होता है
05:14इस्त्री का दस्वान द्वार केवल जैविक न होकर चैतन्य का प्रवेश निकास द्वार है
05:20ब्रह्म यहां एक नए आत्मा के रूप में आता है
05:23इस्त्री उस चेतना को कोशित करके जगत के लिए एक दिव्य उपहार बनाती है
05:29वैज्यानिक द्विष्टी से शरीर एक अध्भुत जैविक प्रणाली है
05:32जिसमें स्रीजन की क्षमता प्रकृति का चमत्कार है
05:36चेतना पूरुष और नारी प्रकृति है
05:39चेतना द्रिष्टा निरबुण आधार है
05:42प्रक्रतिस रिजन की क्रियाशील उर्जा और गती है दस्वे ब्रह्म द्वार पर शक्ति चेतना के अवतरण का माध्यम बनती है
05:51अन्य और नाद का युगल सगुन निर्गुन सूक्ष्म स्थूल का पूरक युगल है
05:57केवज शरीर की पुष्टी से चेतना जागरत नहीं होती इसके लिए नाद चाहिए ब्रह्म का इसपंदन ही नाद है
06:04धनी रूप में चेतना का प्रवा है गर्भ में शिशु पहले नाद माकी धरकन धनी संगीत आधी के माध्यम से
06:12चेतना को संसकारित करता है
06:14आने वाली चेतना को जगत के लिए तैयार प्रता है
06:19नाद ही चेतना का भूजन है चेतना की माता है
06:23इस्त्री अन है पुरुष नाद इस्त्री मूर्थ आधार पोशन और धारन करने वाली भूमी है
06:29पुरुष अमूर्थ स्पन्दन चेतना का स्वर है, अन बिना नाद जड़ है और नाद अन के बिना निराधार
06:40एक और हमारे शास्त्रों का यह उद्घोश है और दूसरी और वह विलासिता का साधर बनती जा रही है
06:48इस्त्री माया है, ब्रह्म की शक्ती है, शक्ती चेतना के बिना जड़ है, शक्ती के बिना चेतना अव्यक्त है
06:55इस्त्री दो स्तरों पर जीती है, इस थूल भी सूक्षनों की, उसकी दिवयता का आधार भी उसके दो शरीर ही
07:02है
07:02हम पढ़ चुके हैं कि विवा के बाद इस्तरी का आत्मा पूरुषात्मा से युक्तु होकर सूक्ष मुस्रिष्टी जीवात्मा का अवतरन
07:10जगत में संभव करते हैं
07:12इस्तरी गर्भस्त शिशु की देह का निर्मान स्वयम की देह से ही करती है
07:17वास्तव में तो संतान का शरीर माता ही है
07:20वही जीव के आत्मा को संसकारित करती है
07:24अभिमन्यू बनाती है
07:25अंतर ज्यान और परोक्ष भार्षा भी उसकी दिव्यता का प्रमान है
07:29परोक्ष प्रिया इभी देवाहा कहा गया है
07:33नमस्कार
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