00:00तुम वही हो ना जो रात में टिक टॉक पर बैठते हो और दो घंटे लगा देते हो सोने से
00:04पहले ये तुमारे समय की कीमत होती तो तुम सोशल मीडिया पर इतना समय कैसे लगा रहे होते तुम अपने
00:14बाबू सोना से थाना थाना कैसे कर रहे होते चार चार घंटे तक तुम �
00:18चैनल लगा करके वेर्थ चीज़ें देखते रहते हो कभी कुछ न्यूज चैनल लगाया कभी नेट्फिक्स लगी और उस पर एक
00:23से एक बेहुदगी तुम देखे जा रहे हो और गंटों गंटों दिनों दिनों हफतों हफतों चल रहा है यह तुम्हारे
00:29समय की कीमत है लेकिन �
00:31बेहां जब ट्रेनमे और फ्लाइ्ट में चुनन ना होता है तो मुझेित �ुम कहते हो हम तो इतने बड़े आत्मी
00:35है कि हमारे एक घंटे की बहुत कीमत है हमें तो फ्लाइट से जाना है तुमारे घंटे की अगर कीमत
00:41है तो वो बात तुमारी
00:43जिन्दगी के अन्य पक्षों में क्यों नहीं दिखाई दे रही
00:46फ्लाइट का ट्रिकर तुम सिर्फ इसलिए अफोर्ड कर रहे हो बैटा क्योंकि सस्ता है
00:49उस पर एक जबरदस्त ग्रीन टैक्स लगना चाहिए
00:53यह वो ग्रीन टैक्स लग गया होता तुम फ्लाइट पर बिलकुल नहीं चलते
00:55तब तुम बिलकुल हसते हसते राजी खुशी जाके ट्रेन में या बस में बैठ जाते
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