00:00राधी एक कृष्ण की जोति आलोकिक तीनों लोक में छाए रही है
00:10भक्ती विवश एक प्रेम पुजारिन फिर भी दीप जलाए रही है
00:22कृष्ण को गोपुल से राधे को
00:29कृष्ण को गोपुल से राधी को बरसान से बुलाए रही है
00:38दोनों करो स्वीकार कृपा कर जोगन आरति गए रही है
00:45दोनों करो स्वीकार कृपा कर
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