00:00Siddhэn шурургарте хэм.
00:01Аж хэм ээк ээсси дил дэхла дэнээ ваали гхатна ка вишлэшн карны ваалэ хэм,
00:05ёэ тэээ мусури ки вааадьио сэ.
00:07Хэм яхаа сирф кои аам каааня нэхи суннэ ваалэ хэ,
00:10балкьи татхио, тайм лайнз, ауэр пэтэнс кэ за риээ,
00:14ис пурэ гхатна крамко стэп бай стэп дикоад карэнгэ.
00:17Їэ гхатна бута ти хэ,
00:18कि जब modern arrogance का सामना अंजान और पुरानी ताकतों से होता है
00:22तो उसके परिणाम कितने भयानक हो सकते हैं
00:25हर एक detail पर ध्यान दीजेगा
00:27क्योंकि यहां हर छोटी कड़ी एक नया रहस्य खोलती है
00:31जरा कलपना कीजे, चारो तरफ घुप अंधेरा है
00:35सामने कोई ऐसी चीज खड़ी है जो इस दुनिया की लगती ही नहीं
00:39और उससे बचने का सिर्फ एक ही तरीका है और वो है बिल्कुल शांत रहना
00:44लेकिन क्या होगा अगर आपका अपना डर, आपकी खुद की तेज धड़कने
00:49या घबराहट में निकली एक चीख ही आपको शिकार बना दे
00:52आज हम बिल्कुल यही समझेंगे
00:54ये केस सिर्फ एक लोकल लेजन नहीं है
00:56बलकि इनसानी डर और मनो विज्ञान का एक बेहट डरावना खेल है
01:00चलिए इसमें थोड़ा डीटेल में जाते हैं
01:03इस पूरे घटना क्रम का स्ट्रक्चर समझना जरूरी है
01:06शुर्वात होती है धीरज के उस पहले अनुभव से
01:08जो उसने अपने चाचा के साथ जिया था
01:10फिर आता है लगभग डेर साल का लंबा फासला
01:13जहां जिंदगी थोड़ा आगे बढ़ जाती है
01:15और अंत में आता है वो मनहूस शनिवार का दिन
01:18जब एहंकार और एक बेकार की जिद के कारण
01:21वही डर दुगनी ताकत से वापस लोट कराता है
01:24ये टाइम लाइन हमें बताती है कि कैसे एक भूली हुई घटना
01:27अचानक एक भयानक रात में तबदील हो गई
01:30तो सबसे पहले उस पहले अनुभव को देखते हैं
01:32शाम का वक्त था
01:34धीरज और उनके चाचा मसूरी के एक बिल्कुल सुनसान ट्रेकिंग पॉइंट पर टहल रहे थे
01:38तब ही करीब सौफ फुट की दूरी पर उन्होंने एक अजीब सा द्रिश्य देखा
01:43एक लड़की थी सफेद कपड़ों में
01:45लेकिन सबसे डरावनी बात ये थी कि उसके पैर ही नहीं थे
01:49वो हवा में तेर रही थी और उसके कपड़े हवा में ऐसे उड़ रहे थे
01:53जैसे वो कोई साया हो
01:54वो बिलकुल सीधी चलती हुई आई और सीधे गहरी खाई में गिर गई
01:58वो भी बिना किसी आवाज के
02:00धीरज और उसके चाचा इस हद तक डर गए कि वहां से भाग कर सीधे अपने होटेल रुके
02:05होटेल वापस आकर जब उन्होंने सांसे भरी और वहां के ओनर को ये पूरा किस्सा सुनाया
02:11तो इस एंटिटी के कुछ नियम निकल कर आए
02:14और ये नियम इस पूरे विशलेशर का सबसे बड़ा हिस्सा है
02:18पहला नियम वो आत्मा पूरी तरह से अंधी है
02:22दूसरा वो देख नहीं सकती पर सुन बहुत तेज सकती है
02:26यानि वो सिर्फ आवाज का पीछा करती है
02:28अगर वहां खामोशी है तो आप सुरक्षित है
02:31और तीसरा नियम जब भी वो आसपास होती है
02:34तो उसके चलने की आवाज नहीं आती
02:36बलकि एक अजीब सी खोकली डरावनी ध्वनी आती है
02:40और ये ध्वनी आम बिलकुल नहीं है
02:42तक तक तक
02:44होटेल ओनर ने बताया कि ये आवाज बिलकुल ऐसी होती है
02:47जैसे किसी सक्त सतह पर लकडी का चमच मारा जा रहा हो
02:51ये इस आत्मा की एक ऐसी पहचान है
02:54जो आज भी वहां के लोकल्स के दिलों में खौफ बिठा देती है
02:57सोचिए अंधेरे में आसपास कोई नहीं है
03:00और सिर्फ ये खोकली ध्वनी आपके करीब आती जा रही है
03:03इस डरावनी घटना के ठीक डेर साल बाद
03:06इस मामले में दो अलग-अलग विचारधारा वाले किरदार सामने आते हैं
03:10एक तरफ है धीरज
03:11धीरज अब अंजान ताक्तों का सम्मान करना सीख चुका है
03:14क्योंकि उसने सच्चाई को अपनी आँखों से देखा था
03:16पर दूसरी तरफ उसका नया दोस्ट सुशान्थ है
03:19सुशान्थ एक अमीर जैन जी कॉलिज स्टूडेंट है
03:21जिसे ये भूत प्रेट की कहानिया बड़ी अनकूल लगती है
03:24वो धीरज का मजाक उड़ाता है
03:26और कहता है कि ये सब बातें बैकवर्ड लोगों की होती है
03:29इन दोनों की मनुस्थिती का ये फर्क ही आगे चलकर
03:32सबसे भयानक ट्विस्ट लाने वाला था
03:34अब देखते हैं कि ये इगो क्लैश कैसे एक खतरनाक मोड लेता है
03:38अहंकार को हमेशा सुबूत चाहिए होता है न
03:41सुशान्त अपनी जिद पर अड़ गया कि अगर ऐसी कोई आत्मा सच में है
03:45तो उसे सुबूत चाहिए
03:46उसने तुरंत अपनी बाइक निकाली और शनिवार की दोपेशर दोनों निकल पड़े सीधे मसूरी
03:51वो ठीक उसी होटेल में रुके
03:53धीरज ने बहुत मना किया पर सुशान्त उसी ट्रैकिंग पॉइंट पर जाने की जिद पर अड़ा रहा
03:58यहां तक कि उसने होटेल ओनर की हर एक चेतावनी को पूरी तरह से इग्नौर कर दिया
04:02रात को बाहर निकलने से ठीक पहले होटेल ओनर ने उन्हें एक आखरी चेतावनी जरूर दी थी
04:07उसने कहा था कि वो अंधी है पर अगर तुमने जरासी भी आवाज की तो वो सीधे तुम्हारी तरफ मुड
04:13जाएगी
04:14ओनर ने साफ समझाया था कि रात के वक्त वहाँ अकसर वही द्रिश्य बनता है
04:18वो घूमती है और खाई में किरती है अगर शान्ती बनाए रखोगे तो वो किसी को नुकसान नहीं पहुँचाएगी
04:24लेकिन सुशान्त ने बस एक एहंकारी हसी दी उसका यही सोचना था कि भाई अगर वो अंधी है तो वो
04:31किसी को देखेगी ही कैसे
04:32रात के आठ बच चुके थे घुप अंधेरा चागया था और दोनों उसी ट्रेकिंग पॉइंट पर खड़े थे
04:39उनके हाथ में सिर्फ एक फ्लैशलाइट थी आसपास पूरा पहाड़ी इलाका, ठंडी हवा और एक ऐसी खामोशी जो बता रही
04:47थी कि कुछ बहुत बुरा होने वाला है
04:49सुशांत जो कुछ देर पहले तक इस डर का मजाक उड़ा रहा था, अब थोड़ा असहज हो गया था
04:54लेकिन इगो इतना बड़ा था कि वो अपनी गल्ती मानने को तयार नहीं था
04:59और तब ही वही हुआ जिसका डर था
05:01एक चोड़े रास्ते के दूसरे एंगिल से अचानक एक लड़की उभरी
05:05वही सफेद कपड़े और उसके पैर नहीं थे
05:08उसके आगे बढ़ने पर किसी तरह के कदमों की कोई आवाज नहीं आ रही थी
05:13सिर्फ एक ही धोनी उस सन्नाटे को चीर रही थी
05:16एक खोखली, रोंगटे खड़े कर देने वाली आवाज
05:20जो धीरे-धीरे उनकी ही तरफ बढ़ रही थी
05:23धीरज ने तो फिर भी खुद को संभाल लिया
05:25वो जानता था कि इस वक्त शांत रहने में ही दोनों की भलाई है
05:28लेकिन सुशांत, जिसने कभी ऐसी किसी चीज की कलपना तक नहीं की थी
05:33उसके तो होशी उड़ गए
05:35और इस पैनिक में आकर उसने उस एंटिटी का सबसे बड़ा और सबसे जरूरी नियाम तोड़ दिया
05:40वो बुरी तरह चीख पड़ा
05:42उसकी चीख उस अंधेरी वादी में बहुत दूर तक गूंच गई
05:45जैसे ही सुशांत की चीख निकली, पूरा सीन बिलकुल पलट गया
05:49वो आत्मा वहीं अचानक रुख गई
05:51बिना आखों के भी उसने अपना चेहरा ठीक उन दोनों की तरफ घुमाया
05:55और अगले ही पल वो जो धीमी धीमी ध्वनी थी वो अचानक भयानक रूप से तेज और आक्रामक हो गई
06:01तक तक तक तक वो आत्मा बहुत तेजी से सीधे उनकी तरफ आ रही थी
06:07उस अंधी शिकारी को अब उसकी मनजिल अपना शिकार मिल चुका था
06:11अब यहां जो चीज सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली है वो है सर्वाइवल इंस्टिंक्ट
06:16जब आपका अपना ही डर, आपकी अपनी ही चीख और धड़कने आपकी लोकेशन बता रही हो
06:22तो इन अंधेरे पहाडों में कोई कहां और कैसे छिपेगा
06:26धीरज को समझा गया था कि अब यहां से जान बचा कर भागना ही अकेला विकल्प है
06:31पर दिक्कत ये थी कि अंधेरे में पहाडों पर भागना सीदेख हाई में कूदने के बराबर था
06:36किसी तरह जान बचाते हुए वो एक बड़ी इसी चटान के पीछे जा चुपे
06:41वहाँ उनकी हालत बेहद खराब थी
06:44सुशांत का एहंकार पूरी तरह तूट चुका था
06:47वो बुरी तरह रो रहा था और घबराहट में माफिया मांग रहा था
06:51धीरज ने किसी तरह अपने हाथ से सुशांत का मू दबाया ताकि उसकी सिस्कियां बहार न चली जाएं
06:57और वो आत्मा वो ठीक उस चटान के आसपासी घूम रही थी
07:01जैसे ही थोड़ी सी अवाज होती वो तुरंत उस तरफ मुड जाती
07:05दोनों ने डर के मारे अपनी आँखे इतनी कस के मीच ली थी
07:10ताकि गलती से भी उस बिना पैर वाली आत्मा का डरावमा चहरा ना दिख जाए
07:14ये सिलसिला पूरे देड़ घंटे तक चला
07:17जिहां पूरे एक दशमलव पाँच घंटे तक वो उस चटान के पीछे सांसे रोके और आँखे बंद किये बैठे रहे
07:25हर बार जब वो टक-टक की आवाज करीब आती उनकी जान जैसे हलक में आ जाती थी
07:30ये देड़ घंटा किसी लंबे नरक जैसा था
07:34क्योंकि एक आहट एक छोटी सी गलती और मौत तै थी
07:38जैसे ही वो आवाज थोड़ी दूर गई धीरज ने फैसला किया कि अब यहां छिपे रहना किसी चमतकार का इंतजार
07:45करना है जो नहीं होगा
07:46उन्होंने अपनी जगह छोड़कर सीधे होटेल की तरफ पूरी ताकत से दौड़ लगा दी
07:51लेकिन मुसीबत अभी भी वहीं थी
07:54वो आत्मा बहुत तेज सुन सकती थी
07:56उनके तेजी से भागने के कदमों की आवाज ने उसे दुबारा आकरशित कर लिया
08:00और जब तक वो भाग कर होटेल नहीं पहुँचे वो टक-टक की आवाज उनके बिलकुल पीछे लगभग उनकी गरदन
08:07पर उन्हें महसूस होती रही
08:08खौफ इस हद तक था कि भागने में उनकी फ्लैशलाइट तक गिर गई पर किसी ने मुड़कर देखने की हिम्मत
08:14नहीं की
08:14उनकी सांसे बुरी तरह फूल रही थी टांगे काप रही थी और दोनों गिरते पढ़ते होटल के रिसेप्शन पर पहुँचे
08:21रात की ड्यूटी पर एक नया रिसेप्शनिस्ट बैठा था दोनों ने घबराते हुए उसे सारी बात बताई
08:27पर उस रिसेप्शनिस्ट ने जो कहा उसने उनके बचे कुछे होश भी उड़ा दिये
08:31उसने कहा कि वो चुडैल आम तोर पर उसी ट्रैकिंग पॉइंट पर रहती है
08:36किस्मत अच्छी थी जो उसके पीछे पढ़ने के बाद भी तुम दोनों जिन्दा वापस आ गए
08:40वो दोनों इस कदर खौफ जदा थे कि रात के तीन बज़े तक सो नहीं पाए
08:45और सुबह साथ बचते ही होटल से चेक आउट करके हमेशा के लिए उस जगा से चले गए
08:49तो इस विशलेशन का सबसे एहम पॉइंट ये निकल कर आता है
08:54कि कैसे एक रात ने एक इंसान को पूरी तरह बदल दिया
08:58जो सुशान्त पहले ढंके की चोट पर कहता था कि भूत प्रेत नहीं होते
09:02और ये सब बैकवर्ड लोगों की बाते हैं
09:04अब उसके मन में इन अंजान ताकतों के लिए दर और सम्मान दोनों पैदा हो गया था
09:09उसका वो सारा एहंकार और मॉडन बनने की चाहा
09:13मुसूरी की उस ठंडी और अंधेरी रात में हमेशा के लिए दफन हो चुकी थी
09:17इस घटना ने साबित कर दिया कि जिन चीजों को हम नहीं समझ सकते
09:21उन्हें थोड़ा सम्मान और दूरी देना ही समझदारी है
09:24तो अब हम इस विशलेशन के अंत पर आ चुके हैं
09:27पर यहां एक बहुत गहरा सवाल छूट जाता है
09:29क्या हमारा ये आधुनिक एहंकार और ओवर कॉन्फिडेंस हमें इस दुनिया के उन पुराने और अंजान नियमों के प्रती अंधा
09:36कर देता है
09:37क्या सच में हर चीज को साइन्स और लॉजिक पर तोला जा सकता है
09:41या कुछ चीजें ऐसी हैं जिनने उनके हाल पर छोड़ देना ही बहतर है
09:45अगली बार जब कभी भी एक सुनसान पहाडी रास्ते पर चलें और अचाना कोई खोकली आवाज सुनाई दे तो याद
09:51रखियेगा
09:51हो सकता है कि वहाँ कोई और भी हो जो सिर्फ आहट सुन रहा हो
09:56उमीद है ये विशलिशन आपको पसंद आया होगा
09:58ऐसे ही और रोचक रहसियों को समझने के लिए जुड़े रहिये
10:21झाल झाल झाल झाल
11:16झाल झाल
11:21झाल झाल झाल
Comments