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  • 7 weeks ago
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00:00भूत प्रेत होते हैं क्या जो भूत प्रेत होते हैं या देवता होते हैं इसलिए हर आदमी मरने के बाद
00:05भूत है ये फिर आदमी खुचते हैं कि कमजोर कोई मिल जाए उसमें घुसके हम अपनी इच्छा पूरती करा लें
00:16एक मुसलिम तांत्रीक था तो उससे मजाक में पू�
00:21हमको तो शक खुराई कोई प्रेत हैं कि हम प्रेत हैं अब निम की पेड़ पे रहते हैं पीछे मृत्यू
00:29के बाद जैसे आपने कहा कि वह महिला साथ दिन बाद लौत आई लेकिन तब तक तो शरीर तो जला
00:35दिया जै आपका सामना हुआ है कभी ऐसे भूतों से एक जगह था
00:41जाहाँ पर हम सोते थे वहां रोज आके निश्चित गला दवा था तो उन्होंने क्या किया जल्ली वाजी में एक
00:48पुराना हंटेड हाउस नया कर दिया हम लोग ठायर गये एक दिन हम ने देखा कि बड़ा काला सा आदमी
00:54आके सरीर पे चड़ गया है और दबाने ही कोशिश
00:57करें 15-20 दिनों सोया है वहां मारे पास क्यों हाथ ऐसे जया है पलंग सीधर लिखाई पढ़ने लगा यहां
01:08है कुछ रात भर जो रोना शुरू किया चिलाना शुरू किया
01:23भूत होते हैं क्या देखिए भूत क्यों नहीं होते है
01:26है जो है अभूत है और जो है अभी वह बरतमान है जो आने वाला है भविश है इस लिए
01:44है इसलिए हर आदमी मरने के बाद भूत है कि अब उन भूतों की के टेगरी है कि वह आत्मा
01:57दिब्व है तो देवता माना जाएगा सुक्ष्म
02:07अब उनके कर्मों के हिसाब से उसकी श्रेणी रिश्यों ने बनाए कि यह देवता है और यह पिशाच है तो
02:14यह जिन है तो यह जाकिन है चुरैल है इसका अलग अलग श्रेणी बनाए उन भूतों की सब भूत है
02:22या तो तुरंद जन्म हो जाए जब तक हवा में आप घूमते
02:26रहेते हैं जन्म का इंतजार करते हैं या मोक्षपरापती नहीं हुई है तब तक सब भूत हैं लेकिन मान लिया
02:32कि कोई ऐसा भूत ऐसी केटेगरी में डाला गया जो जिसने बुरे कर्म किये और फिर वो बाद में एक
02:39दुरदान इंसान रहा वो बाद में भूत बना लेकिन
02:45फिर वह कर्म क्यों कर रहा है कि किसी को तकलीफ देना उसको और फिर अगयानी ठोड़े हो गया की
02:52सत्संगी हो इस रीचोडने के बाद जाकिने लगा और कता सुनने लगा तो पुरा कचाहरा ले के गया है और
03:02वो वही कर्म इसले करता इत्ना अत्रिप्त है वो उसको भूख
03:07प्यास है और यह सुक्ष्म सरीर होता है यह बनता है रूप रस गंद इस पर्स शब्द पंचतन मात्रा से
03:17मतलब जैसे पंचतत्तो होता है च्छिति जल पाउग गगन समेरा पंचतत्तो या अधर शरीरा तो उसी तरह से सुक्ष्म सरीर
03:26जिस पे यह टिका हुआ इसके अंदर �
03:30जो बॉड़ी है आत्मा लक्षिट है वो भी एक बॉड़ी के अंदर है उसको इस्टल बॉड़ी कहते है अच्छा सुक्ष्म
03:36सरीर तो सुक्ष्म सरीर भी बनता है किसी तत्तों से लिमेट से वह रूप रस गंद इस पर्स शब्द तेक
03:45है तो यह जो भूत्परेत होते हैं �
03:49इनको पांची जो मेंसे लगाव होता है क्योंकि सरीर को खुराक मिलता है अब अब अगर बत्ती की चर्चा हो
03:56रही थी एक खुस्बू की तो जो देवता होते हैं सुक्ष्म सरीर धारी पीतर लो उनको खुस्बू चाहिए रस मिठा
04:03इसलिए चड़ाए रस भी चाहिए और स
04:06आप सुत्रा सुंदर बनाए सुंदर भी चाहिए शब्द मतलब मंत्र उससे उनको एनरजी मिलते है इसलिए रावन ने क्या कहा
04:15दूज भोजन मक्होम सराधा सबके जाई करहूं तुम बादा ये देवता पितर यतने हैं इनका भोजन हवन सराध पूजा पाठ
04:24यही सब है �
04:25ये बंद करवा दो ये भूखे मर जाएंगे और जो अत्रिप्त होते हैं ये फिर आदमी कोई मिल जाए उसमें
04:34घुसके हम अपनी इच्छा पूरती करा लें तो जैसे आप अपने आत्मा इतने स्ट्रॉंग है एनरजी कि आप पूरे बोडी
04:43को कैप्चिर कि उस दूसरा घ�
04:56अब एक पांडे जी है बकसर के रांची में है अखिलेश पांडे उनके पिता जी एक दिन गटना बता रहे
05:03थे कि हमारे गाओ में भुचपुरी में उन्हें ने का कि हम रह गाओ में एगो
05:11परोशी के यहां संतोसी मात आवे लग ली हैएक इनकी बहूपे संतोसी मात आती थी यह अच्छा लग consumeraw
05:27बोले हम घुमने गए तो एक मुस्लिम तान्तरीक था तो उस से इसे मजाक्न पूछले कि अच्मुच संतुसी माता है
05:36बुला निया हमको तो शक्त हो रहा ही कोई प्रतेक्ष वाद बता रहे हम तो बोले कि तो जाचें कैसे
05:44तो बोले कि पण्डी जी रोगा लोग इनके घर में
05:48हम कैसे घुछ सकता है नहीं कि घार में है और महिला का मामला है बवाल हो जाएगा तो दूसरे
05:55संप्रदाय का आदमी तो बोले एक उपाय है आप आहां आईएगा भीर लगी रहती है अंजान बनके क्या हो रहा
06:02हमको पता है नहीं बुले पांडे जी है क्या मिलना था और बुल
06:18है तो पूशा की संतोसी माता क्यों ने हुए मिठाए उठाए खूब चड़ रहा है और नारियल पानी बहुत मिठा
06:26मिठा लगा इसलिए तो यह भी खूब होता है तो इसमें भी 10% 90% धोखा धवी है देवतानी
06:37होते हैं यह 10% में भी देवतानी प्रेथ होते हैं जो बोलते
06:40में देवी मा हूँ मुर्गा चड़ाओ बोतल चड़ाओ और लोग भविश्च पुछने जाते हैं वहाँ पर यह धोका है और
06:47उस 90% में साइकलोजिकल मरीज होते हैं लोग जो जूट मुट के देवी आने का बहाना करते हैं उनको
06:54सम्मा सब कॉंसिस में यह फीड है कि उनको
06:58कभी घर में सम्मान नहीं मिला है तो कभी ऐसी गलती से फीट आने लगा तो लोग पैर छुने लगे
07:03पानी छिड़कने लगे तो सबकॉंसिस में पकड़ लिया कॉंसिस को पता भी नहीं कि हम यह करते हैं और जैसे
07:11अगर बत्ती जलाया घंटी बजना शुरू हुई आरती ह�
07:16तो थोड़ा सा मैं कन्फ्यूज हो जाती हूं स्वामी जी जब सुनती हूं कि अम्रित्यू के बाद जैसे आपने कहा
07:23कि वो महिला साथ दिन बाद लोट आई लेकिन तब तक तो शरीर तो जलाया गया था उनके बेटे में
07:29लेटरी में थे आने वाले थे इसलिए बरत में र�
07:43आते हैं और परमतपस भी होते हैं वो स्वर्ग भी ठुकरा देते हैं क्योंकि स्वर्ग एक स्थान है जहां क्रेडिट
07:49काड़ लेके जाए नौकरी छोड़के और पूरा खतम कर लीजिए और फिर नौकरी ढूड़िया के बड़े भाग मानुस तन पावा
07:57सुर्धुर्लब स
08:09तो वह देवता हो जाते हैं यो पुन आत्म से क्षिष अंदर तो तो यह जाते हैं पुनिया
08:39को कुछ नहीं चाहिए". बोले नहीं हम आये हैं, बोले नहीं चाहिए तो.
08:44स्किरपा करकर आपना जाहिए. हम jestem कुछ चाहिए ये किशे अपना कर रही है।यें
08:49ठक गएत्य कि यह लिए है। कि संत, रिशी, स्वर्ग नहीं जानते,
08:54तो कि स्वर्ग एक भोग योनी है, एक जगह है जहां पर जाते हैं, वह सीधे आत्मत अत्यों को पराप्त
09:03के, परमात्म में हो जाते हैं.
09:06हेरत हेरत हे शकीक अविरा गया है बुनसमानी समध में अब कथेरी जाए यह वह इश्वर अंस जीव वविनासी तो
09:15अंस अपने अंसी के मिल जाता है प्रति निधी निधी-पति में हो जाता है
09:23बहुत है सुन्दर ठीक है आपका सामना हुआ है कभी ऐसे भूतों से बहुत हुआ है डरे हैं ने बच्पन
09:31में तो डर भी लगता था आप भी डर लगता हूं नहीं लेगा चोटा है बच्चा कई वर गलादबाता रहा
09:37एक जगह था जहाँ पर हम सोते थे वहां रोज आके नि
09:46लेकिन जैसे साधना करने लगे उसके बाद भी सामना हुआ है तो गला क्यों दबाएगा उसकी नाराजगी एथी कि जगह
09:55हमारा है सोने का आप यहां क्यों सोते हैं यह था हम समझे में आया जैसे साधना करने लगे हम
10:01और उस जगह पर जो भी सोई सब के साथ ही एक्स्प्र
10:13नहीं, हम जूड़े हुए थे, हम तो हो सम्हाले तब से देखे हम गायत्री मंत्री जप रहें, बाद में हमको
10:21गुरू दिक्षा में ली, सपने में गुरू आए, फिर बुलाए, फिर जाके हम नहरेदवार में दिक्षा ली, फिर एक महीने
10:31रहके भी आ गए, फिर उसके बाद
10:33सपने में फिर आगे, कि आजाई आपका टाइम हो गया, इस काम के लिए आए, तो सारा खेल सपने का
10:39है, आपने पूछा कि मुलाकात हुई कि निभूत प्रेतों से, एक घटना वतार है, गायत्री परिवार शांती को उनसे तोली
10:48भाई जया थी, चार-पांच लोगों की टि
11:03में एक पुराना हंटेड हाउस, उनको नहीं पता था कि ऐसा है, फटा-फट वाल पेपर लगाया, रंग पोताई की
11:10नए फ्रेज टी-वी सब लगाके, सोफा लगाके नए खर दिया, हम लोग ठायर गया, और सब लोग उपर सोज
11:17आते थे, और उन दिनों गर्मी का मौसम हो
11:33ही चल रहा है, थोड़े दिर शिंतन करें, सोफा पर लेट के, तब सोने जाएं, तो एक दिन हम देखा
11:38कि एक बड़ा काला सा आदमी आके सरीर पे चड़ गया है, और दबाने ही कोशिश करें, हमने उठा के
11:45फेका उसको, इतनी नर्जी हमारे पास थी कि फेक सकते थे, वो हम
12:01था खाँ था कि हमारा सोने का टाइम है, तो हम उठके चल दिए, तो अंग्रेजी बोल रहा था, भाव
12:08में अंग्रेजी ही के हिंदी बात समझ में आ रही है, अंग्रेजी हिंदी तो इस शब्द होट का है ना
12:15खेल, यहां पर कोई भाशा किसी मानी होती, फिर हम उपर जाके
12:20सो गए अगले दिन बताया अपने साथियों को सब लोग डर गए अब गयतरी मंद्जपे दिया जलाए को एक और
12:29घटना घट गई उपर जिस कमरे में हम सो रहे थे उसमें फ्रांस से एक और टीम हमारे नुसके आ
12:37गई डॉक्टर दत्ता हुआ करते थे अब तो गुजर गए त
12:50हमको दिख रहा है दूसरे को नहीं दिख रहा है धक्का मार रहा है कि हमको सोना है तो भाई
12:58कल भी तो सोये थे हम तो तुम थे नहीं तो मुश्कुराए और धक्का मारे तो हम खिसक के सो
13:05गए रात में ठके हुए थे अगले दिन देखे फिर वही हाल तो हमने उतने दूर में
13:10अपनी किताबे और एक टेप रिकाडर रख लिया कि किसी को पता ने चले हम आधे में क्यों सूते हैं
13:15पंदर अब इस दिन उस्वया है वहां मारे पास
13:21तो सिफ आपको सात्री का अत्मत था इसलिए तो ठीक नहीं सकता था भाग जाता लेकिन जब आप गैत्री मंत्र
13:29इतना जपने वाले
13:30एक साधू संत इंसान इश्वर से किसम का कनेक्ट होता है आप लोगों का फिर आपको कैसे उसने आके कहा
13:40नहीं किया ना आहत वो अपने बात बता रहा है कि हम भी तो जिन्दा हैं हम भी एकस्तित हम
13:46रोज यहां रहते हैं आज आप आये हैं तो हमको भी तो सो लेने लिजि�
13:50अगर हमारे पास एनरजी नहीं होती तो मारता पटग देता या परिशान कर देता अंदर घुश जाता आराम से शोदर
14:01दिन सो रहा है यह प्रत्रेक्शन भाव हम बता रहे हैं लेकिन दूसरे को क्यों नहीं दिख रहा है गुरो
14:05जीजिग दूसरे को दिखने थे एक तो द�
14:22एक प्रोफेसर हरेस प्रताप सिंग आजकल लोग से वायोग में है यूपी में हमारे एक सिश्य वो प्रिंसिपल थे वहाँ
14:30उनके घर पे सो रहे थे क्यों हाथ ऐसे गया है पलंग से इधर दिखा ही पढ़ने लगा कि यहां
14:37है कुछ उस रेंज में जैसे हाथ गया तो हमने हा
14:49यहां आतवर जो रोना शुरू किया चिलाना शुरूव किया हम समझ गया हमने का नजड़ा का बदल दक्रम समझ चुक्त
14:55हैं हमने देख लिया हैं तो ट्राइए कर रहते कि सचमुछ हमको दिखा वो सत्त्य है यहां तो कुछ किया
15:02नहीं लेकिन उसके इसे में हाथ गया है औ
15:18गायत्री मंत्र पढ़ना चाहिए अच्छी चीज है लेकिन गायत्री मंत्र भी कम जूट नहीं है। ये तो ब्रहास्तर प्रयोग है।
15:30प्रेरे सकल स्रिष्टी के प्राण विधाता पालक पुशक ना सकतराता गृष्षि मुनियती तबस्वी होगी आरत अरती चिंती तभोगी जो जो
15:39शरन तुम्हारी आवे सोसो मनबांचित्वल पावे
15:44भूत पिसाच सब इससे गाएं वो जाते हैं लोग कहते हैं वास्तु खराब है तो सास्त्रों में लिखा साथ बर
15:51गाए इतनी वन पढ़के निकली आपके दिशा बदल जाएगी जो दिशासूल लगा है या कुछ हुआ है हम लोग तो
15:57रोज चलते हैं किस दिशा में जा रहा ह
16:12साथ के लोग तो साथ के सिंगर रखते हैं तो क्या आप मंत्रों चारण से इसको ठीक कर सकते हैं
16:17क्यों नहीं कर सकते मालेजी जो दुकाने जितनी हैं और सब दक्षिन मुखी है तो सब दुकाने तोड़ देंगे आप
16:25कितनी विल्डिंग देखेंगे कितने होटल से देखें
16:42तो हमें फैक्टरियों के वो एनर्जी लेबल ये करते हैं, हमें इस कमरे का एनर्जी बताइए, जहां बैठे हैं, क्योंकि
16:49अलग-अलग एनर्जी के लोग बैठे हुए यहां, बुल एनर्जी जीरो हो गया है, आपके बैठने के कारण एनर्जी पकड
16:56में ही नहीं आ रहा है,
16:56सब इक्वल एनर्जी है पूरे कमरे में
17:00कहीं किसी कोने के इनर्जी का फर्क नहीं समझ में आ रहा
17:02ना किसी आदमी के इनर्जी पकड़ में आ रही
17:05एक ही फ्रिक्वेंसी में पूरा है
17:07तो ये क्या है? हम अपनी महिमा नहीं बता रहे हैं
17:10ये गायत्री मंत्र का शमतकार बता रहा है कि प्रत्यक्ष ऐसा नहीं कि फल भीवेका नंजी ने किया उनको लाब
17:17मिला था दया नंजी ने किया उनको लाब मिला था हमने किया हमको मिला है कि एक कोल फिल्ड में
17:25पैदा हुआ आदमी कोईले में खेलने वाला पूरी माफिया गि
17:32वहां से आकि एकाम कर रहा है, तो उस मंत्र का श्मतकार, हमने कोई बहुत पुरशार्थ नहीं किया है, लगबग
17:4170-80 देसों में रहे हम,
17:44कैमरे जॉक्सफर्ड से लेके सभी विश्विद्ध अलेम हमारे लेक्शर हुए है, आई आई टी जितने आपके पटना के बेटाओं में
17:51दो-तीन बार कर चुके हैं, अभी इसी महिने में SVNIT, आई आई आई टे का है सूरत उसमें भी
17:58था, तो वो ग्यान भी देती है, शक्ती �
18:02देती है, और आपकी उम्र भी बढ़ाती है, जो चाहे वो मिलेगा इस मंतर से, बहुत सुंदर, स्वामी जी, आज
18:13तो मैं यहां विराम लगा रही हूँ, मैं उमीद करती हूँ कि एक बार और आपके दर्शन यहां जरूर होंगे,
18:19बहुत-बहुत शुक्रिया आपके, धन्
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