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क्या आपने कभी सोचा है कि एक मामूली सी गलती आपकी जिंदगी का सबसे भयानक सपना बन सकती है? यह दिल दहला देने वाली सच्ची घटना है झारखंड के धनबाद जिले (झरिया) के रहने वाले पवन की।

अपनी पत्नी की डांट से बचने के लिए पवन अपना टिफिन पुराने रेलवे स्टेशन के खंडहरों में कुत्तों को खिलाने लगा। लेकिन उसे नहीं पता था कि उस सुनसान जगह पर कोई और भी उसका इंतज़ार कर रहा है—एक सफेद साड़ी वाली रहस्यमयी आत्मा! सुध-बुध खो बैठना, कपड़ों पर रोज़ मिट्टी का लगना और एक ऐसा खौफनाक साया जो शरीर के आर-पार हो जाए।

इस वीडियो में जानिए धनबाद के पुराने स्टेशन की रहस्यमयी और भूतिया कहानी। पवन की शर्ट पर बार-बार मिट्टी और कीचड़ कैसे लग जाते थे? और उस सफेद साड़ी वाली औरत और पवन के बीच क्या खौफनाक रिश्ता बन गया था?

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Queries Solved in this video:

Dhanbad ke purane station ki rahasyamayi kahani

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00:00नमस्कार दोस्तों। आज के इस विशलेशन में हम एक ऐसे रहस्य की गहराई में जाने वाले हैं जो सच में
00:06आपके रॉंग्टे खड़े कर देगा।
00:08हम बात कर रहे हैं जारखन के धनबाद जिले के जरिया की। देखे ये कोई आम भूत प्रेत की कहानी
00:14नहीं है जहां बस दरवाजे खड़कते हैं। बिलकुल नहीं। ये कहानी हमें दिखाती है कि कैसे किसी की एकदम साधारन
00:21सी दिंचर्या अचानक एक भयानक मनोवेग्यान
00:24एक डरावने सच में बदल सकती है। ये किस्सा है समय के गायब होने का और एक इनसान के खुद
00:30पर से अपना ही कंट्रोल पूरी तरह खो देने का। चलिए बिना देर किये इस पूरी घटना को एकदम बारीकी
00:35से समझते हैं। तो चलिए सीधे इसमें गहराई से उतरते हैं
00:39जिरा एक सेकंड के लिए इस बात पर गौर कीजिए। मेरे पती ने तुम्हारे पती को खंडरों के पास अंधिरे
00:45में देखा। वो भी एक सफेद साडी वाली औरत के साथ। अब आप खुद सोचिए। अगर किसी पतनी को अपनी
00:51ही पडोसन से अचानक ही सुनने को मिले त
00:53उस पर क्या भीतेगी? सच कहूं तो यही वो पॉइंट है जहां से इस कहानी में एक बहुत ही अजीब
00:58और गहरा मोडाता है। लेकिन पता है दिल्चस्प बात क्या है? इस खौफनाग घटना की शुरुवात इन डरावने खंडरों से
01:05हुई ही नहीं थी, बलकि इसकी जड�
01:21जो शायद हम में से कई लोगों के घरों में अकसर होता रहता है। लेकिन यहां इसी एक टिफिन बॉक्स
01:27ने एक ऐसे खौफनाक सिलसिले को जन्द दे दिया जिसकी कोई सपने में भी कलपना नहीं कर सकता था। इसे
01:33समझने के लिए ना कहानी के मुख्य किरदार पवन जी �
01:36उनकी डेली रूटीन पर जरा नजर डालते हैं। देखिए सुभर नौ बजे काम पर जाना, शाम छे बजे ओफिस से
01:42छुटी, फिर छे से साड़े साथ बजे तक अपने दोस्तों के साथ बैट कर थोड़ा चिल करना, दिन भर का
01:47तनाफ कम करना और ठीक साड़े साथ बजे �
01:49घर वापस लोटना। मतलब एक दम परफेक्ट साधारन सा दिन, कोल बुरी आड़ेट नहीं, बस दोस्तों के साथ थोड़ा हसी
01:55मजाक, सब कुछ बिलकुल नॉर्मल चल रहा था। और ये बहुत ही शांदार तरीके से उस असली समस्या को दर्शाता
02:02है जिसने इस पूरी श
02:17जगा पर मिलने वाला मस्त, तला, भुना, मस्सालेदार खाना, जो पवन जी को आजकल कुछ ज्यादा ही पसंदाने लगा था,
02:23लेकिन घर के नियमों के हिसाब से वो उनके लिए पूरी तरह से बैन था। तो हुआ ये कि जब
02:28एक दिन पवन जी ने बाहर का खाना खाने की �
02:30अपने इच्छा जताई तो बस घर में एक भयंकर बवाल खड़ा हो गया। बात इतनी जादा बढ़ गई कि पवन
02:37जी को सीधा सीधा एक अल्टिमेटम ही मिल गया। पत्नी ने एकदम साफ कह दिया कि भई अगर हाथ का
02:42बना खाना पसंद नहीं है तो हमेशा के लिए घर छ
03:00हसके ना काम पर जाते हुए उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि वो खाना फेके बिना इस खाली
03:05टिफिन वाली खतरनाक शर्त को आखिर पूरा कैसे करें। और इसी उधेड बुन में उन्होंने जो रास्ता चुना वो उन्हें
03:12ले गया खंडर हो चुके स्टेशन के उन आव
03:30काम से लोटते हुए पवन जी को वहां कुछ आवारा कुत्ते दिखे और तभी उनके दिमाग की बती जली। उनके
03:37मन में खयाल आया कि कुत्ते हमेशा उनके कर्जदार हो जाते हैं जो उन्हें खाना खिलाते हैं। और वो अपनी
03:43वफादारी से इस कर्ज को चुकाते हैं।
03:45पवन जी को लगा कि भाई उन्होंने तो एक मास्टर स्ट्रोक खेल दिया है। एक पहतरीन समाधान। अपसे वो बाहर
03:51अपना मन पसंद खाना खालिया करेंगे और घर का टिफिन रास्ते में इन कुछ पता चलेगा और बे जुबान कुछ
03:59पता चलेगा। और बे जुबान
04:12पर मिलने लगी अजीब सी मिट्टी, एक नया रहस्य। इस परफेक्ट प्लान के शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद
04:20चीजे बहुत अजीव होने लगी। घर में शान्ती आने के बजाए रहस्यमई घटनाओं का एक नया ही सिलसिला शुरू हो
04:27गया। और दोस्तों सच कह
04:29तो ये वो हिस्सा है जहां ये कहानी बहुत ही खामोशी से एक बेहट डरावना मोड लेती है। जरा इन
04:36सुरागों को देखिए। जब पवन जी शाम को घर लौते तो अकसर उनकी पीठ और शर्ट पर रहस्यमई मिट्टी या
04:42कीचर लगा होता था। ऐसा लगता था जैसे �
04:45वो कहीं जमीन पर गिरे हो या किसी ने उन्हें रगड दिया हो। अब जाहिर सी बात है पतनी पूछती
04:49कि ये मिट्टी कहां से आई, कहीं दोस्तों से लड़ाई तो नहीं की। तो पवन जी एकदम डिफेंसिव हो जाते।
04:54वो अजीब से गोल मोल बहाने बनाते की अरे शा
05:13गंदे कपडों तक नहीं रुकी। जल्द ही एंट्री हुई खंड हरों की। उस सफेद साड़ी वाली औरत की। जैसा की
05:20मैंने कहा ये रहस्य सिर्फ एक गंदी शट तक सीमित रहने वाला नहीं था। कहानी का लेवल तब और भी
05:27ज्यादा खौफनाक हो गया जब पूरे प
05:43पत्नी की सहली ने आकर बताया कि उसके पती ने पवन जी को उस सुनसान खंडर में एक सफेद साड़ी
05:48वाली औरत के साथ देखा है। अब पत्नी के मन में तो सीधा ये डर बैढ़ गया कि पक्का पवन
05:53जी का किसी दूसरी औरत के साथ चकर चल रहा है और वो छुपकर वहा
05:58दूसरी तरफ जब पत्नी ने शक के मारे स्टेशन के बारे में घुमा फिरा के सवाल पूछने शुरू किये तो
06:04पवन जी बुरी तरह घबरा गए। पवन जी को लगा कि लो भाई पत्नी को कुत्तों को टिफिन खिलाने वाले
06:10उस रास का पता चल गया है। मतलब दोनों ही
06:12अंदर से बुरी तरह डरे वे थे, एक ही टॉपिक पर बात कर रहे थे, लेकिन दोनों के दिमाग में
06:17बिलकुल अलग-अलग ही कहानिया और डर चल रहे थे। अब इस घुटन और शक को हमेशा के लिए खत्म
06:23करने के लिए पत्नी ने एक पक्का प्लान बनाया। उन्होंने
06:26धनबात से सीधे अपने भाई को बुला लिया, ताकि वो दोनों मिलकर चुपचा पवन जी का पीछा कर सकें और
06:33इस सफेद साड़ी वाली ओरत का जो भी सच है उसे सामने ला सकें। और सच्चाई का परदाफाश करने के
06:39लिए भाई बहन की ये जोड़ी एक शाम उसी खं�
07:23कपादी।
07:25चली आगे बढ़ते हैं और देखते हैं कि ये घटना करम कैसे आगे बढ़ता है। भाई बहन चिपकर ये सब
07:30देख रहे थे। सबसे पहले क्या हुआ? पवन जी ने अपनी बाइक रोकी और हमेशा की तरह अपना टिफिन खोल
07:36कर कुत्तों को खाना डाला। लेकिन इसके ठ
07:39खीक बात जो हुआ वो किसी बुरे सपने से कम नहीं था। पवन जी का शरीर एकदम से अकड़ गया,
07:46उनका बढ़ताओ बदल गया और वो किसी जॉंबी की तरह बिना किसी हाव भाव के सीधे चलते वे उन खंडरों
07:52के गहरे अंधेरे में चले गए। जब पत्नी और उनका
08:05एकदम आरपार हो गई, जी हाँ वो कोई इनसान नहीं थी, वो एक रूह थी और जैसे ही वो भयानक
08:12आत्मा वहां से गुजरी, पवन जी अचानक एक जटके से होश में आ गए। वो ऐसे उठे जैसे नीन से
08:17जागे हों और उन्हें बिलकुल भी याद नहीं था कि वो वहां
08:20उस अंधेरे में कैसे पहुँचे, पता है, जब परिवार ने पवन जी को उस खंडर में देखा था ना, तो
08:26वो जमीन के मिटी पर बैठे वे थे, उनकी आखें पूरी तरह से उपर की और चड़ी वी थी, और
08:31वो खंडर की उस ठंडी, सीलन भरी दिवार से बुरी तरह टि
08:48जासे थी, वो रोज अंजाने में उस भूतनी के वश में होकर बिना अपने होश और हवास के उसी मिटी
08:54और दीवार के सारे जाकर बैठ जाया करते थे, लेकिन इस कहानी का सबसे भयानक सच भूत नहीं है, बलकि
09:02वो है खोई हुई यादें, ये घटना अपने आप में ही र
09:15जहरा डर कुछ और ही निकल कर आता है, एक ऐसा डर जो शायद भूत प्रेतों से भी कई गुना
09:20ज्यादा खोफनाक है, अब इस स्लाइट के बारे में जो सबसे दिल्चस बात है, वो है ये संख्या शून्य, जीरो,
09:28कुत्तों को खाना खिलाने के बाद से लेकर, खंडार में
09:31उस ठंडी दिवार के सहारे बैटने तक पवन जी की याददाश्ट बिल्कुल शून्य थी, उन्हें एक सिंगल चीज याद नहीं
09:37रहती थी, सोचिए उनका अपने शरीर पर, अपने दिमाग पर और अपने फैसलों पर से कंट्रोल पूरी तरह से खत्म
09:43हो जाता था, खु�
10:01अपने ही यादों का इस तरह पूरी तरह से मिट जाना, अपने ही शरीर पर अपना हक हो देना, बिना
10:07ये जाने के उन अंधेरे पलों में आपने क्या किया है, सच मानिए ये एक ऐसा डर है, जो किसी
10:12भी इनसान को अंदर से पूरी तरह तोड़ कर रख दे, जो अंतता हमें �
10:16इस बेहद परेशान कर देने वाले विचार पर लाकर खड़ा करता है, सोच कर देखिए, अगर किसी इनसान के दिमाग
10:23को अंधेरे में इस तरह पूरी तरह से हैक किया जा सकता है, जहां उसे अपनी ही हरकतों का कोई
10:28होश न रहे, तो क्या वाकई हम में से कोई भी इनसान अ
10:44आपका बहुत बहुत धन्यवाद, इस खौफनाक सवाल के साथ हम आपको यहीं छोड़ते हैं, थोड़ा सोचिएगा जरूर
11:14सकता है जरूर
12:08झाल झाल
12:42झाल
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