00:00नमस्कार दोस्तों। आज के इस विशलेशन में हम एक ऐसे रहस्य की गहराई में जाने वाले हैं जो सच में
00:06आपके रॉंग्टे खड़े कर देगा।
00:08हम बात कर रहे हैं जारखन के धनबाद जिले के जरिया की। देखे ये कोई आम भूत प्रेत की कहानी
00:14नहीं है जहां बस दरवाजे खड़कते हैं। बिलकुल नहीं। ये कहानी हमें दिखाती है कि कैसे किसी की एकदम साधारन
00:21सी दिंचर्या अचानक एक भयानक मनोवेग्यान
00:24एक डरावने सच में बदल सकती है। ये किस्सा है समय के गायब होने का और एक इनसान के खुद
00:30पर से अपना ही कंट्रोल पूरी तरह खो देने का। चलिए बिना देर किये इस पूरी घटना को एकदम बारीकी
00:35से समझते हैं। तो चलिए सीधे इसमें गहराई से उतरते हैं
00:39जिरा एक सेकंड के लिए इस बात पर गौर कीजिए। मेरे पती ने तुम्हारे पती को खंडरों के पास अंधिरे
00:45में देखा। वो भी एक सफेद साडी वाली औरत के साथ। अब आप खुद सोचिए। अगर किसी पतनी को अपनी
00:51ही पडोसन से अचानक ही सुनने को मिले त
00:53उस पर क्या भीतेगी? सच कहूं तो यही वो पॉइंट है जहां से इस कहानी में एक बहुत ही अजीब
00:58और गहरा मोडाता है। लेकिन पता है दिल्चस्प बात क्या है? इस खौफनाग घटना की शुरुवात इन डरावने खंडरों से
01:05हुई ही नहीं थी, बलकि इसकी जड�
01:21जो शायद हम में से कई लोगों के घरों में अकसर होता रहता है। लेकिन यहां इसी एक टिफिन बॉक्स
01:27ने एक ऐसे खौफनाक सिलसिले को जन्द दे दिया जिसकी कोई सपने में भी कलपना नहीं कर सकता था। इसे
01:33समझने के लिए ना कहानी के मुख्य किरदार पवन जी �
01:36उनकी डेली रूटीन पर जरा नजर डालते हैं। देखिए सुभर नौ बजे काम पर जाना, शाम छे बजे ओफिस से
01:42छुटी, फिर छे से साड़े साथ बजे तक अपने दोस्तों के साथ बैट कर थोड़ा चिल करना, दिन भर का
01:47तनाफ कम करना और ठीक साड़े साथ बजे �
01:49घर वापस लोटना। मतलब एक दम परफेक्ट साधारन सा दिन, कोल बुरी आड़ेट नहीं, बस दोस्तों के साथ थोड़ा हसी
01:55मजाक, सब कुछ बिलकुल नॉर्मल चल रहा था। और ये बहुत ही शांदार तरीके से उस असली समस्या को दर्शाता
02:02है जिसने इस पूरी श
02:17जगा पर मिलने वाला मस्त, तला, भुना, मस्सालेदार खाना, जो पवन जी को आजकल कुछ ज्यादा ही पसंदाने लगा था,
02:23लेकिन घर के नियमों के हिसाब से वो उनके लिए पूरी तरह से बैन था। तो हुआ ये कि जब
02:28एक दिन पवन जी ने बाहर का खाना खाने की �
02:30अपने इच्छा जताई तो बस घर में एक भयंकर बवाल खड़ा हो गया। बात इतनी जादा बढ़ गई कि पवन
02:37जी को सीधा सीधा एक अल्टिमेटम ही मिल गया। पत्नी ने एकदम साफ कह दिया कि भई अगर हाथ का
02:42बना खाना पसंद नहीं है तो हमेशा के लिए घर छ
03:00हसके ना काम पर जाते हुए उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि वो खाना फेके बिना इस खाली
03:05टिफिन वाली खतरनाक शर्त को आखिर पूरा कैसे करें। और इसी उधेड बुन में उन्होंने जो रास्ता चुना वो उन्हें
03:12ले गया खंडर हो चुके स्टेशन के उन आव
03:30काम से लोटते हुए पवन जी को वहां कुछ आवारा कुत्ते दिखे और तभी उनके दिमाग की बती जली। उनके
03:37मन में खयाल आया कि कुत्ते हमेशा उनके कर्जदार हो जाते हैं जो उन्हें खाना खिलाते हैं। और वो अपनी
03:43वफादारी से इस कर्ज को चुकाते हैं।
03:45पवन जी को लगा कि भाई उन्होंने तो एक मास्टर स्ट्रोक खेल दिया है। एक पहतरीन समाधान। अपसे वो बाहर
03:51अपना मन पसंद खाना खालिया करेंगे और घर का टिफिन रास्ते में इन कुछ पता चलेगा और बे जुबान कुछ
03:59पता चलेगा। और बे जुबान
04:12पर मिलने लगी अजीब सी मिट्टी, एक नया रहस्य। इस परफेक्ट प्लान के शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद
04:20चीजे बहुत अजीव होने लगी। घर में शान्ती आने के बजाए रहस्यमई घटनाओं का एक नया ही सिलसिला शुरू हो
04:27गया। और दोस्तों सच कह
04:29तो ये वो हिस्सा है जहां ये कहानी बहुत ही खामोशी से एक बेहट डरावना मोड लेती है। जरा इन
04:36सुरागों को देखिए। जब पवन जी शाम को घर लौते तो अकसर उनकी पीठ और शर्ट पर रहस्यमई मिट्टी या
04:42कीचर लगा होता था। ऐसा लगता था जैसे �
04:45वो कहीं जमीन पर गिरे हो या किसी ने उन्हें रगड दिया हो। अब जाहिर सी बात है पतनी पूछती
04:49कि ये मिट्टी कहां से आई, कहीं दोस्तों से लड़ाई तो नहीं की। तो पवन जी एकदम डिफेंसिव हो जाते।
04:54वो अजीब से गोल मोल बहाने बनाते की अरे शा
05:13गंदे कपडों तक नहीं रुकी। जल्द ही एंट्री हुई खंड हरों की। उस सफेद साड़ी वाली औरत की। जैसा की
05:20मैंने कहा ये रहस्य सिर्फ एक गंदी शट तक सीमित रहने वाला नहीं था। कहानी का लेवल तब और भी
05:27ज्यादा खौफनाक हो गया जब पूरे प
05:43पत्नी की सहली ने आकर बताया कि उसके पती ने पवन जी को उस सुनसान खंडर में एक सफेद साड़ी
05:48वाली औरत के साथ देखा है। अब पत्नी के मन में तो सीधा ये डर बैढ़ गया कि पक्का पवन
05:53जी का किसी दूसरी औरत के साथ चकर चल रहा है और वो छुपकर वहा
05:58दूसरी तरफ जब पत्नी ने शक के मारे स्टेशन के बारे में घुमा फिरा के सवाल पूछने शुरू किये तो
06:04पवन जी बुरी तरह घबरा गए। पवन जी को लगा कि लो भाई पत्नी को कुत्तों को टिफिन खिलाने वाले
06:10उस रास का पता चल गया है। मतलब दोनों ही
06:12अंदर से बुरी तरह डरे वे थे, एक ही टॉपिक पर बात कर रहे थे, लेकिन दोनों के दिमाग में
06:17बिलकुल अलग-अलग ही कहानिया और डर चल रहे थे। अब इस घुटन और शक को हमेशा के लिए खत्म
06:23करने के लिए पत्नी ने एक पक्का प्लान बनाया। उन्होंने
06:26धनबात से सीधे अपने भाई को बुला लिया, ताकि वो दोनों मिलकर चुपचा पवन जी का पीछा कर सकें और
06:33इस सफेद साड़ी वाली ओरत का जो भी सच है उसे सामने ला सकें। और सच्चाई का परदाफाश करने के
06:39लिए भाई बहन की ये जोड़ी एक शाम उसी खं�
07:23कपादी।
07:25चली आगे बढ़ते हैं और देखते हैं कि ये घटना करम कैसे आगे बढ़ता है। भाई बहन चिपकर ये सब
07:30देख रहे थे। सबसे पहले क्या हुआ? पवन जी ने अपनी बाइक रोकी और हमेशा की तरह अपना टिफिन खोल
07:36कर कुत्तों को खाना डाला। लेकिन इसके ठ
07:39खीक बात जो हुआ वो किसी बुरे सपने से कम नहीं था। पवन जी का शरीर एकदम से अकड़ गया,
07:46उनका बढ़ताओ बदल गया और वो किसी जॉंबी की तरह बिना किसी हाव भाव के सीधे चलते वे उन खंडरों
07:52के गहरे अंधेरे में चले गए। जब पत्नी और उनका
08:05एकदम आरपार हो गई, जी हाँ वो कोई इनसान नहीं थी, वो एक रूह थी और जैसे ही वो भयानक
08:12आत्मा वहां से गुजरी, पवन जी अचानक एक जटके से होश में आ गए। वो ऐसे उठे जैसे नीन से
08:17जागे हों और उन्हें बिलकुल भी याद नहीं था कि वो वहां
08:20उस अंधेरे में कैसे पहुँचे, पता है, जब परिवार ने पवन जी को उस खंडर में देखा था ना, तो
08:26वो जमीन के मिटी पर बैठे वे थे, उनकी आखें पूरी तरह से उपर की और चड़ी वी थी, और
08:31वो खंडर की उस ठंडी, सीलन भरी दिवार से बुरी तरह टि
08:48जासे थी, वो रोज अंजाने में उस भूतनी के वश में होकर बिना अपने होश और हवास के उसी मिटी
08:54और दीवार के सारे जाकर बैठ जाया करते थे, लेकिन इस कहानी का सबसे भयानक सच भूत नहीं है, बलकि
09:02वो है खोई हुई यादें, ये घटना अपने आप में ही र
09:15जहरा डर कुछ और ही निकल कर आता है, एक ऐसा डर जो शायद भूत प्रेतों से भी कई गुना
09:20ज्यादा खोफनाक है, अब इस स्लाइट के बारे में जो सबसे दिल्चस बात है, वो है ये संख्या शून्य, जीरो,
09:28कुत्तों को खाना खिलाने के बाद से लेकर, खंडार में
09:31उस ठंडी दिवार के सहारे बैटने तक पवन जी की याददाश्ट बिल्कुल शून्य थी, उन्हें एक सिंगल चीज याद नहीं
09:37रहती थी, सोचिए उनका अपने शरीर पर, अपने दिमाग पर और अपने फैसलों पर से कंट्रोल पूरी तरह से खत्म
09:43हो जाता था, खु�
10:01अपने ही यादों का इस तरह पूरी तरह से मिट जाना, अपने ही शरीर पर अपना हक हो देना, बिना
10:07ये जाने के उन अंधेरे पलों में आपने क्या किया है, सच मानिए ये एक ऐसा डर है, जो किसी
10:12भी इनसान को अंदर से पूरी तरह तोड़ कर रख दे, जो अंतता हमें �
10:16इस बेहद परेशान कर देने वाले विचार पर लाकर खड़ा करता है, सोच कर देखिए, अगर किसी इनसान के दिमाग
10:23को अंधेरे में इस तरह पूरी तरह से हैक किया जा सकता है, जहां उसे अपनी ही हरकतों का कोई
10:28होश न रहे, तो क्या वाकई हम में से कोई भी इनसान अ
10:44आपका बहुत बहुत धन्यवाद, इस खौफनाक सवाल के साथ हम आपको यहीं छोड़ते हैं, थोड़ा सोचिएगा जरूर
11:14सकता है जरूर
12:08झाल झाल
12:42झाल
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