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00:00Supreme Court की statement आते हैं कि you are not marrying to maid
00:02जब हम बीवी की बात करते हैं तो उसमें हम महिला को एक गर की देखवाल बच्चे प्यादा करने हो
00:08और सेक्स के लिए देखते हैं
00:10नहीं तो और क्या परिभाशा होनी चाहिए
00:16दोनों पक्षभली बाते जानते हैं कि उन्होंने एक डील करी है
00:30जलेगा मैं ही खाना क्यों बनाओं तो वो भी कहेगा फिर कि मैं ही पैसे क्यों कमाओं और यह बाग
00:36तो जायज है
01:00मैं आपसे हाथ उठाने को कहूंगा नहीं पर भीतर ही भीतर उठा लीजिएगा अपमानित महसूस किया है कि नहीं
01:11ठीक कह रहा हूं मना आ रहा है बढ़ियां यहां पर हम सबसे ज़्यादा बुज़र्ग आप बैठी हुई है और
01:22बोल रही है एक एक बात बिलकुल सच कही
01:31अभी रीसेंटल एक वेब सिरीज आई है चिरहिया नाम से उसका जो थीम है वो है
01:37मैरिटल रेप से रिलेटर्ड वो कह रहे हैं कि अगर हमने मैरिटल रेप को क्रिमिनलाइज कर दिया तो
01:43इंस्टिटूशन आफ मैरिज ही खत्म हो जाएगा इस्टिटूशन आफ मैरिज आधायरित ही है
01:58अबी हाली में एक सुप्रिम कोट की जजमेंट आई है जिसमें की एक पती देव थे जो की कोट तक
02:06जाते हैं कि उनकी विच खाना नहीं बनाती तो उनको डैवोर्स दे दिया जए
02:10तो इसमें सुप्रिम कोट की स्टेच मेंट आते है कि You are not marrying to a maid
02:13कि वो बीवी काम बाली नहीं है
02:16तो इसमें सुप्रेंग कोर्ट की
02:18इक्वल पार्टर्शिप और
02:21शेर डिस्पॉंसिबिलिटी
02:22की बाचित करते हैं
02:23लेकिन जैसे ही अचारी जी ये खबर
02:25सोचल मीडिया के वाइरल होती है
02:27तो उसमें बहुत सारे कोमेंट्स आना शुरू हो जाते हैं
02:30तो उसमें से कुछ कोमेंट्स ऐसे थे
02:32कि
02:33अब लेट्स सप्लिट दाइश्पेंस फिप्टी-फिप्टी
02:35और उसमें से कुछ ऐसे भी थे कि
02:37अब हजबेंट को भी
02:39नो से पांच की जोग शोड देनी चाहिए
02:42और उसमें से कुछ कोमेंट्स ऐसे भी थे कि
02:44इस दा
02:46वाइफ
02:46हैस दाइश्पेंस को पढ़के भी ऐसे लगता है कि
03:01जब हम बीवी की बात करते हैं तो उसमें हम
03:05उस महिला को एक
03:07गर की देखवाल
03:08बच्चे प्यादा करना है हो और सेक्स के लिए देखते हैं
03:11नहीं तो और
03:12क्या परिभाशा होनी चाहिए
03:16जैसा कि अचारी जी आपने भी
03:18जब भी विशे के वारे में चर्चा किये तो
03:20आपने हमेशा कहा है कि
03:50मैं समझ रहा हूँ, आपको सुनने में भदा लग रहा है कि
03:52कि अरे जब जो आम सिध्धान्त है विवाह का भले ही उसका कुछ मौलिक अर्थ उद्देश परिभाशा रही हो पर
04:09जब आज आम सिध्धान्त ही यही है कि शादी कर लो तो घर आएगी तो घर समार देगी चुला चौका
04:18देख लेगी बच्चे पैदा कर देगी और यह सब हो
04:21जाएगा तो जो भी पुरुष कर रहा और जो भी इस्तरी कर रही है विवाह में प्रवेश जब कर रहे
04:29हैं तो वो इसी परिभाशा के अंतरगती तो कर रहे हैं ना और यह परिभाशा उन्हें बहुत पहले से पता
04:36है पुरुष को भी पता है इस्तरी को भी पता है इनका आ
04:42है दर्द से आ रहा है कह रहे है सुप्रीम कोर्ट ने कोई सज्जन होंगे वो गए होंगे सुप्रीम कोर्ट
04:49की बीवी खाना नी बनाती तो सुप्रीम कोर्ट ने
04:52कह दिया तो पत्नी है तुम कोई मेड थोड़ी लाए हो काम वाली थोड़ी लाए हो
04:58पर कि तुम्हारा रुसोई देखे
05:01और सुप्रीम कोर्ट ने उसने और भी बाते बोल दी कि भई
05:04पती पतनी हो तो जिम्यदारियां अपनी बाटो 50-50
05:08और जो भी shared responsibilities
05:11तो social media पर लोग खफा हो गए है
05:16जिनके सबसे आदा संसकार हैं सबसे आदा
05:18खफा होते हैं
05:20संसक्रिती खत्रे में आ जाती है तुरंत
05:23वो कह रहे हैं अब जब सब 50-50 होना है
05:25तो यह घर में क्यों बैठी रहती है भार जाके कमाई भी
05:29जब 50-50 होना है तो पुरुष ही क्यों कमा रहा है सिर्फ
05:32और अगर महिला को कई चीजों में
05:36ना कहने का अधिकार है कि आज खाना नहीं बनाऊंगी आज सक्स नहीं करूंगी
05:39महिला कोई सब अधिकार है तो पुरुष को भी ना कहने का अधिकार है
05:42किस बात में ना कहने का अधिकार है
06:01तो फिर वो जब बोलती है कि मैं शॉपिंग करूंगी
06:03contract है वो है ही इसी तरह का
06:09जिसमें सीधी सी चीज़ यह है कि
06:13वो घर देखेगी वो खर्चे उठाएगा
06:22वो household duties निभाती है और वो caretaker और provider है
06:29और यह बात आपसे मैंने शुरू में ही कहा
06:33कि पुरुष और स्री दोनों ही जानते हैं
06:35जब वो उस व्यवस्था में प्रवेश करते हैं
06:37उस व्यवस्था की आज परिभाशा ही है ही हो चुकी है
06:41परिभाशा सही है कि गलत है अच्छी है बुरी है
06:43परिभाशा यदि विक्रत हो गई तो किसने विक्रत कर दिया
06:46ये मुद्धा दूसरा है, हम उसकी भी चर्चा कर सकते है
06:50पर आज के समय में
06:54भारत में
06:55जब एक प्रोशोर रिष्ट्री विवाह करते हैं
06:57तो उन्हें बहुत अच्छे से पता होता है
06:59कि इस गटबंधन का अर्थ क्या है
07:03भई आपको कुछ काम दे दिये हैं
07:04आपको करने आया और कुछ आपकी अधिकार होंगे
07:07उन कामों के बदले और जो दूसरा वेक्ते
07:09कुछ काम उसे करने और कुछ उसके अधिकार होंगे
07:11और यही इस रिष्टे का स्वरूप है
07:15तो जब आप कहोगे कि
07:17भई मैं ही खाना क्यों बनाओं
07:19तो वो भी कहेगा फिर
07:21कि मैं ही पैसे क्यों कमाऊं
07:23और यह बात तो जायज है
07:25खरी खरी है क्योंकि सौधा ही तो है
07:26और सौधे में जब एक पक्ष है
07:29एक पार्टी पीछे हट रही है
07:31तो फिर जो दूसरा पक्ष है
07:33जो दूसरी पार्टी है उसको भी पीछे हटने कहा क्या
07:35ठीक है अच्छी बात है
07:38मैं इस बात पर
07:39कोई आपत्ति नहीं करने वाला
07:42हां
07:43मैं ये आपत्ति
07:45जरूर करने वाला हूं कि دो
07:46मनुश्यों के बीच संबंध
07:48क्या जरूरी है कि सौदे का ही हो
07:53क्या मनुश्यों के बीच दो इन्सान है अब वो साथ रहने जा रहे हैं जितने भी समय के लिए
08:05क्या जरूरी है कि उनके बीच संबंध सौदे काई हो चाहे उनकी यात्रा किसी ट्रेन यात्रा की तरह बस 6
08:13-8 घंटे की साथ की हो
08:16और चाहे हो सकता है 60-80 साल का साथ हो पर क्या जरूरी है कि संबंध सौदे पर इअधारित
08:23हो
08:26और अगर सौदे पर आधारित है जो की है तो फिर दोनों पक्षों को अपनी अपनी और के दायतों का
08:33निर्वाहतों करना पड़ेगा
08:36आप एक कॉंट्राक्ट पर साइन करने के बाद यह नहीं कह सकते कि अब मैं इसकी टर्म्स को फॉलो नहीं
08:43करता कर सकते हैं क्या
08:45और उसकी जो टर्म्स हैं उसकी जो शर्ते हैं उस कॉंट्राक्ट के जो क्लॉजिस हैं वो तो आपको अगरिम में
08:54ही पता होते हैं ना पहले ही पता होते हैं पता होते हैं जब पहले ही पता हैं तो तुमने
09:00उस सौदे पर हस्ताक्षर क्यों किये और हस्ताक्षर करने के बाद
09:05अब शिकायत कैसे कर रहे हो
09:08उस अनुबंध पर
09:09तुम्हारे दस्तखत है
09:10तुमने साइन कर रखा है भाई नीचे
09:16अब कह रहे हो
09:17नहीं मैं ये नहीं करूंगी
09:19वो कह रहे हैं मैं वो नहीं करूंगा
09:20अगर वो ये नहीं करेगा अगर वो नहीं करेगा
09:23तो कॉंट्रैक्ट क्यों किया
09:28पर कॉंट्रैक्ट भी करना है
09:30क्योंकि समाज से डर लगता है
09:34कॉंट्रैक्ट भी करना है
09:35क्योंकि भेड़चाल में चलना है
09:38कॉंट्रैक्ट भी करना है
09:40क्योंकि पपा ने कहा था
09:41कि देख अगर तू शादी नहीं करेगी
09:43तो मैं जान दे दूँगा
09:46contract भी करना है
09:47क्योंकि उम्र हो गई है
09:48अब sex भी तो चाहिए
09:52वो contract करना भी है
09:54और फिर उसकी शर्तों का पालन भी नहीं करना है
09:57ये कैसे चलेगा
09:59ये कैसे चलेगा
10:02ये कैसे चलेगा
10:08अगर ये contract करो गे
10:09तो इसकी शर्ते माननी भी पड़ेंगी
10:14तो सवाल फिर मैं दूसरा उठाना चाहता हूँ
10:16इन दो इनसानों के बीच
10:18ये ही अनुबंध होना
10:20ये ही रिष्टा होना
10:23ये ही करार
10:24ये ही contract होना जरूरी है क्या
10:26क्या दो इनसानों के साथ
10:28रहने का कोई और तरीका नहीं हो सकता
10:32क्या जरूरी है
10:34कि बिलकुल व्यापार की तरह
10:37दोनों के शेत्र सीमाएं
10:39करतव और अधिकार बांध दिये जाएं
10:43कितने लोगों ने कभी
10:45किसी बिजनस डील पर
10:48एग्रिमेंट पर
10:49साइन वगरा कराए
10:51उसमें आप देखते हो बिलकुल
10:53ऐसे ही लिखा रहता है
10:54राइट्स एंड रिस्पॉंसिबिलिटीज वहाँ बिलकुल इसी भाषा में
10:57बात होती है
10:58और विवाह में भी अगर आप
11:01इसी भाषा में बात कर रहे हो तो आपको
11:16खाना नहीं बनाएगी तो शादी करके क्यों आई है
11:20तु देवी एक तुझे पूझे पूझे हूँगा अपने घर में रखके
11:24यहाँ आई है चल भरतन दो खाना बना
11:26पोचड़े साफ कर
11:28और कही के लिए लाया हूँ तुझको
11:31और यही बात महिला की और से भी लागू होती है
11:35महाँ चली जाए और पती बोले कि मैं कमाऊंगा नहीं
11:37वाल निखट्टू
11:39तु कमाएगा नहीं तु मुझे बेहा के किस मुझे लाया है
11:43अब मुझे बेहा के लाया है तो चल मेरे खर्चे भी उठा
11:46दोनों पक्ष भली बाते जानते हैं कि उन्होंने एक डील करी है
11:55मैं यहाँ यह पूछने के लिए नहीं हूँ
11:59कि डील तोड़ी किसने
12:01मैं यह पूछने के लिए नहीं हूँ
12:04कि डील मैं नाइनसाफी कौन कर रहा है
12:07मैं ये पूछने के लिए हूँ कि ये डील होनी जरूरी भी है क्या
12:12ये डील होनी ये समझाता होना जरूरी भी है क्या
12:19हम जानते हैं जहां व्यापार होता है वहां प्यार नहीं होता
12:22जानते हैं कि नहीं जानते हैं
12:27बोलो
12:31और व्यापार ठीक है
12:32खाने पहनने उड़ने की चीजों के लिए आप व्यापार कर लेते हो ठीक है
12:37पर प्यार मनुष्य की अपनी भीतरी गर्मा की बात होती है
12:44और जहां रिष्टा प्यार का होना चाहिए वहाँ व्यापार का है
12:47तो ये हमारी हस्ती के मुँपे तमाचा है
12:54बहुत बहुत गहरे अस्तित्तोगत अपमान की बात है
12:57कि आपका सबसे आत्मिये सबसे अंतरंग रिष्टा भी व्यापार पर अधारित है
13:04शर्तों पर अधारित है, कंडिशनल है
13:06ये मुँपर तमाचे जैसी बात है
13:14अपमान क्यों नहीं अनभव होता इस तमाचे पर
13:16अपमान क्यों नहीं अनभव होता जब हाथ पहला करके कहना पड़ता है
13:20कि शॉपिंग जा रही हूं पैसे दे दो
13:22क्यों नहीं अपमान अनभव होता
13:27इसे अपने अधिकार मान ही कैसे लिया
13:31कि उसके पैसे पर मेरा भी तो हक है
13:33कैसे हक है उसने कमाया है उसका है
13:36और उसने कैसे मान लिया कि उसकी देहें पर मेरा हक है
13:39उसकी देहें उसका अधिकारक शेतर है
13:43तुमारा हक कैसे हो गया उस पर
13:49ना पती के पैसो पर पत्नी का हक है
13:51ना पतनी की देह पर पती का हक है
13:54अब
13:54सब लोकधर्मी एकदम चिला उठेंगे
13:57कहेंगे अच्छा किसी है कोई हकी नहीं है
13:59तो फिर शादी माने क्या
14:00तो यह प्यार नहीं पता जुन्नू
14:06तुम्हारे लिए एक दूसरे पर
14:07हक जमाना ही प्यार है
14:10प्यार एक दूसरे पर
14:11हक जमाने का नाम नहीं है
14:12प्यार एक दूसरे को पंख देने का नाम होता है
14:29लानत है ऐसे पती पर
14:32जिसको पतनी की देह
14:35ये जता कर हासिल करनी होती है
14:38कि तेरे खर्चे उठाता हूं न
14:41चल अब बिस तर पर लेट जा
14:46इसके लिए एक शब्द होता है
14:48वेश्या वृत्ति
14:50भले ही आपने इन शब्दों का
14:52इस्तिमाल ना किया हो
14:53पर अगर भीतर ये भाव भी है
14:56कि उसकी देह मेरी इसलिए है
14:58क्योंकि उसके खर्चे तो मैं ही उठाता हूं
14:59मेरे घर में रहती है
15:00खुद तो कुछ कमाती है नहीं
15:02मेरी टुकणों पर जीती है
15:04अगर आपके भीतर ये भाव भी आ गया है
15:06और इस भाव में आपने उसके शरीर को छुआ है
15:10तो आप अपनी पत्नी को नहीं एक विश्या को सपर्श कर रहे हो
15:13आपने अपनी पत्नी को बहुत नीचे गिरा दिया
15:15आपने अपने रिष्टे का ही अपमान कर दिया
15:25इसी तरीके से उसमें
15:28अगर ये भाव आ गया है
15:29कि उसके पैसों पर तो मेरा अधिकार है
15:31कैसे तुम्हारा अधिकार है
15:32बताओ न
15:33पती के पैसो पर
15:34तुम्हारा अधिकार कैसे हो गया
15:40तुम देखने ही रही हो
15:41कि तुम में भी यही भाव है
15:42कि चूखी
15:44मैं उसके लिए खाना बनाती हूँ
15:45उसके कपड़े धोती हूँ
15:48उसको सेक्स देती हूँ
15:49और उसके लिए बच्चे पैदा करें तो इसलिए उसके पैसो पर मेरा हक है
15:53ये तो सर्विसेज हैं तुम सर्विस प्रोवाइडर हो
15:57सर्विसेज हैं की नहीं
16:00खाना बनाने वाली मेड होती है वो सर्विस प्रोवाइडर है
16:05और तुम कह रही हो मैं तेरे लिए ये सब करती हूँ
16:06तो तेरे पैसो पर मेरा हक है
16:08तो फिर अपने आपको पत्नी क्यों बोल रही हो
16:09काम वाली ही बोलो न
16:15ये रिश्टा कैसा है
16:17जिसमें एक दूसरे से कहा जा रहा है
16:19मैंने तेरे लिए ये किया है तू मेरे लिए अब ये कर
16:21मैंने तेरे लिए ये किया है तू मेरे लिए कर
16:22ये कैसा रिष्टा है ये प्रेम तो नहीं है
16:25तो कुछ और है
16:28और जो भी ये बड़ा गंदा है
16:30ऐसे तो नहीं जीना
16:36मैं आपसे हाथ उठाने को कहूंगा नहीं
16:39पर भीतर ही भीतर उठा लीजिएगा
16:45अपमानित महसूस किया है कि नहीं
16:48बोलिए
16:52उपर उपर से कितना भी प्रपंच किया जाए
16:56आते हैं वो ख्षण की नहीं जब रिश्टे की हकीकत बिलकुल नंगी सामने खड़ी हो जाती है
17:01बोलो
17:05रिश्टा जरूर होना चाहिए पर रिश्टा व्यापार का हो ये जरूरी है किया
17:11पूछरा हूँ
17:16व्यापार में व्यापार शोभा देता है
17:19प्रेम में व्यापार तमाचा होता है
17:31और ये विवस्था चली आ रही है
17:34जब ये कहा भी जाता है ने कि इसमें महिलाएं शोशित हैं
17:38मैं उस बात को मानता भी हूँ और नहीं भी मानता
17:44आप किसी वीगडे पर किसी रेस्टरॉ में चले जाएए
17:48किसी शॉपिंग मॉल में चले जाएए वहाँ आपको अधिकांश महिलाएं मिलेंगी
17:53खूब खर्चा पानी चल रहा होगा वहाँ पर
17:58और उनको देख करके या उनसे पूछ करके ताकि आप निश्चिन्त हो जाएं
18:04आप जान सकते हैं कि वो खुद कुछ नहीं कमाती है
18:09तुम खुद कुछ नहीं कमाती हो तो तुम चार घंटे से यहां रेस्टरॉ में बैठ करके
18:13यह खेल क्या रही हो किटी और बाकी चीज़ें किसके पैसो पर यह हो रहा है
18:18और अगर तुम यह कर रही हो तो इसके बाद अब तुम्हारी गर्मा का क्या होगा
18:26दो पहर के समय वीक डेज पर शॉपिंग मॉल में 80% आपको महिलाएं ही मिलेंगी
18:32क्योंकि पुरुष तब कहा होते हैं
18:34वो काम पर जाते हैं
18:36और महिलाएं क्या कर रही होती है
18:38वो शॉपिंग मॉल में जा करके बढ़ियां पूरी दो पहर खर्चा चल रहा है
18:43खर्चा करने में कोई दिक्कत नहीं
18:46खूब उड़ाईए पर पहले ज़रा कमाईए
18:51ये किसके पैसे उड़ा रहे हो
18:53और पिर जिसके पैसे उड़ा रहे हो
18:54जब वो आ करके तुम पर तरह तरह की अधिकार जमाएगा
18:57तब शिकायत कैसे कर पाओगी आप
19:01बोलो
19:02कितना गंदा ये सौदा है
19:11फोन भी हो सकते अधिकार के नाते ही बज़रा हो
19:15तु अभी तक वापस कैसे नहीं आए
19:23ये प्रेम के नाते नहीं बज़रा होगा
19:27ये अधिकार के नाते बज़रा है
19:42आदत सी बन गई है
19:51आपसे बोल रहा हूँ दिवियों
19:54लेने की
19:57और अपने आपको ये समझा लेने की
20:00कि किसी से पैसा लेना, सुख लेना, सोईधा लेना, छत्रचाया लेना
20:05ये तो मेरा अधिकार है नहीं
20:08तुम्हारा बस वो है जो सचमुष तुम्हारा है
20:13ग्यानियों ने तो समझाया है
20:17कि शरीर भी तुम्हारा नहीं है
20:19तुम्हारा ही शरीर भी तुम्हारा नहीं है
20:24ग्यानियों ने तो यहां तक समझाया है कि तुम्हारा ही धन भी तुम्हारा नहीं है
20:29तुमने दूसरे के धन को भी अपना मान लिया
20:33क्या होगा आपका
20:37जानने वालों ने कहा है कि
20:40तुम्हारा धन भी आखरी अर्थ में तुम्हारा नहीं है
20:44और तुमने तो किसी और के धन को अपना मान लिया
20:48और पूरे इतिहास में महिलाएं इसी गलत फहमी में रही है कि किसी और का धन मेरा है
20:54और होता नहीं है, तुम जानते हो नहीं होता है
20:57होता भी है तो नाम मातर को होता है
21:01जैसे कई बार पुरुष किसी प्रॉपर्टी की रेजिस्ट्री करा लेते हैं पत्नी के नाम पर
21:05जैसे कई बार ग्राम पंचायत, ग्राम सवाव अगरा के चुनावों में
21:10कोई पुरुष अपनी पत्नी को खड़ा कर देता है
21:12और उसको कुछ सरपंचों गरा बनवा देता है
21:14अब वो क्या कहेगी कि ये गद्धी मेरी है
21:20न वो पैसा तेरा है न वो गद्धी तेरी है
21:22तेरे पीछे कोई और है वो उसकी है
21:27क्यों अपने आपको धोखे में रख रही है
21:30नहीं मैंने तो उनसे वादा लिया हुआ है
21:36तंखा आते हैं वो आधी तंखा मेरे हाथ में रख देते हैं
21:39वो मेरी हो जाती है
21:40कैसे हो जाती है
21:41ने इसलिए हो जाती है
21:42मैं घर का काम करती हूँ न उसके पैसे मिलते हैं
21:44तुम जो घर का काम करती हो न
21:46वो घर का काम करने वाली को फिर जितने पैसे मिलते हैं
21:49उतनी लिया करो
21:53और तुम बहुत अच्छे से जानती हो
21:54कि गर का काम करने वाली को कितने पैसे मिलते है
21:58पती से फिर एक लाग रुपे महीने के किस बात के ले रही हो
22:04बुरा लग रहा है कड़वा लग रहा है
22:05मुझे भी बोलते हुए दर्दसा हो रहा है
22:08पर बोलना जरूरी है तो बोलने दीजिए
22:11क्योंकि ये भी तर्क आप दिया करती है
22:14कि हमने पैसे कोई मुफ्त के थोड़ी ले लिए
22:17हम घर का काम भी तो करते हैं
22:19आप जो घर का काम करती हैं
22:20माल लिजे आप करना बंद कर दें
22:22और वो सारा काम करने के लिए किसी को लगा दिया जाए
22:24तो उसको कितने पैसे दिये जाते हैं बताईए
22:27तो उतने ही लिया करिये फिर
22:29पर खूब भलना मचता है
22:31कहते हैं घर में इतना काम करती है
22:32उनका कोई अकाउंटिंग नहीं होती
22:34वो सारी सर्विसेस जीडिपी में काउंट नहीं होती
22:36कर लो अकाउंटिंग
22:39कर लो accounting न, कितना निकलेगा
22:44आप खाना बनाते हो, खाना बने लिए कितना दे देते हो
22:50और भी मुझे पर इलजाम लगते हैं
22:52कहते हैं बाहर के काम को घर के काम से शेष्ट बताते हैं
22:55अच्छा ठीक है
22:55तो देख लो कि जब आप बाहर काम करने निकलती हो
22:58तो उसमें कितने पैसे मिलते हैं
23:01और जो घर का काम करने वाली होती हैं
23:04उनको कितने पैसे मिलते हैं
23:05किसी आधार पर ही तो पैसे मिलते होंगे न
23:08तो फिर क्यों बोल रहे हो कि वो बाहर जाकर के
23:11जो DMSP बनकर बैठी हुई है
23:14या corporate manager बनकर बैठी हुई है
23:17या आर्मी में है या रिसर्चर है या साइंटिस्ट है
23:20उसका काम और जो घर में चूला चौका किया जाता है
23:23वो दोनों काम एक बराबर है ये मुझे पर बड़ा इल्जाम है
23:25कहते हैं घर के काम का अपमान करते है
23:29कहते हैं घर में जो काम होता है उसका कुछ मूल्य ही नहीं करते
23:35मैं क्या मूल्य करूंगा कोई भी मूल्य नहीं करता अगर तुम मूल्य कर रहे होते
23:41तो फिर जो घर में काम वाली लगी होती है कपड़े और धोने के लिए खाना पीना बनाने के लिए
23:47उसको भी तुम फिर उतनी इतन खा देते जितनी किसी superintendent of police को देते हो
23:53एक महिला है वो SP बनी होई है उसको कुछ salary मिलती है न
23:58विया वो जाकर के बैंगलोर में IT में कोई senior job कर रही है उसको भी salary मिलती है न
24:04और आपके घर में made होती है उसको भी salary मिलती है अगर घर का काम भार का काम एक
24:08बराबर है तो दोनों को एक बराबर salary क्यों नहीं देते हो
24:14तो किस आंतरिक जूट में जी रहे हैं हम
24:19कैसा सौधा सुईकार कर लिया हमने
24:23और खुद कोई कह रहे हैं नहीं उनकी आधी salary पर मेरा हक है क्योंकि मैं तो घर का काम
24:28करती हूँ घर का काम करने के इतनी होने चाहिए बस
24:31आपको आहत करने के लिए नहीं बोल रहा हूँ
24:35आपको जगाने उठाने के लिए बोल रहा हूँ
24:39अब बुरा लग रहा होगा
24:40मुझे मालूम है
24:41अब बुरा आप जल्दी मान जाते हो
24:48ठीक है बुरा लग रहा है
24:49तो जो भी यह गाली गलोज कर लेना
24:53मैं तयार हूँ
24:54मुझे क्या
24:57ऐसे आता है
24:59यह
25:00बच्चे पालने को छोटा काम मानता है
25:03अगर इसकी माने भी इसको नहीं पाला होता तो
25:06फिर यह इतनी पकवास कैसे करता
25:11धन्य
25:13धन्य देवी धन्य
25:14क्या तरक दिया है
25:18आप इंसान हो
25:21आप इंसान हो
25:25रोज सुबह उठके अपने आपको बोला करो
25:28क्या
25:28आप इंसान हो
25:31अप क्या बन गए
25:36आप में हर तरह से
25:38उतनी ही ख्षमता है जितनी किसी पुरुष में
25:40उससे थोड़ी ज़्यादा ही हो सकती है बलकी
25:42कम नहीं है
25:50महिलाए कम उपद्रवी होती है
25:54और जब लग करके सद करके काम करती है
25:56तो पुरुषों से थोड़ा बहतर ही करती है
26:04आप में सारी ख्षमताएं हैं
26:06जो किसी चैतन्य मनुष्य में होती है
26:08आपनी ये कौन सी डील कर ली
26:11ये डील आपके लिए अच्छी नहीं है
26:15बस इस डील में आपको क्या मिल गया है
26:19सुरक्षा, चार दिवारों की सुरक्षा है
26:21और सम्मान है
26:24किसी बड़े घर की बहु बनूँगी
26:29ये बड़े घर की बहु टाइप्स
26:37वैसे बड़ा घर जेल को भी बोलते हैं
26:39पता है न ये
26:41जब कोई धरा जाता उसको पगड़े जलते हैं
26:42चलते हैं तो ये बड़े घर अब दे जलते हैं
26:45तो कौन-कौन है आप बड़े घर की बहु
26:49नि मैं हाथ उठाने को बिलकुल नहीं बोल रहा
26:52पर भीतर भीतर उठा लो हाथ
26:55और न जाने कितने लोगधर्मी माबाब घूम रहे हैं
26:58जिनका कौल अर्मानी है ये कि किसी बड़े घर की बहु बना दें इसको
27:02और उसके लिए दहेज जोड रहे हैं
27:03कि अब ये बड़े घर की बहु बनेगी
27:07पुरुशों से कह रहा हूँ
27:15इस्त्री को खरीदा नहीं जाता
27:22प्रेम न बाड़ी उपजे प्रेम न हाट बिकाए
27:27खरीदे बेचे जाने वाली चीज नहीं है प्रेम जो तुम सोचते हो
27:31कि मैं उसका भरण पोशन करता हूँ
27:34उसको गहने लाकर दे देता हूँ
27:37उसे पैसे दे देता हूँ
27:39तो वो मेरी चीज हो गई, जायजाद हो गई, प्रॉपर्टी हो गई
27:46राजा प्रजा जेही रुचे
27:51शीश काट ले जाए
27:56शीश दे दो प्रेम ले जाओ
28:02इस्तरी न जीती जाती है न खरीदी जाती है
28:08जब इस्तरी में मनुष्य दिखाई देने लग जाता है
28:13जब दो पक्षियों में दोस्ती इसलिए होती है कि सास और उचा उड़ पाएंगे
28:23उसे प्रेम कहते हैं
28:33और इस्तरी न से कह रहा हूँ
28:37बिकना मत
28:37भले ही बिकने को समाज ने कितने भी इज़दार नाम दे दिये हो
28:44बिकना अपने आप में चीज ही बैज़दी की होती है
28:47भले ही उसमें नाम कितना भी इज़दार हो
28:50नाम तो ये बहुत दे देंगे
28:51बड़े घर की बहू है, सुशीला है, इजददार है, ये है, वो है
28:56दिली दिल में तुम्हें तो पता ही है ना, कि तुमने क्या सौधा कर लिया है
29:02क्या करोगी है जूटी इजदत ले करके
29:09अरनिट
29:11आ रही बात समझोए
29:14किसी भी कीमत पर
29:18किसी से भी
29:21मदद मत ले लेना
29:26जो तुम्हे निस्वार्थ मदद दे सके
29:30ऐसे लाखो करोड़ों में एक दो होते है
29:35और इतने अच्छे सैयोग नहीं है आपके
29:38कि आपके जीवन में बुद्ध्य कृष्णा जाए
29:42धनिया है यदि आप तो जीवन में जुन्नू ही आया होगा कोई
29:46और वो आपको यदि मदद दे रहा है तो बदले में दाम वसू लेगा ही वसू लेगा
29:52निस्वार्थ मदद कोई कृष्णा दे सकते हैं पर थोड़ा भी मुश्किल है कि जीवन में कृष्णा कोई आ गया
30:00तो कोई और ही होगा जो कानहा बनके आ गया है साउधान
30:08मदद के नाम पर खुद को बंधक मत बनवा लेना
30:14बड़ा अच्छा लगता है मैं तो घर की रानी हूँ वो मुझसे कहता है तू क्यों मेहनत करेगी मैं हूँ
30:21ना
30:23ना तो घर की रानी हूँ बज गया फोन
30:33घर की रानी को घर से घंटी आई है
30:36टेडिं टेडिं
30:51ठीक है रहा हूँ मना आ रहा है बड़ियां
31:04एक उम्र लगी है ये जानने में
31:07जानते हो ना क्या बोला अभी अभी
31:10यहां पर हम सबसे ज़्यादा बुज़र्ग आप बैठी हुई है
31:14और बोल रही है एक एक बात बिल्कुल सच कही
31:23और यहां जो लड़कियां महिलाएं बैठी हैं
31:26मैं आपसे कह रहा हूँ जो बात आप इस उम्र में आकर बोल रही हैं
31:30मैं आपके सामने खड़ा हूँ वो बात आप अपनी उम्र में जान लो ना
31:46कोई नहीं तुम्हें प्यार या मदद के नाते कुछ दे रहा है
31:49वसूली होगी
31:57इससे अच्छा यह है कि खुद को विक्सित करो
32:01इस लायक बनाओ
32:05कि पूरी दुनिया को ही प्रेम दे सको
32:11साथी भी आपको वैसा ही मिलेगा जैसे आप होंगे
32:18आपको अपने स्तर के अनुसारी कोई मिलता है
32:22आपके जीवन में भी कृष्ण बुद्ध नहीं
32:25तो कम से कम उनकी थोड़ी छवी लिए
32:28थोड़ी सुगंध लिए कोई आ सके इसके लिए पहले अपना स्तर बढ़ाईए
32:36जल्दी इससे किसी सौदे में बंध मत जाईए
32:40आप जितना उंचे उठोगे संभावना बढ़ेगी कि आपके जीवन में भी
32:45कोई उंचा सुयोग्य व्यक्ति प्रवेश करे
32:51और मज़ेदार बात ये आप जितना उंचे उठते जाओगे
32:54उतना आपके भीतर से ये ललक कम होती जाएगी कि मेरे जीवन में कोई प्रवेश करे
33:05और फिर अगर कोई प्रवेश कर गया तो कर गया और नहीं करा तो नहीं करा
33:11बात ये नहीं है कि जीवन में कोई आया के नहीं आया बात ये है कि हमने जीवन उचा बिताया
33:16के नहीं बिताया
33:22उचाई जीवन का लक्षे है
33:25जोड़े बाजी नहीं
33:28आ रहे ये बात समझ में
33:31उचे उठो और उचे उठने की प्रक्रिया में कोई मिल गया हमसफर अच्छी बात है
33:35कलपो नहीं, रो नहीं
33:42डेस्परेट मत हो जाओ कि कोई मिल जाए जल्दी से और सौधा कर ले
33:46अपने उपर ध्यान दो
33:49जितना स्वयम को उठा सकते हो, जितने तरीकों से उठाओ
33:56जीवन खुला जीओ
34:01प्रक्रते कखेल है
34:03नाच रही है जिंदगी, द्वार खुले हुए है
34:07कोई सुयोग्य वेक्ति अगर प्रवेश कर गया
34:10तो कर गया
34:12हम रोग भी नहीं रहे
34:16और हम
34:19कलप भी नहीं रहे
34:21हाई हाई आधी रात बीत गई अभी भी कोई नहीं आया
34:28आया तो आया
34:29नहीं आया तो नहीं आया
34:32हमारे पास जिंदगी, जीने के लिए बहुत उचे काम मौझूद हैं
34:38ये जोडे बाजी तो पशू भी कर लेते हैं
34:42हमें इसी में नहीं फसे रहना है
34:48कुछ
34:51ये बिलकुल एक नमावे हारी बात कर रहा हूँ
34:55बेकार
34:57इन्हें क्या पता, इन्होंने खुद करी है
35:03बोलिए
35:05क्पर एक
35:15जाता हूं, या कोई रिष्टन आ�ser आता है
35:16तो यादि चाए बनाने के लिए जाता हूं
35:19या भी बत्रंथ होने के लिए जाता हूं
35:20तो उसमें जो घर के, मतलब मेरी मम्मी है
35:23वो भी निराज हो जाते हैं कि
35:24तुम ऐसे रिष्टिदारों के लिए चाय बनाने जाते हो?
35:36सब अभी 6 साल से मैं घर से बाहर हूँ जब पहले बनाता था
35:40तो पहले की बात पहले गई, अब क्यों पूछ रहे हो?
35:47पहले तो रिष्टिदार आ रहे हैं तो तुम घुसके चाय बना रहे हो
35:50और फिर हो कह रहे अरे इसको देखो मर्द हो करके जनानियों वाले काम करता है, रसोई में घुस गया
35:56है, चाय बना रहा है, अब चूडिया भी पहन ले
36:04तुमने ऐसे रिष्टदारों को पहले तो घर में घुसने दिया, फिर बैठने भी दिया, फिर चाय भी पिला रहे हो,
36:12और भी चीज़े होती हैं पिलाने की, ऐसा पिलाओ, ऐसा पिलाओ, कि दुबारा है न,
36:25ये कौन सा रिष्टदार है, रिष्टदार माने होता है संबंधी, संबंध माने जानते हैं क्या, मनुष्य और मनुष्य के बीच
36:34वास्तविक संबंध, तो ज्ञान का, बोध का और प्रेम का होता है, ये कौन सा रिष्टदार है जो तुम्हे बांधने
36:42के लिए आया है, जो
36:53बोलो जल्दी, बोध की जगह घर में घुसके तुम्हें बंध देने आया है, तुम्हें संबंधी बोल रहे हो, अब बखाओ,
37:05एक कप चाय बना, उतके सामने बैठके खुद पी जाओ,
37:14और बेसरम तब भी न भागे, तो उसको बोलो की अब जराई धोके ले आदे,
37:30अब, मैं तो ऐसे ही दूँगा, उल्टे जाओ अब, तुम अच्छे बच्छे बन करके, हाँ,
37:40सुसील बालक, और बोलिये, दन्यवाद धारी,
37:49मेरा क्या धन्यवाद, मेरी चाए तो यह रखी,
37:56नमस्ते है चैरी जी, चैरी जी मेरे सवाल महिलाओं से रिलेटेट था,
38:01अभी रीसेंटल एक वेब सिरीज आई है, चिरहिया नाम से,
38:05उसका जो थीम है, वो है, मैरिटल रिप से रिलेटेट,
38:08मैं इस पर लीगेली बहुत सारी चीज़े पढ़ रहा था,
38:12तो मुझे पताए चला कि, जो बहुत सारे,
38:15अभी तक का, हाई कोट और सुप्रीम कोट में केसिस गया है,
38:19उसमें जो फाइनल वर्टिक्ट देना है, अभी भी उसको क्रिमिनलाइज नहीं करा गया,
38:23और जो एज है, उसके बेसेज पर काया जाते हैं कि 18 से पहले शादी हो रही है,
38:28और उनके बीच में सेक्शुल इंटर्गोर्स हो रहा है,
38:30तब ही उसको रेप बुले आगा, लेकिन 18 ये बाद तो आपकी जिन्दगी बन चुका है,
38:35और ये तो हो गई, सेक्स तो साधी का पार्टी है, ऐसा, सामान्य दोर पर चलता है,
38:40और उस मूवी में भी वेब सेरीज में भी ये दिखाया जा रहा था,
38:44कि कैसे एक फीमेल की लाइव जा रही है, तो अचारी जी ऐसे आपने भी तक समझाया,
38:49मेरे समझाने की कोई जरूरत ही नहीं है, ये बात तो कानून बनाने वाले ही स्पष्ट करे दे रहे हैं
38:59ना,
39:02कि जिसको आपने विवाह बना रखा है, उसका अर्थ क्या है, वो खुल कर बोल रहे हैं, वो छुपा भी
39:09नहीं रहे,
39:10वो कह रहे हैं कि विवाह का रखी है, कि पती का पतनी के शरीर पर अधिकार है, वो कह
39:17रहे हैं कि अगर हमने
39:19marital rape को criminalize कर दिया
39:22तो institution of marriage ही
39:23खत्म हो जाएगा
39:24इसका मतलब समझ रहो क्या है
39:27वो कह रहे हैं कि institution of marriage
39:30आधारित ही है
39:33पति
39:35द्वारा पत्नी की देह
39:37पर स्वामित्व पर
39:43ये जो ऐसा होना नहीं चाहिए
39:45बिलकुल मैं बिलकुल
39:47इन दो व्यक्तियों की संगति के
39:50खिलाफ नहीं हो तो मुझ संगति को विवा भी
39:52नाम दे सकते हो लेकिन
39:54विवाह का जो प्रचलित
39:56लोगधार में करत है
39:58वो यही कह रहा है
39:59कि इस institution
40:04का स्टम्भ है
40:06इसकी बुनियाद है
40:07क्या कि पत्नी एक बार
40:10आप बन गई है अब पती का आपके शरीर पर हक है
40:13और आप जाकर कि अब दावाव अगरा नहीं कर सकते
40:16कि मेरा पती बलातकार कर रहा है मेरा
40:18तो यह बात जब
40:20महिलाओं को पता है तो पहले से ही पता है
40:22ठीक देख लो आप क्या करना है
40:26छुपी होती तो कुछ खतरा भी होता
40:29अच्छा है कि बात बाहर आ गई है
40:32कानूनन बता दी गई है
40:34लिखे तुमें दे दी गई है
40:36कि देखो भाईया
40:39अगर अब घुस रहे हो उस घर में
40:41तो आप वहाँ से रेप की शिकायत आप नहीं कर सकते
40:46नहीं कर सकते
40:48बस हो गए
40:49मैं तो इसको नीट मानता हूँ
40:53बात जो भी थी साफ कर दी गई
40:56अब अगर इतनी साफ बात के बात भी
40:59अगर कोई कहे कि अरे मुझे तो धोखा हो गया
41:02तो धोखा खाने की जिम्मेदार आप खुद है
41:05क्योंकि कोई छुपी होई बात नहीं थी
41:10लोकधर्म ने
41:12और कानून ने
41:13दोनों ने खोल करके पहले ही बता दिया था
41:16कि ये क्या चीज़ है
41:17उसके बाद भी हो चीज़ आपने उठा करके खाली
41:19तो आप खुद जिम्मेदार है
41:28और मज़िदार बात ये है
41:30कि ये सब ऐसे देश में चल रहा है
41:32जहाँ
41:34ज्यादा तर विवाह आयोजित होते है
41:36किसी और के द्वार आयोजित
41:40मैं प्रेम विवाह अगराओको बहुत उची चीज़ नहीं मानता
41:43क्योंकि ये सब जो लड़का लड़की आपस में गोमते है
41:45इन्हें प्रेम का कुछ पता नहीं है
41:47या आम तोर पर वासना को शारिरिक आकरशन को या किसी और तरह के आकरशन को प्रेम समझ लेते हैं
41:53तो प्रेम विवाह का पक्ष लेने का मेरा कभी कोई इरादा नहीं
41:58लेकिन आयोजित विवाह तो बड़ी मद्यदार चीज होती है
42:01मस्त चुटकुला
42:07प्रेम विवाह धोखा हो सकता है, मुर्खता हो सकती है
42:12पर आयोजित विवाह इससे बहुत आगे की बात है
42:17न वो धोखा है, न वो मुर्खता है, वो सिर्फ एक चुटकुला है
42:24भले घर की संसकारी लड़की
42:29उसको All Girls स्कूल में पढ़ाया गया
42:33मुहले के लफंगों की उस पर छाया भी नहीं पढ़ने दी गई
42:40किसी अपरिचित व्यक्ति को तुम्हारा स्पर्श भी नहीं होना चाहिए
42:47और फिर उसे एक अपरिचित व्यक्ति को सौब दिया गया सेक्स के लिए
42:53अपरिचित परश करे नहीं चलेगा अपरिचित सेक्स करे चलेगा
43:02कोई हसा नहीं चुटकले पर
43:09कोई हसा ही नहीं
43:20यह अपरिचित व्यक्ति है आपको इसको सौब दिया गया है
43:27और अब आप यह भी नहीं गया सकते कि वो रेप कर रहा है
43:30और अगर वो अपरिचित है तो बताओ क्या प्रेम करेगा
43:36अगर संभोग करेगा तो बलाकारी तो होगा और क्या होगा
43:39बोलो
43:42जो अपरिचित है वो तुमसे प्रेम किस नाते कर लेगा
43:46जिसको तुम न जानते न समझते
43:52जिसके साथ तुम्हारी चेतना
43:57कभी नाची नहीं
44:02जिसके साथ पंक फैलाकर तुम कभी उड़े नहीं
44:08जिससे यूही महीने दो महीने के अंदर तुम्हारा कटबंधन हो गया
44:13उससे तुम्हारा शारीरिक संपर्क प्रेम के नाते तो नहीं हो सकता
44:18पर उसंपर्क तो होगा, संभोग तो होगा
44:20क्योंकि कानून ही कहता है
44:28कि अगर उसमें संभोग नहीं है तो, आप बाकाइदा इस बात पर तलाग ले सकते हैं, इसी बात को मैरेज
44:38का fulfillments माना जाता है, कानूनन, अगर मैरेज में सेक्स नहीं है कुछ महीनों तक तो आप बाकाइदा कोड जाकर
44:44क्या सकते हैं, जब सेक्स ही नहीं है, तो मैरेज हुई
44:48यह तो सेक्स होगा
44:49पर अपर इचितों के बीच में
44:51मैरिज होई है तो प्रेम तो नहीं होगा
44:52प्रेम तो नहीं होगा पर सेक्स होगा
44:54क्योंकि कानूनन जरूरी है
44:56तो सेक्स कैसा होगा
45:00जैसा भी होगा आप जानो
45:02भाईया
45:07हमें कोई लेना देना नहीं
45:13ये सरदर्द आपका है
45:16आप जानो
45:23हमारा यार है हमें
45:26हमन को इंतजारी क्या
45:30जो बिछडे हैं पियारे से
45:34भटकते दर बदर फिरते
45:39हमारा यार है हमें
45:41हमन को भे करारी क्या
45:46आपकी समस्य आप समखलो
45:52लगे हुए थे पंदरा साल की हुए नहीं
45:54कि बाहर कोई यार मिल जाए बाहर कोई यार मिल जाए
45:57दे दे प्यार दे प्यार दे प्यार दे प्यार दे
46:00हमें प्यार दे
46:03आठीवी में पहुंचे नहीं कि प्यार का खटोरा लेके लगे भीख मांगने
46:09अब भुख तो
46:12और जो भीतर ही यार बैठा हुआ है उससे कोई परिचय ही नहीं
46:19खुद को कभी जाना ही नहीं
46:22जो बाहर से मिली नहीं सकता उसको बाहर तलाशते रहे
46:26भीतर कभी जहांका ही नहीं अब भुख तो
46:40कईयों के तो बिलकुल होश फाकता है
46:42रंग उड़ा हुआ है कहां फस गए वो भी टिकट लेके
46:52बोच्थल में आचारे जी निशुलक बुलाते हैं
46:55ग्रेटर नोड़ा में जब भी होता है वहां टिकट तो नहीं लगता बहुता है
46:58क्या-क्या सुनने को मिल रहा है
47:07मैंने कहा था सवाल पूछो
47:11मैं तो ऐसे ही हूँ
47:17आप ही आयते मुझे छेड़ने छेड़ोगे तो यह ही होगा ऐसी सुनने को मिलेगा आप
47:24नहीं पसंदा रहा तो मत सुनू
47:31क्या
47:38समस्या पता है क्या है यह जवान नड़कों की
47:43छोटी चीज होता ही नहीं है प्यार
47:47आयोजित विवा न हो
47:50तो इनको कभी सेक्स मिलेगा ही नहीं
47:57प्यार के रिष्टे तक दूसरे तक पहुचने की
48:00इनकी काबिलियत ही नहीं है
48:03इनको छोड़ दिया जाए
48:05कि दूसरा तुमारे जीवन में प्रेम के रास्ते ही प्रवेश करेगा
48:10तो यह असी साल के वर्जिन मरेंगे
48:22क्योंकि छोटी मोटी चीज होता नहीं है न प्यार
48:25कभी कोई आता भी है बोलता है मेरे कोई है नहीं मुझे कोई मिली नहीं
48:28तो तुझ में है क्या कि तुझे कोई मिले
48:32और फूटी उसकी किस्मत जो तुझे मिल जाए
48:37काज्योब होता मुझे अगर तु बोलता तुझे कोई मिल गई
48:40यही बात महलाओं पर भी लागू होती है जब वो बोलती है मुझे कोई मिला नहीं है तुझे काहे को
48:43कोई मिले
48:44किसका इतना बड़ा भाग है कि तुझे मिले
48:50प्रेम का बिलियत मांगता है
48:52बुलता हुन प्रेम सीखना पड़ता है
48:55प्रेम के लिए उठना पड़ता है
49:01अयो जित विवाम में उठने वगेरा का कोई जंजेटी नहीं
49:05जैसे भी ओ फूफी तुमारे लिए कुछ न कुछ ले या देगी पंडित कुंडली मिला देगा
49:10लेओ सज गई सेज मनाओ सुहागरात
49:17ओ मम्मी मम्मी मैंने ढूंड ली है जातके अब तुम बात कराओ
49:24तो फिर मम्मी जाती है रिष्टा ले करके
49:43बहुत जो उची और महंगी चीज होनी चाहिए थी
49:47उसको हमने क्या बना दिया
49:49सस्ती और गिरी हुई चीज
49:50कि उम्र हो गई है तो एक नर और माधा को
49:54एक साथ बांध कर एक कमरे में धकेल दो
49:59एनिमल हस्बेंडरी
50:02उसको हस्बेंडरी बोलते है न शायद
50:07अच्छ उसको हस्बेंड क्यों बोलते है
50:09हस्बेंडरी तो वो होता है
50:11जानते हुआ जू अगरा में होती हस्बेंडरी
50:15महाँ पर एक बड़ा वाला रखा जाता है
50:18जवर्दस्ट गैंडा
50:19और एक एक करके उसको मादा दी जाती है
50:24ताकि अच्छी प्रजाती
50:25कि बच्चे पैदा हूँ, उसे बोलते हैं हस्बेंडरी
50:35ये सारे काम क्यों हो रहे हैं बताऊं
50:38लबो लुबाब
50:41क्योंकि हंकार प्रेम से घबराता है
50:45प्रेम से घबराता है
50:46तो कुछ तो विकल्प निकालना पड़ेगा न
50:49तो उसने सौ तरे के विगल्प निकाले है
50:51प्रेम से क्यों घब राता है
50:52क्योंकि प्रेम में उसका विगलन है
50:55प्रेम में हंकार को मिठना पड़ता है
50:57इसलिए वो प्रेम की जगह
50:59दूसरे रास्ते खोजता है
51:00जीवन के हरक्षेत्र में
51:02मातर संबंधों में नहीं
51:04हर चीज में वो ऐसे रास्ते खोजता है
51:06जिसमें उसे मिठना न पड़े
51:09तो जब बात इस तरही है
51:10पुरुष ढूड़ने की आती है
51:11तो वहाँ भी वो प्रेम का रास्ता छोड़कर
51:14बाकी सारे रास्ते पकड़ लेता है
51:15प्रेम कमारग कठिन है
51:20जानते हो न वो रास्ता कठिन है
51:22उस कठिन रास्ते पर चलने की आउकात नहीं
51:24तो फिर सस्ते रास्ते पकड़े जाते है
51:28आज तो में लड़की वाले देखने आ रहे है
51:32एकदम तयार हो यार हो के बैठ गए है
51:36छी
51:46हम बलो
52:15कर दो कर दो
52:46कर दो कर दो कर दो कर दो
53:15कर दो कर दो
53:46कर दो कर दो
54:15कर दो
54:16जो
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