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  • 11 hours ago
पूरा वीडियो: वासना: गलतियाँ और ग्लानि || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)

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Transcript
00:00पूरे जवान हिंदुस्तान का उचे से उचा सपना होता है
00:04सरकारी नौकरी जिसमें कुल 6-8 घंटे काम करके चल जाए
00:07पुष्टैनी घर, मा के पराठे, पिता की दौलत, जवान शरीर
00:12हम सोचते हैं कि बिना महनत करे अगर खाने को मिल रहा, सोने को मिल रहा
00:18यह हमारा सभाग्य है, दूसरी लाग कहते हैं वा बेटा सही जिंदगी चल रही है तुम्हारी
00:22ज़्यादा महनत वहनत करने नहीं पड़ती और छक्के खापी रहे हो
00:26जो व्यक्ते बिना महनत के छक के खापी रहे है, भोग रहे है, वो व्यक्ते वास्ताव में बड़ी दुर्दशा में
00:33है
00:33दुर्भाग्य है उसका कि उसको ऐसी जिंदगी मिल गई, जहां पिता जी ने छत दे दी, और विरासत दे दी,
00:40माता जी ने हलवा पूरी दे दी
00:41और सरकार ने नौकरी और पैसा दे दिया, इससे बड़ा दुर्भाग्य नहीं हो सकता, वो हिंदुस्तानी युवाओं का आदर्श बन
00:49चुका है, और तुम्हारी बदकिस्मती इतनी हो कि आदर्श साकार भी हो जाए, तो फिर तुम्हें इसकी सदा यही मिलेगी,
00:55जिंद�
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