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  • 11 hours ago

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00:00रिसेंट में एक मूवी रिलीज हुई थी धूरंदर उसमें एक थीम दिखाया है कि बलिदान पर्मो धरम
00:07तो मेरा सवाल यह है कि बलिदान परिवार के लिए किया जाए, स्टेट के लिए किया जाए, या देश के
00:14लिए किया जाए, या किस के लिए किया जाए
00:16आपके सामने कोई भी आकर आपको बता जाता है कि परमधर्म क्या है
00:20सिर्फ इसलिए क्योंकि आप जानते ही नहीं हो कि धर्म क्या है
00:24उचे से उचा शब्द है त्याग
00:26जीना तुमको है
00:28और जीओगे कैसे ये कोई और तै करेगा
00:30शाबाश
00:33ये बलिदान का गणित है
00:35मैंने बली दिये तो अब दूसरे से भी दिलवाऊंगा
00:39मुझे लूटा गया है तो अब दूसरे को भी लूटूँगा
00:41ये सब लुटे-पिटे घूम रहे होते हैं बलिदानी लोग
00:45और इंसे मिलो तो ये अपनी नजरों में बड़े उच्चोते हैं
00:47जब भी कोई आपसे कहे कि बलिदान परमधर्म है आप कहिएगा देखो
00:53वो चाहते हैं कि आप जूठे बोज ढोते रहो
00:57वो चाहते हैं कि जूठे कर्तव्यों में उलज करके
01:02आप अपने वास्तविक कर्तव्य को भूलते रहो
01:05क्यों किसी कर्तव्य का पालन करूँ
01:07तुम कौन होते हो मुझे मेरे कर्तव्यों का पार्ट पढ़ाने वाले
01:10सुधर्म सीखूंगा
01:11और वो भी सीधे श्रीकृष्ट से सीखूंगा
01:14तुम कार होते हैं मुझे बताने वाले कि मैं बलिदान करूँ
01:19ये बलिदान और अगरा से बचना क्योंकि सबसे ज़्यादा इतिहास में बलिदान आप से ही कराया गया है
01:23तुम स्त्री हो, तुम सब कुछ त्याग दो
01:26अपने पंक समाज को दे दो, अपनी देह पती को दे दो, अपना जीवन अउलाद को दे दो
01:34वास्तविक बलिदान क्या होता है
01:35अब असली चीज पर आओ
01:37जो सनातन विदान त आपको बताता है उसमें बलिदान का अर्थ क्या है
01:47गुड़ आफटरों सर, मैसल राशी हुमने
01:50और आपको बलिदान परमोधरम
02:03विच मेंस सेक्रिफाइज इस दी अल्टिमेट ड्यूटी
02:07तो मेरा सवाल यह है कि यह बलिदान परिवार के लिए किया जाए
02:11स्टेट के लिए किया जाए या देश के लिए किया जाए या
02:17किस के लिए किया जाए और अगर यह जो भी ड्यूटीज है
02:22यह एक दुसरे से टकरा रही है तो क्या किया जाए
02:32देखो दो तरह के बलिदान होते हैं
02:38एक वो नाम क्या था आपका राशी राशी बैठिए बैठ लगे दो तरह के बलिदान होते हैं
02:50एक वो जिसमें कोई बाहर वाला आपको प्रेरित कर रहा होता है कुछ छोड़ने के लिए
03:07और ऐसे में आम तोर पर जो चीज आप छोड़ रहे होते हैं उसको वही इकठा कर ले जाता है
03:15उठा ले जाता है
03:17जिसने आपको बलिदान के लिए प्रेरित किया होता है ठीक है लगभग वैसे कि जैसे आपको घड़ी चाहिए हो और
03:27आप मुझे प्रेरित करें कि ये घड़ी का बलिदान कर दो
03:32और उसमें ये बताएं ही नहीं कि बलिदान सैक्रिफाइस तो हो रहा है पर उस बली को अब उठा के
03:42कौन ले जाएगा उस सैक्रिफाइस को अब कलेक्ट कौन कर लेगा
03:46ये बताया नहीं जा रहा है बस ये का जा रहा है तुम बलिदान कर दो
03:49तो मैंने घड़ी का बलिदान कर दिया और मेरे बलिदान करते ही आप उस घड़ी को उठा करके ले गए
03:58मुझे क्या दे गए एक नैतिक श्रेष्ठता की भावना की मैं बलिदानी हूँ
04:08और इस भावना की धुन्ध में इस श्रेष्ठता के भ्रह्म में मैं ये देख भी नहीं पाया कि मुझे मूर्ख
04:17बनाया गया है
04:21कि यहां बलिदानकार्थ इतना ही है कि तुम अपना कुछ छोड़ दो भले तुम्हारा अपना हो नहीं हो उस पर
04:28हम अभी बाद में आ जाएंगे
04:29तुम कुछ छोड़ दो तुमने इतना ही पढ़ा कि तुम कुछ छोड़ दो तुमने ये नहीं पूछा कि मैं जो
04:34छोड़ूंगा उसको अब लेके कौन चला जाएगा
04:37जो मुझसे बलिदान करवाया जा रहा है
04:41अब उसका लाभार्थी कौन है
04:43मैं तो बलिदान कर दूंगा पर उसका बेनफिशियरी कौन बनने जा रहा है
04:47ये ना आपको बताया गया और ना आपने पूछा
04:52ये गड़बड़ वाला बलिदान होता है
04:54और इस तरह का बलिदान पूरी दुनिया में हजारों सालों से बड़ी बड़ी जनसंख्याओं से कराया गया है
05:06जब आप किसी की कलाई मरोड करके उसकी घड़ी नहीं उतरवा सकते
05:16जब आप दुनिया की नजरों में शोशक लगे बिना शोशन करना चाहते हो
05:27तब एक एतिहासिक रूप से बड़ा उपयोगी साधन रहा है बलिदान
05:38बलिदान करवा लो किसी की कलाई मरोड करके उसकी घड़ी उतरवाओगे
05:46पहले तो वो विरोध करेगा शिकायत करेगा
05:49और दूसरी बात इधर उधर फैलेगी तो तुम्हारी चवी खराब होगी
05:54कि देखो तुमने किसी की घड़ी लूट ली
05:57उससे कहीं बहतर है कि उससे बोलो कि देखो
06:00बहुत बड़ा आदर्श है कि तुम बलिदान करो
06:04और अब वो खुद बखुद अपनी घड़ी उतार करके आपके चरणों में अर्पित कर देगा
06:10आप मुस्कुराएंगे आप कहेंगे तुम महान हुए क्योंकि तुमने बलिदान किया
06:14और आपने यह देखा ही नहीं कि आपने जो बलिदान किया उसको लेके कौन गया
06:18वो घड़ी अब किसकी कलहाई पर है यह आप देखना ही भूल गए
06:24यह बाहरी और नकली बलिदान होता है
06:31बलिदान, त्याग, सेक्रिफाइस, रिननसियेशन यह बड़े अच्छे और उच्छे शब्द है
06:40पर समाजों ने, लोकधर्मों ने इनका इतिहास में बड़ा विक्रित अर्थ और बड़ा दुरुपयोग करा है
06:55बोल दो किसी को किसी विवस्था में डाल करके कि अब तुम इस विवस्था में आ गए हो तो तुम्हें
07:02अब फलानी चीजों की सैक्रिफाइस करनी पड़ेगी
07:04और अगर तुम नहीं कर रहे तो तुम अनैतिक हो तुम दोशी हो तुम अपराधी हो तुम गिरे हुए हो
07:11वो खुद बखुद बलिदान करने को ततपर हो जाएगा वो बलिदान नहीं है वो लूट है
07:17और एक बार आपने वो तथकतित बलिदान कर दिया तो फिर आप दूसरों से भी करवाओगे
07:25सास ने अपनी आजादी का बलिदान करा होता है तो वो बहू से भी करवाती है
07:33और सास ने क्यों करा क्योंकि उसकी सास ने अपनी आजादी का बलिदान करा था
07:37वो बलिदान था या कुछ और था
07:43पता नहीं अब रैगिंग होती है कि नहीं होती है
07:45कैमपस में होती है
07:48अब सब प्रोफिसर्स बैठें इनके सामने कैसे बोलेंगे बिचारे
07:53पर जब मैं सिकंड येर में पहुंचा था अपने कैमपस में
07:59तो थोड़ी बात चली हमने का इनको छोड़ी देते हैं
08:02यहां फ्रिशर्स क्या बोलते हैं
08:04हमारे यहां फच्चा बोलते थे
08:06तो उगार गिए अब इनको छोड़ देते हैं
08:10या कम करते हैं
08:13तो हॉस्टल के हमारे कई बैच मेट्स उग्रो गए
08:17बोले हमें किसी ने छोड़ा था
08:20जब हमारी जम करके हुई तो इनकी भी करेंगे
08:24ये बलिदान का गणित है
08:27मैंने बली दिये
08:28तो अब दूसरे से भी दिलवाऊंगा
08:32मुझे लूटा गया है तो अब दूसरे को भी लूटूँगा
08:38बात आ रही है समझ में
08:39ये सब आपको मनोवैग्यानिक रूप से अधीन करके होता है
08:49तुम अपनी मुक्त त्याग दो
08:51तुम अपनी उडान त्याग दो
08:52या तुम अपनी ग़डी त्याग दो
08:55और अकर नहीं त्याग ओगे
08:57तो मैं तुम्हें अपनी नजरों में गिरा दूँगा
09:00इसमें शिकार वही बनते हैं
09:02जिनको दूसरों की नजरों में उठे रहने की बड़ी ललक होती है
09:09नहीं तो आप सीधे क्या देंगे
09:10भाई ये घड़ी है
09:12ये समय दिखाती है और समय जिंदगी है
09:15नहीं देता अपनी घड़ी
09:16वो बोलेगा तू अपनी घड़ी का बलिदान नहीं कर रहा
09:19आज से तू मेरी नजरों में गिर गया
09:20बोलो गिरने दो
09:23तुमारी नजरें ही गिरी वही है
09:25उनमें जो कुछ रहेगा वो अपने آپ गिर हुआ ही होगा
09:29मुझे तुम्हारी नजरों में उठा हुआ रहना भी नहीं है
09:34मैं अपनी हस्ती को तुम्हारी नजरों की कैद में रखता भी नहीं हूँ
09:41मेरा अस्तित तुम्हारी दृष्टी के भीतर नहीं है
09:45मैं मैं हूँ
09:47तुम्हारी नजरों में मैं जैसा भी हूँ मुझे फरक नहीं पड़ता क्योंकि मैं जानता हूँ मैं कौन हूँ
09:52तो तुम ये जो बलिदान के बहाने मुझे लुटना चाहते हो मैं नहीं लुटने वाला भाई
09:57मैं नहीं लुटने वाला
09:58इसमें लुटने को वही ततपर हो जाते हैं
10:02जिन में आत्म ग्यान नहीं होता
10:05और फिर इसलिए आत्म सम्मान नहीं होता
10:07तो वो अपना आत्म सम्मान दूसरों में तलाशते हैं
10:10दूसरों से कहते हैं थोड़ा सम्मान दे दो
10:14थोड़ी स्विकृति दे दो और दूसरा मुफ्त तो कुछ देगा नहीं ना, दूसरा कहता है, थोड़ा सम्मान दे दूँगा, थोड़ी
10:20स्विकृति दे दूँगा, बदले में तुम कुछ बलिदान तो करो।
10:26और ये जो बलिदानी नहतिकता होती है बड़ी मज़दार चीज होती है
10:30ये सब लुटे पिटे घूम रहे होते हैं बलिदानी लोग और इनसे मिलो तो ये अपनी नजरों में बड़े उच्छ
10:35होते हैं
10:38मावा आपको पता ही नहीं पहली बात तो उनका विवाग क्यों हुआ फिर उन्हें पता नहीं कि उन्होंने संतान क्यों
10:42पैदा करी कुछ हो रहा है उनके साथ
10:45और वो उम्र भर बच्चे पर चड़कर बैठेंगे हमने तुम्हारे लिए अपनी खुशियां बलिदान करी है हमने तुम्हारे लिए अपनी
10:52खुशियां बलिदान करी है अब तुम हमारे कहे अनुसार चलोगे
10:56तुमसे कहा किसने था बलिदान करने को
11:00और कुछ छोड़ने के लिए पता होना चाहिए
11:03कि छोड़ने वाला कौन है और छोड़ी जा रही वस्तु क्या है
11:06तुम्हे कुछ पता भी था तुम कौन हो और तुम क्या त्याग रहे हो
11:09जब तुम कुछ जानते ही नहीं
11:10तो तुमने क्या बलिदान करा है वो बलिदान नहीं है
11:18वो ऐसा है जैसे शराबी शराब खाने में अपनी कोई चीज नशे में छोड़कर भूलकर आ जाए
11:26नशे में आपसे कोई चीज छूट गई गिर गई उसको बलिदान थोड़ी बोलते है
11:31सोचो कोई प्यक्कड वापस आ रहा है किसी बार हो गहरा से और वापस आ करके कह रहा है मैं
11:36अपने मुबाइल का बलिदान कराया हूं
11:41मैं अपने मोबाइल का वहां बलिदान कराया हूं तुम बलिदान नहीं कराये तुम्हें पता भी नहीं है कि तुमने क्या
11:48छोड़ दिया छूटी हुई चीज की तुम कीमत भी नहीं जानते ठीक से तुम नशे में हो
11:54हम में से ज़ाधा तर बलिदानी ऐसे होते हैं
11:56और यहां भी आप में से भी
11:58बहुत सारे बलिदानी बैठे होंगे
12:06जब भी कोई आप से कहे
12:08कि बलिदान परमधर्म है
12:09आप कहिएगा देखो पहली बात तो यह बात
12:11शास्त्रगत है नहीं
12:13लेकिन फिर भी हम यह मानते हैं कि बलीदान का एक सुन्दर और उचा अर्थ संभव है
12:20पर तुम पहले यह बता दो कि तुम किस बलीदान की बात कर रहे हो
12:26if there is somebody making a sacrifice there is also somebody collecting the sacrifice
12:32who is that person पहले तो यह बताओ कि मैं जो छोडूंगा
12:36वो किसके खाते और किसके जोले में जाने वाला है यह तो बताओ
12:41मुझसे तो छुडवा रहे हो पर मेरे द्वारा छोड़ी गई वस्तु से अब लाभ किसका होगा वो तो बताओ
12:50और वो बताए बिना मेरे सामने धर्म बाचने मताओ
12:55आपके सामने कोई भी आकर आपको बता जाता है कि परमधर्म क्या है
12:59सिर्फ इसलिए क्योंकि आप जानते ही नहीं हो कि धर्म क्या है
13:06आप जानते ही नहीं कि धर्म क्या है तो इसलिए कोई भी आकर आपके सामने कुछ भी बोल सकता है
13:10और फिर आपको मानना पड़ेगा और अक्सर ऐसी बाते आपके सामने संस्कृत में रख दी जाती है भले ही वो
13:18किसी शास्त्र में ना आती हो ताकि आपको लगे कि ये बात सची है कहीं शास्त्र से ही उठाई होगी
13:28और ये कोई आज की बात नहीं है ये देखो बलिदान कर रहे हैं अभी कैमरे का बलिदान हो जाएगा
13:37और कौन रोकता है इनको ये कहने से
13:42कि मुझे देखो मुझे मैंने सरवोच्चे त्याग किया है
13:49I made the supreme sacrifice
13:59था क्या कुछ नहीं ना खुद को जानते ना पाउं तले की जमीन को जानते
14:06लड़कडा रहे हो गिर रहे हो किसी ने कुछ बोल दिया उसी का आग्या पालन करे जा रहे हो
14:14तुम्हारे हाथ में सेब था किसी और की लालच भरी निगाह थी तुम्हारे सेब पर
14:19तो उसने कहा दिया सेब का बलिदान कर दो ये क्या कर रहे हो ये क्या कर रहे हो
14:29और चुकि प्रश्न कहां गई राशी हाँ चुकि प्रश्न एक महिला ने पूछा है
14:37तो महिलाओं को तो मैं और आगाह करे देता हूँ
14:40ये बलिदान नोगरा से बचना क्योंकि सबसे आदा इतिहा से बलिदान आपसे ही कराया गया है
14:47तुम स्त्री हो तुम सब कुछ त्याग दो
14:53अपने पंक समाज को दे दो अपनी देह पती को दे दो
14:57अपना जीवन अौलाद को दे दो
14:59तुम स्त्री हो तुम अपने आपको पूरा ही बलिदान कर दो
15:13वास्तविक बलिदान क्या होता है
15:16अब असली चीज़ पर आओ
15:19नकली को तो उधेर दिया
15:23वास्तविक बलिदान का संबंध किसी बाहर वाले से नहीं होता है
15:28न बाहर की वस्तु के त्यागने से होता है
15:32न बाहर किसी को कुछ देने से होता है
15:38मैं एक बाहरी वस्तु को किसी बाहरी जगह पर रख आया छोड़ आया
15:44ये वास्तविक अर्थ नहीं है त्याग का
15:48अब हम आते हैं
15:50सेक्रिफाइज बलिदान त्याग के
15:53उस अर्थ पर
15:56जो आपको वास्तविक धर्म से
15:59स्वधर्म से शुरुति धर्म से मिलता है
16:01इससे पहले जो बलिदान का अर्थ चल रहा था
16:04वो कौन से धर्म से मिलता है लोक धर्म से लोक धर्म मने जहां परंपरा कोई धर्म बना दिया गया
16:11जहां इधर उधर जो भी संस्कृती चल रही है उसको धर्म मान लिया गया जहां शास्त्र कभी पढ़े ही नहीं
16:19गए और जो कुछ हवाओं में था चुपचाप उसी को मान ल
16:23यही तो धर्म होता है वो कहलाता है लोक धर्म वास्तविक धर्म को तोड मरोड करके जो विकृत संस्क्रण तैयार
16:32होता है उसको कहते हैं लोक धर्म
16:35अब हम बात करते हैं सोधर्म की वही सोधर्म जिसके लिए श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं
16:40कि सोधर्मे निधनम श्रेय वास्तविक धर्म शुति धर्म वो धर्म
16:48जो सनातन विदानत आपको बताता है उसमें बलिदान का अर्थ क्या है
16:54उसमें बलिदान का अर्थ बाहरी नहीं है
16:58न बाहरी घड़ी की बात है
17:00न बाहरी इस्थिती की बात है
17:04न प्रेरणा बाहरी है
17:07न पुरोहित बाहरी है
17:13भीतर कोई बैठा है जो अतिरिक्त है
17:17अनावश्यक है
17:21शरीर पर चर्बी की तरह है
17:25सर में दर्द की तरह है
17:29छाती में गाठ की तरह है
17:31नीडलेस
17:32होना नहीं चाहिए पर है
17:41उसको छोड़ देना
17:42ये जान करके कि इसको विर्थ ही ढो रहा हूँ
17:45इसको त्याग कहते हैं
17:48त्याग माने
17:50जो अनुपयोगी है
17:53उसकी अनुपयोगिता को साफ देख लेना
17:57और जिसकी अनुपयोगिता दिख गई
17:59जिसके अनुपयोगी होने के बावजूद
18:03उसकी कीमत अदा करने की मूर्खता दिख गई
18:11उसको छोड़ने में फिर कुछ श्रम लगता है क्या
18:15बोलो जल्दी
18:17आप सोच रहे थे आपकी जेब में नोटों की गड़ी है
18:22बढ़िया वजनी
18:23बहुत सारे नोट
18:25पांच किलो ब्राबर नोट
18:26भारी है ऐसे जेब फूली हुई
18:29और आप इतराए इतराए घूम रहे थे
18:31और आपको पता चल गया कि वो सब नकली थे
18:35वो सब नकली थे
18:39आप क्या करोगे उन्हें उठा करके
18:42नीचे रख दोगे
18:43क्यों ढोना है ये पांच किलो
18:45ये है वास्तविक त्याग
18:48इसमें किसी पर उपकार एहसान नहीं किया जा रहा
18:53इसमें बस जो ढो रहे हो
18:54उसकी विर्थता को देख लिया जा रहा है
18:58और नोटों का उधारण तो फिर भी बाहरी है
19:00क्योंकि हाँ जेब में है
19:03हम ढोते हैं यहाँ पर
19:05यहाँ
19:08ऐसी चीजें जिनको हमने कभी जाना नहीं हो
19:10नोटों की गड़ी का बस वजन आपको अनुभव हो रहा था
19:13उस वजन से आपने अनुमान लगा लिया था
19:15कि कुछ सार्थकता है
19:16इसी तरीके से हमारे भीतर भी कुछ है
19:20जिसके बस वजन का अनुभव होता है
19:24उसको कभी पर्खा नहीं गया
19:25जैसे ये नोटों की गड़ी आपने पर्खी नहीं
19:27बस उसके वजन को महसूस कर रहे थे
19:29वैसे हम भी अपने भीतर बहुत कुछ लेकर चलते हैं
19:33जिसका अनुभव तो होता है पर परिक्षन नहीं
19:37आप जब उसका परिक्षन करते हो तो आपको पता चलता है
19:39वो चीज नकली है और आप उसे ढो रहे हो
19:41और ढोने में ठक रहे हो
19:46ढोने में अपनी जीवन उर्जा को समय को वेर्थ कर रहे हो
19:52तब ये बात सहज हो जाती है बिलकुल कि जो मैं भीतर ढो रहा था
19:55मैं उसको छोड़ दूँ
19:58मैं किसी धर्म से आता हूँ
19:59मैं किसी जगह से आता हूँ
20:01मैं वहां की शिष्ठता का भावट हो रहा था
20:03वो वेर्थ है भाई
20:06मैं किसी जाति किसी वर्ण से तालुक रखता हूँ
20:09और इस नाते अपने आपको उच्चे या हीन समझ रहा था उबात वेर थे भाई उसको पर्खो
20:16तुम्हें तुम्हारे पुर्खों ने बता दिया, हवाओं ने बता दिया, परंपरा ने बता दिया
20:19कि तुम ऐसे हो, तुम वैसे हो, तुमने वो बात पकड़ कर अपने भीतर बैठा ली
20:22और उसे धो रहे हो, धो रहे हो, धोने की कीमत अदा कर रहे हो, ठके जा रहे हो
20:26पर परख नहीं रहे हो परखो अपने आप छूट जाए का जो छूटने लायक है यह त्याग है वास्तविक परखो
20:33धो नहीं कोई आदमी हो जो दूसरे का बोजा या सर पे उठाए उठाए रेल्वे प्लेटफॉर्म पर भाग रहा हो
20:43और बड़ा वाला प्लेटफॉर्म है
20:47एक ही प्लेटफॉर्म अपने आप में बड़ा लंबा है और वैसे बीस प्लेटफॉर्म है स्टेशन पर और वो बीस सो
20:54प्लेटफॉर्म में सीडियां उतर रहा है सीडियां चढ़ रहा है और यहां पर उसने बहुत सारा वजन रखा हुआ है
20:59आप कहोगे रे उसको ट्रेन �
21:01पकड़नी होगी पर तब क्या कहोगे आपको पता चले कि वो नहीं जानता उसे किस ट्रेन में चढ़ना है बात
21:08अभी शुरू हुई है वो जो उठा करके भाग रहा है वो सामान उसका अपना नहीं है क्या कहोगे ऐसे
21:17को बोलो जल्दी आपको एक ऐसा व्यक्ति दिख गया �
21:22रेलवे स्टेशन पर जो बहुत सारा बोजा सर पे रख करके एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म में एक घंटे से
21:30भाग रहा है ठकान से चूर है पसीने से तर्बतर है और भागे ही जा रहा है उसको दूर से
21:37देखोगे पर्खोगे नहीं तो कहोगे आदमी अ�
21:50जानता जिंदगी क्या है यह नहीं जानता यात्रा क्या है यह नहीं जानता मंजिल क्या है और इस नाते यह
21:55भी नहीं जानता कौन सी ट्रेन में बैठना है और बस यह अपना बैगेज लोड बोजहा लेकर करके दोड़े पड़ा
22:03है तो आप क्या कहोगे अभी क्या कहोगे अ
22:18वो हम है, वो हम है, हम और क्या कर रहे हैं जिन्दगी में, हम और क्या कर रहे हैं
22:24जिन्दगी में, किस-किस को साफ दिखाई देता है कि यहां बोज है, किस-किस को दिखाई देता है,
22:35बाकियों को मोक्ष है ठीक है अच्छी बात है
22:41पड़ाम पर तीन चौथाई लोगों ने हाथ उठाई तो तीन चौथाई लोगों में तो इतनी इमानदारी है कि उन्हें दिखाई
22:46देता है कि बोज लेकर
22:47जिन्दगी में घूम रहे हैं
22:52वो बोज आपका अपना नहीं है जो आपका अपना नहीं है उसे सर पर नड़ो उसे नीचे रख दो इसको
23:01कहते हैं बलिदान
23:03यह वास्तविक परिभाशा है त्याग सेक्रिफाईस या रिननसियेशन की
23:08जो तुम हो ही नहीं उसको लेकर के क्यों दोड़े पड़े हो
23:13इसलिए श्री कृष्ण बड़े सुंदर शब्द से वास्तविक धर्म का परिचे देते हैं कहते हैं स्वधर्म
23:20परधर्म नहीं उसी श्लोक में परधर्म की भी बाद कर देते हैं
23:25परधर्म बड़ा भयावा होता है परधर्म वो जहां बाहर का बोजह आपके सर पे डाल दिया गया है करतव बता
23:32के ड्यूटी बता करके आइडेंटिटी पहचान बता करके कि लो इसको ढो क्योंकि ये तो तुम्हारी ड्यूटी है वो परधर्म
23:41है
23:42और गीता आपको यही पताने के लिए है कि परधर्म का पालन मत करना छोड़ दो परधर्म को सोधर्म में
23:49जीओ भले उसमें जान चली जाएगी जान जाने की संभावना इसलिए क्योंकि घूम रहे हैं बाहर स्वार्थी आपसे बलिदान कराने
23:56के लिए जब आप कहोगे कि नह
24:11आप अपने वास्तवे करतवे को भूलते रहो वो चाहते हैं कि पत्थरों से उल्जे उए आप हीरे मोतियों को त्यागते
24:22रहो और क्यों ताकते रहो हीरे मोतियों को क्योंकि वो सारे हीरे मोती फिर वो हड़प ले जाते हैं
24:30जब आप मना कर दोगे जूटे त्याग से तो बिल्कुल संभव है कि वो हिंसक हो जाएंगे हो सकते हैं
24:36हिंसक तो क्या दिया कृष्ण ने मार देंगे मर जाना
24:42पर नकली कर्तव्यों का पालन मत करना मत करना कोई आके तुम्हें बताए कि फलानी चीज तुम्हारा कर्तव्य है पूछना
24:50कैसे ये मेरा कर्तव्य कैसे हो गया नहीं तुम्हें ये करना ही चाहिए नहीं क्यों करना चाहिए बताओ तो क्यों
24:57करना चाहिए और मैं नहीं कह रहा
24:59गीता कहती है
25:00मैं नहीं पूछ रहा
25:01कृष्ण पूछते हैं
25:02बताओ क्यों
25:03क्यों किसी कर्टवे का पालन करूँ
25:05तुम कौन होते हो
25:06मुझे मेरे कर्टवियों का पाठ पढ़ाने वाले
25:10सुधर्म सीखूंगा
25:11और वो भी सीधे श्री कृष्ट से सीखूंगा
25:13तुम कार होते हैं
25:14मुझे बताने वाले कि मैं बलिदान करूँ
25:20बात आ रही है समझ में
25:23उच्छे से उच्छा शब्द है त्याग
25:27पर त्याग में
25:30आप कुछ ऐसा नहीं छोड़ रहे होते
25:32जो आपके काम का होता है
25:36त्याग ऐसा ही है
25:37जैसे नहाया तो मैल का तयाग हो गया उसमें आपने किसी पर क्या उपकार किया है तयाग ऐसे ही जैसे
25:45सुभै मल तयाग कर देते हो किसी दूसरे
25:48पर हैसान कर रहे हो क्या बात आ रही हैं समझ में वात्विक तयाग करो वो अंतरिकlate
26:03बात होती है और मैं देख रहा हूं मेरे भीतर क्या-क्या गैर जरूरी है कौन सी माननेता हैं कौन
26:10सी रूढ़ियां कौन से अंदविश्वास मैंने पकड़ रखें हैं कौन सी मेरी पहचाने आयातित हैं
26:17मुझे कौन सी आइडेंटिटीज दे दी गई हैं बिना मेरी अनुमति के यह तो तुमने अच्छा खेल चला रखा है
26:24बच्चा पैदा हो उसको कोई पहचान दे तो तू यह है तू यह है
26:31और फिर जब वो बड़ा होने लागे तो तू चू कि यह है इसलिए अब यह तेरा करतव वे है
26:36वो खहेगा भाई
26:38इफ ड्यूटीज फ्लो फ्रॉम आइडेंटिटी तुमने मुझे यह आइडेंटिटीज मुझसे पूछ के दी थी क्या
26:45तुमने मुझसे पूछा था कभी यह इडेंटिटी देने से पहले अब क्या रहे हो नहीं तू तो यह है इसलिए
26:51तुझे इस करतवे का पालन करना पड़ेगा
26:54मैं इंकार करता हूँ मैं इंकार करता हूँ क्यों कि क्रिश्ण है मेरे साथ तेरी क्यों सुनू तू कौन है
27:14है जिसके भीतर एक ऐडेंटिटिटी और उससे अंबंधित कर दी गई है इंप्लांट कर दी गई है
27:24है सर्जिकली अदिए इस कर दी गई है को एक साइकलौॉजिकल इंसर्षण है यहां डाल धिया गया है और अब
27:33वह अपनी उस द्यूटि � §
27:35अपनी जिन्दगी बना करके उग्र भी हो गया है करें फ़लानी चीज की रख्षा करना ही तो मेरा धर्म है
27:42तुझे कैसे पता इसे धर्म बोलते हैं
27:47तुने कितने उपनिशद पढ़े जहां से धर्म की व्याक्षा मिले तुझे कुछ पता भी है तुझे बुद्भू बनाया गया है
27:54तु जिस चीज को ले करके इतना आतुर इतना ओगर इतना हिंसक हो रहा है वो चीज तेरी है यह
28:00नहीं
28:03तेरी उम्र तेरी पहचान है देखो अब तुम 25 साल के हो गए और तुमें फलाना काम कर लेना चाहिए
28:10यह मैं कैसे अपना करतवे मान लूँ कैसे मान लूँ
28:17नहीं देखो तुम फलाने वर्ड से आते हो तो तुम्हें इस प्रकार का आचरण तो करना ही पड़ेगा क्यों मान
28:25लूँ क्यों मानूँ
28:31तुम महिला हो वो भी तुम मुसलिम महिला हो तो तुम्हें इस तरह के कपड़े पहनना ही पड़ेंगे
28:39तुमने मुझसे पूछकर ये सब तह करा था
28:41और मुझसे पूछकर नहीं तह करा था
28:43तो अब मेरे उपर ये बात लाद क्यों रहे हो
28:48हमारे तुम्हारे बीच ऐसा करार तो कभी हुआ नहीं
28:50और जब नहीं हुआ
28:52तो अब मेरे उपर ये बात कैसे लाद रहे हो
28:54सक्से ऐस तर्क रहिएगा सतर रहिएगा जो भी कोई आप से कह रहा हूँ ना बलिधान करो देखियेगा कि कहीं
29:07वह खुदी तो नहीं खड़ा हुआ है आपके बलिधान को अपने जोले में भरने के
29:12लिए देखिए कहीं आपके बलिदान में उसका स्वारत तो नहीं है बहुत जरूरी है इसी लिए वास्तविक बलिदान बाहरी नहीं
29:22होता असली त्याग अंदरूनी होता है
29:29हाँ वो जो अंदरूनी त्याग है उसकी गूंज बाहर जरूर सुनाई देती है
29:39वो जो भीतर छोड़ दिया गया है भीतर अब जो शुधता उठी है
29:49उसकी निर्मलता और उसकी सुगंध फिर बाहर भी अनुभव में आती है पर बाहरी चीज प्राथमिक नहीं है
29:58त्याग प्राथमिक तौर पर भीतरी बात है उसके फिर लक्षन चिहन प्रमान बाहर भी दिखाई देते हैं बाहर भी दिखाई
30:11देते हैं पर उसकी शुरुआत सदा कहां होगी भीतर होगी
30:21यह करा मत करो आप यहां बैठे हुए हैं घर में दो बच्चे हैं उसको बोल रहे हैं नो बिटा
30:30आप अपनी चीज उसको दे दो
30:33आप अपना खेलोना उसको दे दो, पडोस के बच्चे को दे दो, आप अपना एपल छोटे भाई को दे दो,
30:42यह अच्छी चीज होती है, हमें सेक्रिफाइज करना आना चाहिए, हमें शेयर करना आना चाहिए, बिकार की बातें मत करो,
30:55प्यार होता है
30:58तो आदमी आधा सेब नहीं देता पूरे ही देता है
31:02और प्यार नहीं है तो आधा भी देने के लिए उसको मजबूर मत करो
31:09पूछो अपने आप से कि घर का महौल ऐसा क्यों नहीं है कि बच्चा प्यार नहीं जानता
31:16घर के महौल में बच्चा प्यार क्यों नहीं जान पा रहा पर नहीं हम इस पर ध्यान नहीं देंगे
31:23हम बच्चे को कुर्बानी सिखा रहे है
31:26तू बड़ी बहने चोटा भाई आया है चल अपना सेव अब चोटे भाई को दे दे
31:31क्या सिखा रहे हो उसको
31:35और तुम्हें क्या लग रहा है वो दे कर भूल गई नहीं उसने खाता खौल दिया भी तरब
31:42वो गिंती करके रखेगी एक मेरा खिलोना में उससे छुड़वा दिया उसको दिलवा दिया एक मेरा सेब छुड़वा दिया उसको
31:49दिलवा दिया
31:52विस्तर में मेरी जगा अब पर अब वो लेटा करता है
31:56वो पूरा हिसाब बना करके रखेगी और फिर जिन्दगी में किसी ना किसी से वो हिसाब बराबर करेगी
32:02उस भाई से नहीं कर पाई तो किसी और से करेगी पर करेगी जरूर बदला लेगी
32:07ये जूटे बलिदान के साथ एक और समस्या है
32:11चुकि उसमें आपने सचमुच नहीं त्यागा होता
32:17किसी दबाव में किसी भरम में आपसे छुड़वाया गया होता है
32:20इसलिए खाता कभी बंद नहीं होता
32:25बीतर एक घाव की तरह रह जाता है बलिदान
32:29एक खोखलापन बन जाता और फिर आप अपनी ख्शती पूर्ती करते हो
32:34आप किसी और से लूटते हो जिन्दगी से मुआवजा मांगते हो
32:42बात आ रही है समझ में
32:48नैतिक आचरण से जिन्दगी नहीं कटने वाली भाई
32:53नैतिक आचरण करने निकले हो तो ये भी तो पूछलो नीती बनाई किसने
32:58जिन्दगी तुम्हारी है नीती बनाई किसी और की है
33:03तो तुम लुटने के लिए निकले हो क्या दुनिया के बाजार में
33:08जिन्दगी तुम्हारी और नीती निर्धारक कोई और
33:12शाबाश
33:17जीना तुमको है
33:19और जीओगे कैसे ये कोई और तै करेगा
33:22शाबाश
33:27चीज तुम्हारी है
33:30और तुम्हें छोड़ने के लिए
33:32कोई और बताएगा
33:33और तुम छोड़ भी दोगे
33:35शाबाश
33:38हाँ
33:39जब भी तरी आँख खुलती है
33:42तो कचरा खुद बखुद छूट जाता है
33:46और जब प्रेम होता है
33:48तो आदमी सिर्फ अपने हाथ की चीज़ दूसरे को नहीं देता
33:52अपने आपको ही
33:53समूचा दूसरे को और पित कर देता है
33:55वो चीज़ दूसरी है
33:57वो बात दूसरी है
33:58वो नीती नहीं है
33:59वो प्रेम है
34:04बात आ रही है
34:07और कभी भी
34:11उनकी नैतिक गुंड़ई
34:13से दब मत जाना
34:15जो सामने खड़े हो जाते हैं
34:16कि तुम्हें पता भी है
34:17मैंने क्या-क्या सेक्रिफाइज किया है
34:19बड़े बेवकूफ हो तुम
34:20और ये बात बता के मुझे इंप्रेस करने आयो
34:24पहली बेवकूफी ये
34:27कि जिंदगी भर लुटते रहे हो
34:30और उससे बड़ी बेवकूफी ये
34:31कि तुम कितना लुटे हो
34:32ये बता कर गया मुझे पर इंप्रेशन जाड़ना चाहते हो
34:37और ऐसे ही होते हैं
34:41नैतिक गुंड़ाई
34:44नैतिक गुंड़ागर्दी
34:45आम सुपीरियर
34:46बिकॉज आफ मेड़ सेक्रिफाइस
34:50जो भी करा अपने पास रखो न
34:52उससे मेरे उपर क्यों चढ़े आ रहे हो
34:57तुम जानो तुमारी सेक्रिफाइस जाने
34:59मैं जहां से देख रहा हूं सब जूटा है
35:01तुम भी जूटे तुमारी सेक्रिफाइस भी जूटी
35:05तुमारी नकली सेक्रिफाइस के नाते
35:07मैं तुमें क्रिडिट नहीं देने वाला
35:09जाओ कोई और शिकार तलाश हो
35:14यही सब बोल बोल के डराया दबाया जाता है ना जाओ उनके सामने जुको तुम्हें पता भी है उन्होंने कितने
35:19बड़े-बड़े त्याग किये थे
35:21नहीं हमें नहीं पता
35:23हमें बिलकुल नहीं पता
35:27क्योंकि उनके बारे में पता होने से पहले
35:29हमें हमारे बारे में पता होना चाहिए
35:30उन्होंने क्या त्याक किये
35:32उससे पहले सुधर्म कहता है
35:34त्याक की परिभाशा पता होनी चाहिए
35:37पर ना तो आप मुझे मेरे बारे में जानने दे रहे
35:40ना आप मुझे सुधर्म जानने दे रहे
35:42ना मुझे आप वास्तविक ट्याग की परिभाशा जानने दे रहे
35:46आप बस नैतिक गुंडागरदी चला के कह रहे हो
35:49तो जाओ उनके सामने जुको, तुम्हें पता उन्होंने कितने बड़ोड इत्याग किये थे
35:54मैंनी जुकने आला ऐसे
35:58जा रहा हूं गीता पढ़ने
36:08सुननी अगर मुझे तो कृष्ण की सुनूंगा
36:11तुमसे क्यों सुनू
36:21और हाँ तुम्हारे लिए भी अच्छा यही है
36:23कि आओ मेरे साथ और दोनों इकठे गीता पढ़ते हैं
36:27जान जाओगे कि वास्तविक बलिदान किसको बोलते हैं
36:42जाओगे कि वास्तवरा यही तुम्हा
36:47यहाल ≭ कि वास्तॵराण kaloठगpf
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