00:05कहते हैं आप ता जब दर्वाजा घटखटाती है तो इंसान की असल पहचान सामने आती है
00:10जवलपुर के बर्गी डैम में उसे शाम पानी सिर्फ उफन नहीं रहा था
00:15वो चीख रहा था और उसे शोर में कुछ आवाजें मदद के लिए तूट सा रही थी
00:20डगमगाते क्रूज पर खड़े लोग मौत को अपनी आँखों के सामने देख रहे थे
00:24तबी बिना किसी पहचान के बिना किसी डर के एक बाइस साल का लड़का शेख रमजान मौत के उस समंदर
00:31में फूट पड़ा
00:32उस पल उसने नाम, धर्म और अपनी जान सब कुछ पीछे चोड़ दिया
00:37उस दिन नर्मदा का पानी शांत नहीं था वो बेकाबू था जैसे किसी अनुहूनी का संकीत दे रहा हो
00:44देखते ही देखते ही खुशियों से भरा एक क्रूज हादसे का शिकार हो गया
00:48लोग जो कि कुछ देर पहले हस रहे थे, सेलफी ले रहे थे, विडियोज बना रहे थे, रिल्स बना रहे
00:53थे
00:54अब मदद के लिए चिला रही है, कोई हाथ खिला रहा है तो कोई आखरी बार अपने अपनों को कुकार
01:00रहा है
01:00हवा में डर था, चीट, उकार, मातम का महौल
01:04इसी खौफनाक मंजर के बीच खड़ा था रमजान, एक साधारन वेल्डर जो कि पश्यम बंगाल से रोजी रोटी के लिए
01:11जबलपुर आया
01:12लेकिन उस दिन वो सिर्फ मजदूर नहीं था, वो था उम्मीद का इकलौता सितारा
01:18उसने बताया कि जैसे ही उसने आवाजे सुनी, वो बिना सूचे दौड़ पड़ा
01:22सामने का द्रिश्यो किसी पूरे सपने से कम नहीं था, नावाधी तूप चुकी थी, लोग पानी में छटपटा रही थी
01:29पर रमजान की कदम डगमगाए नहीं, उसने उचे टीले से छलांग लगा दी, सीधे उस पानी में जहां हर लहर
01:36मौत का पैगाम लेकर उट रही थी
01:38एक बार, फिर दूसरी बार और फिर बार बार, उसने एक एक करके साथ लोगों को बाहर निकाला, सांसे थम
01:45रही थी लेकिन हिम्मत नहीं, रमजान अकेला नहीं था, उसके साथ थे पूला रेकवार और अन्या, कई दूसरे मस्दूर, बिहार,
01:54यूपी और बंगाल से आए,
01:55ये अफतार, ये मसीहा, जो कि लोगों को अब नई जिन्द की दे रहे थे, जो रोजाना मेहनत करते हैं,
02:02जिनके नाम शायद कोई जानता भी नहीं, लेकिन उस रात वही लोग किसी के लिए भगवान बन गए, किसी के
02:07लिए अफतार तो किसी के लिए फरिष्टा बन कर आए
02:10रसिया, टाया, टीउग, जो कुछ मिला, उसी से उन्होंने रस्क्यू आपरेशन शुरू कर दिया, मौत का तांडव जारी था, लेकिन
02:18ये गुमनाम नायक लगातार लड़ रहे थे, करीब 17-18 लोगों को उन्होंने जिन्दा बाहर निकाला, कई घंटों तक बिना
02:25रुके,
02:26बिना थके, पानी में गहरा पहरा दिया और लगातार, इस रस्क्यू आपरेशन को तीजी से अपनी हर एक हिम्मत से,
02:35अपनी हर एक कोशिश से बनाए रखा और कह सकते हैं आप एक ऐसी मिसाल पीश्की, जिसको लेकर आज हर
02:43कुई इन्हें सलाम कर रहा है, पानी गहरा था, �
02:46अधेरा बढ़ रहा था, लेकिन उनका जजबा उससे भी कह रहा था, हलंकि हर कहानी का एक दर्दनाक हिस सब
02:53की होता है, चार महिलाओं को इस सब पूरे हादसे में बचाया ना चा सका, उनके शब जब बाहर निकाले
03:00गएं तो हर आखी नम थी, रमजान कहते हैं, जब कोई �
03:15जा रहे हैं, सलाम कर रहे हैं, जब देश में अकसर हिंदो मुस्लिम के नाम पर बहस होती है, दीवारें
03:21खड़ी की जाती है, तब बरगी डैम की ये खटना एक आईना है, एक सबूत है, एक मिसाल है, जो
03:28कि सदियों तक याद रखी जानी चाहिए, यहां किसी ने किसी का धर
03:45की भीक मांग रहा है, और उसे बचाने के लिए, यह मजदूर, यह रमजान दौट पड़ा, एक तरफ हम खबरों
03:52में नफरत की आवाज से सुनते हैं, तो दूसरी तरफ ऐसे लोग हैं, जो कि चुपचाफ इंसानियत की मिसाल बन
03:58जाते हैं, रमजान और उसके साथियों ने
04:00हमें याद दिलाया कि असली पहचान नाम या मजहब में नहीं, बलकि दिल की होती है, बर्गी डैम का हाथसा
04:07सिर्फ एक दुरगटना नहीं थी, यह कहानी है, डर की, दर्द की, लेकिन उससे भी कहीं ज्यादा उम्मीदों की, यह
04:15कहानी बताती है कि जब हालात सबसे बुरे
04:18होते हैं, तब भी इंसान्यत जिन्दा रहती है, और शायद यह सबसे वड़ी सच्चाई है, आपना में फरिष्टे आस्मान से
04:26नहीं उतरते, वो हमारे बीच ही होते हैं, बस पहचानने की देर होती है, बहराल रमजान को लेकर आपकी क्या
04:33राय है, कमन बॉक्स आपके लि�
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