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Vivek Vihar Fire: आखिरी सांस तक मां ने बच्चे को थामे रखा, दिल दहला देगा सच. दिल्ली के विवेक विहार में हुए इस अग्निकांड ने हर किसी को झकझोर दिया जहां एक मां अपने डेढ़ साल के बच्चे को सीने से लगाए ही जल गई।

A tragic fire in Delhi’s Vivek Vihar claimed nine lives, including a mother and her toddler who were found embracing each other even in death, highlighting both negligence and a heartbreaking story of maternal love.

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00:02जिसमें 10-15 लोगों को रेश्क्यू किया है जिसमें 2-3 इंजर्ट थे उनको ऑस्पिटल में सिफ्ट किया है और
00:07अभी 9 एजल्टी इसमें रिपोर्टेट हुई है
00:13दो और तीन मई की रात विविग विहार में पसरी उसाग ने सिर्वेक इमारत नहीं चलाई
00:19उसने एक माँ और उसके तीन साल के बच्चे को साथ साथ निकल लिया लेकिन जो सबसे ज्यादा दिल तूर
00:25देने वाला था वो ये की मौद भी उन्हें अलग ना कर पाई
00:29जलती हुई लप्टों के बीज दम खोटते हुए धूए में वो माँ अपने बच्चे को सीने से ऐसे चिपकाय रही
00:36कि दोनों एक साथ राख बन गए
00:38उसका शरीर जलता रहा डड़ असहनी रहा होगा लेकिन उसकी बाहें धीली नहीं पड़ी आखिरी सांस तक उसने अपने बच्चे
00:47को अपनी छाती से लगाए रहा
00:49जैसे कह रही हूँ कि अभी जाने का वक्त नहीं हुआ अभी और चीना है
00:54रविवार तड़के करीब साड़े तीन बचे जब ज्यादतर लोग गहरी नीद में थे तब ही आग ने चुपके से इस
01:00चार मंजिला इमारत को अपनी गिरफ में ले दिया
01:03शुरवात दूसरे मजिल के पिश्वे हिस्से से हुई लेकिन कुछी पलो में लपटें बेकाबू हो गई
01:08किसी को संभलने का मौका नहीं मिला जो जहां था वहीं फस गया
01:13चीखे दीवारों से टकरा रही थी लेकिन बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था
01:18सफरा तफरी के बीच एक मा अपने बच्चे को सीने से लगाए चाती से लिपटाए छिपी रही
01:24कोशिश करती रही कि मैं अपने बच्चे की सांसी रोक लूँ
01:28बच्चे की सांसी तूट रही थी लेकिन मा कोशिश छोड़ना नहीं चाहती थी
01:33हर एक उमीद को जिन्दा रखना चाहती थी
01:36शायद उसने भी बाहर निकलने की भरसक कोशिश की हो
01:40शायद उसको अंदाजा ना हो कि ये बल ये दिन अब आखरी है
01:45उसने दर्वाजा भी खटखटाया होगा
01:47मदद के लिए फुकारा भी होगा
01:49लेकिन जब हर कोशिश नाकाम हो गई तो उसरा अपने बच्चे को और कसकर अपनी चाती से लिपटा लिया
01:56जैसे वो कह रही हो जैसे वो सोच रही हो लगातार
02:01जैसे वो आग से लड़ रही हो और अपने शरीर को ढाल बना कर अपनी नन्नी जान को बचाना चाहती
02:07हो
02:07आग की तपिश बढ़ती गई, धुए ने सांसे छीन ली, लेकिन माने हार नहीं मानी, उसने अपने बच्चे को सीने
02:15से चिपकाए रखा, लगातार मानो कह रही हो, लगातार ये चीख सुनाई दे रही हो, कि जब तक मैं हूँ,
02:22तुझे कुछ उने नहीं दूँगी, लेकिन क
02:25गस्मत को कुछ और मन्जूर था, जब रहत दल वहां पहुँचा तो दृश्या दिल तोड़ने वाला था, कलेचा फाड़ने वाला
02:32था, इस दृश्या ने हर किसी को अंदर तक छपशूर दिया, मा और उसका बच्चा दोनों एक दूसरे से वैसे
02:39ही लिप्टे थे, जैसे �
02:40जिन्दगी में थे, सासे में एक परिवार के पांच लोगों की जान चले गई, एक पूरा परिवार, एक पूरा घर,
02:47जो कभी हसी से गूँचता था, अब राक में तब्दील हो चुका था, माता पिता, बेटा बहू और उनका छूटा
02:55सा मासूम बच्चा, सब इसाग की भी
03:10आग ने कई लोगों को छटकी और भागने पर मजबूर किया, लेकिन वहां का दरवासा बंद था, मौत मानों, अपना
03:18पूरा मन बना कर आई थी, कि आज कोई दूसरा मौका नहीं, सीडियों पर कई लोगों ने दम तोर दिया,
03:24कई लोगों की लाशें, सीडियों पर मिली, क
03:40सबसे ज्यादा दिल को चीर देने वाला दृष्य था, वो दृष्य उसी मा और बच्चे का था, जो एक साथ
03:47लिप्टे, चिपके से नज़र आए, इस दुनिया से जाने को मजबूर होते नज़र आए, एक ऐसा रिष्टा जो कि मौत
03:54के बाद भी नहीं तूटा, मौत के बा
04:09अगों के सामने आती है, जहां एक मा जिसने अपने बच्चे को आखरी पल तक सीने से लगाए रखा, जिसने
04:15दर्द सहा आख की तपिश्चे ली, लेकिन अपने बच्चे को अकेले नहीं छोड़ा, विविभिहर का ये अगनिकांट सिर्फ एक खासा
04:23नहीं, ये एक एहसास ह
04:25ये याद दिलाता है कि मा और बच्चे का रिष्टा किसी भी ताकत से बड़ा होता है, आग सब कुछ
04:31चला सकती है, लेकिन मा की ममता नहीं, बीदे दिन पहले हमने देखा कुछ दिनों पहले ही जपलपूर में वो
04:38बोट एकसिडेंट हुआ जहां पर लगभग 9 लोगों की म
04:54मौत जीत गई, जिन्दगी को वहाँ भी हार न पड़ा था, शायद इसलिए कहा जाता है कि मा का प्यार
04:59कभी खत्म नहीं होता, वो आखरी सांस के बाद भी अपने बच्चे को बचाना जानती है, हर एक तपिश से
05:06भुरोपना जानती है, तपिश से दूर रखना जानती है,
05:10बहराल इस गटना करम को लेकर आपकी क्या राय है, आपके क्या सवाल है और आपके मन में जो भी
05:17तर्द, जो भी शंकाएं हैं, कॉमेंट बॉक्स आपके लिए अपने टिपपनी वहाँ कर सकते हैं, मेरा नाम है मुकुंदा, आपनी
05:24रहे वन इंडिया के साथ, शुक्रिया.
05:30आपके अपके लिए आपके लिए यंडिया एंडिया कॉंदा आपके लिए बूना इंडिया को लिएूना की तर्द, आपके लिएूए।
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