00:02जिसमें 10-15 लोगों को रेश्क्यू किया है जिसमें 2-3 इंजर्ट थे उनको ऑस्पिटल में सिफ्ट किया है और
00:07अभी 9 एजल्टी इसमें रिपोर्टेट हुई है
00:13दो और तीन मई की रात विविग विहार में पसरी उसाग ने सिर्वेक इमारत नहीं चलाई
00:19उसने एक माँ और उसके तीन साल के बच्चे को साथ साथ निकल लिया लेकिन जो सबसे ज्यादा दिल तूर
00:25देने वाला था वो ये की मौद भी उन्हें अलग ना कर पाई
00:29जलती हुई लप्टों के बीज दम खोटते हुए धूए में वो माँ अपने बच्चे को सीने से ऐसे चिपकाय रही
00:36कि दोनों एक साथ राख बन गए
00:38उसका शरीर जलता रहा डड़ असहनी रहा होगा लेकिन उसकी बाहें धीली नहीं पड़ी आखिरी सांस तक उसने अपने बच्चे
00:47को अपनी छाती से लगाए रहा
00:49जैसे कह रही हूँ कि अभी जाने का वक्त नहीं हुआ अभी और चीना है
00:54रविवार तड़के करीब साड़े तीन बचे जब ज्यादतर लोग गहरी नीद में थे तब ही आग ने चुपके से इस
01:00चार मंजिला इमारत को अपनी गिरफ में ले दिया
01:03शुरवात दूसरे मजिल के पिश्वे हिस्से से हुई लेकिन कुछी पलो में लपटें बेकाबू हो गई
01:08किसी को संभलने का मौका नहीं मिला जो जहां था वहीं फस गया
01:13चीखे दीवारों से टकरा रही थी लेकिन बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था
01:18सफरा तफरी के बीच एक मा अपने बच्चे को सीने से लगाए चाती से लिपटाए छिपी रही
01:24कोशिश करती रही कि मैं अपने बच्चे की सांसी रोक लूँ
01:28बच्चे की सांसी तूट रही थी लेकिन मा कोशिश छोड़ना नहीं चाहती थी
01:33हर एक उमीद को जिन्दा रखना चाहती थी
01:36शायद उसने भी बाहर निकलने की भरसक कोशिश की हो
01:40शायद उसको अंदाजा ना हो कि ये बल ये दिन अब आखरी है
01:45उसने दर्वाजा भी खटखटाया होगा
01:47मदद के लिए फुकारा भी होगा
01:49लेकिन जब हर कोशिश नाकाम हो गई तो उसरा अपने बच्चे को और कसकर अपनी चाती से लिपटा लिया
01:56जैसे वो कह रही हो जैसे वो सोच रही हो लगातार
02:01जैसे वो आग से लड़ रही हो और अपने शरीर को ढाल बना कर अपनी नन्नी जान को बचाना चाहती
02:07हो
02:07आग की तपिश बढ़ती गई, धुए ने सांसे छीन ली, लेकिन माने हार नहीं मानी, उसने अपने बच्चे को सीने
02:15से चिपकाए रखा, लगातार मानो कह रही हो, लगातार ये चीख सुनाई दे रही हो, कि जब तक मैं हूँ,
02:22तुझे कुछ उने नहीं दूँगी, लेकिन क
02:25गस्मत को कुछ और मन्जूर था, जब रहत दल वहां पहुँचा तो दृश्या दिल तोड़ने वाला था, कलेचा फाड़ने वाला
02:32था, इस दृश्या ने हर किसी को अंदर तक छपशूर दिया, मा और उसका बच्चा दोनों एक दूसरे से वैसे
02:39ही लिप्टे थे, जैसे �
02:40जिन्दगी में थे, सासे में एक परिवार के पांच लोगों की जान चले गई, एक पूरा परिवार, एक पूरा घर,
02:47जो कभी हसी से गूँचता था, अब राक में तब्दील हो चुका था, माता पिता, बेटा बहू और उनका छूटा
02:55सा मासूम बच्चा, सब इसाग की भी
03:10आग ने कई लोगों को छटकी और भागने पर मजबूर किया, लेकिन वहां का दरवासा बंद था, मौत मानों, अपना
03:18पूरा मन बना कर आई थी, कि आज कोई दूसरा मौका नहीं, सीडियों पर कई लोगों ने दम तोर दिया,
03:24कई लोगों की लाशें, सीडियों पर मिली, क
03:40सबसे ज्यादा दिल को चीर देने वाला दृष्य था, वो दृष्य उसी मा और बच्चे का था, जो एक साथ
03:47लिप्टे, चिपके से नज़र आए, इस दुनिया से जाने को मजबूर होते नज़र आए, एक ऐसा रिष्टा जो कि मौत
03:54के बाद भी नहीं तूटा, मौत के बा
04:09अगों के सामने आती है, जहां एक मा जिसने अपने बच्चे को आखरी पल तक सीने से लगाए रखा, जिसने
04:15दर्द सहा आख की तपिश्चे ली, लेकिन अपने बच्चे को अकेले नहीं छोड़ा, विविभिहर का ये अगनिकांट सिर्फ एक खासा
04:23नहीं, ये एक एहसास ह
04:25ये याद दिलाता है कि मा और बच्चे का रिष्टा किसी भी ताकत से बड़ा होता है, आग सब कुछ
04:31चला सकती है, लेकिन मा की ममता नहीं, बीदे दिन पहले हमने देखा कुछ दिनों पहले ही जपलपूर में वो
04:38बोट एकसिडेंट हुआ जहां पर लगभग 9 लोगों की म
04:54मौत जीत गई, जिन्दगी को वहाँ भी हार न पड़ा था, शायद इसलिए कहा जाता है कि मा का प्यार
04:59कभी खत्म नहीं होता, वो आखरी सांस के बाद भी अपने बच्चे को बचाना जानती है, हर एक तपिश से
05:06भुरोपना जानती है, तपिश से दूर रखना जानती है,
05:10बहराल इस गटना करम को लेकर आपकी क्या राय है, आपके क्या सवाल है और आपके मन में जो भी
05:17तर्द, जो भी शंकाएं हैं, कॉमेंट बॉक्स आपके लिए अपने टिपपनी वहाँ कर सकते हैं, मेरा नाम है मुकुंदा, आपनी
05:24रहे वन इंडिया के साथ, शुक्रिया.
05:30आपके अपके लिए आपके लिए यंडिया एंडिया कॉंदा आपके लिए बूना इंडिया को लिएूना की तर्द, आपके लिएूए।
Comments