00:00जब भी मैं मेरे आसपास के लोगों से गीता की बात करती हूँ तो वो मुझे थोड़ा पिछड़ा हुआ मानते
00:07हैं और स्वयम को रैशनलिस्ट बोलते हैं
00:11क्या हिंदु धर्म वास्तों में पिछड़ा हुआ धर्म हैं?
00:15जिसको हिंदु धर्म कहते हैं उससे अगर हमारा आशय है वेदों के दर्शन पर आधारित धर्म तो हिंदु धर्म ना
00:28अगड़ा है ना पिछड़ा है हिंदु धर्म एक मात्र धर्म है
00:34वेदान्त इकलोता है जो शुरुआत करता है परिभाशा से ही कि धर्म माने क्या और यहां पर भी रुक नहीं
00:43जाता है रिशी श्ठिठक कर कहते हैं धर्म किसके लिए?
00:48अक्सर यह तरकवाद नास्तिक्ता इन सबको एक में समेट करके बुद खड़ा करते हैं जो कहता है हिंदु धर्म पिछड़ा
00:56हुआ है पिछड़ा हुआ नहीं है वो धर्म है और वो बताता है कि धर्म होता किसके लिए?
01:04नहीं तो धर्म के नाम पर तो बस यह कह दिया जाता है कि धर्म वो चीज़ है जो इनसान
01:09को उपर वाले की आग्याओं का पालन करना सिखाती है पर यदि हिंदु धर्म का अर्थ है वेदांत तो वेदांत
01:17वो है जो हमें आईना दिखाता है ये जो दुख में बैठा हुआ ह
01:32है इसका दुख दूर करना नहीं तो किसी धर्म के वह जरूरत का है जानवरों को
01:52वो शुरुवात ही एक अंधविश्वास से करते हो गयते मैं तो हूँ तो मेरा कोई creator होगा
01:57वेदान्त अपने आप में इकलोता है जो कहता है नहीं मुझे इतना भी विश्वास नहीं करना
02:04पहले तु ये बताओ मैं भी हूँ क्या
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