00:00धर में हो तो कुछ भी बोलो अपने आपको वो ग्रह मंत्री बोलती है अपने आपको
00:07आलतु में अपने आपको नवाजे पड़ी हैं मेरे वो प्राइम मिनिस्टर हैं और मैं उनकी होम मिनिस्टर हूँ
00:16वो देखो वो भी
00:19वो होम में रहता है तो होम मिनिस्टर
00:23कि सारी पोल जानता है शावाज बेटा और इसलिए कई बार ग्रहणियों में एक विचित्र किसम का अहंकार पाया जाता
00:34है कोई ज्ञान नहीं कोई अनुभाव नहीं लेकिन उसके बाद भी एक प्रिष्ठता एक अकड़ का भाव रहता है
00:42हम कुछ है हम कुछ है क्योंकि उनको आईना कभी दिखाया ही नहीं गया क्योंकि घर से बाहर निकल करके
00:54उन्होंने अपनी हैसियत का परिक्षन कभी करा ही नहीं वह घर में रही है और घर में यह होता था
01:01कि जो भी आता था तो जैसे मामा जी کے पाउं चूता था वैसे ही
01:08मामी जी के भी चूत देता था जैसे होता है ना जि
01:12ब्रिगेडियर औरन को साथ जो ब नोते मिसिस ब्रिगेडियर
01:14वो भी कुछ बन गई बढ़ा बुरा लगता है उनको देख करके
01:19क्योंकि जिन्दगी तो किसी के पक्ष में नहीं खड़ी है
01:23जिन्दगी तो बेरहमी से तुम्हें तुम्हारी असलियत और आउकाद दिखाई देती है
01:28जिन्दगी जब दिखाती है असलियत बड़ी गहरी चोट देती है
01:32पिर उस समय पर जो दीधी की हालत होती है देखके बड़ा बुरा भी लगता है
Comments