00:00एक राजा था, विरासत में मिली हुई राजसी सत्ता, तो राजा को धुन सवार हुई, बोला आधी जो पुरी दौलत
00:07है राजकोश की, किसी ऐसे वो दे दूँगा, जिसके पास पहले ही बहुत दौलत हो, तो अब राजा से जो
00:14मिले वही क्या दिखाने की कोशिश करे, हमारे
00:16पास ही बहुत कुछ है, हमारे पास ही बहुत कुछ है, दौलत का लालच है ऐसा, कि आदमी दमाग खरा
00:21हो जाए, तो साधारन दोग भी राजा के सामने आ रहे हैं, तो वो भी क्या दर्शा रहे हैं, हमारे
00:25पास ही बहुत कुछ है, अब राजा ने इस तरह करके पूरा राज
00:27चाहर आजने बाद बन नहीं रही है। राजा निकल रहा था एक बैठा हुआ था वहां पर पर अधू फकीर
00:37नंगधणंग पेड़ के नीचे बैठा हुआ है।
00:57देख लिया अपना तो अपने आम को देखने लगा फिर उसने अपना आम छीला थोड़ा सा चूसा फिर देखा राजा
01:03को राजा भी तक कोई बैठा है तो उसने एक आम उठा के राजा को दे दिया
01:10राजा रोने लग गया, उसे कोई मिला ही नहीं था, जिसके सामने उजमीन पर बैठ पाए
01:15राजा को सहसा लगा कि वो मिल गया, जिसके पास बहुत कुछ है
01:18तो राजा ने कहा कि मेरी इतनी दौलत है, और मैं आपको और्पित करना चाहता हूँ
01:23तो हसने लग गया, तो हसते हसते बोला, नहीं बात ये नहीं है, कि मुझे नहीं चाहिए
01:29बात ये है कि तुम इतने गरीब हो कि मैं तुमसे कुछ ले कैसे लूँ
01:36तो साधू जैसे हो जाओ, फिर जितने अमीर है ना, तुम्हें इनकी गरीबी दिखाई देगी
01:41जिनके पास बाहर बाहर बहुत कुछ होता है और भीतर कुछ भी नहीं
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