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वीडियो जानकारी: 10.01.2026, भगवद् गीता सत्र, भुवनेश्वर
Title: "मैं किसी की बीवी हूँ।" — हाँ, तो? || आचार्य प्रशांत, भुवनेश्वर (2026)
Chapters:
00:00 - Intro
01:56 - आध्यात्म से घर टूटता है?
08:24 - डर की असली चाल क्या है?
15:09 - रिश्ते निभाना, माने क्या?
25:26 - मैं किसी की बीवी हूं—तो क्या?
32:40 - Testimonial
विवरण: इस संवाद में एक श्रोता परिवार, जिम्मेदारियों और आध्यात्मिक जीवन के बीच अपनी उलझन रखती हैं। इस पर आचार्य प्रशांत जी सीधे “घर टूटना”, “रिश्तों की जिम्मेदारी” और “बंधन” जैसे शब्दों पर प्रश्न उठाते हैं, और दिखाते हैं कि हम जिन बातों को बहुत गंभीरता से लेते हैं, उनके अर्थ को कभी स्पष्ट रूप से देखते ही नहीं। यह संवाद दर्शक को अपनी मान्यताओं पर ठहरकर देखने और यह पूछने के लिए प्रेरित करता है कि जो कुछ हम सच मानकर जी रहे हैं, क्या उसे हमने वास्तव में समझा भी है?
🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर:
https://open.spotify.com/show/3f0KFweIdHB0vfcoizFcET?si=c8f9a6ba31964a06
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LearningTranscript
00:00आप में से कितने लोग डर का शिकार हैं किसी मुद्दे को?
00:04लोग कहते हैं डर को भगाओ आदी इस भाशा में बात करते हैं न?
00:07पर अगरो भगाओ नहीं, उसका हाथ पकड़के सामने लाओ
00:10और उसको बोलो, जो कुछ भी तू बोल रहा है साफ बता
00:15बता क्या हो जाएगा?
00:26तिरे पाँ तले
00:32वह खड़ा हो जाओ भगना मत वहाँ से
00:37हम जो बंधे हुएं परिवार के साथ
00:39कुछ चुनोतियां हमारे साथ ऐसे आते हैं
00:42कि हम उस चुनोति को अगर एक्सिप्ट करते हैं
00:45तो वो दाइरे आते हैं, हमारे परिवार भी उसको जहलते हैं
00:49उस परिस्तिती में हम क्या करें?
00:51एक दिन में बात कर रहा था कि लोग करते हैं
00:54अध्यात्म से घर तूटता है
00:56तो ये घर तूटना या घर तोडना माने क्या?
00:59बुल्डोजर चलता है, दिवार गिरती है, क्या होता है?
01:03सावसाफ बताओ ना, मुहावरे के पीछे बात को छुपा क्यों रहे हो?
01:07ये एक psychological हेज है, एक मानसिक धुन्ध जिसके पीछे हकीकत छुप जाती है
01:15हम परिवार से बंधे हुए हैं, माने क्या? कैसे बंधे हुए है? रस्ती दिखाओ, रस्ती दिखाओ
01:20और परिवार माने क्या?
01:23collective term है परिवार, परिवार माने किस से?
01:25और यह जो हमारे concept हैं भी है हमारे नहीं है क्योंकि हमें ये तक नहीं पता कि हमें आये
01:30कैसे
01:31कर्तव वे तो बहुत ऊची बात होती है
01:33मामेकम शर्णम बरज है कर्तव ये रा कर्तव वे लो
01:36सारे धर्मों को त्यागो ये रा कर्तव वे
01:42Qawada rar ar hai हैं कि अपना कर्थ वे क्या क्रिशन से सीख आ है को से पता आपक्रकर करता
01:47पर शिंदगी इन ही की आधार पर निकाल रहे हो आपको क्या से पता प्रेम माने क्या
01:57हई मिका है आपके चरण में मेरी प्रणाम है में बहुत कुछ आप
02:03सोच के आई थी बट अचरे जी जो बहुत सुंदर से जितनी भी बात बोले है उसका सब अंसर उसी
02:09के अंदर ही छुपा हुआ है और मुझे सब कुछ अंसर मिल गया क्योंकि हम यहां रातो रात कुछ बदलने
02:15के लिए नहीं आए हैं हम अपना जो माइंड सेट है जो प्रॉब
02:33कि हमको खुद को जाना पड़ेगा हमें अचरे जी लेके हमारे घर घर में जाके उस प्रॉब्लम को शॉट आउट
02:38नहीं करेंगे तो इसलिए मैं यह बोलना चाहती हूँ अचरे कि कई बर क्या होता है कि हम पीछे छोड़
02:45देते हैं सब चीज को छोड़ना चाहते हैं चोड
03:01उस परिस्तिती में हम क्या करें उसको सबसे पहले तो वक्तव्य में शब्दों में थोड़ी इस पश्टता दें जैसे यह
03:13मुहावरे होते हैं यह अक्सर एक कहानी दे करके हकीकत को छुपा देते हैं एक दिन मैं बात कर रहा
03:26था कि लोग कहते हैं
03:29कि अध्यात्म से घर तूटता है वो कहते तो यह आचारे घर तोड़ता है पर मैं थोड़ा अपने आपको अलग
03:37रखे
03:40तो यह घर तूटना या घर तोड़ना माने क्या माने क्या कि उसका संबंद वही परिवार वाली बात से है
03:47जो आप कह रही है
03:51माने क्या हर तूटना माने क्या बुल्डोजर चलता है दिवार गिरती है क्या होता है
03:58साव साव बताओ न मुहावरे के पीछे बात को छुपा क्यों रहे हो वैसे ही कि परिवार से बंधे हैं
04:09या परिवार की जिम्मेदारी है
04:11वाट इग्जैटली माने क्या ये एक साइकलोजिकल हेज है एक मानसिक धुंध जिसके पीछे हकीकत छुप जाती है
04:24ये एक शाब्दिक कोहरा है घर तूटना घर तूटना माने क्या होता है माने क्या आप कुछ कहना चाहते हैं
04:35उसको साफ करके बताओ
04:36माने क्या वैसे ही आज जब कहते हैं पर रिष्टों की जिम्मेदारी होती है उसका अर्थ क्या है रिष्टों की
04:43जिम्मेदारी होती है आपने कुछ बोला उसको साफ करके बताओ उना उसका माने क्या है और जैसे ही आप उसको
04:50साफ करना शुरू करोगे ना आप उसको मान ल
05:06शुद्र है
05:08शुद्र के सर्थ में महत्यों के अर्थ में
05:10और आप हैरान रह जाएंगी
05:12कि इतनी छोटी सी
05:15चीज इतना
05:16बड़ा मानसिक
05:19स्थान घेर कर बैठी हुई थी
05:23असल में जब आदमी डरा होता है
05:25तो कई बार वो मुहावरों
05:27के पीछे छुपता है
05:30मुहावरों के पीछे छुपता है
05:33जैसे कि कोई आप से बोले
05:34आप डरे हैं
05:36आप किसी फैसले की तरफ जा रहे हैं
05:37कोई आपको बोले
05:38ऐसा मत कर नहीं तो क्यामत आ जाएगी
05:42और आप तक एहसास ऐसा पहुंचता है
05:44कोई बहुत बड़ी बात बोल दी गई है
05:45क्या बात बोल दी गई है
05:46प्रले आ जाएगी
05:48कयामत आ जाएगी
05:49आप कहिए रहां रेक मेंट रेक मेंट थम
05:51माने क्या
05:53वाट इग्जैक्ली
05:56ये ज्यान की पहचान होती है
05:58पिन पॉइंट प्रेसिशन
06:00साफ साफ बताओ
06:02गोल गोल मत घूमो
06:05डोन्ट बीट अराउंड बुश
06:08प्रले आ जाएगी माने क्या
06:10घर तूट जाएगा माने क्या
06:13क्या कहना चाहते हो
06:14साफ बताओ क्या हो जाएगा
06:15क्या तुम्हारा डर है
06:16वो भी साफ साफ लिखके बताओ
06:19लिखने लगो गो तो पता चलेगा
06:21कि डर हटता जा रहा है क्यों क्योंकि न जानना ही डर था
06:29मैं कई बार कहा करता हूँ जब डर लगे तो डर को बुलाया करो
06:32वो आता है ऐसे जैसे यहां से आएगा पीछे से पर्दा पर्दा दिख रहा है
06:38पर्दा दिख रहा है सबको दिख रहा है पर्दा पीछे
06:41यहाँ पर्दे के पीछे से फुसफसा के धमकी देगा
06:46जलजला, कयामात, विध्धवन्स, प्रले
06:51तो मैं क्या करूँगा?
06:52मैं ऐसे जाऊँगा, मैं भी पर्दे की धर छुप जाऊँगा
06:55ताकि अगली बार जबाए तो भट से पकड़ लू
06:58मैं उसे भगा नहीं रहा
07:00लोग कहते हैं डर को भगाओ आदी इस भाशा में बात करते हैं न
07:03मैं कहते हैं भगाओ नहीं, उसका हाथ पकड़के सामने लाओ
07:06और उसको बोलो, जो कुछ भी तू बोल रहा है, साफ बता
07:11बता क्या हो जाएगा?
07:13आप में से कितने लोग डर का शिकार हैं किसी मुद्दे पर?
07:18ठीक
07:19तो डर को भगाना नहीं है
07:22डर को क्या कर रहा है?
07:24भागने देना नहीं है
07:27उसका काम है hit and run
07:29उसका क्या काम है?
07:31hit and run
07:34और
07:35चूके सच पूछो तो अस्तित्तों में डरने की कोई बात होती नहीं
07:40तो डर सिर्फ एक शर्थ पर अपने आपको बना के बचा के रखता है
07:44वो शर्थ है धुंध, असपश्टता
07:48vagueness
07:49क्या?
07:51vagueness
07:52fear you will discover is always vague
07:57वही fear का कवच है
08:00डर एक धुंध जैसे कवच के पीछे सोयम को सुरक्षित रखता है
08:07वो कभी साफ नहीं बताएगा कि किस बात का डर है
08:10वो बस यह कहेगा देख ले कुछ गलत हो सकता है
08:14अरे क्या गलत हो सकता है? साफ बताना
08:18साफ बताना
08:20और आप आओगे कि उसकी अब जबान लडखडा रही है
08:23उसके उसकुछ बोलने को नहीं है
08:25यह डर
08:27छुपो तुम उसके पीछे
08:32ठीक है?
08:33वहाँ से फुस फुस आओ डराओ मुझे
08:37देखा?
08:38क्यारा कुछ बहुत अजीब हो सकता है
08:43तेरी घर तूट जाएगा
08:46तेरी दुनिया बरबाद हो जाएगी
08:47इसका कोई भी
08:49स्पश्ट अर्थ है तेरी दुनिया बरबाद हो जाएगी
08:51इसका क्या मतलब है?
08:53कुछ कोई मतलब है? कुछ नहीं
08:54तो अभी वहाँ चुप
08:57अब यह वहां से छुपके मुझे धंका रहा है
09:00तो मैं क्या करूँगा कि अभी बीच वीचे मुंडी निकालता है
09:03मुझे डराने के लिए तो मैं यहां जा करके
09:05यह होशियारी दिखाए से पहले मैं यहां खड़ा हो जाओंगा
09:09जैसे चुहा बिल से निकलता है न तभी पकड़ सकते हो उसको
09:12अब यह निकलने दो इसको बिल से यहां से निकल के
09:27भाई है भाई
09:30इतना प्यार करता है कि बारवार आता है
09:33किस-किस को डर बारवार आता है
09:36कोई आपके पास बार-बार आता हो तो आशे की होगा आपका तो भाई है भाई यार है पियार है
09:43बता पिटा क्या बोल रहा था है
09:49गर तूट जाएगा कैसे तूट जाएगा मेरा बहुत मस्तीमेंट से बनाया है जंग लग जाएगा तेरे दिमाग में लगए जंग
09:58यही अगर मैं इसको अनुमति दे दूँ पर्दों के पीछे से फुस फुसाते रहने की तो यह मेरे लिए खौफनाक
10:09हो जाएगा
10:11मैंने इसको बुलाया है और मैं पूछूँगा तू बता इससे तेरा मतलब क्या है दुनिया में आग लग जाएगी तेरी
10:19दुनिया में आग लगने वाली यह है तेरे रिष्टे बरबाद होने वाले हैं इसका मतलब क्या है क्या मतलब है
10:26कौन से रिष्टे की बात कर रहा है औ
10:39भागना नहीं है यह भागने मत देना यह जितनी दूर होता है उतना ही ताकतवर होता है सूत्र समझ लो
10:49यह जितनी दूर होगा वो उतना ताकतवर होगा यह जाके धुंद के पीछे चुपता है वहां पे वो धुंद है
10:58यह जब भी पीछे से फुसपुसाए, डराए, धमकाए, जाकर पकड़ के ले आओ, और भागने मत दुचाए पिलाओ चाए पी
11:08इसकी ताकत छुपने में है, इसकी ताकत दूरी में है
11:14और जब बुलाओगे और जैसे इससे कहोगे, clarify, क्या बोलोगे, be exact
11:22इसकी जान निगल जाएगी, क्योंकि ये छुपता ही है वेगनेस में, वेगनेस समझते हैं, वेग माने क्या, वेग माने क्या,
11:34अपरासंगेक, असपश्ट, खालतू, एपसर्ड, फिदूल बातें, जैसे अभी ये मुझसे बोलेगा, तुम्हारे पाव तले से जमिन खिसक ज
11:46मतलब है, इसका कोई मतलब है, और ये ऐसे नहीं बोलता साधारण, ये तो सीधा है, अभी मैंने पकड़ रखा
11:53ना इसलिए, जब मैंने इसे पकड़ नहीं रखा होता है, तो मालू मैं कैसे बोलता है, पाव तले,
12:04जमीन खिसकने वाली है, याद कर अपने सारे पुराने कर्मों को, याद कर तुन्हें आठ सो साल पहले क्या किया
12:14था, तुझे आज इसकी सजा, हिस, मिलने वाली है,
12:26और हर आद्मी को लगता है कि कुछ तो मैंने कभी गलती करी ही होगी, कुछ तो किया ही होगा,
12:32और भी आया है वो श्राप को फली भूत करने,
12:37तो यह कैसी बाते गरेगा हमेशा, धुंदली, धुंदली बाते से करनी देनी नहीं है, हम परिवार से बंधे हुए हैं,
12:45माने क्या, कैसे बंधे हुए हैं, रस्ती दिखाओ, रस्ती दिखाओ, और परिवार माने क्या,
12:51collective term है परिवार, परिवार माने किस से, नाम क्यों नहीं लेना चाहते, व्यक्ति का नाम लो, कौन सा व्यक्ति
12:58है, किसकी बात कर रहे हो, बच्चे का नाम ले रहे हो, पती का नाम ले रहे हो, पिता का
13:02नाम ले रहे हो, बहन का नाम ले रहे हो, किसका नाम ले रहे हो, पहले तो �
13:16मतलब समझते हैं ऐसे बाजू से बाजू का बंधना, अरे भीतरी बंधना भी तो कुछ होता है न, भीतरी, भीतरी,
13:22हाँ तो भीतरी माने क्या, बताओ तो थोड़ा सा, मैं आज्यानी, मैं मूढ मैं नहीं जानता, भीतरी माने क्या, मुझे
13:28समझाओ, नहीं जिम्मेदारियां �
13:44का इस्तिमाल किया है तो इतनी उम्मीद करना तो वाजब है ना कि उस शब्द की कोई परिभाशा होगी तुम्हारे
13:50पास जिम्मेदारी मैंने क्या ने पर मैं कैसे मुक्ती की तरफ बढ़ सकती हूं बड़ी जिम्मेदारिया है ठीक ठीक क्या
14:01किसके प्रति और क्या और जब त
14:19बहुत नालायक है यह तुरंट भगता है और भगा नहीं है यह भी नहीं करेगा कि चला ही जाए क्या
14:27करेगा वहां जाके छुपेगा वहां से फुस फुस आएगा
14:36वहां खड़ा हो जाओ भगना मत वहां से
14:52बोलो क्या बोलूँगा मैं जैसे ही बोलोगे यह व्यक्ति है और इसको मैं जिम्मेदारी बोलता हूँ अगर यहां तक मैं
14:58आपको ले आया तो फिर मैं क्या प्रति प्रश्न करूँगा
15:02आप कहोगे ये इनसान है, मान लो बच्चा और इसके ये जिम्मेदारी है मेरी
15:06तो मैं फिर क्या पूछूँँगा, कैसे पता, कैसे पता, तुम्हें कैसे पता
15:22कि तुम्हारी जिम्मेदारी है ये, इस इनसान के साथ इस तरह का प्रोटोकॉल निभाना
15:27तुम्हें कैसे पता कि तुम्हारी जम्मेदारी है बताओ कैसे पता
15:33बोलो कैसे पता
15:35अब फज जाओगे क्योंकि ये तुम्हें पता ही नहीं कि तुम्हें कैसे पता
15:38ये तुम्हें सूंग लिया है हवा में
15:42हवा में वो गंध आई कहां से
15:44वो धुआ उठा किस चूले से था
15:47ये तुम्हें पता ही नहीं है
15:48बस सूंग लिया है
15:52तुम्हें कैसे पता कि
15:54फलाने तरीके के कर्म को
15:55जिम्मेदारी कहते हैं
15:59तुम्हें एक शब्द दिया गया
16:00करतव तुम्हें कभी
16:02ये प्रशन करा कि इसका अर्थ तो बता दो
16:06तुम्हें वेग शब्द दे दिये गए
16:08बेटा रिष्टे तो निभाने होते हैं
16:11कि क्या अजीब सी बात है
16:12रिष्टे निभाने होते हैं माने क्या
16:14मैं एक इंसान हूँ
16:15ये एक इंसान हूँ
16:18ये एक इंसान है
16:21रिष्टा निभाना माने क्या, मैं इंसान जानता हूँ, ये इंसान है, अब रिष्टा निभाना माने क्या
16:29आप मेटाफर्स में जीते हो
16:35आप प्रत्वी पर नहीं चलते हैं, आप धुवे पर चलते हो
16:46फिल्मी गाने, मैं जिन्दगी का साथ निभाता चला गया, इसका मतलब क्या है
16:53मतलब तो बताओ, मैं जिन्दगी का साथ निभाता चला गया, मतलब क्या
17:02मैंने क्या
17:06इसी के करतूत है ये
17:09अपने आपनी हो रहा ही है।
17:18मुहावरों से हट कर कुछ है हमारे जीवन में।
17:30मेरी जान हो तुम, माने क्या।
17:38यह तो फिर भी थोड़ा सा धुंदला लग रहा होगा।
17:45अब मैं वो बात बोलता हूँ जिसको आप धुंदला भी न मानो।
17:48मैं तुमसे प्यार करती हूँ, माने क्या।
17:52माने क्या।
17:55बताओ ना।
17:57मैं भी परिशान हूँ यही सुन सुनके।
18:02इतने इलजाम जहले हैं मैंने इसी बात पर।
18:08बताओ ना माने क्या।
18:09मैं तुमसे प्यार करती हूँ, माने क्या।
18:17क्या।
18:17यही वह बताओ थोड़ी सकते हूँ, भीतर एक रूई जैसी फीलिंग होती है, गुद्गुदी जैसी।
18:33प्यार को प्यारी रन दो, कोई नाम न दो।
18:37भाई सत्य का कोई नाम नहीं हो सकता ठीक है, पर तुम और तुम्हारे जजबात सत्य के समकष्टों नहीं हैं,
18:45तो उनको तो नाम देना चाहिए।
18:48जितना जरूरी है कि सत्य को नाम न दिया जाए, उतना ही जरूरी है कि जो कुछ सत्य नहीं है
18:54उसे नाम जरूर दिया जाए, पर तुम नाम देने में कोताही कर जाते हो, क्योंकि सही नाम पॉल खोल देगा,
19:03तो नाम नहीं दोगे, और बोलोगे, सिर्फ एहसास है, रूह से मह
19:13सूज करो रूह माने क्या अच्छा यही बता दो दिदी रूह माने क्या उसे कुछ नहीं पता पर concept पे
19:20concept पे concept पे concept जिसकी बुनियाद में कुछ नहीं है हवा महल हवा महल जो किनी भी इस तंभों
19:30पे नहीं टिका हुआ है
19:38कॉंसेप्ट की परिभाशा क्या होती है that which depends on another concept for its definition
19:46ठीक है हमारी जो पूरी जिन्दगी हो ऐसी ही है एक concept वो कहां से आ रहा है दूसरे concept
19:55से वो कहां से आ रहा है
19:59और इन सब के पीछे क्या है सिर्फ धुंद एक वेगनेस कुछ और नहीं है
20:12और यह जो हमारे concept हैं भी हमारे नहीं है क्योंकि हमें ये तक नहीं पता कि हमें
20:18आये कैसे ये कहां से घुजगए हमारे खोपड़े में हमें ये भी नहीं पता बर इनको हमने इपनी जिन्दगी बना
20:25लिया है
20:30चलो एक छोटा सा प्रयोग कर लो वैचारिक प्रयोग
20:33ये सब बातें ये जिम्मेदारी होती है ये फलानी बात तो निभानी ही पड़ती है ऐसा तो करना ही होता
20:45है
20:46ऐसा करने पर ही सचरित्र कहलाते हो अच्छे आदमी के ये लक्षन होते है ठीक है अगर ये सब बातें
20:54आपके कानों में नहीं पड़ी होती है
20:56कान में नहीं पड़ी है actually
20:59उद्र ड्रिलिंग करके खोपड़े के अंदर डाली गई है
21:02अगर ये सब बाते आपके खोपड़े के भीतर
21:05स्थापित ना की गई होती है
21:06इंप्लांट ना की गई होती है
21:08तो आप जिंदगी में जो कुछ भी कर रहे हो
21:11क्या एक प्रतिशद भी कर रहे होते
21:14तो हमारी पूरी जिंदगी ही चल रही है जिससे
21:17हमें उसका कुछ नहीं पता कि माने क्या
21:25कुछ नहीं पता
21:27मैं किसी कर्म का विरोधी नहीं हूँ
21:30मैं अज्ञान का विरोधी हूँ
21:32अस्पश्टता का विरोधी हूँ
21:3712-14 साल पहले गी बात होगी, तब अद्वैत लाइफ एजुकेशन में था, एक वो शादी करने आ रहा था,
21:45तो उसने दृष्टता की, वो कार्ड देने आया,
21:50मैंने उसको हाथ पकड़ के बठाया, मैंने का ऐसे थोड़ी देखे चले जाओगे,
21:55मैंने कहां बताओ,
21:59क्या उसर है, क्या हो रहा है, बुलता है विवाह, मैंने क्या, मैंने क्या, बता दो मैं आउँगा जरूर,
22:13बुलता बड़ ये तो हर कोई जानता है ना, विवाह मने, शादी, मैंने क्या, मैंने क्या, मैंने क्या,
22:24तुम जो कुछ भी करने जा रहे हो
22:25मुझे उसे कोई विरोधनी बस बता दो क्या करने जा रहे हो
22:28जो तुम करने जा रहे हो
22:30यह क्या है
22:32तो बोले नहीं पर वो तो
22:33सब जानते हैं न मतलब मैं नहीं
22:35जानता मैं मुझे बताओ
22:41समस्या विवाह में नहीं है तुम्हारे समस्या तुम्हारे न जाननी में है
22:48तो एक ये मनुष्य है एक ये मनुष्य है ठीक है यहां तक समझ में आई मुझा आती है एक
22:52मनुष्य एक मनुष्य है
22:53अब इसके आगे क्या करने जा रहे हो इवाह मतलब
22:56अब इन दो मनुष्यों कुछ होने जा रहा है ठीक है
22:58और किसी एक खास जगह पर किसी एक खास दिन में
23:01ये दो मनुष्य हैं इनका कुछ होगा
23:04तो वो जो होगा वो क्या होगा वो मुझे बताओ
23:07और जो कुछ भी इस मनुष्य और इस मनुष्य का होने जा रहा है तुम उसके मुझे आमंत्रित भी कर
23:11रहे हो
23:13तो उसमें मेरा क्या योगदान होगा ये भी बताओ
23:24और अगर तुम्हें बताया नहीं गया होता
23:28कि इस मनुष्य और इस मनुष्य के बीच में ये करना होता है
23:31तो क्या तुमने किया होता
23:33तो फिर तुम क्यों कर रहे हो
23:36नहीं तुम्हें करना है कुछ भी तो करो पर पहले पता करो
23:40कुछ भी करने दे पहले पता करूँगा कि नहीं
23:43कि नहीं करूँ
23:46ये ऐसे ही कुछ भी
23:48ये भी खड़े हैं पीछे ये भी सूंगते हैं पहले
23:51तुमने तो सूंगा भी नहीं
23:52ये देखिए इनको
23:57इनके पास भी ज्यानेंद्रियां होती है
24:01तुम्हारे पास सिर्फ ज्यानेंद्रियां ही नहीं है
24:04ज्यान प्रेमी
24:06एक अंतहकरण भी है
24:09ये भी कम से कम अपनी यानेंद्रियों का इस्तिमाल कर लेते हो
24:12देखो कैसे देख रहा है
24:13वो देखो
24:14वो तो मुझे देख रहा है क्योंकि उधर सब पीला इधर हरा है
24:17तो मुझे इचरने के लिए देख रहा होगा
24:22वो भी देखो कैसे देख रहे हैं, देखो, देखो, कि वो भी देखना जानते हैं, वो भी देखना जानते हैं,
24:31देखो शावक है, कैसे देख रहा है, साफ मासूम आखों से देख रहा है, तुम कुछ देखते हो, या बस
24:37कूद पढ़ते हो करने के लिए,
24:41उद पड़े हैं ये लिजे कड अरे जाओ तुम्हारे पास सारी ज्ञानेंद्रियां है आख से देखो नाख से सूंगो हाथ
24:50से छुओ बुद्धी से तर्क करो विवेक से विभाजन करो
25:03असत्य को गिरने दो सत्य को उभरने दो
25:15कुछ समझ में आ रहा है ये बस जुमले उचलने जुमला बनके रह गई जिन्दगी
25:34आप नहीं समझोगे अचारी जी मैं एक मा हूँ माने क्या
25:41मा आप स्तरी हैं समझ में आता है बिल्टल ठीक यहां तक समझ गया ये तत्थ है आप स्तरी है
25:46और आपने जन्म दिया है आपके पास एक संतान है यहां भी समझ में आ गया अब इसके आगे आप
25:51क्या बोलना चाहती है वो तो बताइए
25:56ये फैक्ट है क्या फैक्ट है आप एक मनुष्य है और आप स्तरी लेंगे यहां तक तत्थ है ठीक है
26:03सुईकार कोई समस्या नहीं अब आपने एक संतान को भी जन्म दिया हुआ है वहां तक भी सुईकार कोई समस्या
26:08नहीं अब इसके बाद जो है वो तत्थ है इसके बाद �
26:23पर अब इसके आगे आप जो बोलना चाहते हैं, आप नहीं समझोगे, मैं मा हूँ, उसका माने क्या होता है,
26:28क्या नहीं समझूगा, मा माने क्या, दुनिया में हर प्रजाती जर्म देती है, वो मा ही खड़ी है शायद, वो
26:34उसने जर्म दे रखे हैं, चार, तो उसमें समझने क
26:37क्या बात है
26:41समझने की क्या बात है
26:48psychological haze
26:50as an armor of the ego
26:58इसलिए आपको इस सब
26:59मंत्र दिया करता हूँ
27:00माने क्या
27:01तो
27:03तो
27:06तो
27:15एक वर्सतर चल रहा था
27:16पहले जब
27:18जी 39 नोईडा में होता था
27:20तो ऐसी
27:23देवी जी बैठी थी
27:27तो उसका schedule रहता था
27:29रविवार को सुबह होता था
27:30और बुधवार को शाम को शुरू होता था
27:31शाम को शुरू हुआ साथ-ाट बजे
27:33तो ग्यारा बज गए
27:35जन्वरी के दिन थे तो धुन धुन धुन होती
27:39तो
27:41देवी जी बोलती
27:44तो वो बोलती है
27:45अब सत्र भी चल रहा है और आम तोर पे सत्र के बीच में उठना
27:49बड़ी अभदरता की बात होती है
27:50कई लोग अभी भी उठे हुए हैं तो ठीक
27:53तो
27:56वो
27:56बोलती है कि
27:58अब मुझे जाना होगा
28:03तब तो
28:04मुझे आचारी भी नहीं बोलते थे लोग
28:06मैंने का बस हो रहा है समा आप तभी
28:08पंटरमेंटर किये बोलती है नहीं जाना होगा
28:10मैंने क्यों
28:12तो अदा से मुस्कुरा कर बोलती है क्यों कि
28:14मैं किसी की बीवी हूँ
28:19तो मैंने कहा
28:21तो
28:23तो
28:26उनकी अनुसार
28:27it is understood
28:30and I refuse to understand
28:33आप
28:34किसी की पतनी हैं
28:35तो
28:39तो
28:40तो
28:41तुम्हारे देखे
28:42इस वक्तवे से बहुत सारी
28:44चीजे अपने आप
28:47फॉलो करती हैं
28:48मेरे देखे नहीं फॉलो करती हैं
28:52तुम्हारे अनुसार तुम किसी की बीवी हो
28:54तो तुम्हें ग्यारा बज़े घर में होना ही चाहिए
28:59मैं बस इतना पूछ रहा हूँ
29:00तो
29:02क्यों
29:04और तुम्हारे पास कोई जवाब है नहीं
29:07इससे बस ये पता चल रहा है तुम
29:08खटपुतली हो तुम भी भी नहीं हो
29:12तुम्हारे पास जवाब होता हाँ उन्होंने ये बोला होता कि
29:15अचारी जी बाहर फॉग हो रहा है
29:17और जन्वरी का महीना है
29:19घर जाने में दिक्कत हो सकती एक्सरेंट हो सकता है
29:21सेक्यूरिटी का इशू है
29:23तो मैं कहता हाँ आप जरूर जाएए
29:24बलकि मैं ये भी कहता ड्राइवर में भेज देता हूं साथ में आप जाएए
29:28पर उन्होंने ये नहीं कहा
29:30उन्होंने जो आपत्ति करी
29:33वो फिजिकल या उंटोलोजिकल नहीं थी
29:35वो साइकोलोजिकल थी
29:36उन्होंने कहा मैं इसलिए जाओंगी
29:37क्योंकि मैं किसी की बीवी हूँ
29:39तो मैंने कहा
29:40तो तुम हो किसी की बीवी
29:43उससे क्या फरक पड़ता है
29:45क्या फरक पड़ता है
29:51पर आपके लिए
29:52ये मुहावरे ये कहानियां बड़े अर्थपूर्ण होते हैं यही जिन्दगी बन जाते हैं और फिर आप इन्हीं की दुहाई देते
29:59हैं मेरे पास आते हैं
30:01कि जिम्मेदारियां निभानी है, ये करना है, वो करना है, मैं जिम्मेदारियों के खिलाफ नहीं हूँ, मैं असपश्टता के खिलाफ
30:06हूँ, आपको कर्तव की परिभाशा दी किसने, आपको कैसे पता कि इसके प्रते ऐसा आचरण करना कर्तव कहलाता है, आपने
30:18रिशियों से
30:18पूछा, आपने चिंतकों से पूछा, आपने दार्शनिकों से
30:20पूछा, आपने किस से पूछा
30:23आपने रामपुर वाली फूपी
30:24से पूछा है जा करके
30:27और वो आपकी गुरू है
30:28और उसने आपको बताया है कि
30:30being a lady, this is your duty
30:32towards your husband
30:36और ये बात मैं बरदाश्च्त करूँगा नहीं
30:39कर्तव्य तो बहुत ऊची बात होती है
30:42मामेकम शर्ण व्रज
30:43है कर्तव, यह रा कर्तव्य लो
30:45सारे धर्मों को त्यागो
30:47यह रा कर्तव्य
30:52पर आपने अपना कर्तव्य किया
30:54क्रिश्न से सीखा है? आपको कैसे
30:56पता आपका क्या करतव्य है
30:58आपको कैसे पता परिवार की परिभाशा
31:00ही क्या होती है
31:02आपको क्या से पता प्रेम माने क्या
31:06और पूरी जिंदगी
31:08इन ही क्या अधार पर निकाल रहे हो
31:13वास्तों में जिन शब्दों
31:15को बुनियाद बना कर हम
31:17पूरा जीवन जीते हैं वो वही शब्द हैं
31:20जिनका हमें कुछ पता नहीं
31:23कäreर माने क्या बताओ
31:26के केरियर क्या चीज़ है?
31:28ये भी एक बहुत धुनला शब्द है
31:32बताओ न केरियर माने क्या
31:37प्रोग्रेस माने क्या
31:42कोई परिभाशा नहीं
31:43कोई स्पष्टता नहीं पर उसी के पीछे मरे जा रहे हैं कि progress चाहिए, progress चाहिए, क्या, progress वाने क्या
31:53जीना है या कटपुतली की तरह नाचना है
32:02अध्विज होने का सीधा सार्थ ही यही है
32:06कटपुतली को गिरने दो
32:09तुम जीना शुरू करो
32:15जिन भी बातों को हमने sacred मान रखा है, पवित्र मान रखा है
32:19क्या हमें उसका कुछ पता भी है
32:21क्या हमने कभी उन पर प्रश्न करा, क्या हमने कभी समझना चाहा
32:26बस तुम्हें तो ऐसा करना ही चाहिए, क्यों करना चाहिए
32:29तुम्हें तो ऐसा सोच नहीं चाहिए, क्यों और क्या?
32:59कुछ ढून रही थी, जो मिल नहीं रहा था.
33:01और जैसे-जैसे इन से जूड़ती गई, समझ आता गया कि कितना कुछ गलत है, जो सोच रहे हैं, जो
33:08जी रहे हैं, जिसके बारे में जानकारी ही नहीं थी.
33:11जैसे जैसे आगे बढ़ती गई, मुझे मेरी life में clarity मिलती गई, confidence मिलता गया
33:17और वो सब जूट में जो में जीती आई थी आज तक उनने परखने का और उखाड के फैंकने के
33:23हिम्मत मिली
33:23थोड़ा थोड़ा तो मालूम था गड़बर चल रहा है बट वो confidence नहीं था
33:27और वो करेज भी नहीं थी कि उन सब चीजों को हटा के साइड कर सकूँ
33:32इनसे जुड़े हुए मुझे करी 5 साल हो गए है पहले यूट्यूब पर सुनती थी
33:36और 2022 अवर्ण सेशन को अटेंड कर रही हूं लाइँ हूं लाइँ लाइँ लाइँ सेशन थे आद लोग कहते हैं
33:51अध्यात में जाने से या चार जी किसाद जूड़ने से परिवार टूटते हैं पतानी क्या क्या सिखाते हैं वो
34:01बट मेरे साथ तो यह चीजें बहुत अलग रही है, बहुत ही ब्यूटिफुल एक्सपिरेंस दाय है, मेरा और मेरे हस्बंड
34:06का रिलेशन पहले से और ज्यादा अच्छा हो गया है, I would say truthful हो गया है, पहले authentic नहीं
34:13था, हम बहुत फेक चीजों के पीछे दोनों भाग रहे थे, �
34:16और आजकल यह सुनने में आता है, अकसर सारे पिरिंस की यही प्रॉब्लम की, बच्चे सुनते नहीं और डिस्ट्राक्शन बहुत
34:22हैं, सोशल मीडिया, हाओ टो कोप अप विद ता, तो as a mother मेरी वो प्रॉब्लम भी आसान हुई है,
34:28बिकिस जब हमारे घर में सेशन चलते है
34:31मैं और मेरे हस्बंड यहां सेशन अटेंड करने आते हैं, यह घर में उनको सुनते हैं, तो बच्चे भी उस
34:38एंवारमेंट को अन्नोंगल अब्सॉब कर रहे हैं, बुक्स के बारे में जब हम बात करते हैं, यह डिस्ट्रिबूट करते हैं
34:45फ्रेंस को, वो भी पढ़ते हैं
34:59कि अडिव तो गथा हैं, बुक्ति अगानूने को जब लिए एँप धितने को थागन।
35:03यूण थोजए श्यूंजए और में आते हैं, इसमस्तव यह ठांट रानूने क्वेश्वीव में आते हैं, इसमस्तु Measure Tuff J
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