केंद्रीय मंत्री Giriraj Singh के साथ इस EXCLUSIVE इंटरव्यू में भारत के Textile Sector को लेकर बड़ी बातें सामने आईं। उन्होंने बताया कि कैसे 2014 के बाद Textile इंडस्ट्री में तेजी से बदलाव आया है और अब सरकार का लक्ष्य इसे 300 बिलियन डॉलर के मार्केट तक ले जाने का है। इंटरव्यू में Technical Textiles, New Age Fibers, Export Growth, और रोजगार के नए अवसरों पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे भारत अब Import पर निर्भरता कम करके Global Textile Hub बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। देखिए पूरा इंटरव्यू और जानिए भारत के Textile Sector का भविष्य क्या होने वाला है।
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~HT.96~GR.122~ED.108~
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00:00अभिवादन स्विकार करिए कुद्णन सिंग का और वन इंडिया के विशेस पोड़कास्ट पर आपका स्वागत है।
00:31और दुनिया में कहा भी जाता है कि रोटी, कपड़ा और मकान यानि कपड़ा आपके मानो सभिता के जो विकास
00:41के क्रम में देखा जा तो बहुत महत्वण है और देश में इतनी जनसंख्या है दुनिया में भारती कपड़ों की
00:47इतनी डिमांड है तो हम ही कह सकते हैं कि कपड�
00:50बहुत महत्वण मंत्राले है और कपड़ा मंत्राले की जिम्यदारी आपके पास है कितना चैलेंज था क्योंकि आप हमने देखा MSME
00:59में थे और फिर आप पशुपालन जो किकनिया विभाग बना था उसके बाद ग्रामीड जो की देश का सबसे बड़ा
01:06मंत्राले कहा जाए कि
01:08जो लोगों से कनेक्ट है अब कपड़ा मंत्राले के लिए सो कितना अपने आपको तयार किया था आपने इस मंत्राले
01:14के लिए और कितना तयार हो चुके हैं देखे कुंदन जी सच मुच में इधर दो धाय दसक से इस
01:25मंत्राले में कभी यूपी बिहार अशाम बंगाल उरि�
01:31नौर्थिस्ट के कोई भैक्ती टेक्सटाइल मिनिष्टर नहीं हुआ उसका एक कारण है इन सब राजियों में टेक्सटाइल नेचुरल का उप
01:44है और संथेटिक और बेसकोस जब माल ही नहीं है जब रो मेटेडियल नहीं तो फैक्ट्री भी नहीं है तो
01:54मैंने भी प्रदा
02:01हमने जो भी काम किया
02:03वो कॉपरेटिव में किया
02:05पशुपालन में किया
02:06मतस में किया
02:08दिली में भी आपने कहा
02:10उन सब मंत्रालेईों में काम किया
02:14तुरह ने बड़ी बात कहा
02:18कि रोजगार
02:20किरसी के बाद सबसे बड़ा रोजगार कहा
02:23और सच मुछ मैं
02:26मैं डंके की चोट पर कहता हूं कि नरेंदर मोदी जी के 11 साल या 12 साल का लेकिन लेखा
02:38जो खा 11 साल का में दूगा तो अभी टेक्स्टाइल का अगर टोटल मैं तो मुश्किल से सावा सो बिलियन
02:51डॉलर का ये मार्केट साइज था
02:542014 में और अभी हमने 2030-31 तक के लिए सारह तीन सो बिलियन डॉलर के मार्केट साइज को एक
03:08अपना टार्गेट लिया है
03:12300 बिलियन डॉलर अब ये सारह 300 बिलियन डॉलर जिसमें 200 बिलियन डॉलर हमारा देशी होगा और 100 बिलियन डॉलर
03:27हमारा एक्सपोर्ट का होगा
03:30अब भी हम लगभग 190 बिलियन डॉलर के मार्केट साइज पर हैं
03:3948 बिलियन हमारा एक्सपोर्ट है ऐसी अस्थिति में हमें आबादी भी बड़ी तेजी से बढ रही है
03:51भारत के टेक्स्टाइल इंडेस्ट्री के गार्मेंटर एक्सपोर्टर या टेक्स्टाइल को भी
04:00प्रधान मंत्री जी ने पहली बार दो हजार चोविस में भारत टेक्स रखा उनका सौच दुनी हाँ
04:11और पिछले बर्स दो ही साल में ये दुनिया का बहुत बड़ा एक एक्जिबिशन हुआ या बी टू बी प्लेट
04:22फारम हुआ
04:23और महाराष्ट के इचलकरंजी जैसा टेक्स्टाइल पहली बार उसने एक्सपोर्टर के साथ बात किया
04:31और आज मैं कहूं तो इस एक्सपोर्ट में लगभग सारह तीन बिलियन टेक्निकल टेक्स्टाइल है
04:44जिसका यूपिय गॉर्मेंट में कभी चर्चा तक नहीं हूँ और आपको बताओं मजे की बात एक कार्बन फाइबर आता टेक्निकल
04:56टेक्स्टाइल में
04:57जो इसरो से लेकर के डिफैंस से लेकर एवियेशन से लेकर के दुनिया के हर छेतर में उसकी ज़रुत होती
05:10लेकिन नरेंद्र मोदी जी ने अभी टेक्निकल टेक्स्टाइल एमेब एप दस हजार सारे दस हजार छेसो आसी करोर के लगभग
05:24में
05:25पी अलाई लाया लोगों को इंसेंटिव देना और जिसका परतिफल मिला जब टेक्स्टाइल में टेक्निकल टेक्स्टाइल नाम यहां लोग इंपूर्ट
05:38करते थे कुछ करके अपना करते थे अब भारत के अंदर मैं केवर टेक्निकल टेक्स्टाइल की इसलिए कि देश के
05:50लोगों के सामने टेखनिकल टेक्स्टाइल बारह सेक्टर में है, कोई ऐसा सेक्टर नहीं है जीवन का जो टेखनिकल टेक्स्टाइल के
06:00बगार नहीं है, चाहे ये सोफा का हो, चाहे कर्टल हो, चाहे मेडिकल टेक, मोबाइल टेक, एगरी टेक, बिल्डिंग टेक,
06:16बारह सेक्
06:17अब तो देशी आदमी थोड़ा सधारन भासा में समझाए कि हमारे दर्शकों देशकों कि क्या है टेक्शनिकल टेक्स्टाइल।
06:28ये दिवार पर paper while है paper है ये भी technical textile है और medical के sector में हाईजनिक के
06:40sector में ये जो sanitary पहेडाता है ये हम import करते थे भैया लेकिन नरेंद्र मोदी जी ने केवल सारे
06:49दस हजार करोर से उपर का PLI नहीं लाया
06:53देर हजार करोड पहली बार मोदी जी ने इनोवेशन के लिए दिया, मार्केटिंग, ब्रांडिंग के लिए, आज सनेटरी पैड, डाइपर,
07:08जो बुजुर्ग लोग या बच्चे और वो लेते हैं, अब हम इंपोर्ट को कम कर दिया, आधा कर दिया, ये
07:19नरेंद, और दुनि
07:21दुनिया में चाइना को बिट किये हैं, एफ आई बी सी बोलते हैं, एक फलेक्सेबूल बल्क कंटेनर, ये बल्क कंटेनर
07:38में दुनिया में हम एक नमबर पर एक्सपोर्ट करते हैं, और ये एक टन तो उसमें खुद रखा जा सकता
07:48है,
07:49लेकिन वो बड़े-बड़े कंटेनर में जो साते हैं, उसको रैप करना, ये करना, उसको फलेक्सेबूल इसलिए नाम दिया गया
07:58है, और वही नहीं, ग्लास फाइवर, ये सब जितने नाम सुनते हैं, सब टेक्निकल टेक्स्टाइल में आते हैं,
08:08हम ये कहें कि कोई लक्ष रखा, आप लोगों ने क्या कि इतने तक हम आने वाले 2030-31 तक,
08:19हम 25 बिलियन का साइज हम बनाएंगे, और 12 बिलियन हम एक्सपोर्ट करेंगे, क्योंकि भारत में टेक्स्टाइल, हमारा डॉमेस्टिक चित,
08:35अब एगरी टेक में, जितने आप देखते हैं, पॉली हाउस, नेट हाउस, ये सब टेक्निकल टेक्स्टाइल हैं,
08:44तो देश में अगरी कल्चर अब हमारे पास लेंड मैक्सिमम हम यूज कर रहे हैं,
08:51अब लोगों के पास 2011 के मताबिक 0.12 हेक्टर पर कैप्टा पड़ता है जमीन,
09:01क्योंकि हमारे पास जमीन की कभी है, आबादी दुनिया में सबसे अधिक है,
09:08तो हम टेक्निकल टेक्स्टाइल एक अभी हम टोटल जब महींने आपको कहा,
09:17तेरह से पंद्रह मिलियन टन हम यूज करते हैं फाइबर, सब मिला है।
09:23उसी सवाल पर आ रहा हूं कि जो निवेज फाइबर है, आपने देखा आपके कई प्रेस कॉन्फरेंस आपके मंत्रालत से
09:30निकलने वाँ रिलीज में भी देखा,
09:31हमने गाजियाबाद में भी आप गये थे, दिली से सटा हुआ इलाका है, वो क्या है और निवेज फाइबर क्या
09:38आने वाले वक्त में ये फार्म कम्यूनिटी से लेकर और एक सबस्चूट के तौर पर हम देख सकते हैं क्या।
09:44दुनिया आज देखिये सस्टनेबल फाइबर चाहता है, तो उनाइटेड ने इसका नाम दिया निवेज, सस्टनेबल फाइबर का, अभी एरोप से
09:58हमारा एफटी ए फाइनल मुकाम पर है, अब वो अभी कर दिया है कि 20% रिशाइकिल फाइबर, चाहे कॉटन
10:13रिशाइकिल
10:14हो, यूज किये हुए चीजों से और या पेट बोतल से, ये दोनों मस्ट 20% रहेगा, तभी हम लेंगे
10:24आपका कपड़ा, अब वो भी उसमें ट्रेसमिलिटी होगी, तो उनाइटेड ने भारत में भी रखा एक, ये एजंडा रखा है,
10:37तोटल जो आप एक्सपोर्ट करेगे
10:40उसकी 20% है, टोटल प्रोडक्शन का 20% है आपको रिसाइकल से आना चाहिए, वो लक्ष हम लोग पार
10:45कर रहे हैं, हमारे पास लक्ष पार है, लेकिन हमने कहा हमारे विभाग से अधिकारी जो गए, उन्होंने सस्टनेबूल फाइवर
10:56जो हम लोगों ने लाया है, अभी मोध
11:09प्रोडक्टिविटी बढ़ाना, दुनिया में 200 केजी प्रती हेक्टर है, हम सारे 400 केजी पर हैं, हम दुनिया में सबसे अधिक
11:19एडिया में लगाते हैं, लेकिन सबसे प्रोडक्शन कम है, मोधी जी ने कहा कि नहीं, अब इस पे काम करो,
11:29और हम लोग काम करना शुरू किये ह
11:32अगरी कल्चर के साथ मिल करके, दूसरा, इंडिस्ट्री में तो बन जाएगा संथेटिक, बन जाएगा बेसकोस, लेकिन नेचरल फाइबर, देश
11:46और दुनिया मांग रहा है, वही सस्टनेबू, हम लोगों ने भी निव एज फाइबर कहा, अब निव एज फाइबर में
11:54हम
11:58पिला जो राता हूँ, मिल्क बीड, मिल्क बीड कई नाम है, उत्तर भारत में इसे अकान, आकरा, आकू, क्या-क्या,
12:11जो भगवान शंकर के उपर चरता है, अकवन कहते हैं, मदार भी कहते, उससे कपड़ा बन लेका, उससे जो रुई
12:19निकलता, वो इतना फाइन है, कि पश
12:25मीना से पतला है, और तो और, उलन से गरम है जादा, और संथेटिक से हलका है, और कॉटन से
12:35डेरगुना पानी सोकता, अभी हमने चाट टन पिछले साल राजस्थान से कलेक्ट कर बाया, एंजियो के थुरूर, और इंडुस्ट्री को
12:47दिया, इंडुस्ट्री अब डिमांड
12:50कर रहा है, मैं उसके सीट पे भी काम कर रहा हूँ, तो इंडुस्ट्री इस वार हम 400 हेक्टर में
12:58लगाने का संकल्प लिया है, वो निट्रा एक और्गनाइजेशन है उसी के थुरूर, और इस वार हम 100 टन मार्केट
13:10से प्रोक्योर करके इंडुस्ट्री को देने का काम करें�
13:15अब ब्रिज का काम कर रहे हैं एक तरह से अग्रिकल्चर को भी फैसिलिटेट कर रहे हैं कि इंडुस्ट्री की
13:21जो डिवांड है वो पूरी हो सके अब देखिए, हबारा धे है किसानों को कम से कम डेर एक से
13:29दो लाक के बीच में रासी परतिय कराना चाहिए, इसका अग्रिक
13:45लाक एक बार लगाईए तो दस साल चलेगा और उसके एक एक चीज का यूज किया है, वो डिटेल हो
13:53जाएगा उसी पर नहीं तो, दूसरा हमने लिया है रैमी फाइवर, अभी तक भी अतनाम चाइना और अन्यदेश पैदा करते,
14:04हमारे पास इसका जर्म प्लाज था, लेकि
14:09यह सब मोदी जी के लिए ही रुका हुआ था, मोदी जी का डायरेक्शन और हम लोगों ने उसको अभी
14:18बीश हेक्टर में पहला साल है, और इससे प्लांट प्रोपगेशन करके अगले साल हम कम से कम पचास हेक्टर में
14:30ले जाएंगे, इसकी क्या क्वालिटी होती है और क्या
14:33यह रहमी एक ऐसा प्लांट है कि एक बार लगाईए तो आठ से दस साल तक और हर तीसरे महीने
14:42आप काटिये और यह फाइबर सबसे मजगूत, सबसे सॉफ्ट, खुद इसका कपड़ा बंगलादेश चाइना से लेके बनाता और हम अपने
14:55यहां भी बाहर से आता भी, तो रह
14:58रहमी, उलैंवे बी मिलाए, सिल्क में मिलाए, बेसकोस में मिलाए, कॉटन में मिलाए या खुद बनाएए, तो दूसरा लिया है
15:08रहमी, तीसरा लिया है लीलेन, लीलेन की मांग बड़ी तेजी से बढ़ रहे हां, हर यूत आजका लीलेन पहनता है,
15:18ओल वेदर ऐबरिक के �
15:21और यह लिलन हम 2021-2021 का डेटा देखा तो 18,000 metric ton import था और अभी वो 60
15:35,000 metric ton पर पहुंच गया इंपोर्ट अब हम ने टाय किया है कि 2031 तक हम सारे इंपोर्ट को
15:49बंद करेंगे
15:50बंद बंद इसलिए नहीं करेंगे अपना पैदा करेंगे क्राइजेफ एक संस्था है ICR का उससे बेल्जियम साइड का वन हमारे
16:04यहां होता है FLEX TCLC जिसे कहते लेकिन चोटा फाइबर होता मोटा होता अभी निकाले हैं अभी हम दूसरा साल
16:16सारे 400 हेक्टर का सीड मुझे हो �
16:20है नौर्थ इस से लेकर के देश के कई भागों में थोड़ा थोड़ा एक्सप्रिमेंट कर रहे हैं ICR और डिपार्टमेंट
16:29और राजों के साथ मिल करके आप ही करें कि आने वाले दिन में हम लीलेंड में भी हम से
16:36लीलेंड में सेल्प सफिशेट होंगे 29-30 तक और यह इसक
16:44आपके foreign exchange आता है foreign exchange की कमी होगी क्योंकि हम जब रोकेंगा था हमारा foreign exchange बचेगा और
16:53किशानों को यह 110 दिन का क्रॉप होगा
16:58minimum एक लाक रुपईया इससे किशान को मिलेगा यह रभी का क्रॉप होगा
17:05चलिए एक दो आपके textile मेरे सवाल रह जाते हैं एक तो भारत सिल्क के लिए जाना जाता था
17:12मतलब और आप हम भी इस देश से आते हैं भागलपूर की सिल्क की चर्चा हम लोगों ने सुना है
17:18सिल्क लोगे क्या काम हो कि कि ट्रडिशनली जो प्रीमियम कॉलिटी की फैबरी की बात होती तो लोग सिल्क की
17:23बाते करते थे
17:24देखें दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश है जहां सिल्क चार तरह के पूरे होते लेकिन भारत में चारों
17:33सिल्क होते एक मुंगा जो देखते होंगे सोने कलर का उसके धागे का अरतिस अजार से लेकर के पैटालीस अजार
17:47रुपे कीलो है
17:52तो मुंगा उसके बाद उसको बोलते है एरी अतीसरा होता तसर अच्चा उठा होता मालवड़ी ये चारों में दो तो
18:10एरी होता कई तरह के पत्तों में लेकिन एरी का केवल नौर्थिष्ट में पहले था
18:17अभी हम गुजरात के पालंपूर डिस्टिक के दंतेवारा इंभर्सिटी क्योंकि वहां कैस्टर की खेती सबसे जादे होती
18:27राजस्थान को लिया है और गुजरात को जहां अरंडी की खेती होती तो हमने बढ़ाने के लिए ये लिया है
18:38मद्परदेश को लिया है मालवरी के लिए और मालवरी की खेती पूरे नौर्थ इंडिया में बढ़ा रहा है पहले तो
18:48साउथ में बैंगलोर करनाटक सबसे बढ़ा था तामिलाडू सबसे बढ़ा था अब इसको लिया है
18:58जब मोदी जी आये सत्ता में तब 26,000 मेट्रिक टन का उपज था पूरे सिल को लेकर के अभी
19:07हम 42,000 मेट्रिक टन आज एक महिना पहले तक
19:13जो मैं आपको कह सकता हूं मैंने टार्गेट लिया है तीस तक 31,31 तक पचास हजार मेट्रिक टन नहीं
19:2660,000 मेट्रिक टन
19:29धाई गुना करीब धाई गुना 26 से उठा करके हम ले जाएंगे 60,000 मेट्रिक टन पर
19:36हम यह किसी को नहीं कहेंगे कि उन्होंने ध्यान नहीं दिया लेकिन न्यू एज फाइबर और कॉटन की
19:44प्रोड़क्टिविटी पर कॉंग्रेश की सरकार ने कभी ध्यान नहीं दिया अभी कहने कि इसके लिंकेज से
19:51अगरिकल्चर को भी फाइदा होगा और हमारा इंपोर्ट घटेगा जॉब क्रेशन होगा और अपने फैब्री की जो इंटरनल डिमांड पूरी
20:01होगी
20:01क्योंकि सारे 300 बिलियन डॉलर पे जाएंगे तो देश की आबादी भी 31 तक होगी अभी 13 से 15 मिलियन
20:10टन हमें फाइबर लगता है
20:12और उस समय हमको कम से कम 23 से 25 मिलियन टन लगेगा ऐसा अंदाज करते हैं
20:22तो इसके लिए भी तो हमको प्लानिंग डॉमेस्टिक पहले तो हमें डॉमेस्टिक ही चाहिए आप लोग जब पर्शन करते हैं
20:31कि आपका एक्सपोर्ट नहीं बर रहा है तो मैं बार बार यही कहता हूं कि मेरा एक्सपोर्ट बर रहा है
20:40राहुल गांधी जी गलत इंफॉर्मेशन भरम फैलाते हैं
20:46एक बहुत बड़ा सेक्टर है जूट इंडस्टि का
20:49चुकि बंगॉल खासकर पशिमंगाल में और चुनाओ हो रहा है तो थोड़ी राजनीती भी होती रहती है
20:55उसमें दो-तीन वज़े हैं राजनीती होने की इंडस्टि पुरानी हो गई
20:59कोई नया इन्वेशन नहीं हुआ अभी भी जो पुराने लेकिन हाल फिलाल में कुछ लोगों ने ट्रेंड देखा है
21:06आपकी सरकार ने भारे टेक्स में हमने देखा था जो जूट इंडस्टि के लोग आये थे कई कुछ इन्वेशन देख
21:13रहे थे लेकिन वो इन्वेशन प्राक्टिकल या मार्केट तक आप आए हैं नहीं आप आए हैं
21:19देखे ऐसा है हम जूट का बाइक जूट से खड़ते हैं जूट मिल से उनको जूट का रेट प्रोसेसिंग चार्ज
21:33प्रोफिट देकर खड़ते हैं
21:36लेकिन राज की सरकार, त्रिमुल की सरकार या पहले की सरकार ने जूट पर कोई ध्यान नहीं दिया
21:45उनका काम था प्रोडेक्शन, इनोवेशन, हमारा काम रेस्पॉंसलिटी था केंदर का
21:54कि हम खादपदार्थों के लिए चीनी के लिए बैग जो लें जूट का लें, हम ले रहें, लेकिन दुर्भागे रहा
22:05कि राज सरकार कोई इसमें मिलों को शहुलियत नहीं, और तो और होडिंग कर बाता अपने लोगों से और तकलीफ
22:20देता मिलों को
22:21वो तो कहते हैं कि इनोवेशन केंदर का काम है, इसकी मार्केटिंग केंदर का काम है, और नए तरह के
22:29फैबरिक्स बनाना
22:30तो तकि राज और केंद्र मिल करके, हमारा पहला दायूत है बैक खरिदना, वो जो बनाएंगे उसको खरिदना, वो काम
22:39हम कर रहे हैं, 12,000 करोर, 15,000 करोर, जो भी लगता है, वो हम खरिद कर रहे हैं,
22:47इनोवेशन भी अब हम ही लोगों ने किया है,
22:50क्या किया है, इनोवेशन को अब हम डाइभर्सिफिकेशन कर रहे हैं, पहले 12,000 करोर का जूट बैग, शॉपिंग बैग,
23:04यह सब, कुछ हैंडी क्राप्ट की चीज हैं, यह एक्सपोर्ट होते थे, अभी हम 32,000 करोर पर हैं, जश्ट
23:16डबल से ज़्यादा,
23:17क्योंकि हम इसमें कई शेक्टर को खास करके, सॉपिंग बैग, जब 2020 में आया करोना का काल, तो लोग और
23:29भी इसके परतिस्ट, अब तो हम एक गुलोस्टर करके, बहुत बड़ी इंडिस्ट्री है, जूट मिल, और भारत सरकार का इंसिचूट,
23:41निन्फैट, यह दोनों मिल
23:44लिःक कड़कर करके, उसने कार्पेट के लिए यह उललाइज किया, उलन के बराबर लाया, और गौलोस्टर ने कप्रा तयार किया,
23:58जिसको आप कहते हैं, कि पैसन सो, पैसन सो अभी हुआ, कप्रे की मारकेटिटिंग के लिए,
24:08और कपड़ा उसी जूट मिल में अब एक छोटा सा टेक्स्टाइल यानि हुमन यूज के लिए आदमी के लिए कपड़े
24:20का अब हो सकता है जो एसियन गैम होने वाला है उसमें भी मौका मिले कपड़ा देने का जूट और
24:30कॉटन के मिक्स कपड़े
24:31तो अब यह कहने कि जो बोरे बनते थे चीनी के लिए और गेहूं के लिए और बाकी कमेडिटीज के
24:38लिए अब हम कपड़ा पहन रहें जूटका
24:53लेकिन गिराज जी आपके मंत्राले के एक दूसरा हिस्सा भी है इस मंत्राले का हेंडी क्राफ्ट की बात करें हम
25:00और भी देश में तमाम क्राफ्ट क्योंकि मानुसर्बत्या के साथ ही विकास हुआ था बहुत एलीट क्लास में हमने देखा
25:06बेज़िजों की उपयोग होता है �
25:08लेकिन वो मार्केट नहीं मिलता क्या कहां बेचें क्या उसके लिए आप लोग थोड़ा आप से डीफर करूंगा हम लोगोंने
25:18हैंडलूम और हैंडी कराफ्ट में लगभग एक करोड लोग जूरे हुए हैंडलूम का हो चाहे हैंडी कराफ्ट का इसके लिए
25:32दिल्ली हाट स
25:33लेकिया स्टेट तक सुरज कुंड से लेकर के गोवा तक हर जगह इवेंट्स मार्केट इवेंट्स होता है उसमें मुका मिलता
25:46है बिदेश भेजते हैं इस दुनिया में बहुत दिमांड है इसकी बिदेश भेजते हैं अब तो हम यूएस में एक
25:57हब एन एस्पॉक मोडल प
25:59जो एक्सपोर्ट परमशन काउंसील है राकेश शिन्हा के नत्रित में राकेश कुमार के वहां एक बेर हाउस है बेर हाउस
26:11में लोग अपने प्रोडेक्ट को डालते हैं एलेक्ट टेक्नलोजी के साहरे फोटो भेजते हैं वहां कपड़ा जाता है जो मार्क
26:22जो दुकंदार
26:23चार पीस, दस पीस वहां पसंद करके लेते हैं हम एक नया स्टेटिजी लिया है मार्केटिंग का हब एन एसपोग
26:32अब इरोप में भी करने जा रहे हैं टेक्स्टाइल डिपार्टमेंट बिजनेस हाउसेज के एक्सपूर्ट परमुसन काउंसील के साथ मिलके युएस
26:44में �
26:44तो हो गया अब मैं इरोप में कि जो छोटे छोटे एक्सपूर्टर हैं उनके लिए सहुलियत हो बड़े महा शहरों
26:55में बड़े महानगरों में दिली की बात करें मोंबी की बात करें कोलकता की बैंगलोर की बात करें यहां भी
27:00आप लोगोंने कुछ मॉल स्टार्ट किया था
27:02डिली के साउड डिली के बसंद कुझ में
27:05वो क्या कॉंसेप्ट है
27:06वो कॉंसेप्ट है
27:08अवो कितना सफ़ल है
27:11अभी हम सारे
27:13हाउसेज को
27:14जो इससे जुरे हुए है
27:17वो आ रहा है
27:18उनके बिक्री अच्छी हो रही है
27:21और वो
27:22एक तरह से
27:23बी-टू-बी सेंटर है
27:26कंजूमर के लिए भी है
27:28वहाँ बी-टू-बी के लिए
27:31हाउल है
27:31एक्सपोर्ट हाउसेज सब वहाँ लिये है
27:34जिससे उनको
27:36जो एक्सपोर्टर आएंगे
27:38वो
27:40इंपोर्टर आएंगे
27:42वो देखेंग एक्सपोर्टर और इंपोर्टर
27:53देश के दूसरे शहरों में भी शुरू करने का अभी पहले इसको एस्टाइबिस करके जैसे आप मॉल्स होता है या
28:03इस तरह आप देखें अभी भारत में मोदी जी ने हमारे पास कोई बड़ा टेक्स्टाइल का कलस्टर नहीं था
28:14पचीस एकर, पचास एकर, सौ एकर, दू सौ एकर इससे जादे देश में कहीं नहीं था तो हम लोगों ने
28:24मोदी जी के नतृत में बहुत बड़ा मेगा एक टेक्स्टाइल पीम मित्रा के नाम से अभी सात राज्यों में हम
28:34लोगों इसको जो इस साल सारे ऑपरेशनल हो जाएं
28:39हैं, end-to-end, cost-cutting, ecosystem, ये देश के लिए पहला मिशाल होगा. उसी तरह से इस वार के
28:53budget में टेक्स्टाइल को बहुत कुछ एनाउंस हुआ है, जिसको हम अब ला रहे हैं, जमीन पर, मेगा टेक्स्टाइल भी
29:04हुआ है.
29:04एक और सवाल आपके मंत्राले काई, आपने कहां आल में दो-तिन साल होगा, मुझे करेक्ट करेंगे, जो भारे टेक्स्ट
29:13इवेंट होता है, और इस साल भी आप करेंगे, क्या होगा इस बार नया और कैसे जो छोटे बेपारी हैं,
29:23या छोटे इंक्यूबीटर हैं, छोटे �
29:25जो सप्लायर, उनके लिए कितनी बड़ी आपॉर्चूरीटी एंट नास्ते लोगों से इंट्रेक करेंगे, दुनिया में कई इवेंट्स होते हैं, टेक्स्टाइल
29:34के, लेकिन भारत में नहीं था, ये नरेंदर मोदी जी की सौच, जो उन्होंने दोजार चोबीस में पहली
29:44बार किया, पचीस में दूसरी बार हुआ, जो दुनिया का एक बड़ा इवेंट्स बन गया, टेक्स्टाइल का, भारत टेक्स, जिसमें
29:55आप अंदाज नहीं कर सकते हैं, छे हजार विदेशी महमान आए, जो बाएर के तौर पर, जी, और एक सौ
30:08पचीस देशों से आए, पा
30:13कोई ऐसा देश नहीं था, जहां से नहीं बाएर आए, बड़े देशों से, इस पार क्या, किस स्केल पर कर
30:21रहें हैं आप लोग, इस पार हम लोग फिर, आप यही समझ लीजिए, कि सारे जो एस्पेस था, वो इंड़स्ट्री
30:32ने ले लिया, राजियों ने लिया, और सारे �
30:38अब इस पार हम लोगों ने इंड़स्ट्री को एक न्यू एज फाइबर को जरूर हम एस्पेसल गैलरी रखेंगें जो दुनिया
30:50को बताने के लिए, न्यू एज फाइबर, आईए न्यू एज फाइबर सबसे बड़ा होगा, और टेक्स्टाइल को इस तरह से
30:59देखिएगा
31:00तब आपको समझ में आएगा, एक्सपोर्ट में जब लोग चिला रहे थे, आपने कहा मैं बाद में पुछता हूँ, मैं
31:10उस पे आना इसलिए चाह रहा हूँ, कि देश में जब मुख भी पक्षी दल, टैरिफ वार चल रहा था,
31:21नरेंदर मोदी जी के दिशा निर्देश मे
31:28हम लोगोंने दुनिया के लगभग 119 देशों में एक्सपोर्ट का मार्केट खोजा, नए जेंगे, यू एस छोड कर, लगभग 119
31:43देशों में, और 500 से उपर जिलों से एक्सपोर्ट हुआ, जिसके कारण भारत का एक्सपोर्ट नहीं गिरा,
31:58और गिरा ही नहीं, जो आप जिसमें सारे गार्डमेंट लेंगे, टक्साइल लेंगे, कार्पेट लेंगे, हेंडीक्राइप लेंगे, सारे चीजों को लेने
32:12के बाद मेरा ओन्दा होल इयर टू यर बढ़ोतनी रहा।
32:18तो आपने ही का कि US में जो नुकसान था टैरी फॉर से आपने नए मारकेट खोच के और उसको
32:23कमपंसेट कर दिया ये कह रहे हैं तो जो आरोप है वो गलत है
32:27एकदम पता नहीं कहीं से एक भाइरल उठा लिया और इतना साफ जूब
32:35लेकिन गिराजी ये भी तो देखेंगे कि हाल के कुछ सालों में इंडियन ब्रेंट्स मैं नाम नहीं लेना चाहरा वो
32:42बंगलादेश में स्टेचिंग कराते हैं सिरलंका में स्टेचिंग कराते हैं आपका बाजार आपकी कंपनी आपके पहनने वाले लोग बाहर जा
32:50रहे हैं �
32:50देखिए इसको समझ पहनने वाले लोग नहीं, ये बनाने वाले, देखिए.
32:55यूजर तो इंडियन ही है, नहीं, नहीं, यूजर इंडियन नहीं है, ये जो एक्सपोर्ट करते हैं,
33:02बंगलादेश को FTA था, दुनिया वहां जाके लगाया, उसको 10-20% का फाइदा होता, और ये हमको नुक्षान था,
33:26अभी नरेंदर मोदी जी ने, पहले हम केवल 10 देशों के साथ 10 FTA किया था, अभी 56 देशों के
33:36साथ FTA का, जिसमें 27 देश तो इरोपेर कर देशों महा जो मेगा डिल कहा गए, मादरा फॉल डिल कही
33:47गए थी,
33:47और सारे देशों मिला के 56 देश, 56 देशों से और ये आने वाले दिन में जो टेक्स्टाइल का एक्सपोर्ट
33:59है,
33:59800 बिलियन डॉलर का, और उसमें 465 दॉलर हम 56 देशों का ही है, तो हमारे लिए तो 56 देशों
34:12के 465 बिलियन डॉलर में,
34:15हमें तो 100 बिलियन का टार्गेट रखा है, हमारे लिए बहुत बड़ा उपर्चूनिटी नरिंदर मोदी जी के नत्रोइत में मिला,
34:25क्योंकि पहले नहीं था FTA, तब ये हम मार्केट भी, दूसरा हमारा डॉमेस्टिक मार्केट अपने,
34:34आप में, अच्छा कोई बताईए, पहले घड में खाने का आनाज किसान रखता है, तब बेजता है, ये दुनिया का
34:43नीती है, तो हम जो पहले देश के लोगों को कपड़ा देगें, तभी हम इंडेस्ट्री को आसान भी होता है,
34:53यहान कोई कंटेनर लगता है, यहान सब चल
34:57जाता है, कटा हुआ तो भी चला गया, ओबर साइज हुआ तो भी बिग गया, ब्रांडेड हुआ वो भी का,
35:06नोन ब्रांडेड हुआ वो भी का, अब भारत के अंदर बड़े-बड़े सहरों में फूट पात पर देखते हैं, कपरे
35:13बिगते हुए, इसलिए लोग डोमेस्ट
35:17मार्केट को जादा, अब हम नए एक्सपोर्टर छोटे जुड़े उसके लिए टेक्लोजी का सहरा ले करके, ये टेक्स्टाइल कमिशनर आफिस
35:29को ये दायत दिया है, चले गिराज जी, अब सवाल का रुख मोड़ते हैं, रुजगार सबसे बड़ा चीज है, हाँ
35:35मैं यही
35:47मुझे बहस कर ले, सदन के अंदर या सदर के बाहर, मैंने कहा कि मुश्किल से जो हमारा वर्किंग साइज
35:59था, दो करोर, धाई करोर के बीच था, और इसका पैमाना एक्जक्ट डेटा के साथ नहीं था,
36:09कोई स्टड़ी किया, आप लोगों ने कहाई, हम लोगों ने स्टड़ी भी कराया, और सबसे बड़ा आप लेगे यूजर को
36:16और एक्सपोर्ट के डेटा को, यूजर कपड़ा पहनेगा, धोती और सारी एक अलग हो गया, लेकिन और तो सब कश्टीच
36:27किया हुआ कपड़ा,
36:28रेडिमेट गार्मेंट हो, कस्टमाईज गार्मेंट हो, ब्रांड हो, नॉन ब्रांड, हमारे पास सिलने वाली मशीन, जो सिलाई करने वाली, ये
36:39सिंगर और उसा नहीं बनाता, सब इंपोर्ट होता, चाहे लेदर का गार्मेंट हो, चाहे कप्रे का गार्मेंट हो, ये सब,
36:50तो मैंने study किया तो UPA सरकार केबल 48 लाग के 58 लाग से नीचे रहा मशीन एक मशीन पर
37:07पहले दो आदमी काम करते थे अब 1.7 आदमी कपड़ा से लेके गार्डमेंट के पैकिंग था
37:18उनके कार्जकाल में केबल 50 लाग के अंदर आया हमारे काल में मोदी जी के कार्जकाल में दो करोर से
37:28उपर मशीन है इंपोर्ट हुआ यही पांच करोर लोगों को रुजगार दे रहा थी लेकिन मसीने इंपोर्ट हो रही है
37:38एक तरह भारत सरकार बेकिन इंडिया प्लान चला �
37:41रही है तो यह माना जाए कि मसीने देश में बनीगी नहीं बन रही हम लोग जापान यह भी एक
37:49चैलेंज यह चैलेंज है मेरे लिए आपने वह आकड़े जिस्टिफाई कर दिये कि चारगुना मसीने आई इसका मतले काम बढ़ा
37:57काम बढ़ा डिमांड बढ़ा लेकिन हमारे
38:03यह हमारे लिए चैलेंज है यहां बनता इस्पिनिंग का केवर यहां सर्कुलर मशीन नहीं बनता जिस पर निटिंग होता कपर
38:14बनते फ्लैट मशीन यहां होता बुनाई जो कपरे बनते एर जेट वाटर जेट यह किम आई बनता आई अब थोड़ा
38:26शुरू हुआ है अब हम
38:29Japan के दो
38:31company को यहां ला भी
38:33रहे हैं. यहां carbon
38:35fiber बनाने वाले को भी
38:40तोडे
38:42company को
38:43यहां पर ला रहे हैं.
38:46प्रियास कर रहे हैं.
38:47यह मशीने भी बने यहां से.
38:49बने यहां और बनेगा. मैं डंके
38:51की छोट पर कहता हूँ,
38:53हम मशीनों को अब
38:55making इंडिया में ही
38:59अबस्क्राइब एक बाल जाओट कर दो किजए टूलाओ इसे लिए आप टूलाओ टूलाओ टाल टूलाओ टूलाओ टूलाओ कि लिए लेगा।
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