00:03Today we will talk about the history of the story of the Prophet, which is a part of the Prophet,
00:12which is a part of the Prophet.
00:30this is the true person.
00:30Think about it.
00:32It's not just the whole person.
00:36It's the whole person.
00:37This is the story of the story.
00:40This is the story of Abu Zar.
00:42It's about the story of Abu Zar.
00:43In the Arabian in the Arab world,
00:45there was a person who was a person who was a man.
00:49The person who had a great deal of the love.
00:53This story tells us that Islam
00:56The following book, we had a new one who got a God.
00:59When we got to see each other, we had to know them and meet them.
01:08In a Bible, we had to say that they were the fourth person who was in the middle of the
01:16church.
01:16They had to know them.
01:18They had to know them.
01:18They had to know them and they had to know them.
01:20They had to know them.
01:25that was not a shame
01:26and no doubt
01:27and Islam accepted us to see an end
01:30this was not a good time
01:32that he will always say in this respect
01:35would be gay
01:36it would be a good time
01:38and that he would benefit
01:39by which he will be able to do
01:42when he will be the crop of the lord of the year
01:45to have his sexual assault
01:48and their background
01:50or any further affection
01:53the helping of the Lord
01:54उनका किरदार जो हर किसी को मुतासर करता था
01:58देखें ये सिर्फ नाम या अल्काबात नहीं थे
02:00ये उनकी जिन्दगी का हर दिन था
02:02वो बिल्कुल सादा जिन्दगी गुजारते थे
02:04दुन्या की चीजों से कोई लगाओ नहीं था
02:06उनका पूरा ध्यान अपने रुहानी सफर पर था
02:09यानि उनकी जिन्दगी ही उनके असूलों का सबूत थी
02:12उनकी समझ और इल्म का आलम ये था
02:15कि हज़र अली जैसी शक्सियत ने उनके बारे में कहा
02:18कि अबुजर के पास वो इल्म है जिस तक दूसरों की रसाई नहीं
02:22और ये उनके खास रोहानी मकाम की तरफ एक बहुत बड़ा इशारा है
02:26फिर वक्त बदला
02:27पेगंबर के बाद इसलामी सल्तनत तेजी से पहलने लगी
02:31और इसके साथ हाई बे तहाशा दौलत
02:33लेकिन इसी दौर में अबुजर को कुछ ऐसी चीजे नजर आने लगी
02:36जो उनके ख्याल में पेगंबर के साध़गी वाले रास्ते से हट कर थी
02:40ये वो अलफाज थे जो उनकी जबान पर आए
02:43ये उनके दिल की आवास थी
02:45खास तोर पर खलीफा उस्मान के दौर में जब उनके देखा के दौलत और ताकत चंद हाथों में जमा हो
02:51रही है
02:52तो उनके लिए ये सीधा सीधा हग को दबाने के मतरादिफ था
02:57उनके लिए बात बिलकुल वाज़ थी
02:59एक तरफ थे पेगंबर स्लिल्लाई लिए वालियों के सिखाए हुए उसूल
03:04लानी सादगी और अवाम की भलाई
03:06और दूसरी तरफ नज़र आ रहा था हुकमरानों का जाती दौलत जमा करना
03:10उन दोनों में उनको एक बहुत बड़ा फर्क एक बहुत बड़ा तज़ाद नज़र आया
03:15जिरा तसवर करें शाम के बाजारों में गलियों में अबुजर की आवाज गोंज रही है
03:20वो बार बार कुरान की यही आयत पढ़ते हैं और यह सीधी सीधी तनकीद थी उस वक्त के हुकमरानों पर
03:26खास दोर पर अवामी खजाने यानी बैतलमाल के मामले में क्योंकि उनके नज़दी के खजाना अवाम की अमानत था
03:32अच्छा तो जब शाम के गवर्नर मौाविया ने सोचा कि इस आवाज को खमोश कराया जाए तो उन्होंने तीन सो
03:39सोने के दीनार उनको भीजवाए
03:40लेकिन अबुजर का जवाब सुनिये उनके किरदार की पूरी अकासी करता है उन्होंने वो पैसे वापिस भीज़ दिये और कहा
03:48अगर ये अवाम के खजाने से मेरा वो हिस्सा है जो तुमने रोका वा था तो ठीक है मैं ले
03:52लूँगा लेकिन अगर ये मुझे खामोश करान
04:10कर दिया जाए और फिर उनको एक जगा से दूसरी जगा भीजने का सिलसला शुरू हुआ ये जमीर की आवाज
04:16को लोगों से दूर करने की एक कोशिश थी पहले मदीना में उनकी मुखालफत हुई फिर उन्हें शाम जला वतन
04:21किया गया और जब वहां भी बात ना बनी तो आ
04:37हमार यासर जैसे लोग इस हुकम की परवा किये बगएर उन्हें अलविदा कहने आए और हजरत अली ने जो अलफाज
04:43कहे वो तो तारीख का हिस्सा बन गए उन्होंने अबुजर के मौकिफ की पूरी तरह ताइद की तो अब हम
04:48पहुँच गए हैं रबसा के उसी वीरान सहर
04:51में यहां अबुजर की जिएंगे अकेले मरेंगे और अकेले ही उठाये जाएंगे जब उनका आखरी वक्त आया तो उनकी बीवी
05:10रोने लगी कि इस वीराने में तो उनके पास कफन के लिए कपड़ा भी नहीं तब अबुजर ने उन्हें तसली
05:16दी और पेशिंगोई का एक
05:17और हिस्सा यादिलाया जो अभी पूरा होना था और फिर बिलकुल वैसा ही हुआ उनकी मौत के बाद मौमिनीन का
05:25एक काफला वहां से गुजरा और उन्होंने ही उनकी तद्वीन की तो देखिए उनकी मौत तनहाई में जरूर हुई लेकिन
05:31गुमनामी में नहीं ये तो एक �
05:44अगला की दास्तान नहीं ये है अखला की जुरत की कहानी उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा समाजी इनसाफ की एक
05:51अलामत के तौर पर टाकत के सामें सच बोलने वाले एक इनसान के तौर और एक ऐसे शखस के तौर
05:57पर जिसने अपने एमान के लिए हर कीमत अदा की और ह�
06:11This is the first time of the war.
06:12It was the first time of the war.
06:13It was the first time of the war.